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चंडीगढ़ के युवाओं को पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए आवेदन करने का आमंत्रण, मिलेगी आर्थिक सहायता

चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

प्रतिष्ठित *प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना* के अंतर्गत 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा अथवा स्नातक उत्तीर्ण युवाओं के लिए विभिन्न इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध हैं।

श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, MY Bharat, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार ने जानकारी देते हुए बताया कि पात्र युवा MY Bharat पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत कर प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना हेतु आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि चंडीगढ़ में वर्तमान में विभिन्न इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध हैं तथा चयनित अभ्यर्थियों को इंटर्नशिप अवधि के दौरान प्रतिमाह ₹9,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

इच्छुक युवा निम्न वेबसाइट पर पंजीकरण एवं आवेदन कर सकते हैं:

http://www.mybharat.gov.in

आवेदन प्रक्रिया से संबंधित किसी भी जानकारी हेतु युवा जिला युवा अधिकारी से मोबाइल नंबर *9805832503* पर संपर्क कर सकते हैं अथवा MY Bharat कार्यालय, आरजीएनआईवाईडी भवन, PEC कैंपस, गेट नंबर 1, सेक्टर 12, चंडीगढ़ में संपर्क कर सकते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का किसान हित में निर्णायक कदम, 4,886 करोड़ रु. से अधिक की MSP सुरक्षा

कर्नाटक/ सत्ता संदेश

कर्नाटक में 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी खरीदी को केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी

महाराष्ट्र के चना उत्पादकों के लिए बड़ा फैसला, श्री  शिवराज सिंह चौहान ने खरीद सीमा बढ़ाकर 8.19 लाख मीट्रिक टन की

लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार प्रतिबद्ध, किसानों को औने-पौने दाम से मिलेगी राहत- श्री शिवराज सिंह

किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और बाजार में मजबूरी में बिक्री की स्थिति से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक में रबी 2026 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है, वहीं महाराष्ट्र में रबी 2025-26 सीजन के दौरान चने की अधिकतम खरीद सीमा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन कर दी गई है। इन दोनों फैसलों के जरिए किसानों को 4,886.46 करोड़ रुपए से अधिक की एमएसपी सुरक्षा उपलब्ध होगी।

किसान हित में केंद्र सरकार का एक और बड़ा निर्णय

कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2026 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 69.66 करोड़ रु. से अधिक होगा। इस निर्णय से कर्नाटक के सूरजमुखी उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।

केंद्र सरकार का यह कदम विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहतकारी साबित होगा, जिन्हें बाजार में कम कीमत मिलने की आशंका के कारण मजबूरी में अपनी उपज बेचनी पड़ती है। एमएसपी पर खरीद की स्वीकृति से किसानों का भरोसा मजबूत होगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

महाराष्ट्र के चना किसानों को बड़ी राहत

इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव पर निर्णय लेते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2025-26 सीजन के दौरान राज्य में पीएसएस के तहत चने की अधिकतम खरीद मात्रा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन करने को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 4,816.80 करोड़ रु. से अधिक होगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र में चना खरीद की समय-सीमा में 30 दिनों का विस्तार करते हुए इसे 29 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला उन किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो निर्धारित अवधि में अपनी उपज की बिक्री पूरी नहीं कर पाए थे। अब अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सकेगा और उन्हें बाजार के दबाव में कम कीमत पर बिक्री नहीं करनी पड़ेगी।

किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय लगातार इस दिशा में काम कर रहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और कृषि उपज की खरीद प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसानोन्मुख बने। कर्नाटक में सूरजमुखी और महाराष्ट्र में चने की खरीद संबंधी ये निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील और सक्रिय है। इन फैसलों से न केवल संबंधित राज्यों के किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में विश्वास, सुरक्षा और स्थिरता का वातावरण भी मजबूत होगा। लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को और सशक्त करता है।

संसदीय कार्य मंत्रालय ने सक्रिय भागीदारी और ठोस परिणामों के साथ स्वच्छता पखवाड़ा-2026 का समापन किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

