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न्यायालय का बिहार चुनाव को चुनौती देने वाली जन सुराज पार्टी की याचिका पर विचार करने से इनकार

नयी दिल्ली, छह फरवरी उच्चतम न्यायालय ने पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी द्वारा दायर उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के उल्लंघन के आधार पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

पार्टी का आरोप था कि कर्ज में डूबी राज्य सरकार ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 15,600 करोड़ रुपये बांट दिए, जिससे अन्य राजनीतिक दलों को समान अवसर नहीं मिल पाया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव हारने के बाद लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करने की कोशिश को लेकर पार्टी को फटकार लगाई और पटना उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक राज्य से संबंधित है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आपको कितने वोट मिले? जब लोग आपको नकार देते हैं, तो आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का सहारा लेते हैं! किसी को तो उसी समय योजना को चुनौती देनी चाहिए थी। आप तो पूरे राज्य के चुनाव को अमान्य घोषित करने के लिए एक व्यापक निर्देश चाहते हैं।’’

पीठ ने कहा कि यह याचिका पूरे राज्य के लिए एक समग्र चुनाव याचिका के अलावा और कुछ नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘चूंकि यह मामला सिर्फ एक राज्य से संबंधित है, इसलिए कृपया संबंधित उच्च न्यायालय में जाएं। कुछ मामलों में मुफ्त योजनाओं का गंभीर मुद्दा है, जिसकी हम गंभीरता से पड़ताल करेंगे।’’

पार्टी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू. सिंह ने कहा कि जिस योजना के तहत मतदाताओं को भुगतान किया गया था, उसकी घोषणा चुनाव से ठीक पहले की गई थी और भुगतान तब किया गया था जब चुनाव आचार संहिता लागू थी।

वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘‘जब किसी राज्य में गंभीर राजकोषीय घाटा हो और योजना की घोषणा के बाद तुरंत 10,000 लोगों को भुगतान कर दिया जाए तो ऐसे में इससे यही अर्थ जाता है कि मानो इसे खैरात में बांटा जा रहा है। इतना ही नहीं, चुनाव आचार संहिता की घोषणा के तुरंत बाद 35 लाख से अधिक लाभार्थियों को इस योजना में नामांकित किया गया।’’

पीठ ने कहा, ‘‘प्रत्यक्ष हस्तांतरण योजनाएं अलग हैं। यह मामला महिला स्वयं सहायता समूहों से संबंधित है।’’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243-सदस्यीय विधानसभा में 202 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी और विपक्षी दलों के ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) ने 35 सीट हासिल की, जबकि जन सुराज पार्टी (जेएसपी) का खाता भी नहीं खुल पाया तथा उसके अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। जन सुराज पार्टी ने बिहार में नये सिरे से चुनाव कराने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

याचिका में राज्य सरकार पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये हस्तांतरित करके चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया और संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत कार्रवाई की मांग की गई।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत राज्य की महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए 10,000 रुपये की प्रारंभिक आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

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