ब्रेकिंग न्यूज़
यूपीएससी सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 में तीन नए जोड़े गए केंद्रों को 23,000 से अधिक उम्मीदवारों ने चुना; इससे विद्यमान केंद्रों पर दबाव कम हुआ

दिल्ली / सत्ता संदेश

सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 के परीक्षा केंद्रों पर भीड़ कम करने के प्रयास में, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ में तीन नए परीक्षा केंद्र आरंभ किए हैं। इन केंद्रों के जुड़ने से प्रारंभिक परीक्षा के लिए केंद्रों की कुल संख्या 80 से बढ़कर 83 हो गई है। लगभग 23,000 उम्मीदवारों ने इन नए केंद्रों के लिए आवेदन किया है, जिससे सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 के लिए आस-पास के केंद्रों पर भीड़ कम हो गई है।

संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने इस पहल पर विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को उम्मीदवारों के लिए अधिक सुगम, सुलभ और प्रभावी बनाना है। तीन नए केंद्रों को जोड़ने का उद्देश्य भीड़भाड़ को कम करना और उम्मीदवारों को अधिक सुविधा प्रदान करना है। इसके अलावा, दिव्यांग उम्मीदवारों को उनके पसंदीदा परीक्षा केंद्र आवंटित करके, आयोग भौगोलिक और भौतिक बाधाओं को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है ताकि यूपीएससी की यात्रा सभी के लिए वास्तव में सुलभ और समावेशी हो सके।”

भुवनेश्वर में नए केंद्र की स्थापना से कटक पर दबाव अत्यधिक कम हो गया है। सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा – 2026 के लिए भुवनेश्वर केंद्र को 10,656 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार, कानपुर केंद्र के जुड़ने से लखनऊ पर दबाव कम हुआ है। कानपुर में नए केंद्र के लिए 6,938 आवेदन प्राप्त हुए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, मेरठ केंद्र की स्थापना से आसपास के क्षेत्रों के उम्मीदवारों को लाभ हुआ है और गाजियाबाद पर निर्भरता कम हुई है। मेरठ में नए केंद्र के लिए 5,902 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

संघ लोक सेवा आयोग ने विशिष्ट दिव्यांगता वाले व्यक्तियों (पीडब्ल्यूबीडी) के लिए समावेशिता और सुलभता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। संशोधित व्यवस्था के तहत, यह सुनिश्चित किया गया है कि दिव्यांग उम्मीदवार को विद्यमान केंद्रों की क्षमता से अधिक होने पर भी  और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त क्षमता सृजित करके भी उनकी पसंद का केंद्र मिले। परिणामस्वरूप, अकेले दिल्ली क्षेत्र में लगभग 805 दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद का केंद्र मिला।

इस वर्ष सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 के लिए यूपीएससी को कुल 8,19,372 आवेदन प्राप्त हुए हैं। परीक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ करने के लिए संघ लोक सेवा आयोग ने सीएसपी-2026 आवेदन पत्र में एक ड्रॉपडाउन विकल्प जोड़ा है, जिससे उम्मीदवार अपने पसंदीदा निकटवर्ती शहरों का चयन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से प्राप्त डेटा उम्मीदवारों की प्राथमिकताओं के सर्वेक्षण के रूप में कार्य करेगा और भविष्य में अतिरिक्त परीक्षा केंद्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने में सहायक होगा।

ये पहलें समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं को विकसित करने के लिए संघ लोक सेवा आयोग के निरंतर प्रयासों को दर्शाती हैं, साथ ही निष्पक्षता, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को बनाए रखती हैं।

हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर हो : भगवंत सिंह मान

हलवारा /सत्ता संदेश

– उड़ानें शुरू होने के बाद पहली बार ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ हलवारा हवाई अड्डे पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

– हलवारा हवाई अड्डे के विकास पर पंजाब सरकार ने 54 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए: भगवंत सिंह मान

– नियमित उड़ानें शुरू होने से जनता को सुविधा के साथ-साथ पंजाब में निवेश भी बढ़ेगा: भगवंत सिंह मान

– सरकार साहनेवाल हवाई अड्डे को प्रशिक्षण अकादमी के रूप में उपयोग करने की योजना बना रही है: भगवंत सिंह मानहलवारा एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत पंजाब के लिए आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी और तरक्की के नए युग की शुरुआत है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया कि पंजाब सरकार के दृढ़ प्रयासों और वित्तीय प्रतिबद्धता के कारण पूरा हुआ यह लंबे समय से लटकता प्रोजेक्ट पूरे क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देगा। उड़ानें शुरू होने के बाद पहली बार ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ एयरपोर्ट टर्मिनल का दौरा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लोगों से बातचीत की और कहा कि इस हवाई अड्डे की शुरुआत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्रांत में विश्व स्तरीय सुविधाएं लाने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पंजाब सरकार द्वारा हवाई अड्डे के विकास पर लगभग 54.67 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हलवारा से नियमित उड़ानें शुरू होने से न केवल पंजाब के लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रांत में औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे। स्वतंत्रता सेनानियों और महान संतों की विरासत का सम्मान करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अथक प्रयासों के कारण मोहाली एयरपोर्ट का नाम शहीद भगत सिंह और आदमपुर एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास महाराज जी के नाम पर रखे जाने के बाद अब हलवारा एयरपोर्ट का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वे इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे।

