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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर संबोधित किया

उत्तर प्रदेश / सत्ता संदेश

मोदी सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है

पिछले 20 वर्षों में अपने साहस, समर्पण और परिश्रम से देश का विश्वास अर्जित कर ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ हासिल करने वाले NDRF के सभी जवानों को बधाई

CAPF के जवानों ने 7 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाए हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे

भारत आज आपदा प्रबंधन में ‘ग्लोबल लीडर’ और ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ बनकर उभरा है तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को धरातल पर उतारा है

पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है

मोदी सरकार आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण को ‘मिनिमम कैजुअल्टी’ से ‘ज़ीरो कैजुअल्टी’ तक पहुँचा रही है

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है

1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाने और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने वाले NDRF के जवानों को देखते ही मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव बढ़ जाता है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक और NDRF के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किया जाना सिर्फ NDRF की सराहनीय सेवाओं को स्वीकार किया जाना ही नहीं, बल्कि यह SDRF, पंचायत से लेकर राज्य तक पूरी मशीनरी, NCC, NSS और हजारों की संख्या में सेवा में लगे आपदा मित्रों की सेवाओं का राष्ट्रपति महोदया द्वारा अनुमोदन किया जाना है। उन्होंने कहा कि NDRF के जवान देश में कहीं भी ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के घोष के साथ जाते हैं। NDRF के जवान देश-दुनिया में जहाँ कहीं भी गए, वहाँ प्यार और भरोसा अर्जित किया है। देश में कहीं भी आपदा आई हो या आने वाली हो, जब NDRF के जवान वहाँ पहुँचते हैं, तो जनता राहत की साँस लेती है कि अब उनका बचाव हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि NDRF ने अपनी स्थापना के 20 साल में देश में कहीं भी बाढ़, भूकंप, चक्रवात या किसी अन्य प्रकार की आपदा आई हो, अपने सफल कार्यों के आधार पर पूरे देश की 140 करोड़ जनता का विश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा हो या कोई भीषण हादसा, NDRF की एक झलक ही देशवासियों के मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव भर देती है। इस बल ने अब तक 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई है और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि NDRF को प्रेसिडेंट्स कलर मिलना, NDRF के समस्त बल के सेवा, साहस, शौर्य और समर्पण के संचित गुणों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और NDRF ने अपने कार्यकाल में आपदा बचाव के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नक्शे पर स्थापित करने का काम किया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है, लेकिन देश के गृह मंत्री के नाते मेरे लिए यह विशेष गौरव का विषय है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज 116 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली छह परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन परियोजनाओं के माध्यम से NDRF देश की जनता को किसी भी प्रकार की आपदा से सुरक्षित रखने के लिए और भी मजबूती से काम कर पाएगी।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 2014 से अब तक हमने न केवल आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए काम किया है, बल्कि अब हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि अब हम जीरो कैजुअल्टी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। जिस आपदा का पूर्वानुमान और मौसम विज्ञान विभाग से पूर्व जानकारी मिल जाती है, वहाँ जन, धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि NDMA ने आपदा प्रबंधन से जुड़े नीति विषयक मामलों में ढेर सारे निर्णय लिए, बहुत सारे दिशानिर्देश जारी किए, और जन जागरूकता पैदा करने की दिशा में सफल प्रयास किए, जिसकी वजह से धीरे-धीरे आपदा बचाव देश का संस्कार बनता जा रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF ने न केवल नागरिकों, बल्कि उनके साथ रहने वाले मूक पशुओं को भी बचाकर उत्कृष्ट सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि आपदा में जनहानि शून्य हो और संपत्तियों का नुकसान न्यूनतम हो।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय हीट वेव जैसी गंभीर चुनौतियों का भी बहुत ही प्रभावी तरीके से सामना करने की तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय और NDRF ने क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर बहुत बल दिया है। NDRF ने अपने 8,500 से अधिक जवानों, 10,000 से ज्यादा सिविल डिफेंस कर्मियों और 2 लाख 20 हजार से अधिक वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का भागीरथ कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दो वर्षों में 10,500 से अधिक नाविकों को भी प्रशिक्षित किया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि कम्युनिटी बेस्ड आपदा रिस्पॉन्स को मजबूत करने के लिए आपदा मित्रों की टोली हर खतरे का मुकाबला करने में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है। आपदा के कहर से जानमाल का नुकसान न्यूनतम करने के विषय को प्रधानमंत्री मोदी जी ने न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में एक थ्योरी के रूप में स्थापित किया है। बीते 12 साल में आपदा से बचाव सिर्फ एक सिस्टम नहीं बल्कि इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर भारत सरकार तक, भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक से लेकर आम नागरिक तक हर जगह एक साथ एक उद्देश्य के लिए काम करने का एक नया तरीका भारत सरकार ने अपनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत में कई भीषण प्राकृतिक आपदाएं आई। ओडिशा के सुपर साइक्लोन, गुजरात के भूकंप और हिंद महासागर की सुनामी ने देश के जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। इन घटनाओं के कारण देश में एक मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता को महसूस किया गया। आपदा प्रबंधन अधिनियम भी आया। NDMA और NDRF का भी गठन हुआ। उन्होंने कहा कि अब 16 बटालियनों के साथ NDRF एक सशक्त बल बन चुका है। NDRF ने अपनी कार्यपद्धति से SDRF की ट्रेनिंग और SDRF के साथ साझा अभियानों से अपनी शक्ति बढ़ाया है। प्रोएक्टिव डिप्लॉयमेंट और प्रीपोजिशनिंग जैसे उपाय हमें नुकसान से बचाने में कारगर साबित हो चुके हैं। श्री शाह ने कहा कि 2008 में बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ NDRF के लिए बहुत बड़ी परीक्षा थी। बाद में ऐसी कई आपदाएं आई, जैसे – धराली में फ्लैश फ्लड, चासोटी में क्लाउडबर्स्ट, जम्मू, पंजाब और दिल्ली के फ्लड्स, साइक्लोन मोंथा और साइक्लोन दितवाह। वहीं, अमरनाथ यात्रा, महाकुंभ, चारधाम यात्रा, मणि महेश, सबरीमाला यात्रा, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे कई महत्वपूर्ण आयोजनों में NDRF ने बहुत अच्छे तरीके से समाज के साथ मिलकर काम किया।

