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ईरान से युद्ध जल्द समाप्त होने की संभावना, लेकिन तेल आपूर्ति बाधित हुई तो और कठोर हमले करेंगे: ट्रंप

दुबई, 10 मार्च (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस्लामी गणराज्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करता है तो लड़ाई और तेज हो सकती है।

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उनके पुत्र अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी चुना गया। इसके एक दिन बाद ही तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।

निवेशकों का मानना है कि यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध के 10 दिन बाद ईरान अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है।

हालांकि बाद में कीमतों में थोड़ी नरमी आई, जिसके बाद अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई और यह उम्मीद जगी कि संभवत: ईरान के साथ युद्ध ज्यादा समय तक नहीं चलेगा।

ट्रंप ने मियामी के पास अपने गोल्फ क्लब में रिपब्लिकन सांसदों से कहा, ‘‘हम कुछ शैतानी ताकतों को खत्म करने के इरादे से कुछ समय के लिए पश्चिम एशिया में थे और मुझे उम्मीद है कि यह सब जल्द खत्म हो जाएगा।’’

कुछ घंटे बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया: ‘‘अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के प्रवाह को रोकने वाला कोई भी कदम उठाता है तो अमेरिका उस पर अब तक की तुलना में बीस गुना अधिक जोरदार हमले करेगा।’’

ईरान के सरकारी मीडिया में ट्रंप की टिप्पणियों के प्रकाशन के बाद सीधा जवाब देते हुए अर्द्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के प्रवक्ता अली मोहम्मद नाइनी ने कहा ‘‘ईरान तय करेगा कि युद्ध कब खत्म करना है।’’

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध की शुरुआत में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की विचारधारा उनसे कुछ अलग थी, हालांकि उन्होंने दोनों के बीच मतभेद की बात को सिरे से खारिज कर दिया।

सोमवार को अपने गोल्फ क्लब में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वेंस शायद युद्ध में जाने को लेकर उतने उत्साहित नहीं थे, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हवाई हमले शुरू करने का उनका फैसला जरूरी था।

ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे लगा कि यह करना जरूरी था। मुझे नहीं लगता था कि हमारे पास कोई और विकल्प था।’’

इस युद्ध ने विश्व बाजारों में तेल और गैस की प्रमुख आपूर्ति को बाधित कर दिया है और अमेरिका भर में ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। इस लड़ाई के कारण विदेशी नागरिक व्यापारिक केंद्रों से पलायन कर रहे हैं और लाखों लोग शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं क्योंकि बम हमलों में सैन्य ठिकानों, सरकारी इमारतों, तेल और जल संयंत्रों, होटलों और स्कूल को निशाना बनाया जा रहा है।

ट्रंप ने सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर बात की और युद्ध तथा अन्य मुद्दों पर चर्चा की।

पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि खाड़ी देशों के नेताओं और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ बातचीत के बाद पुतिन ने संघर्ष के त्वरित राजनीतिक और राजनयिक समाधान के संबंध में कुछ विचार व्यक्त किए।

ईरान के 56 वर्षीय धर्मगुरु खामेनेई इस्लामी गणराज्य के इतिहास में केवल तीसरे सर्वोच्च नेता हैं। उनके अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से घनिष्ठ संबंध हैं।

इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान में कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जिसे 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से राजधानी पर सबसे भीषण हवाई हमला माना जा रहा है। ईरानी मीडिया ने नुकसान और हताहतों के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं दी।

इजराइल ने सोमवार को कहा कि वह ईरान के इस्फहान शहर के साथ-साथ तेहरान और दक्षिणी ईरान में बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है। इजराइली सेना ने कहा कि उसने कई बुनियादी ढांचा स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें रिवोल्यूशनरी गार्ड का ड्रोन मुख्यालय भी शामिल है।

ईरान की इजरायल को परमाणु हमले की धमकी: ‘सत्ता बदली तो डिमोना न्यूक्लियर प्लांट को बना देंगे निशाना’