हवाई अड्डे के दौरे के दौरान लोगों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार के प्रयासों के कारण यह हवाई अड्डा अब शुरू हो गया है। इस कदम के पीछे एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रांत के लोगों को सुरक्षित, किफायती और आरामदायक हवाई यात्रा की सुविधा मिल सके।”

उन्होंने आगे कहा, “यह हवाई अड्डा इस क्षेत्र के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों के उद्यमियों, व्यापारियों और उद्योगपतियों को पंजाब आने-जाने में मदद करेगा, जिससे व्यापार, कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।”

पहले आने वाली मुश्किलों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दिल्ली-एनसीआर के लिए सीधी उड़ानें न होने के कारण लोगों, खासकर उद्योगपतियों को सड़क मार्ग से देश की राजधानी जाने के दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इससे न केवल बेकार की परेशानी होती थी, बल्कि समय, पैसे और ऊर्जा का भी बड़ा नुकसान होता था।”

उन्होंने आगे कहा, “इस हवाई अड्डे के चालू होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी और दुनिया भर के प्रमुख उद्यमी पंजाब में बड़ा निवेश करने के लिए आकर्षित होंगे।”

हवाई अड्डे के आर्थिक प्रभाव पर विश्वास जताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह हवाई अड्डा पंजाब में औद्योगीकरण को तेज करने में सहायक के रूप में काम करेगा और प्रांत को सबसे पसंदीदा निवेश स्थान के रूप में और मजबूती से स्थापित करेगा।”

कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा, “यात्रियों की सुविधा के लिए जल्द ही हलवारा हवाई अड्डे से और उड़ानें शुरू की जाएंगी। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी पंजाब में आर्थिक गतिविधियों को और मजबूत करेगी और प्रांत की तरक्की तथा यहां के लोगों की खुशहाली में अहम भूमिका निभाएगी।”

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार हलवारा हवाई अड्डे का नाम महान शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने की मांग को भारत सरकार के समक्ष जोरदार ढंग से उठाएगी।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “शहीद करतार सिंह सराभा ने मात्र 19 वर्ष की छोटी उम्र में देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी अद्वितीय कुर्बानी ने लाखों लोगों को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया।”

उन्होंने कहा, “शहीद-ए-आजम भगत सिंह भी शहीद करतार सिंह सराभा को अपना रोल मॉडल मानते थे। हलवारा हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखना उस महान शहीद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जो इस क्षेत्र से संबंधित थे और जो पहले विमानन की पढ़ाई करने के लिए बर्कले विश्वविद्यालय गए और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने के लिए वापस लौटे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब महान गुरुओं, संतों, पीरों और शहीदों की पवित्र धरती है और इस मिट्टी के हर कण में उनकी महान विरासत समाई हुई है। पंजाब विधान सभा ने 22 मार्च, 2023 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें भारत सरकार से इंडियन एयर फोर्स स्टेशन हलवारा, लुधियाना में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने का अनुरोध किया गया था।”

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके बहुमूल्य योगदान को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “शहीद करतार सिंह सराभा ने देश को विदेशी साम्राज्यवाद से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई। गदर पार्टी के नेता के रूप में उन्होंने देश-विदेश में भारत की आजादी के लिए अथक प्रयास किए।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “पहले, पंजाब सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण मोहाली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखा गया था। हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखना हमारे शहीदों के प्रति एक और नम्र श्रद्धांजलि होगी।”

उन्होंने आगे कहा, “शहीदों की शानदार विरासत को संरक्षित करने के लिए हवाई अड्डों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों का नाम महान शहीदों और शख्सियतों के नाम पर रखना हमारी सरकार की अहम पहल रही है। आदमपुर हवाई अड्डे का नाम भी श्री गुरु रविदास महाराज जी के नाम पर रखा गया है।”

विमानन प्रशिक्षण संस्थान के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार द्वारा युवा पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए साहनेवाल हवाई अड्डे की इमारत का उपयोग करने के संबंध में भी ठोस प्रयास किए जाएंगे। युवाओं को पहले से ही किफायती दरों पर विमानन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पंजाब सरकार द्वारा जनहित में हलवारा हवाई अड्डे से उड़ान के समय को बदलने का मुद्दा भी केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।”

पंजाब और इसके लोगों की भलाई के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रांत के हितों की रक्षा और इसकी निरंतर तरक्की और खुशहाली को सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”

भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

दिल्ली / सत्ता संदेश

करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करें; भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित किया

वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने आज (20 मई, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों ने हमारे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जब देश विकास के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है, तो अधिकारियों से अपेक्षाएं भी अधिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा। कई अवसरों पर वे विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व करेंगे। इसलिए, उनके सीखने का दायरा और गति बहुत व्यापक तथा त्‍वरित होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की उनकी क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों की निष्पक्षता उनकी न्यायसंगतता का सूचक होगी। उनकी संवेदनशीलता समावेशिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मापदंड होगी। उनकी विश्वसनीयता उनकी पारदर्शिता और निरंतर निष्पादन पर आधारित होगी। उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक आचरण से निर्धारित उनकी सत्यनिष्ठा उन्हें जनहित में निर्णायक कार्रवाई करने का नैतिक साहस प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा। उन्हें नियमों का पालन करना होगा, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को भूलना नहीं होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अधिकारियों को ईमानदार और नैतिक होना चाहिए। साथ ही, उन्हें परिणाम भी देने होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है बल्कि, जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही नैतिकता का सच्चा सार है। जिस प्रकार न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी भी लोगों को उनके वैध हितों से वंचित करने के समान है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य जनता की आकांक्षाओं को साकार करना है। ये आकांक्षाएं उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त की जाती हैं। इसलिए, अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे जनता के हित में इन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि बहती धारा के साथ बहते रहने में कोई मेहनत नहीं लगती। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और हमारे समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे भारत की जनता, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को, अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखें, चाहे वे क्षेत्र में हों या कार्यालय में। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शी-मार्ट्स के माध्यम से पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक रूपरेखा तैयार की


दिल्ली /सत्ता संदेश

डीएवाई-एनआरएलएम ने पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए शी-मार्ट्स पर राष्ट्रीय परामर्श का नेतृत्व किया

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से 14-15 मई , 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा के मेफेयर कन्वेंशन हॉल में शी-मार्ट्स (स्वयं सहायता उद्यमी-ग्रामीण परिवर्तन के लिए विपणन के अवसर) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। इस परामर्श ने बजट घोषणा – 2026 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया। इस परामर्श की मेजबानी ओडिशा आजीविका मिशन (ओएलएम), मिशन शक्ति विभाग, ओडिशा सरकार ने की और राष्ट्रीय सहायता संगठन (एनएसओ) के रूप में पीआरएडीएएन ने इसे सुगम बनाया।

राज्य मिशन निदेशकों, सीईओ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) के वरिष्ठ अधिकारियों, नाबार्ड के प्रतिनिधियों, क्षेत्र विशेषज्ञों, विकास कार्यकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों ने एक साथ मिलकर महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों और बाजार प्रणालियों को मजबूत करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया।

इस परामर्श का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जमीनी प्रतिक्रिया, सुझावों और प्रासंगिक जानकारियों के माध्यम से शी-मार्ट्स पहल के परिचालन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देना था। प्रमुख विषयों में संस्थागत संरचना, वित्तपोषण मॉडल, अभिसरण मार्ग, निगरानी प्रणाली, व्यावसायिक प्रक्रियाएं, शासन संरचनाएं, प्रौद्योगिकी एकीकरण और कार्यान्वयन रणनीतियां शामिल थीं।

उद्घाटन सत्र का नेतृत्व भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार ने किया, जिन्होंने वर्चुअल माध्यम से मुख्य उद्घाटन भाषण दिया। अपने मुख्य भाषण में, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि डीएवाई-एनआरएलएम का भविष्य उद्यम विकास और बाज़ार एकीकरण में निहित है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी-आधारित संस्थागत मॉडलों के बजाय, महिलाओं के समूहों द्वारा संचालित, समुदाय के स्वामित्व वाले खुदरा और एकत्रीकरण प्रणालियों के रूप में उभरना चाहिए।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री स्वाति शर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस राष्ट्रीय परामर्श का उद्देश्य एक ऐसे कार्यकारी मंच के रूप में काम करना है, जहाँ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश मसौदा रूपरेखा की गहन समीक्षा कर सकें, कार्यान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान कर सकें और बड़े पैमाने पर इसे लागू करने के लिए व्यावहारिक विकल्प सुझा सकें।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी वीबी-जीराम-जी की प्रमुख विशेषताओं को उजागर करने के लिए इस परामर्श में शामिल हुईं।

ओडिशा आजीविका मिशन की राज्य मिशन निदेशक डॉ. मोनिका प्रियदर्शनी ने मिशन शक्ति और सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से विकेंद्रीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में ओडिशा के अनुभव पर प्रकाश डाला।

डीएवाई-एनआरएलएम की ग्रामीण आजीविका विभाग की निदेशक, डॉ. मोलिश्री ने शी-मार्ट्स पहल के विकास और रणनीतिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया और आजीविका संवर्धन से उद्यम-आधारित ग्रामीण बाजार प्रणालियों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत सरकार के वीबी-जीराम-जी की सहायक आयुक्त सुश्री दीक्षा सुप्याल बिष्ट ने वीबी-जीराम-जी और शी-मार्ट्स के बीच संभावित अभिसरण के अवसरों पर चर्चा की, विशेष रूप से महिला-केंद्रित बुनियादी ढांचे, मांग सृजन और बाजार समर्थन प्रणालियों के संबंध में।

पहले दिन का एक प्रमुख आकर्षण “ग्रामीण विपणन के लिए एक रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में ‘शी-मार्ट्स’ पर आयोजित राष्ट्रीय पैनल चर्चा थी। इस पैनल ने शी-मार्ट्स के लिए स्केलेबल डिज़ाइन सिद्धांतों पर विचार-विमर्श करने हेतु सरकार, वित्त, प्रौद्योगिकी और सामाजिक उद्यम क्षेत्रों के विविध दृष्टिकोणों को एक साथ लाया। इस परामर्श में व्यापक उप-समूह विचार-विमर्श भी शामिल था, जिसमें पाँच विषयगत समूहों ने शी-मार्ट्स के मसौदा परिचालन ढाँचे की गहन समीक्षा की; इस समीक्षा में और अधिक विस्तार, जोड़, हटाव और किन पहलुओं से बचना है—इन सभी बिंदुओं पर विशेष रूप से विचार किया गया।