गृह मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है। इसके माध्यम से रिस्क मैपिंग, अर्ली वार्निंग, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन, और गाइडलाइंस के निर्माण जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिली है। श्री शाह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत आज निर्विवाद रूप से एक ग्लोबल लीडर और फर्स्ट रिस्पॉंडर के रूप में उभरा है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को व्यवहार में उतारते हुए इसे धरातल पर लागू किया गया है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी की प्रेरणा से ‘डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर नेतृत्व किया है। CDRI के आज 48 देश सदस्य बन चुके हैं और भारत के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

श्री अमित शाह ने देशभर के सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) के जवानों को बधाई देते हुए कहा कि 2021 से अब तक CAPFs के सभी जवानों ने देशभर में 7 करोड़ से अधिक पेड़ लगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह समस्त CAPFs के मानवीय दृष्टिकोण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय

दिल्ली / सत्ता संदेश

सरकार के संज्ञान में आया है कि “जेजी बिल्डिंग ग्रुप” नामक एक संस्था द्वारा कुछ धोखाधड़ी वाली गतिविधियां की जा रही हैं, जिसमें आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) से संबंध होने का झूठा दावा करके फर्जी भर्ती अभियान चलाए जा रहे हैं।

2. उक्त संस्था कथित तौर पर:

(i). एमओएचयूए के नाम का उपयोग करके फर्जी रिक्ति नोटिस जारी कर रही है;

(ii). मंत्रालय से प्राधिकरण/सहयोग का दावा करके उम्मीदवारों को गुमराह कर रही है;

(iii). रोजगार प्रदान करने के बहाने आवेदकों से कथित तौर पर मौद्रिक लाभ की मांग कर रही है;

(iv). ऐसे झूठे दावों को बढ़ावा देने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म/वेबसाइट का संचालन कर रही है।

3. इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि:

(क). आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ऐसी कोई भर्ती सूचना जारी नहीं की है;

(ख) मंत्रालय ने किसी भी निजी एजेंसी/संस्था को अपनी ओर से भर्ती करने के लिए अधिकृत नहीं किया है;

(ग). इसके विपरीत दावा करने वाले किसी भी संचार को कपटपूर्ण और भ्रामक माना जाना चाहिए।