संसदीय कार्य मंत्रालय ने 16 से 30 अप्रैल, 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा-2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इसमें मंत्रालय के सभी विभागों/प्रकोष्ठों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। पखवाड़े भर चलने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप स्वच्छता, सफाई, अभिलेख प्रबंधन और कार्यस्थल सुधार पर ध्यान केंद्रित करना था।

यह पखवाड़ा 16 अप्रैल, 2026 को संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव द्वारा सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाए जाने के साथ शुरू हुआ। स्वच्छता संबंधी संदेशों को मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जागरूकता को और बढ़ाया गया।

17 अप्रैल, 2026 को एक समर्पित अभिलेख प्रबंधन और डिजिटलीकरण अभियान चलाया गया। इस दौरान 92 फाइलों का डिजिटलीकरण किया गया, 60 फाइलों की समीक्षा की गई, अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची के अनुसार 40 भौतिक फाइलों को हटा दिया गया और 38 ई-फाइलों को बंद कर दिया गया।

पूरे पखवाड़े में व्यापक स्वच्छता एवं रखरखाव कार्य किए गए। इनमें सीपीडब्ल्यूडी द्वारा सभी कमरों में बिजली के उपकरणों की सफाई और फ्यूज्ड बल्ब/ट्यूबलाइटों की मरम्मत के साथ-साथ कार्यालयों, गलियारों और सार्वजनिक क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान शामिल था। आवश्यकतानुसार कमरों की सफेदी भी कराई गई।

ग्रीन ऑफिस इनिशिएटिव के तहत, कार्यस्थल के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के बागवानी विभाग ने इनडोर पौधे लगाए।

29 अप्रैल, 2026 को संसदीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मंत्रालय के विभिन्न विभागों/कार्यालयों में स्वच्छता और सफाई मानकों का आकलन करने के लिए निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण के आधार पर ही स्वच्छता मानकों के अनुसार विभागों का वर्गीकरण भी किया गया।

यह स्वच्छता पखवाड़ा 30 अप्रैल, 2026 को एक समारोह के साथ संपन्न हुआ। इसमें संसदीय कार्य सचिव ने शीर्ष तीन प्रदर्शन करने वाले अनुभागों को स्मृति चिन्ह वितरित किए। इस अवसर पर अपर सचिव भी उपस्थित थे। समारोह के दौरान, सचिव ने अन्य अनुभागों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अनुभागों का अनुकरण करने और स्वच्छता मानकों तथा अपने कार्यस्थलों के समग्र वातावरण को बेहतर बनाकर और अधिक सुधार के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया।

संसदीय कार्य मंत्रालय ने स्वच्छता, कुशल अभिलेख प्रबंधन और एक स्थायी कार्य वातावरण को शासन के अभिन्न घटकों के रूप में संस्थागत रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ब्रिक्स महिला कार्य समूह की पहली प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई


इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी

दिल्ली /सत्ता संदेश

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत, 30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से ब्रिक्स महिला कार्य समूह की प्रथम प्रारंभिक बैठक आयोजित की।

इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके साथ ही, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों, और संयुक्त राष्ट्र महिला व भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) जैसे ज्ञान भागीदारों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अपर सचिव, सुश्री कैरालीन खोंगवार देशमुख ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और चर्चाओं के लिए माहौल तैयार किया।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय: ‘प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण’ से प्रेरित होकर, इस बैठक में वैश्विक स्तर पर महिलाओं की प्रमुख समस्याओं और साझा चिंताओं पर गहन चर्चा हुई, जिन्हें चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बांटा गया। इनमें शासन और नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका; वित्तीय और डिजिटल समावेशन; महिला उद्यमिता और कौशल विकास; तथा जलवायु कार्रवाई, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महिलाओं की भूमिका शामिल है।

इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी गई।

ब्रिक्स सदस्य देशों ने अपने वक्तव्यों में भारत को उसकी अध्यक्षता के लिए बधाई दी, और सहयोग एवं सीखने की भावना को अपनाते हुए इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का स्वागत और समर्थन किया।

