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ईरान सीजफायर के बाद नाटो पर बरसे डोनाल्ड ट्रंप: “जब जरूरत थी तब साथ नहीं था NATO”; अब फिर छेड़ा ‘ग्रीनलैंड’ का पुराना विवाद

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के साथ युद्धविराम (Ceasefire) होने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नाटो (NATO) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्हाइट हाउस में नाटो सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट के साथ हुई एक निजी मुलाकात के बाद ट्रंप ने गठबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

नाटो की कड़ी आलोचना: ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “जब हमें उनकी जरूरत थी, तब नाटो वहां नहीं था और अगर हमें उनकी दोबारा जरूरत पड़ी तो वे वहां नहीं होंगे”। ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान नाटो देशों ने होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने में अमेरिका की मदद करने की उनकी अपील का विरोध किया था।

गठबंधन छोड़ने की धमकी: सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने इस ट्रांस-अटलांटिक सैन्य गठबंधन को छोड़ने के बारे में भी विचार किया था, क्योंकि कई यूरोपीय देश अमेरिकी हमलों का सीधे तौर पर विरोध कर रहे थे। नाटो सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट ने इस मीटिंग को ‘ईमानदार’ बताया, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गहरी असहमति थी।

ग्रीनलैंड चैप्टर फिर खुला: ईरान युद्ध की सुर्खियों के बीच ट्रंप ने अचानक ग्रीनलैंड का मुद्दा फिर से उठाकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने ग्रीनलैंड को “बड़ा, खराब तरीके से चलाया गया, बर्फ का टुकड़ा” करार दिया।

बता दें कि डेनमार्क के इस आर्कटिक इलाके पर ट्रंप का प्लान पहले भी नाटो के लिए बड़ा सिरदर्द रहा है और इसका फिर से जिक्र होना संकेत देता है कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।

तनाव का कारण: ट्रंप के बार-बार आह्वान के बावजूद कई यूरोपीय देश वैश्विक तेल की कीमतों को कम करने के लिए सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से बचते रहे, जिसे ट्रंप ने भरोसे की कमी माना है।

ईरान-अमेरिका युद्ध : ट्रंप ने किया 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान; ‘विनाशकारी’ डेडलाइन से ठीक पहले रुकी जंग

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच मंडरा रहे महायुद्ध के बादलों के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘पूरी सभ्यता’ को तबाह करने की अपनी रात 8 बजे की डेडलाइन खत्म होने से मात्र दो घंटे पहले ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान किया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता: ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि यह सीजफायर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के विशेष अनुरोध के बाद हुआ है।

सबसे बड़ी शर्त: यह युद्धविराम इस शर्त पर आधारित है कि ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को तुरंत, पूरी तरह और सुरक्षित रूप से फिर से खोल देगा।

इजराइल भी शामिल: व्हाइट हाउस के अनुसार, इजराइल भी इस दो हफ्ते के सीजफायर का हिस्सा है और वह भी बातचीत जारी रहने तक अपनी बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है।

ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: ट्रंप ने बताया कि उन्हें ईरान की ओर से एक 10-पॉइंट का प्रस्ताव मिला है, जिसे वे बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार मानते हैं। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है और वे एक स्थायी शांति समझौते के काफी करीब हैं।

ईरान का दावा: दूसरी ओर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे अपनी जीत बताते हुए कहा है कि अमेरिका को उनका प्रस्ताव मानने के लिए विवश होना पड़ा है।

इस प्रस्ताव में प्रतिबंधों को हटाने, यूरेनियम संवर्धन की स्वीकृति और क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी जैसी शर्तें शामिल हैं।अगले दो हफ्तों का समय इस समझौते को अंतिम रूप देने और लंबे समय तक चलने वाली शांति स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

ईरान में ‘सभ्यता खत्म’ होने की आहट? ट्रंप की भीषण धमकी के बाद भारतीय दूतावास का अलर्ट; नागरिकों को 48 घंटे घर में रहने की सलाह

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई “सभ्यता के अंत” की चेतावनी के बाद, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक आपातकालीन सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।

ट्रंप की विनाशकारी धमकी: डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को मंगलवार की समय सीमा (डेडलाइन) दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो “आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा”, जिसे फिर कभी जीवित नहीं किया जा सकेगा। ट्रंप ने इसे इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण क्षण बताया है।