परामर्श के दूसरे दिन मानव संसाधन संरचना एवं महिला नेतृत्व, तकनीकी डिजाइन एवं कार्यान्वयन रणनीति तथा क्षमता निर्माण संरचना पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने महिला नेतृत्व वाली शासन प्रणाली और सामुदायिक स्वामित्व को बनाए रखते हुए पेशेवर खुदरा प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया।

दो-दिवसीय परामर्श के दौरान, इस बात पर एक मज़बूत आम सहमति बनी कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी पर निर्भर खुदरा दुकानों के बजाय, विकेंद्रीकृत, महिलाओं के नेतृत्व वाले, पेशेवर रूप से प्रबंधित और समुदाय के स्वामित्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

परामर्श प्रक्रिया राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, डीएवाई-एनआरएलएम और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों की ओर से शी-मार्ट्स के लिए अंतिम परिचालन दिशानिर्देशों को सुदृढ़ करने और देश भर में चरणबद्ध कार्यान्वयन का समर्थन करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2029 तक 3 करोड़ अतिरिक्त ‘लखपति दीदी’ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, मंत्रालय ने एसआरएलएम को ‘शी-मार्ट्स’ स्थापित करने में सहायता देने का भी संकल्प लिया है। ये शी-मार्ट्स ऐसे टिकाऊ ग्रामीण विपणन मंच होंगे जो पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले उत्पादक समूहों के लिए आय के अवसर, उद्यम विकास, ब्रांडिंग और बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाएंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए इसकी छह दशकों की विशिष्ट राष्ट्र सेवा को स्मरण किया


तिरुवनंतपुरम /सत्ता संदेश

श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे रही है

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने ऑपरेशन सिंदूर सहित संकट के समय अनुकरणीय सेवा दी है

स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने तिरुवनंतपुरम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का अनावरण किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने आज तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल पेरूकाडा फैक्ट्री में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया। यह समारोह देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में संगठन के 60 वर्षों के योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

वर्ष 1966 में स्थापित, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य मिशन को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में अपने शुरुआती योगदान से लेकर स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों, निदान, अवसंरचना विकास और सामाजिक विपणन में अपनी विविध उपस्थिति तक, संगठन ने लगातार उत्कृष्टता, नवाचार और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जताए गए गहरे विश्वास पर जोर दिया और कहा कि संगठन ने प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से इस विश्वास को लगातार कायम रखा है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने एचएलएल के निरंतर विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की उभरती जरूरतों के प्रति उसकी तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करने और व्यावहारिक, प्रभावी उपायों के माध्यम से उन्हें दूर करने की अद्वितीय क्षमता प्रदर्शित की है। हालांकि ऐसे प्रयास हमेशा स्तर तक नहीं पहुंचते, लेकिन उनका संचयी प्रभाव, विशेष रूप से महिलाओं और रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने में, राष्ट्र के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एचएलएल पर विश्वास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वास केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के किफायती दवाइयां और विश्वसनीय उपचार प्रत्यारोपण (एएमआरआईटी) फार्मेसी नेटवर्क जैसी प्रमुख पहलों के प्रति मजबूत समर्थन और जुड़ाव में भी परिलक्षित होता है, जिसने हाल ही में अपनी सेवा के एक दशक पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के साथ-साथ ऐसी पहलों ने देश भर में सस्ती दवाओं की उपलब्धता को काफी हद तक बढ़ाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि एएमआरआईटी फार्मेसियों ने मंत्रालय को कैंसर की दवाओं, ब्रांडेड दवाओं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों सहित महत्वपूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है, जिनकी कीमतें प्रचलित बाजार दरों से 50 प्रतिशत कम हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को ठोस वित्तीय राहत मिल रही है।

संकट के समय में एचएलएल की सराहनीय भूमिका को याद करते हुए, श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संगठन की त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसके तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरण, भीष्म क्यूब्स और दवाएं जम्मू और कश्मीर तथा पंजाब राज्यों में तुरंत पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास संकट के समय राष्ट्र की सेवा करने के लिए एचएलएल की परिचालन तत्परता, प्रतिबद्धता और क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी संस्था की वास्तविक क्षमता महत्वपूर्ण क्षणों में चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता में निहित होती है और इस संबंध में एचएलएल ने सार्वजनिक सेवा वितरण में एक मिसाल कायम की है।

अपने संबोधन के समापन में, उन्होंने पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और समर्पण के उच्चतम मानकों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए संगठन की सराहना की और देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भागीदार के रूप में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में मंत्रालय के निरंतर विश्वास की पुष्टि की।

समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण स्मारक सिक्के का विमोचन था, जो भारत के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से एक के रूप में एचएलएल की विशिष्ट यात्रा के छह दशक पूरे होने का प्रतीक है। यह इसकी स्थायी विरासत और राष्ट्रीय महत्व का भी प्रतीक है।

इस कार्यक्रम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास सहित प्रमुख संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ जिसका उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को आगे बढ़ाना और भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाना है।

किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों और सामाजिक प्रभाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, एचएलएल ने इस कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण उत्पाद और सेवा पहलों की घोषणा की। इनमें हाइड्रोसेफालस शंट का पुनः शुभारंभ, एचएलएल परिवर्तन वेलनेस क्लिनिक, एचएलएल वाटर का शुभारंभ और ‘हैप्पी डेज़’ कम्पोस्टेबल सैनिटरी नैपकिन का विमोचन शामिल हैं। ये सभी पहल संगठन के सुलभता, स्थिरता और नवाचार-संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव द्वारा तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल के अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का उद्घाटन भी शामिल था। यह उन्नत सुविधा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पर्यावरण के अनुकूल मासिक धर्म स्वच्छता समाधानों को प्रोत्साहित करने और स्वदेशी विनिर्माण उत्कृष्टता को मजबूत करने के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की पीएफटी और एएफटी सुविधाओं का दौरा किया जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और उन्हें प्रमुख कार्यों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने दोनों इकाइयों के कारखाना का दौरा किया, टीमों के साथ बातचीत की और विनिर्माण प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही उनके गुणवत्ता, दक्षता और स्वदेशी उत्पादन के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता की भी सराहना की।

इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी, साझेदार संस्थानों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के प्रतिष्ठित हितधारकों ने भाग लिया।

दो जोनल कृषि कॉन्फ्रेंस अब वर्चुअल मोड में, 20% रोटेशनल वर्क फ्रॉम होम होगा लागू- श्री शिवराज सिंह


दिल्ली /सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों में सप्ताह में एक दिन कार-पूलिंग का फैसला; बिजली, ईंधन और सरकारी दौरों पर सख्त संयम- श्री शिवराज सिंह

शादी जैसे अतिआवश्यक अवसरों को छोड़कर 1 साल तक सोना नहीं खरीदेंगे कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारी

खाद्य तेल की खपत घटाने को चलेगा अभियान, खेत बचाओ अभियान और प्राकृतिक खेती पर विशेष फोकस- श्री शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता, संसाधन-संरक्षण और आत्मनिर्भरता की अपील पर श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बड़े निर्णय

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता, संसाधन-संरक्षण और आत्मनिर्भरता की अपील को प्रशासनिक अमल का रूप देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बड़े फैसले किए। अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में एक तरफ जहां बचत, ईंधन-संरक्षण, बिजली नियंत्रण, वर्चुअल कार्यप्रणाली और सरकारी खर्च घटाने के उपाय तय किए गए, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने एक वर्ष तक विशेष पारिवारिक परिस्थितियों को छोड़कर सोना नहीं खरीदने का भी सामूहिक संकल्प लिया।वैश्विक चुनौतियों और बदलते आर्थिक माहौल के बीच केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह संदेश दे रही है कि राष्ट्रहित में संयम और बचत की शुरुआत सरकार खुद से करेगी। इसी दिशा में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि शिक्षा और भूमि संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर कई ऐसे फैसले किए, जो शासन, समाज और कृषि – तीनों स्तरों पर सकारात्मक असर डालने वाले हैं।

कृषि भवन, नई दिल्ली में आज आयोजित इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण संदेश उस समय उभरा, जब अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह के आह्वान पर सामूहिक रूप से यह फैसला किया कि अगले एक वर्ष तक, केवल बेटी की शादी या किसी विशेष अपरिहार्य पारिवारिक अवसर जैसी परिस्थितियों को छोड़कर, वे सोना नहीं खरीदेंगे। यह निर्णय औपचारिक सरकारी आदेश से अधिक एक स्वैच्छिक नैतिक-सामाजिक संकल्प के रूप में है, जिसे श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अपील के प्रति गंभीर प्रतिक्रिया और राष्ट्रहित में व्यक्तिगत संयम का उदाहरण बताया।

प्रशासनिक स्तर पर बैठक में तय किया गया कि गुवाहाटी और विशाखापट्टनम में आगामी दिनों में होने वाली दो जोनल कॉन्फ्रेंस अब फिजिकल मोड में नहीं होंगी बल्कि वर्चुअल मोड में आयोजित की जाएंगी। इससे यात्रा, आवास, स्थल, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबंधित खर्चों में कमी आएगी जबकि राज्यों और हितधारकों के साथ संवाद और समीक्षा की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।

कार्यालयों में बिजली संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। लाइट, पंखे, एसी, कंप्यूटर और अन्य उपकरण आवश्यकता न होने पर बंद रखने के निर्देश केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा दिए गए हैं जबकि एयर-कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों के उपयोग को नियंत्रित और व्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया है ताकि अनावश्यक बिजली खपत रोकी जा सके।

बैठक में यह भी तय किया गया कि लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए रोटेशन के आधार पर वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि इसके साथ यह भी कहा गया है कि फाइल निस्तारण, बैठकों, समन्वय, राज्य-संबंधी कार्य और नियमित कार्यालयीन कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। घर से काम करने वाले कर्मचारी फोन, ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-ऑफिस के माध्यम से उपलब्ध रहेंगे।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि ईंधन बचत और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सप्ताह में एक दिन कार-पूलिंग व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था निदेशक स्तर तक बढ़ाई जाएगी जबकि मंत्रालय में लगभग एक-तिहाई वाहनों के उपयोग को कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है, जिससे ईंधन, वाहन रखरखाव, चालक व्यवस्था और अन्य संबंधित खर्चों में कमी लाई जा सके।