इन चर्चाओं का निष्कर्ष उन प्रमुख परिणामों में योगदान देगा, जो केरल के कोच्चि में आयोजित होने वाली ब्रिक्स महिला कार्य समूह की बैठक (6–7 जुलाई 2026) और ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक (8–9 जुलाई 2026) में सामने आएंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर),

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कियाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीजीआई चंडीगढ़ की विरासत, प्रतिष्ठित साख और अग्रणी चिकित्सा अनुसंधान, सर्जरी तथा एक मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में इसके योगदान पर प्रकाश डालापीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है: श्री नड्डाप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित सभी क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है: श्री नड्डा ने 2014 के बाद से चिकित्सा बुनियादी ढांचे के परिवर्तनकारी विस्तार पर प्रकाश डाला: एम्स की संख्या बढ़कर 23 हुई, मेडिकल कॉलेज 818 हुए और कुल मेडिकल सीटों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई दीक्षांत समारोह में 61 पीएचडी और 114 डीएम सहित 682 स्नातकों ने डिग्रियां प्राप्त कीं और 95 पदक प्रदान किए गए

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री नड्डा ने स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को “एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” हासिल करने के लिए बधाई दी, जो उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ उनके शिक्षकों, संकाय सदस्यों और उनके माता-पिता के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में पीजीआईएमईआर के योगदान की सराहना की।

श्री नड्डा ने रेखांकित किया कि “पीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है।” उन्होंने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों के समर्पित प्रयासों ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई के स्नातकों के साथ संस्थान की साख जुड़ी होती हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान से उत्तीर्ण होने पर सभी छात्रों को बधाई दी।

श्री नड्डा ने पथ-प्रदर्शक क्लिनिकल अनुसंधान और अग्रणी सर्जरी में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा “वर्तमान में पीजीआई में 850 से अधिक बाह्य (extramural) परियोजनाएं और 100 से अधिक आंतरिक (intramural) परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो न केवल एक स्नातकोत्तर संस्थान के रूप में बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाती हैं।” उन्होंने एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण और यकृत प्रत्यारोपण में संस्थान की विशेषज्ञता की भी सराहना की।

श्री नड्डा ने कहा कि “इतने प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना छात्रों के लिए गर्व की बात है” और उन्होंने स्वयं पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के अध्यक्ष के रूप में इस कार्यक्रम का हिस्सा होने पर गर्व व्यक्त किया।

श्री नड्डा ने जोर देकर कहा कि “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में नीतिगत निर्णयों की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि “20वीं सदी के अंत तक, भारत में केवल एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) और एक स्नातकोत्तर संस्थान था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह नए एम्स की स्थापना शुरू की थी और पिछले 10 वर्षों में 16 और एम्स जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 23 हो गई है।”

श्री नड्डा ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य देश भर में तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना है। चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि “मेडिकल कॉलेजों की संख्या एक दशक पहले के 387 से बढ़कर आज 818 हो गई है। स्नातक (यूजी) मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,26,000 से अधिक हो गई हैं, अगले पांच वर्षों में 75,000 और यूजी और पीजी सीटें जोड़ने का लक्ष्य है, जिनमें से 28,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही जोड़ने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया हैं। इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें 31,000 से बढ़कर लगभग 81,000-85,000 हो गई हैं।”

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां दृढ़ता, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। साथ ही, उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि “जहां बुनियादी शिक्षा एक अधिकार है, वहीं उच्च और व्यावसायिक शिक्षा एक विशेषाधिकार है जो महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश द्वारा समर्थित है।” उन्होंने बताया कि “सरकार द्वारा प्रति छात्र प्रति वर्ष लगभग 30-35 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रति छात्र 1.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।”