भारतीयों के लिए 48 घंटे का ‘कर्फ्यू‘: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से अगले 48 घंटों तक घरों के अंदर रहने की सख्त अपील की है।इन जगहों से दूर रहने के निर्देश: एडवाइजरी में नागरिकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे बिजली के प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों और बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों से दूर रहें। साथ ही, राजमार्गों पर आवाजाही के लिए दूतावास से समन्वय करना अनिवार्य कर दिया गया है।

होटल छोड़ने पर पाबंदी: जो भारतीय व्यवस्थित आवासों या होटलों में ठहरे हैं, उन्हें अपने कमरे न छोड़ने और दूतावास की टीमों के साथ लगातार संपर्क में रहने को कहा गया है।

आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर: दूतावास ने किसी भी सहायता के लिए 24 घंटे चालू रहने वाले हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

+989128109115

+989128109102

+989128109109

+989932179359

ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in

व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि वे परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर विचार नहीं कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप के कड़े रुख ने पूरे क्षेत्र में युद्ध का खौफ पैदा कर दिया है।

मंगलवार रात 8 बजे तक ईरान की तबाही का समय तय! ट्रंप के दावे से बढ़ा तनाव

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक नया और कड़ा अल्टीमेटम देते हुए मंगलवार रात 8 बजे तक की समय सीमा तय कर दी है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान इस निर्धारित समय तक होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को फिर से नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और पुलों पर हमला करेगा।

‘पावर प्लांट डे’ की धमकी: ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि मंगलवार को ईरान में ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ एक साथ होगा और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा. उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “होर्मुज स्ट्रेट खोलो, तुम पागलों, वरना तुम नरक में रहोगे”।

तीसरी बार बढ़ी समय सीमा: राष्ट्रपति ने पहले सोमवार तक का समय दिया था, जिसे अब तीसरी बार बढ़ाकर मंगलवार शाम तक कर दिया गया है. ट्रंप का दावा है कि वे फिलहाल ईरान के साथ बातचीत में लगे हुए हैं, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ, तो वे वहां सब कुछ उड़ा देंगे।

ईरान का पलटवार: ट्रंप की धमकियों का जवाब देते हुए ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बघर गालिबफ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नेतन्याहू के आदेशों का पालन कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप के ये लापरवाह कदम पूरे क्षेत्र को आग में झोंक देंगे और अमेरिका को हर परिवार के लिए जीते-जी नरक बना देंगे।

होर्मुज स्ट्रेट का महत्व: यह दुनिया का सबसे रणनीतिक जलमार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता है. फरवरी में हुए हमलों के जवाब में ईरान ने इसे प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तनाव चरम पर है।

ट्रंप का बड़ा फैसला: स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर पर 50% टैरिफ; भारत समेत वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असर

बिजनेस डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर के आयात से जुड़े टैक्स नियमों में बड़े बदलाव की घोषणा की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी इंडस्ट्री को मजबूत करना और जटिल टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है।

कच्चे मेटल पर भारी टैक्स: नए नियमों के तहत कच्चे (बेसिक) स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर पर 50% टैरिफ को बरकरार रखा गया है। अब यह टैक्स आयात की घोषित कीमत के बजाय वास्तविक बिक्री मूल्य पर लगाया जाएगा ताकि टैक्स चोरी रोकी जा सके।

डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को राहत: यदि किसी उत्पाद (जैसे परफ्यूम की बोतल) में इन धातुओं की मात्रा 15% से कम है, तो उस पर अब कोई टैरिफ नहीं लगेगा।

भारी मेटल वाले प्रोडक्ट्स: जिन उत्पादों में इन धातुओं की मात्रा 15% से अधिक है (जैसे वॉशिंग मशीन या गैस चूल्हा), उन पर पूरे प्रोडक्ट की कीमत का 25% टैरिफ लगाया जाएगा।

इंडस्ट्रियल सेक्टर को छूट: खास इंडस्ट्रियल मशीनों और इलेक्ट्रिकल उपकरणों पर टैरिफ घटाकर 15% कर दिया गया है, जो 2027 तक प्रभावी रहेगा। साथ ही, विदेश में बने उन उत्पादों पर केवल 10% टैरिफ लगेगा जिनमें 100% अमेरिकी मेटल का इस्तेमाल हुआ है।

भारत पर प्रभाव: इन बदलावों से वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए अमेरिकी बाजार में निर्यात करना अब महंगा हो सकता है, जिससे व्यापार पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

सरकार का मानना है कि इस पारदर्शी व्यवस्था से टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी, हालांकि इससे कुछ रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