4. आम जनता, विशेषकर नौकरी चाहने वालों को सलाह दी जाती है:

(i). ऐसे फर्जी भर्ती प्रस्तावों का जवाब न दें

(ii). ऐसी संस्थाओं के साथ व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें;

(iii). ऐसे प्रस्तावों के संबंध में कोई भुगतान न करें;

(iv). ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर या स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों को करें।

5. यह विज्ञप्ति जनहित में जागरूकता पैदा करने और भोले-भाले नागरिकों के शोषण को रोकने के लिए जारी की जा रही है।

शिवराज सिंह चौहान करेंगे 5 लाख पीएमएवाई-जी आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ; महाराष्ट्र के लिए ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय अंश सहायता जारी करेंगे


दिल्ली / सत्ता संदेश

15 मई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में महाराष्ट्र को ₹122.98 करोड़ की 35 सड़क परियोजनाओं की भी सौगात

सतारा में आयोजित होगा पीएमएवाई-जी लाभार्थी सम्मेलन एवं ‘महा आवास अभियान’ राज्य स्तरीय पुरस्कार समारो

केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 15 मई 2026 को महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री श्रीमती सुनेत्रा अजित पवार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत पूर्ण हुए 5 लाख आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, 6 पीएमएवाई-जी लाभार्थियों को आवास की चाबियां भी सौंपेंगे, जिनमें योजना के अंतर्गत 3 करोड़वें आवास से जुड़े लाभार्थी भी शामिल होंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र को पीएमएवाई-जी के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय अंश की मातृ स्वीकृति जारी करेंगे। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के अंतर्गत ₹122.98 करोड़ की लागत से 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी जारी करेंगे, जिससे राज्य की 35 ग्रामीण बसावटें लाभान्वित होंगी।

कार्यक्रम के दौरान ‘महा आवास अभियान 2023-24’ के अंतर्गत राज्य स्तरीय पुरस्कार भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में ‘महा आवास अभियान अवॉर्ड्स गौरवगाथा पुस्तिका’ एवं त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जाएगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को मूलभूत सुविधाओं सहित पक्के आवास उपलब्ध कराना है। पीएमएवाई-जी के अंतर्गत अब तक राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को 4.15 करोड़ आवासों का लक्ष्य आवंटित किया जा चुका है, जिनमें से 3.91 करोड़ आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा 11 मई 2026 तक 3.03 करोड़ से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र ने योजना के कार्यान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य को आवंटित 43.80 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध 41.42 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 17.92 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। सतारा जिले में 55,052 आवासों के लक्ष्य के सापेक्ष 54,759 आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा 24,848 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र के लिए पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत बड़ी स्वीकृति

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए बड़ी स्वीकृति की घोषणा भी की जाएगी, जिससे राज्य में ग्रामीण सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना को और मजबूती मिलेगी।

पीएमजीएसवाई-IV (2026-27, बैच-I) के अंतर्गत 95.99 किलोमीटर लंबाई की 35 सड़क परियोजनाओं को लगभग ₹122.98 करोड़ की लागत से स्वीकृति का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटें लाभान्वित होंगी।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर मौसम में सड़क संपर्क सुनिश्चित करना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार एवं अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना है। यह पहल ग्रामीण महाराष्ट्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने एवं जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक होगी।

महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत अब तक 34 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों एवं 1000 से अधिक पुलों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिन पर ₹15 हजार करोड़ से अधिक की लागत स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से गांवों की सड़क संपर्क व्यवस्था मजबूत हुई है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

राज्य में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत ‘न्यू एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी’ आधारित सड़क निर्माण कार्यों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आधुनिक, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल ग्रामीण आधारभूत संरचना विकसित हो रही है।

यह कार्यक्रम ग्रामीण आवास, सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना विकास के माध्यम से ग्रामीण परिवर्तन को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की