उन्होंने कहा कि सरकारी दौरों और बैठकों को भी अब अधिक नियंत्रित और जरूरत-आधारित बनाया जाएगा। केवल अत्यावश्यक दौरे ही किए जाएंगे और जहां संभव होगा, समीक्षा, परामर्श और बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएंगी ताकि बड़े दलों की अनावश्यक यात्रा रोकी जा सके और खर्च में कमी लाई जा सके।

बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खाद्य तेल की खपत को लेकर भी रहा। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह के निर्देश पर मंत्रालय ने फैसला किया है कि खाद्य तेल के संतुलित और स्वस्थ उपयोग के लिए विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अत्यधिक खपत कम हो, स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़े और देश की खाद्य तेल आयात निर्भरता घटाने के लक्ष्य को बल मिले। खाद्य तेल और तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए चल रहे मिशन को और प्रभावी बनाया जाएगा।

कृषि क्षेत्र को लेकर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग और आईसीएआर ने “खेत बचाओ अभियान” चलाने का फैसला किया है, जिसके तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर मिट्टी की जांच और उसमें मौजूद तत्वों के आधार पर किसानों को यह सलाह देंगे कि कौन-सा खाद, कितनी मात्रा में और किस जरूरत के अनुसार डाला जाना चाहिए। इसका उद्देश्य अनावश्यक उर्वरक उपयोग रोकना और आयातित खादों पर निर्भरता कम करना है। श्री चौहान ने कहा कि खेत बचाओ अभियान को 1 जून से 15 दिनों तक पूरे देश में अधिक संगठित और प्रभावी रूप से चलाया जाएगा। राज्य सरकारों के साथ मिलकर किसानों को जागरूक किया जाएगा कि आवश्यक खाद का उपयोग जरूर करें लेकिन अनावश्यक उपयोग से बचें ताकि लागत भी घटे और जमीन की सेहत भी सुरक्षित रहे।

खरीफ सीजन की तैयारी को भी इस पूरी रणनीति से जोड़ा गया है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 28 और 29 मई को होने वाली खरीफ कॉन्फ्रेंस में संतुलित खाद उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा जबकि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग से एक विशेष सत्र रखा जाएगा। इस सत्र में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है ताकि प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक और प्रेरक अनुभव राज्यों के साथ साझा किए जा सकें। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में छोटे-छोटे कदम भी बड़े राष्ट्रीय परिणाम दे सकते हैं। उनका कहना है कि बचत, संयम और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और यह सब करते हुए खेती, खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की आजीविका किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

श्री सौरभ विजय ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में चार्ज संभाला

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

नई दिल्ली, 18 मई 2026: श्री सौरभ विजय ने सोमवार को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में चार्ज संभाला। वे महाराष्ट्र कैडर के 1998 बैच के IAS अधिकारी हैं।

IIT-दिल्ली से सिविल इंजीनियर होने के नाते, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार में कई पदों पर कार्य किया है।

UIDAI में शामिल होने से पहले वे महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग में प्रधान सचिव (व्यय) थे। कैडर में उनके पूर्व असाइनमेंट में महाराष्ट्र के प्रधान सचिव योजना और विकास आयुक्त, प्रधान सचिव पर्यटन, सचिव चिकित्सा शिक्षा, सचिव उच्च व तकनीकी शिक्षा, इत्यादि शामिल हैं।

उन्होंने केंद्रीय डेप्युटेशन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्वपूर्ण भूमिकाओं में सेवा दी है, जिनमें नई दिल्ली में राष्ट्रपति सचिवालय में निदेशक तथा वाशिंगटन डी.सी. में विश्व बैंक में बांग्लादेश, भूटान, भारत व श्रीलंका के लिए कार्यकारी निदेशक के सलाहकार के रूप में कार्य शामिल है।

केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी पर हुई उच्च-स्तरीय बैठक


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यों की केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की विस्तृत समीक्षा

इंटीग्रेटेड और सस्टेनेबल फार्मिंग को बढ़ावा देकर किसानों की आय भी बढ़ाएंगे और धरती माँ को भी बचाएंगे- केंद्रीय मंत्री

भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, कम लागत वाली तथा लाभकारी पेशा बनाने के लिए करेंगे हरसंभव प्रयास- श्री शिवराज सिंह चौहान

कृषि देश की बड़ी आबादी की जीविका का प्रमुख साधन और भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार स्तंभ- केंद्रीय कृषि मंत्

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (EFC) से संबंधित एक उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज 12, सफदरजंग रोड स्थित उनके कैंप कार्यालय में आयोजित की गई।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर आईसीएआर के महानिदेशक तथा डेयर सचिव डॉ एम एल जाट ने केंद्रीय कृषि मंत्री को देशभर में आईसीएआर के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने भविष्य की कार्ययोजना से भी केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया तथा बताया कि भारतीय कृषि एवं किसान बहनों-भाइयों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए परिषद किस प्रकार कार्य कर रही है।