होर्मुज खुलवाए बिना युद्ध खत्म करने के इच्छुक हैं ट्रंप: वॉल स्ट्रीट जर्नल

वाशिंगटन, 31 मार्च (भाषा) अमेरिकी समाचार पत्र द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रशासनिक अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरुमध्य मोटे तौर पर बंद रहने की सूरत में भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने के लिए तैयार हैं, जो बाद में किसी और समय फिर से शुरू किया जा सकता है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के अनुसार हालिया दिनों में ट्रंप और उनके सहयोगियों द्वारा यह अनुमान लगाया है कि जलडमरुमध्य को जबरन खुलवाने के लिए एक अभियान चलाने से संघर्ष ट्रंप की निर्धारित समयसीमा, यानी चार-छह सप्ताह से आगे बढ़ जाएगा।

खबर के अनुसार ट्रंप ने फैसला किया है कि अमेरिका को ईरान की नौसेना को कमजोर करने और उसके मिसाइल भंडार को नुकसान पहुंचाने जैसे अपने मुख्य उद्देश्यों को हासिल करने के बाद मौजूदा सैन्य संघर्ष को धीरे-धीरे समाप्त करना चाहिए, और साथ ही तेहरान पर कूटनीतिक दबाव डालकर व्यापार के मुक्त प्रवाह को फिर से शुरू करने के लिए मजबूर करना चाहिए।

खबर में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अगर यह प्रयास विफल रहता है, तो अमेरिका यूरोप और खाड़ी क्षेत्र में अपने सहयोगियों पर दबाव डालेगा कि वे जलडमरूमध्य को फिर खुलवाने के लिए आगे आएं।

सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति और पेंटागन प्रमुख ने हमेशा सैन्य अभियान के लिए चार से छह सप्ताह की अनुमानित समयसीमा बताई है।

उन्होंने कहा, “आज 30 दिन हो गए हैं।”

लेविट ने यह संकेत भी दिया कि अरब देशों से भी ईरान में जारी सैन्य अभियान का बोझ साझा करने के लिए कहा जा सकता है।

जब यह पूछा गया कि क्या कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को ईरान में जारी सैन्य अभियान का खर्च उठाना चाहिए तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह ऐसा मुद्दा है जिसमें राष्ट्रपति काफी रुचि ले सकते हैं। मैं इस पर उनसे पहले कुछ नहीं कहूंगी, लेकिन निश्चित रूप से यह एक विचार है और मुझे लगता है कि वह इस बारे में आपको ज्यादा जानकारी दे पाएंगे।”

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था, जिसके बाद ईरान ने पलटवार किया और पूरे खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष फैल गया। होर्मुज जलडमरुमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग है।

होर्मुज जलडमरुमध्य फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो फिलहाल काफी हद तक बंद है। इसके कारण रोजाना गुजरने वाले सैकड़ों जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।

ट्रंप का बड़ा यू-टर्न: ईरानी तेल से हट सकता है अमेरिकी बैन, वैश्विक स्तर पर कम होंगी कच्चे तेल की कीमतें

बिजनेस डेस्क: दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका से एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही समुद्र में टैंकरों में फंसे लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटा सकता है।

आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दो हफ्तों से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। प्रतिबंध हटने से ग्लोबल सप्लाई में इजाफा होगा, जिससे कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह तेल अगले 10 दिनों से लेकर दो हफ्तों तक की सप्लाई सुनिश्चित कर सकता है।

कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह: कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल का मुख्य कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) का बंद होना है। इस समुद्री रास्ते के बंद होने से प्रतिदिन 10 से 14 मिलियन बैरल तेल की कमी पैदा हो गई है। इसी कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका फिजिकल सप्लाई बढ़ाने के कदम उठा रहा है।

रूस के बाद अब ईरान पर नरम रुख: इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी ने इसी तरह का कदम उठाते हुए टैंकरों में फंसे प्रतिबंधित रूसी तेल को बेचने की अनुमति दी थी, जिससे ग्लोबल सप्लाई में 130 मिलियन बैरल का इजाफा हुआ था।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserve) से भी भंडार जारी करने की योजना बना रहा है, जो पिछले हफ्ते G7 देशों द्वारा जारी किए गए 400 मिलियन बैरल के अलावा होगा।

जापान के साथ महत्वपूर्ण बैठक: इस मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को व्हाइट हाउस में जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची से भी मुलाकात करेंगे। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से जहाजों के सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करना और जापान के रणनीतिक भंडार से अतिरिक्त तेल जारी करने पर चर्चा करना होगा।