दिल्ली/ सत्ता संदेश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

सीईएल की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत के स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा स्वदेशी नवाचार से प्रेरित परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभूतपूर्व स्तर पर खुल रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है और भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा तथा महासागर-आधारित ऊर्जा प्रणालियों सहित विभिन्न गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत की अपनी उपयोगिता और महत्ता है तथा भारत स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और सतत विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, सीईएल के सीएमडी श्री चेतन जैन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक, सीईएल के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वदेशी प्रणालियों के विकास से जुड़े क्षेत्रों में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग पहलों की भी शुरुआत हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन के संचालन को भारत के स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह सुविधा स्वदेशी विनिर्माण तथा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रति देश के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में सीईएल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का पहला सौर सेल वर्ष 1977 में सीईएल द्वारा निर्मित किया गया था तथा देश का पहला सौर संयंत्र भी वर्ष 1979 में इसी संगठन द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि इतनी अग्रणी उपलब्धियों के बावजूद उस समय सीईएल के योगदान को वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह हकदार थी, लेकिन अब यह संस्था पुनः राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रासंगिकता प्राप्त कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विनिवेश के कगार पर पहुंच चुकी संस्था से लाभ अर्जित करने वाली और राजस्व उत्पन्न करने वाली मिनी रत्न कंपनी के रूप में सीईएल का परिवर्तन संस्थागत पुनरुत्थान का उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव दृढ़ नेतृत्व, नीतिगत समर्थन, संचालन अनुशासन तथा संगठन से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

मंत्री ने नई निर्माण लाइन की स्थापना की गति की सराहना की। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए निविदा आमंत्रण 24 अप्रैल 2025 को जारी किया गया था, एक माह के भीतर सफल बोलीदाता का चयन कर लिया गया और एक वर्ष से भी कम समय में विनिर्माण सुविधा का संचालन प्रारंभ हो गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीईएल अब वर्टिकल एक्सिस पवन टर्बाइन, हाइब्रिड नवीकरणीय प्रणालियां, डेटा सेंटर, उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तथा छोटे हथियार प्रणालियों जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, जो भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास और रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।

रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के नीतिगत सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को अधिक निजी भागीदारी के लिए खोला है तथा उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (एडब्ल्यूओएस) तथा नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली के लिए सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहलों का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योग साझेदारी के माध्यम से व्यावसायीकरण और जन उपयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली अब पूर्ण रूप से स्वदेशी बन चुकी है और कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय आत्मविश्वास, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है तथा यह वैज्ञानिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय विकास में परिवर्तित करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण- एनएचएआई ने पानीपत-जालंधर राजमार्ग परियोजना विवाद में मध्यस्थता दावों का सफलतापूर्वक बचाव किया

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

रियायतधारकों के 8,375 करोड़ रुपये से अधिक के दावों और एनएचएआई द्वारा 2,888.64 करोड़ रुपये के प्रतिदावों से जुड़े दो प्रमुख मध्यस्थता मामलों का निपटारा एनएचएआई के पक्ष में 819.96 करोड़ रुपये की राशि के साथ हुआ

चंडीगढ़, 12 मई 2026: राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में सार्वजनिक धन बचाते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण-एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड से संबंधित दो प्रमुख मध्यस्थता मामलों में अपने पक्ष का सफलतापूर्वक बचाव किया है। इन विवादों में रियायतधारकों के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निष्पादन और संचालन से संबंधित एनएचएआई के विरुद्ध उच्च मूल्य दावे शामिल थे। दोनों मध्यस्थता मामलों में कथित सेवा समाप्ति भुगतान, टोल राजस्व हानि मुआवजा, परियोजना विस्तार लागत, मूल्य वृद्धि, रियायत अवधि विस्तार, परियोजना में देरी से हुई हानि और अन्य वित्तीय दावों सहित 8,375 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए थे।

व्यापक सुनवाई और संविदा प्रावधानों, तकनीकी रिकॉर्ड, साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय पर विस्तृत रुप से गौर करने के बाद, माननीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने एनएचएआई की कई महत्वपूर्ण दलीलों को सही ठहराते हुए उसके पक्ष में अंतिम निर्णय दिया।

पहली मध्यस्थता कार्यवाही में, रियायत समझौते के तहत टोल वसूली में कथित नुकसान, अवसर हानि, सेवा समाप्ति भुगतान और कार्यक्षेत्र में बदलाव संबंधी विवादों में 5,443 करोड़ रुपये से अधिक के क्षतिपूर्ति दावे किए गए थे। एनएचएआई ने इन दावों का जोरदार खंडन करते हुए कहा कि संविदात्मक की समाप्ति वैध थी और यह रियायतधारक की चूक और कमियों के कारण हुई।