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कृषि देश की बड़ी आबादी की जीविका का प्रमुख साधन है और भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि हमारी सम्पूर्ण कोशिश और ऊर्जा इस दिशा में केंद्रित होनी चाहिए कि भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, कम लागत वाली तथा लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसान बहन-भाइयों को इसे व्यावहारिक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा सतत कृषि (सस्टेनेबल फार्मिंग) को मजबूती मिलेगी।

श्री चौहान ने कहा कि वैज्ञानिक कृषि आज समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत सहित विश्वभर में जलवायु परिवर्तन की समस्या अब प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगी है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्यों की कृषि-जलवायु (एग्रो-क्लाइमेटिक) परिस्थितियों के अनुरूप राज्यवार कृषि रोडमैप तैयार करने की दिशा में राज्यों की सहमति से तेजी से कार्य किया जाए।

अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम एवं राजस्थान जैसे राज्यों के अनुरोध पर इस दिशा में कार्य प्रगति पर है तथा शीघ्र ही इन राज्यों का स्वतंत्र कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा।

आईसीएआर की कार्ययोजना पर संतोष प्रकट करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने और अधिक ऊर्जा और उत्साह से अधिकारियों को कार्य करने के निर्देश दिए जिससे समयपूर्व लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम)  ने निगमन दिवस 2026 मनाया; भारत में डिजिटल सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अपना सहयोग जारी रखा

दिल्ली /सत्ता संदेश

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) अपना निगमन दिवस 2026 मना रहा है। यह पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के माध्यम से भारत में सार्वजनिक खरीद के सहयोग में इसकी निरंतर भूमिका को दर्शाता है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन धारा 8 के अंतर्गत गैर-लाभकारी संस्था, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस स्पेशल पर्पस व्हीकल (जेम एसपीवी) को जेम प्लेटफॉर्म के विकास, प्रबंधन और रखरखाव के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 17 मई 2017 को स्थापित किया गया था। वर्षों से, जेम एक प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच के रूप में उभरा है, जो देश भर के विक्रेताओं के लिए व्यापार में सुगमता और व्यापक बाजार पहुंच को बढ़ावा देता है।

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और विकसित भारत 2047 की परिकल्‍पना के अनुरूप स्थानीय क्षमताओं को सरकारी खरीद के अवसरों से जोड़कर घरेलू उद्यमों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर फार्मास्यूटिकल्स, परिवहन, निर्माण उपकरण, फर्नीचर, वस्त्र और चिकित्सा वस्‍तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रथम श्रेणी के स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भागीदारी देखी गई है।  

आज, इस प्लेटफॉर्म पर 1.36 लाख से अधिक सरकारी खरीदार और लगभग 25 लाख विक्रेता एवं सेवा प्रदाता मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 72% सक्रिय विक्रेता सूक्ष्म एवं लघु उद्यम से हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, जेम पर मौजूद 11 लाख से अधिक एमएसई को 2.36 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए। महिला नेतृत्व वाले एमएसई को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के खरीद ऑर्डर मिले, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए। प्लेटफॉर्म पर मौजूद स्टार्टअप्स को 19,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ऑर्डर मिले, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने और सरकारी खरीद तक ​​पहुंच बढ़ाने में जेम की भूमिका को दर्शाता है।

जेम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मिहिर कुमार ने कहा, “जेम की स्थापना सरकार और उसकी एजेंसियों के लिए एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल खरीद मंच बनाने की परिकल्पना के  साथ की गई थी। आज, जेम घरेलू उद्यमों को खरीद के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।”

जेम निगमन दिवस समारोह के उपलक्ष्य में हितधारकों के साथ जुड़ाव और ज्ञान साझा करने संबंधी कई पहल आयोजित कर रहा है। समारोह का शुभारंभ 15 मई 2026 को जेम विक्रेता मूल्यांकन कार्यशाला के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य संभावित ओईएम के लिए विक्रेता मूल्यांकन प्रक्रिया और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं के बारे में स्पष्टता बढ़ाना था।

इसके अलावा, जेम 21 मई 2026 को “जेम को समृद्ध बनाना” विषय के तहत “जेम मंथन” का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य जेम तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा को प्रोत्साहित करना है। जेम 22 मई 2026 को रक्षा सेवाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक विचार-विमर्श सत्र का भी आयोजन करेगा जिसमें रक्षा खरीद और परिचालन आवश्यकताओं के साथ तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रक्रिया सुधार और तकनीकी उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

सतारा से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र को दी सौगात: महाराष्ट्र के 5 लाख ग्रामीण परिवारों को पक्के घरों का गौरवपूर्ण गृह प्रवेश

महाराष्ट्र /सत्ता संदेश


शिवराज सिंह ने दी महाराष्ट्र को PMAY-G के लिए 8,368.50 करोड़ रुपए की बड़ी केंद्रीय सहायता, ग्रामीण विकास को नई रफ्तार

शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी 35 ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी: 122.98 करोड़ रु. से 35 बसावटों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

शिवराज ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हर गरीब को पक्की छत’ का भरोसा दोहराया, बोले- बचे हुए पात्र परिवारों को भी मिलेगा आवास

1 जुलाई से विकसित भारत जी राम जी योजना की शुरुआत, गांवों के समग्र विकास को मिलेगी नई दिशा- शिवराज सिंह