स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के बारे में बात करते हुए, श्री नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टेम सेल अनुसंधान, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ सहित तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा “हालांकि तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य सेवा को बदल रही है, लेकिन मानवीय भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा “करुणा की अपनी ताकत होती है और यह चिकित्सा पद्धति के केंद्र में होनी चाहिए।” उन्होंने छात्रों को रोगियों और समाज के लाभ के लिए तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सहानुभूति और करुणा उनके काम का मार्गदर्शन करती रहे।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इसमें सार्थक योगदान देंगे, और साथ ही यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह स्नातकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाने का एक अवसर होता है। उन्होंने उन्हें बाहरी मान्यताओं से परे देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, और ईमानदारी से अपना आत्म-मूल्यांकन करने, लगातार सुधार करने, तथा अपने प्रयासों और समर्पण के माध्यम से बेहतर पेशेवर और बेहतर इंसान बनते हुए उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि स्नातक छात्र जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सीखना व्यावहारिक और जिम्मेदारी आधारित होगा। उन्होंने उन्हें इस समझ के साथ आगे बढ़ने और पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के मानकों और मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।

दीक्षांत समारोह में 682 उम्मीदवारों को डिग्री दी गई, जिनमें 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाते हुए 95 पदक (18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य) प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर और केंद्र सरकार तथा पंजाब एवं चंडीगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: 1962 में स्थापित और 1967 में ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है। एनआईआरएफ 2025 की मेडिकल श्रेणी में संस्थान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

क्षमता: संस्थान में 47 विशेषज्ञता विभागों में 2,233 बिस्तरों की क्षमता है।

रोगी सेवा: वार्षिक रूप से लगभग 27-28 लाख ओपीडी विजिट, 1 लाख इनपेशेंट प्रवेश और 95,000 से अधिक सर्जरी की जाती हैं।

आयुष्मान भारत: पीएम-जेएवाई (पीएम -जे ए वाई ) योजना के तहत लगभग 1.81 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।

प्रत्यारोपण: 2025 में 250 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए। संस्थान एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण (एसपीके) में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है।

अनुसंधान: डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा समर्थित 800 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं।

विस्तार: संगरूर (पंजाब), ऊना (हिमाचल प्रदेश) और फिरोजपुर (पंजाब) में सैटेलाइट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय पहुंच बढ़ सके।

नवाचार: संस्थान ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम’ और मरीजों की सहायता के लिए ‘प्रोजेक्ट सारथी’ जैसे नवाचार लागू किए हैं।

चार देशों के दूतों ने राष्ट्रपति को अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए

दिल्ली /सत्ता संदेश

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (23 अप्रैल, 2026) राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में लाओ पीडीआर, कांगो, नामीबिया और गिनी बिसाऊ के राजदूतों द्वारा प्रस्तुत उनके परिचय पत्र स्वीकार किए।

जिन लोगों ने अपने प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, वे थे:

1. लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की राजदूत श्रीमती विथया ज़ायावोंग,

2. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की राजदूत श्रीमती एमिली अयाजा मुशोबेकवा,

3. नामीबिया गणराज्य के उच्चायुक्त विंग कमांडर एलेक्स लुन्याज़ो टुकुहुपवेले (सेवानिवृत्त),

4. गिनी-बिसाऊ गणराज्य के राजदूत श्री एंटोनियो सेरिफो एम्बालो।

सिविल सेवा दिवस: डॉ. जितेंद्र सिंह बोले—PM उत्कृष्टता पुरस्कारों के आवेदन 1,216 से बढ़कर 2,035

दिल्ली/सत्ता संदेश

आईजीओटी कर्मयोगी पर 2,000 से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के साथ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा 88 लाख के पार: मंत्री

मंत्री ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा, सीपीजीआरएएमएस के माध्यम से शिकायत निवारण का विस्तार हुआ, यह 2014 में लगभग 2 लाख वार्षिक शिकायतों के निपटारे तक था जो वर्तमान में बढ़कर 25-30 लाख हो गया है जिसमें 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है और समाधान की औसत अवधि 60 दिनों से घटकर लगभग 12 दिन रह गयी है

केवल 2024 में 40 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने चेहरे की पहचान पर आधारित डिजिटल जीवन प्रमाण पत्रों का उपयोग किया जबकि डीएलसी प्रणालियों में कुल उपयोग 10 करोड़ के पारः डॉ. जितेंद्र सिंह

सिविल सेवा मूल्यांकन को प्रमुख कार्यक्रमों के परिणामों के आधार पर पुनर्गठित किया गया हैः डॉ. जितेंद्र सिंह