ईरान की जवाबी कार्रवाई से बैकफुट पर अमेरिका: 24 घंटे में बदला फैसला, अब गैस ठिकानों पर नहीं होगा हमला

इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ‘यू-टर्न’ लिया है। पहले अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के महत्वपूर्ण साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इजरायली हमले को मंजूरी दी थी, लेकिन ईरान की भीषण जवाबी कार्रवाई के बाद ट्रंप ने 24 घंटे के भीतर अपना फैसला बदल दिया है। अब ट्रंप ने घोषणा की है कि इजरायल ईरान के किसी भी तेल या गैस ठिकाने को निशाना नहीं बनाएगा।

कतर पर हमले ने बढ़ाई चिंता: ट्रंप के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान द्वारा कतर के रास लाफान औद्योगिक शहर पर किया गया मिसाइल हमला है। कतर दुनिया का 90 प्रतिशत एलएनजी (LNG) सप्लाई करता है, और इस हमले से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है। ईरान ने न केवल कतर, बल्कि मिडिल ईस्ट के 9 देशों के गैस ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ हमले किए हैं।

ट्रंप का विरोधाभासी बयान: हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस ने ही ईरान के गैस क्षेत्र पर हमले की अनुमति दी थी, लेकिन कतर की नाराजगी और हमलों के बाद ट्रंप ने बयान जारी कर कहा कि उन्हें इस हमले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने इजरायल के प्रति नाराजगी जाहिर की और कतर को ‘निर्दोष’ बताते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि कतर पर और हमले हों।

भारत पर भी असर: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस संघर्ष का असर भारत तक पहुँच गया है। गैस की किल्लत के कारण जेएनयू (JNU) जैसे संस्थानों में छात्रों के खाने से रोटियां तक गायब हो गई हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में एलपीजी (LPG) संकट गहराने लगा है। इसके अलावा, युद्ध की स्थिति के कारण सोने और चांदी के दामों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

ईरान के परमाणु हथियार पर ट्रंप की बड़ी चेतावनी: ‘एक घंटे में कर देगा इस्तेमाल, पूरा मध्य-पूर्व हो जाएगा तबाह’

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान के हाथ परमाणु हथियार लग गए, तो वह उनका इस्तेमाल करने में एक घंटा या एक दिन भी नहीं लगाएगा और तुरंत हमला कर देगा। उन्होंने आगाह किया कि इससे न केवल इज़राइल, बल्कि पूरा मध्य-पूर्व (Middle East) तबाह हो सकता है।

ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को ‘हिंसक और क्रूर’ बताते हुए दावा किया कि ईरानी प्रशासन ने पिछले तीन हफ्तों में अपने ही 32,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है। उन्होंने ईरान के खिलाफ हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि केवल दो हफ्तों के हमलों में ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है। ट्रंप के दावों के अनुसार, अब ईरान के पास न तो वायुसेना बची है, न ही नौसेना और उनके एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार भी नष्ट हो चुके हैं।इसके अलावा, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के महत्व पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि यह दुनिया के लिए एक बड़ा ‘चोक पॉइंट’ है, जहाँ से कई देश अपनी ऊर्जा का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि चीन और जापान जैसे देशों को भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वहाँ अपने युद्धपोत (Warships) तैनात करने चाहिए। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी थी।

ईरान-इजरायल युद्ध का 13वां दिन: राष्ट्रपति पेजेशकियन ने शांति के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

इंटरनेशनल डेस्क: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए दुनिया के सामने तीन अहम शर्तें रखी हैं। यह युद्ध अब अपने 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों की ओर से भारी गोलाबारी जारी है।

शांति के लिए ईरान की 3 शर्तें: राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रूस और पाकिस्तान के नेताओं के साथ चर्चा के बाद सोशल मीडिया (X) पर स्पष्ट किया कि युद्ध तभी रुकेगा जब:

-ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए।-

हुए नुकसान के लिए मुआवजे का भुगतान किया जाए।

-भविष्य में किसी भी आक्रमण के खिलाफ दृढ़ अंतर्राष्ट्रीय गारंटी दी जाए।

डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल का रुख: दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के सैन्य ठिकानों और एंटी-डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है और अब वहां “कुछ भी नहीं बचा है”।

वहीं, इजरायल ने लेबनान के बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसमें अब तक 600 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। इस तनाव का असर खेलों पर भी पड़ा है और विदेशी खिलाड़ियों के न आने की आशंका से IPL फ्रेंचाइजियों की चिंता बढ़ गई है।