प्याज किसानों को बड़ी राहत: आज से NAFED 12.35 रु. प्रति किलो की दर से खरीदी शुरू करेगा- शिवराज सिंह

शिवराज सिंह ने गन्ना उत्पादकों की समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा: केंद्र और राज्य मिलकर निकालेंगे रास्ता

महा आवास अभियान में रिकॉर्ड समय में आवास पूर्ण कर महाराष्ट्र ने पेश किया सुशासन का मॉडल- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ किया, 5 लाभार्थियों को आवास की चाबियां सौंपीं और महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री जयकुमार गोरे, पर्यटन, खननकर्म एवं माजी सैनिक कल्याण मंत्री तथा सतारा के पालकमंत्री श्री शंभूराज देसाई, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री श्री शिवेंद्रसिंह भोसले, मदद एवं पुनर्वसन मंत्री श्री मकरंद जाधव (पाटील), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य मंत्री श्री योगेश कदम तथा स्थानीय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि देश में कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे और प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक पक्की छत मिले। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने PMAY-G के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य करते हुए रिकॉर्ड समय में 5 लाख आवास पूर्ण कर सुशासन, संवेदनशीलता और परिणामोन्मुख प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने महाराष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु 8,368.50 करोड़ रु. की केंद्रीय अंश सहायता जारी किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य में ग्रामीण गरीबों के आवास निर्माण अभियान को और तेज करेगी तथा बेघर-मुक्त ग्रामीण महाराष्ट्र के संकल्प को मजबूत आधार देगी। 

श्री चौहान ने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों का नाम अब तक छूट गया है, उनके लिए भी रास्ता खुला है और सर्वे तथा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार और आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि बिजली, जल, स्वच्छता और सम्मानपूर्ण जीवन के साथ समग्र ग्रामीण जीवन-स्तर को ऊंचा उठाना है। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए 122.98 करोड़ रु. की लागत वाली 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी मुख्यमंत्री श्री फडणवीस को सौंपी। 95.99 किलोमीटर लंबाई की इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटों को लाभ मिलेगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच अधिक सुगम होगी। 

शिवराज सिंह चौहान ने ‘महा आवास अभियान’ के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों, इकाइयों और अधिकारियों को मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ सम्मानित करते हुए कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण का भाव साथ आता है, तब विकास अभियान जनआंदोलन बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने ग्रामीण आवास के क्षेत्र में जिस गति और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरक है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विकसित भारत जी राम जी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 1 जुलाई से शुरू होने जा रही यह पहल गांवों के समग्र और सुनियोजित विकास की नई आधारशिला बनेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की व्यापक रूपरेखा तैयार करेंगी, जिससे गांवों के बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को गति मिलेगी तथा विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प को विकसित गांवों के मजबूत आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।

किसानों के मुद्दों पर विशेष रूप से बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने प्याज उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने और निर्यात संबंधी परिस्थितियों के कारण बाजार भाव प्रभावित हुए हैं, इसलिए आज से ही NAFED द्वारा 12 रु. 35 पैसे प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदी शुरू की जाएगी, ताकि किसानों को तत्काल सहारा मिल सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार किसानों को संकट में अकेला नहीं छोड़ेगी और खरीदी व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने पर बल दिया। श्री चौहान ने अधिकारियों को सतर्क निगरानी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारु रहे और वास्तविक किसानों को उसका लाभ मिल सके। 

गन्ना उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर समस्याओं का समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ इस विषय पर चर्चा हुई है और संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर आवश्यक विमर्श कर व्यावहारिक समाधान की दिशा में पूरी कोशिश की जाएगी, क्योंकि किसान देश की अर्थव्यवस्था का आधार हैं। 

श्री चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं। उन्होंने MSP में हालिया बढ़ोतरी, तिलहन-दलहन खरीदी, कपास मिशन, फार्मर आईडी, किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं और ग्रामीण आधारभूत संरचना के विस्तार जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीण गरीबों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 

शिवराज सिंह चौहान ने सतारा की पावन धरती को छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, स्वाभिमान और सुशासन की प्रेरणास्थली बताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के नायक हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने देश को यह संदेश दिया कि सुशासन का अर्थ गरीबों के आँसू पोंछना, माताओं-बहनों का सम्मान सुनिश्चित करना, किसानों को समृद्ध बनाना और समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाना है; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसी जनकल्याणकारी और संवेदनशील शासन-दृष्टि को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सहयोग से महाराष्ट्र को रिकॉर्ड 30 लाख आवासों की स्वीकृति मिली और राज्य ने रिकॉर्ड समय में 5 लाख घर पूर्ण कर आज लाभार्थियों को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आवासों की गुणवत्ता बढ़ाने, सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली सुविधा उपलब्ध कराने और जमीनविहीन पात्र परिवारों को भी सहायता देकर इस अभियान को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के मॉडल में बदला है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य बेघर-मुक्त राज्य का निर्माण है और आने वाले समय में और अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने प्याज किसानों के लिए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान द्वारा घोषित NAFED खरीदी का स्वागत किया तथा गन्ना एवं चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर केंद्र-राज्य समन्वय से समाधान निकालने का भरोसा व्यक्त किया। 

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास से जुड़े जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, लाभार्थियों और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों की उपस्थिति रही।