विस्तृत अधिनिर्णय के बाद, माननीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के विरुद्ध मौद्रिक दावे खारिज कर दिए। न्यायाधिकरण ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन, परियोजना दायित्वों और व्यय देनदारियों से संबंधित एनएचएआई के कई प्रतिदावों और बचाव को भी स्वीकार किया। दावों और प्रतिदावों पर सुनवाई के बाद, न्यायाधिकरण ने अपने अंतिम निर्णय में एनएचएआई के पक्ष में ब्याज सहित लगभग 115.73 करोड़ रुपये का फैसला सुनाया।

दूसरे मध्यस्थता मामले में 2,931.79 करोड़ रुपये से अधिक के दावे में दावेदार ने परियोजना निष्पादन के दौरान कथित देरी से हुए नुकसान, लागत में बढ़ोतरी, परियोजना लंबा खींचने से संबंधित खर्च, निष्क्रियता लागत और अन्य वित्तीय प्रभावों के लिए मुआवजे की मांग की। एनएचएआई ने संविदात्मक अधिकार न होने, सहायक साक्ष्य अपर्याप्त होने, वजह बताने में विफल रहने और संविदात्मक प्रक्रियाओं तथा दस्तावेजी आवश्यकताओं के अनुपालन न करने का तर्क देते  हुए इन दावों का पूरी तरह विरोध किया।

मामले पर विचार के बाद, माननीय न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के विरुद्ध दावों को काफी हद तक खारिज कर दिया और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रमुख प्रतिदावों को बरकरार रखा। राशि समायोजन और भरपाई के बाद, न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में लगभग 704.23 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करने का निर्णय दिया।

इससे पहले, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने गुजरात में एनएच-48 के कामरेज-चलथान खंड के छह लेन के निर्माण से संबंधित एक अन्य मध्यस्थता मामले का सफलतापूर्वक बचाव किया था, जिससे सार्वजनिक धन की काफी बचत हुई थी। ठेकेदार के लगभग 174.49 करोड़ रुपये के दावों पर मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने मामले के निपटान के लिए केवल 54 लाख रुपये का मुआवजा दिया था।

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना निष्पादन संबंधी मध्यस्थता मामलों में मिली सफलताओं से सार्वजनिक धन की सुरक्षा, संविदा दायित्वों का सख्त अनुपालन और एनएचएआई का सुसंगत दृष्टिकोण सुदृढ़ होता है।

नाईपर, मोहाली में आईटेक (ITEC) कार्यक्रम 2026 “ग्लोबल साउथ में चिकित्सा उपकरण नीतियों को सशक्त बनाना” का 11 मई 2026 को शुभारंभ

मोहाली/ सत्ता संदेश

मोहाली, 11 मई 2026: राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर), मोहाली के मेडिकल डिवाइसेज़ विभाग द्वारा भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के अंतर्गत “ग्लोबल साउथ में मेडिकल डिवाइस नीतियों को सशक्त बनाना” विषय पर दो सप्ताह का अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 से 22 मई 2026 तक नाईपर, मोहाली, पंजाब के कन्वेंशन सेंटर में प्रारंभ किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रातः 10:30 बजे प्रो. दुलाल पांडा, निदेशक, नाईपर द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों, संकाय सदस्यों, आमंत्रित विशेषज्ञों एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर प्रो. पांडा ने विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि आईटेक कार्यक्रम भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक क्षमता निर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना ऐसे सहयोगात्मक प्रयासों की मूल आधारशिला है।

प्रो. पांडा ने बताया कि पिछले पाँच दशकों में भारत ने विभिन्न क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से 2,25,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण प्रदान किया है। उन्होंने मेडिकल डिवाइसेज़ के व्यापक क्षेत्र, वैश्विक नियामक ढांचे तथा नीति तंत्रों के विकसित होते स्वरूप पर भी जानकारी दी |

प्रो. इंदर पाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1964 में आईटेक कार्यक्रम की स्थापना के बाद यह पहला समर्पित मेडिकल डिवाइस पाठ्यक्रम है, जिसे नाईपर, मोहाली द्वारा आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इसे संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