देश के 750 से अधिक जिलों में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कारों की लोकप्रियता में तीव्र वृद्धि हुई है और प्रतियोगिता में भाग लेने वालों की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। इसके लिए आवेदनों की संख्या 2023 में 1,216 थी जो बढ़कर 2024 में 1,588 और 2025 में 2,035 हो गई है। आईजीओटीकर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 88 लाख से अधिक अधिकारी जुड़ चुके हैं जिन्होंने 2,000 से अधिक पाठ्यक्रमों का लाभ उठाया है। शिकायत निवारण कार्यक्रम (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से शिकायतों का निवारण 2014 में प्रति वर्ष लगभग 2 लाख शिकायतों तक था जो अब बढ़कर 25-30 लाख हो गया है। इनमें से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है और समाधान की औसत अवधि 60 दिनों से घटकर लगभग 12 दिन रह गयी है। पेंशन सुधारों के अंतर्गत केवल 2024 में 40 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने चेहरे की पहचान पर आधारित डिजिटल जीवन प्रमाण पत्रों का उपयोग किया जबकि विभिन्न प्रणालियों में इसका कुल उपयोग काफी बढ़ गया है।

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहां 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में इन रोचक आंकड़ों का उल्लेख किया। इस अवसर पर उन्होंने “नागरिक-केंद्रित, संस्थागत शासन” की ओर परिवर्तन पर प्रकाश डाला, सेवा प्रदान करने में सुधारों का उल्लेख किया तथा मिशन कर्मयोगी और इसके नए घटकों जैसी क्षमता-निर्माण पहलों के निरंतर विस्तार की घोषणा की। साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग के बजाय प्रतिस्पर्धी, कार्यक्रम-आधारित उत्कृष्टता की मानक कसौटी के माध्यम से प्रशासनिक प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए पुनर्गठित ढांचे की भी घोषणा की।

मंत्री महोदय ने शासन में ऐसे संरचनात्मक बदलावों पर बल दिया जिनमें “व्यक्तिगत सेवा से संस्थागत सेवा की ओर” और “नियम-आधारित” प्रशासन से “भूमिका-आधारित” प्रशासन की ओर बढ़ना शामिल है। उन्होंने लगभग 2,000 पुराने नियमों को हटाने, कुछ भर्ती प्रक्रियाओं के लिए साक्षात्कार समाप्त करने और सिविल सेवा दिवस को अधिक ज्ञान-आधारित मंच के रूप में नए स्वरूप में प्रस्तुत करने का उल्लेख किया। उत्कृष्टता पुरस्कारों के लिए मूल्यांकनके ढांचे को अधिकारियों के व्यक्तिगत प्रोफाइल के बजाय प्रमुख कार्यक्रमों के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पुनर्गठित किया गया है। इस अवसर पर सहायक सचिव कार्यक्रम, लगभग 90 प्रतिशत सरकारी कार्यों को कवर करने वाली डिजिटल शासन प्रणाली और वैश्विक प्रशासनिक कार्यक्रमों के आयोजन सहित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे संस्थागत नवाचारों का भी उल्लेख किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए मिशन कर्मयोगी और “कर्मयोगी प्रारंभ” जैसी पहलों के माध्यम से प्रशिक्षण और शासन सुधारों के विस्तार का संकेत दिया जिसका मुख्य उद्देश्य सिविल सेवकों को शासन संबंधी उभरती चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय प्रशासनिक मॉडलों में वैश्विक रुचि बढ़ रही है जिसके अंतर्गत मालदीव, मॉरीशस, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश सीपीजीआरएएमएस जैसी प्रणालियों का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यापक प्रयास “विकसित भारत: अंतिम व्यक्ति तक नागरिक-केंद्रित शासन और विकास” के मूलमंत्र के अनुरूप है जिसका उद्देश्य 2047 में भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी के लिए अगली पीढ़ी के सिविल सेवकों को तैयार करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह बदलाव प्रशासन-केंद्रित शासन से नागरिक-केंद्रित शासन की ओर है।” उन्होंने यह भी कहा कि सुधारों का उद्देश्य “अधिकतम पारदर्शिता, अधिकतम उत्तरदायित्व और समयबद्धता का अनुशासन सुनिश्चित करना” है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतों की बढ़ती संख्या असंतोष में वृद्धि के बजाय निवारण प्रणालियों में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

ये घटनाक्रम भारत के प्रशासनिक ढांचे में चल रहे परिवर्तन को रेखांकित करते हैं जिसमें लोक सेवा सुधार के केंद्रीय स्तंभों के रूप में डेटा-संचालित मूल्यांकन, डिजिटल शासन और बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण को शामिल किया गया है।

उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की अध्यक्षता की। समारोह में सरकार के शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन और डीएआरपीजी की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा भी मंच पर मौजूद थीं जो वार्षिक सिविल सेवा सम्मेलन में उच्च स्तरीय संस्थागत उपस्थिति को दर्शाती हैं।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने माता-पिता से बच्चों के लिए अनिवार्य आधार बायोमेट्रिक अपडेट पूरा करने का आग्रह किया

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

लुधियाना में माता-पिता और अभिभावकों से 5–7 वर्ष आयु वर्ग (MBU-1) और 15–17 वर्ष आयु वर्ग (MBU-2) के बच्चों के आधार के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) को समय पर पूरा करने का कड़ा आग्रह किया गया है। बच्चों के बढ़ने के साथ उनकी बायोमेट्रिक विशेषताएँ जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और चेहरे की तस्वीरें महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजरती हैं, जिससे निर्धारित चरणों पर इन विवरणों को अपडेट करना उनकी आधार रिकॉर्ड की सटीकता, विश्वसनीयता और प्रमाणीकरण क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक हो जाता है।

निर्धारित समयसीमाओं के भीतर MBU पूरा न करने से प्रमाणीकरण विफलताएँ हो सकती हैं, जो आवश्यक सेवाओं तक पहुँच को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं। अपडेटेड आधार बायोमेट्रिक्स का उपयोग NEET जैसी प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में, साथ ही स्कूल प्रवेश, छात्रवृत्ति योजनाओं और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में प्राथमिक पहचान सत्यापन मोड के रूप में तेजी से हो रहा है। इसके अतिरिक्त, आधार-आधारित प्रमाणीकरण बैंकिंग सेवाओं, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं के लिए व्यापक रूप से आवश्यक है, जिससे समय पर बायोमेट्रिक अपडेट इन सेवाओं तक निर्बाध पहुँच के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण वर्तमान में 30 सितंबर 2026 तक 17 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट मुफ्त सुविधा प्रदान कर रहा है, ताकि अधिकतम अनुपालन सुनिश्चित हो। माता-पिता और अभिभावकों को भविष्य में किसी असुविधा से बचने के लिए इस सुविधा का शीघ्र लाभ उठाने की सलाह दी जाती है।

लुधियाना जिले के UDISE आंकड़ों के अनुसार, कुल 9,15,410 छात्रों में से पर्याप्त संख्या के बच्चों को अभी भी बायोमेट्रिक अपडेट पूरे करने हैं। 5–7 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1,22,596 बच्चों के पास लंबित MBU-1 है, जबकि 15–17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1,04,204 बच्चों के पास लंबित MBU-2 है, जो पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ध्यान और कार्रवाई की आवश्यकता दर्शाता है।

बायोमेट्रिक अपडेट सुविधाजनक रूप से आधार सेवा केंद्रों (ASKs), पंजाब भर के सेवा केंद्रों पर और स्कूलों में आयोजित विशेष आधार अपडेट कैंपों के माध्यम से पूरे किए जा सकते हैं। माता-पिता से प्रोत्साहित किया जाता है कि बच्चे का आधार नंबर और आवश्यकतानुसार प्रासंगिक सहायक दस्तावेज़ साथ लाएँ और निकटतम केंद्र पर जाएँ या स्कूल-आधारित अपडेट अभियानों का उपयोग करें।

अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट का समय पर पूरा होना आधार-सक्षम सेवाओं तक सहज पहुँच, छात्रवृत्तियों और शैक्षिक लाभों के लिए निरंतर पात्रता, परीक्षाओं और प्रवेशों में सुगम भागीदारी, e-KYC के माध्यम से बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन में परेशानी-रहित अनुभव सुनिश्चित करता है, और भविष्य में प्रमाणीकरण विफलताओं का जोखिम कम करता है। यह बच्चों की सुरक्षित डिजिटल पहचान को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सेवा वितरण और पहचान सत्यापन के लिए आधार पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए, निर्धारित आयु विंडो में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट का पूरा होना आवश्यक है। इसलिए सभी पात्र परिवारों से इस अपडेट को प्राथमिकता देने और सीमित समय के लिए प्रदान की जा रही मुफ्त सेवा का पूर्ण लाभ उठाने का कड़ा आग्रह किया जाता है।

पीएम नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान का दौरा करेंगे

दिल्ली \ सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री बलोतरा के पचपदरा में देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर का उद्घाटन करेंगे

79,450 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले इस ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर की स्थापना की गई

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस परिसर में रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन उत्पादन होता है

यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और पेट्रोरसायन आत्मनिर्भरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 अप्रैल 2026 को राजस्थान का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री बलोतरा के पचपदरा में सुबह लगभग 11:30 बजे देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

यह ऐतिहासिक परियोजना देश के ऊर्जा और पेट्रोरसायन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) क्षमता वाले इस ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर की स्थापना 79,450 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से की गई है।

अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस परिसर में रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन उत्पादन होता है। इसकी पेट्रोरसायन क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है और पेट्रोरसायन उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो दक्षता और स्थिरता के वैश्विक मानकों के अनुरूप है।

इस परियोजना से देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पेट्रोरसायन आत्मनिर्भरता बढ़ाने और औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। यह क्षेत्र में पेट्रोरसायन और प्लास्टिक पार्क के विकास के लिए एक आधार उद्योग के रूप में कार्य करेगी, जिससे संबंधित उद्योगों और सहायक क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से रिफाइनरी रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।

भारतीय रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के सहायक कार्यकारी इंजीनियरों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

दिल्ली \ सत्ता संदेश

भारतीय रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों (2022 और 2023 बैच) और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी इंजीनियरों (2021, 2022, 2023 और 2024 बैच) ने आज (20 अप्रैल, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने इन अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश के विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सार्वजनिक सेवा में शामिल हुए हैं। राष्ट्र एक विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय रेलवे और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के युवा अधिकारी होने के नाते, वे ऐसी भूमिकाओं में कदम रख रहे हैं जो लाखों नागरिकों के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके निर्णय और कार्य नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता पर सीधा और दीर्घकालिक प्रभाव डालेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि बुनियादी ढांचा ही आधुनिक राष्ट्रों की नींव है। रेल और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं हैं; वे आर्थिक विस्तार, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के उपकरण हैं। जब कोई रेल किसी दूरदराज के गांव तक पहुंचती है या कोई राजमार्ग किसी दूरस्थ क्षेत्र से जुड़ता है, तो इससे उन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास के अपार अवसर खुल जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचा लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है, व्यापार को बढ़ावा देता है, निवेश आकर्षित करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह क्षेत्रों और लोगों को करीब लाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि केवल आंकड़े ही सफलता का पैमाना नहीं होते। उनके काम की असली कसौटी यह है कि इससे लोगों के जीवन में कितना सुधार होता है।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता जैसे लोक सेवा के मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चुनौतियां और कठिन निर्णय लेने के क्षण अवश्य आएंगे। ऐसे क्षणों में, उनके मूल्य ही उनका मार्गदर्शन करेंगे। राष्ट्रपति ने उन्हें हमेशा जिज्ञासु बने रहने, सीखते रहने और नवाचार को बढ़ावा देने की सलाह दी। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि उनके लिए गए निर्णय, उनके निर्धारित मानक और उनका समर्पण अमिट छाप छोड़ेगा। वे केवल प्रशासक ही नहीं, बल्कि प्रगति के सूत्रधार और आम लोगों के भरोसे के संरक्षक भी हैं।