इससे पूर्व प्रो. तरुण शर्मा ने 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके बहुविषयक स्वरूप की जानकारी दी। उद्घाटन दिवस पर पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) तथा इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) मंडी के विशेषज्ञों द्वारा स्टेम सेल्स एवं बायोमटेरियल्स जैसे उभरते क्षेत्रों पर व्याख्यान दिए गए।

इस पहल के अंतर्गत 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों सहित शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों तथा उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया है, जहां मेडिकल डिवाइसेज़ के क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों, नियामक ढांचे, विनिर्माण प्रक्रियाओं, ट्रांसलेशनल रिसर्च, इनोवेशन इकोसिस्टम तथा नीतिगत हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

यह कार्यक्रम नवाचार-आधारित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा विकासशील देशों में सुलभ, किफायती एवं मेडिकल डिवाइस पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता 

*राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर जीएमएसएसएस सेक्टर 32, चंडीगढ़ में MY Bharat द्वारा कार्यक्रम आयोजित*

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़, 11 मई 2026: युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत MY Bharat Chandigarh द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 का आयोजन गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (GMSSS), सेक्टर 32, चंडीगढ़ में उत्साहपूर्वक किया गया, जिसमें लगभग 60 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

यह कार्यक्रम MY Bharat से संबद्ध संस्थाओं — करुणा इको कंपेनियन फाउंडेशन एवं ग्लोबल यूथ फेडरेशन — के सहयोग से “विकसित भारत के लिए युवा नवाचार” विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जीएमएसएसएस सेक्टर 32 की प्राचार्या श्रीमती संगीता छाबड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों एवं नवाचार आधारित शिक्षा को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान संसाधन व्यक्तियों श्रीमती शिखा, श्री रोहित एवं श्री नवीन द्वारा आधुनिक तकनीकों पर रोचक एवं व्यवहारिक सत्र आयोजित किए गए। विशेष रूप से दैनिक जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर विद्यार्थियों को जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने डिजिटल नवाचार, साइबर जागरूकता एवं जिम्मेदार तकनीकी उपयोग से संबंधित गतिविधियों एवं चर्चाओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में युवाओं के बीच तकनीकी जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश के युवा आधुनिक तकनीकों एवं डिजिटल कौशल से सशक्त होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल कठिन परिश्रम ही नहीं, बल्कि शिक्षा एवं दैनिक जीवन में तकनीक का प्रभावी उपयोग कर स्मार्ट वर्क अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नवाचार, डिजिटल जिम्मेदारी एवं तकनीक के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करना था। कार्यक्रम का समापन सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, आयोजकों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया, जिन्होंने इस आयोजन को सफल एवं प्रभावशाली बनाया।

मजदूरों की जिंदगी में एक नए सवेरे का आगाज़ हो रहा है- शिवराज सिंह चौहान

दिल्ली / सत्ता संदेश


मजदूर, किसान और गांव; तीनों को ताकत देगा नया ग्रामीण रोजगार कानून- शिवराज सिंह चौहान

विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम, VB–G RAM G Act की अधिसूचना जारी- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 1 जुलाई से ग्रामीण भारत में रोजगार का नया युग, अब 100 नहीं 125 दिन की गारंटी- शिवराज सिंह

1.51 लाख करोड़ रु. से बदलेगी गांवों की तस्वीर, रोज़गार से इंफ्रा तक बड़ा अभियान- शिवराज सिंह चौहान

समय पर मज़दूरी, देरी पर मुआवज़ा, काम न मिले तो बेरोज़गारी भत्ता- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह

भारत के ग्रामीण विकास इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित करते हुए केंद्र सरकार ने आज 11 मई 2026 को विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G RAM G Act के क्रियान्वयन की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसे 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कानून ग्रामीण गरीब, श्रमिक परिवारों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के जीवन में नई आशा, अधिक आय सुरक्षा और गांवों में बड़े पैमाने पर टिकाऊ विकास कार्यों का मार्ग खोलेगा।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल में मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि विकसित भारत जी-राम जी अधिनियम की अधिसूचना जारी कर दी गई है और 1 जुलाई से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार चाहने वाले मजदूर भाई-बहनों को अब साल में 100 नहीं, 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीच के समय में मनरेगा के सारे प्रावधान लागू रहेंगे और अधूरे काम 1 जुलाई के पहले तक मनरेगा के अंतर्गत ही पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राज्यों से व्यापक स्तर पर सलाह-मशविरा कर नियम बनाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन सरकार की चिंता यह है कि ट्रांजिशन पीरियड में कोई भी मजदूर भाई-बहन रोजगार से वंचित न हो, और इसकी संपूर्ण व्यवस्था कर दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत जी-राम जी के अंतर्गत अधिकांश राज्यों को अपेक्षित तैयारी के लिए अधिकतम छह माह का समय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 1 जुलाई तक कोई राज्य अपेक्षित तैयारी नहीं कर पाया, तो 1 जुलाई के बाद कामों का फंडिंग पैटर्न विकसित भारत जी-राम जी योजना के अंतर्गत होगा।

शिवराज सिंह ने कहा कि योजना के तहत रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अपने बजट में 95,000 करोड़ रु. से अधिक की राशि का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि राज्यों ने भी अपने-अपने बजट में इसे लागू करने के लिए प्रावधान किया है और केंद्र व राज्यों की कुल राशि 1,51,000 करोड़ रु. से अधिक होगी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मजदूरों को भुगतान DBT के माध्यम से उनके बैंक या डाकघर के खातों में किया जाएगा। कोशिश होगी कि तीन दिन के अंदर भुगतान हो, लेकिन अधिकतम 15 दिन के भीतर प्रक्रियाएं पूरी कर उनके खाते में पैसा पहुंच जाए। उन्होंने कहा कि 15 दिन के भीतर पैसा नहीं आने पर मजदूर भाई-बहन विलंबित भुगतान के पात्र होंगे और देरी से भुगतान करने पर अतिरिक्त राशि देनी पड़ेगी।

शिवराज सिंह ने कहा कि मांगने पर यदि रोजगार नहीं मिला, तो बेरोज़गारी भत्ता भी देना पड़ेगा। उन्होंने इसे मजदूरों के हित की व्यापक योजना बताते हुए कहा कि 1,51,000 करोड़ रु. से अधिक की सालाना धनराशि से गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर के काम बड़े पैमाने पर होंगे।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, गांवों में अधोसंरचना, सड़क, पुल, पुलिया, स्कूल, आंगनवाड़ी भवन, खेतों से जुड़े जरूरी काम किए जा सकेंगे। आजीविका मूलक कार्यों के तहत स्वयं सहायता समूहों की दीदियों और एफपीओ के लिए वर्किंग शेड जैसी अधोसंरचनाएं भी बनाई जा सकेंगी। प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए नदी किनारे के गांवों या जलभराव वाले क्षेत्रों में रिटेनिंग वॉल जैसे कार्य भी इस योजना के अंतर्गत किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारी साथियों को पर्याप्त और समय पर वेतन का भुगतान हो, इसके लिए प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विश्वास जताया कि मजदूरों की जिंदगी में एक नए सवेरे का आगाज़ हो रहा है और विकसित भारत के लिए विकसित गांव बनाने का संकल्प यह योजना पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई से ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम की शुरुआत

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए, भारत सरकार ने 11 मई को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।

विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक समेकित (इंटीग्रेटेड), भविष्य उन्मुख एवं उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) आधारित ग्रामीण परिवर्तन के नए युग की शुरुआत करता है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। यह बढ़ी हुई गारंटी आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण आय में वृद्धि करने तथा ग्राम स्तर पर सतत विकास को समर्थन देने के उद्देश्य से लाई गई है।

अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को उनकी रोजगार मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसा न होने की स्थिति में श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।

यह अधिनियम समयबद्ध और पारदर्शी मजदूरी भुगतान पर विशेष बल देता है। मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में किया जाता रहेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) पाने के पात्र होंगे।

भारत सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए बजट अनुमान चरण में अब तक का सर्वाधिक आवंटन है।

राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यह आवंटन ग्रामीण अवसंरचना विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन तथा ग्रामीण आय में वृद्धि को नई गति प्रदान करेगा।

बिना किसी बाधा के, सुचारु और श्रमिक-केंद्रित ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए नए अधिनियम के लागू होने की तिथि तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत रोजगार बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे। 30 जून तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य संरक्षित रहेंगे और विकसित भारत–जी राम जी के प्रावधानों के अनुरूप उन्हें सुचारु रूप से नई व्यवस्था में समाहित किया जाएगा। ग्रामीण श्रमिकों को समय पर कार्य उपलब्ध कराना और मजदूरी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारत सरकार ने रोजगार की मांग के पैटर्न और मैदानी आवश्यकताओं के अनुरूप राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पर्याप्त श्रम बजट उपलब्ध कराया है, ताकि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने से पूर्व की अवधि में किसी भी ग्रामीण परिवार को असुविधा का सामना न करना पड़े।

वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मान्य रहेंगे। जिन श्रमिकों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकते हैं। केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा, तथा ई-केवाईसी पूर्ण कराने हेतु राज्य सरकारों द्वारा मैदानी स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं जारी रहेंगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विभिन्न नियमों के ड्राफ्ट राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किए जा रहे हैं, जो निम्नानुसार हैं:

  • मानक(नॉरमेटिव) आवंटन हेतु वस्तुनिष्ठ मानदंडों से संबंधित नियम
  • संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियम
  • राष्ट्रीय स्तर पर संचालन समिति के नियम
  • केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम
  • प्रशासनिक व्यय नियम
  • शिकायत निवारण नियम
  • मजदूरी एवं बेरोजगारी भत्ते के भुगतान की प्रक्रिया संबंधी नियम
  • अतिरिक्त व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम
  • बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में योजना व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम

महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में सुचारु ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियमों में उपयुक्त प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिन्हें शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा। उपर्युक्त अन्य नियमों के प्रारूप भी तैयार कर लिए गए हैं और उन्हें सार्वजनिक परामर्श हेतु जल्द प्रकाशित किया जाएगा।

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 से ग्रामीण रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की अपेक्षा है। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए यह अधिनियम सशक्त, समृद्ध और विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

हर काम देश के नाम’

सैनिकों के स्वास्थ्य और परिवार की भलाई को मजबूत करने के लिए  सप्त शक्ति कमान 11 एवं 12 मई 2026 को दो दिवसीय लैंडमार्क वेलनेस सेमिनार “ ऑगमेंटेड  वैलनेस : फिट  फॉर  ड्यूटी , फिट  फॉर  लाइफ   ” का आयोजन करने जा रही है।

चंडीगढ़: /सत्ता संदेश

भारतीय सेना गर्व के साथ संवर्धित वेलनेस नामक उच्च प्रभाव वाला दो दिवसीय वेलनेस सेमिनार आयोजित करने जा रही है। यह सेमिनार सैनिकों, अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसका शीर्षक “वेलनेस सेमिनार” है। यह सेमिनार आज के कठिन परिचालन वातावरण में सेवा कर रहे सैन्य कर्मियों द्वारा सामना की जाने वाली शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, वित्तीय और आध्यात्मिक चुनौतियों का समाधान करेगा।

वेलनेस सेमिनार बठिंडा मिलिट्री स्टेशन के सागत सिंह ऑडिटोरियम में 11 एवं 12 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को तीन शक्तिशाली सत्रों के साथ तैयार किया गया है, जो अत्याधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान को युद्धकालीन सैन्य अनुभव के साथ जोड़कर व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य रणनीतियाँ प्रदान करता है, जिससे  सेना की परिचालन तैयारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों में सीधी वृद्धि होगी।

आधुनिक सैन्य जीवन, असाधारण शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, वित्तीय समझदारी और आध्यात्मिक शक्ति की मांग करता है। यह सेमिनार प्रतिभागियों को प्रमाण-आधारित उपकरण और सेवा/सेवानिवृत्त सैन्य नेताओं तथा क्षेत्र के विशेषज्ञों के समय-परीक्षित ज्ञान से सुसज्जित करेगा ताकि “संतुलित योद्धा” का निर्माण किया जा सके, जो मिशन के लिए सदैव तैयार रहे तथा व्यक्तिगत और पारिवारिक कल्याण भी बनाए रखे। यह सेमिनार जीवनशैली संबंधी रोगों में कमी, बेहतर तनाव प्रबंधन, मजबूत परिवार समर्थन प्रणालियों तथा संगठनात्मक लचक में सीधा योगदान देगा।