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और इजरायल के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके देश में ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) की कोई भी कोशिश की गई, तो वह इजरायल के सबसे गुप्त और महत्वपूर्ण डिमोना परमाणु संयंत्र (Dimona Nuclear Site) को अपना निशाना बनाएगा। यह चेतावनी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ISNA ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से जारी की है।यह गंभीर धमकी उस समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार ईरान में शासन बदलने के संकेत दे रहे हैं।

इजरायली अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप इस लक्ष्य को लेकर पूरी तरह अडिग हैं और उन्होंने पहले ही जरूरी टारगेट मार्क कर लिए हैं।

क्या है डिमोना न्यूक्लियर साइट और क्यों है यह खास?

गुप्त इतिहास: आधिकारिक तौर पर इसे ‘शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर’ कहा जाता है, जो नेगेव रेगिस्तान में स्थित है। इसका निर्माण 1950 के दशक में फ्रांस की गुप्त तकनीक से शुरू हुआ था।

झूठ की दीवार: शुरुआत में इजरायल ने दुनिया को यह बताया था कि यह केवल एक ‘कपड़ा फैक्ट्री’ है।

परमाणु हथियारों का केंद्र: हालांकि इजरायल इसे एक रिसर्च सेंटर बताता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह इजरायल के परमाणु हथियार कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है, जहाँ परमाणु बम बनाने के लिए प्लूटोनियम तैयार किया जाता है।

अभेद्य सुरक्षा: इस क्षेत्र की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इसके ऊपर से विमान उड़ाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है।अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों का मानना है कि लगातार हमलों और वरिष्ठ नेतृत्व को हुए नुकसान के कारण वर्तमान ईरानी सरकार भारी दबाव में है।

‘मैं न होता तो पाकिस्तान के 3.5 करोड़ लोग मारे गए होते’: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर डोनाल्ड ट्रंप का सनसनीखेज दावा

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध को रोककर करोड़ों लोगों की जान बचाई।

शहबाज शरीफ के हवाले से किया दावा: ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद उनसे कहा था कि अगर ट्रंप ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान 3.5 करोड़ (35 मिलियन) लोग मारे गए होते। ट्रंप का यह बयान मई 2025 में हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष की ओर इशारा करता है, जिसमें पाकिस्तान काफी दबाव में था।

8 युद्ध रोकने का दावा: अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 10 महीनों में 8 युद्ध रुकवाए हैं। इन संघर्षों में भारत-पाकिस्तान के अलावा इजरायल-हमास, इजरायल-ईरान, और रूस-यूक्रेन जैसे विवाद शामिल हैं।

भारत ने दावों को किया खारिज: भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कूटनीतिक अंदाज में चुटकी लेते हुए कहा कि जब यह संघर्ष चल रहा था, तब अमेरिका “यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका” में ही था, यानी उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

वहीं, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के DGMO ने खुद भारतीय समकक्ष को हॉटलाइन पर संपर्क कर युद्धविराम का अनुरोध किया था, और इसमें किसी तीसरे पक्ष का कोई हस्तक्षेप नहीं था।

सोमवार को शेयर बाजार में आ सकता है भारी उछाल! ट्रंप के टैरिफ रद्द होने से निवेशकों की चांदी, गिफ्ट निफ्टी 400 अंक चढ़ा

बिजनेस डेस्क : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी आयात शुल्क (टैरिफ) को खारिज करने के बाद भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार बढ़त की उम्मीद जताई जा रही है,। इस बड़े फैसले का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है, जिससे निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

गिफ्ट निफ्टी में तूफानी तेजी: शुक्रवार को अमेरिकी कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद गिफ्ट निफ्टी में करीब 400 अंकों की तूफानी तेजी दर्ज की गई। यह इंडेक्स 320 अंक यानी 1.25 प्रतिशत चढ़कर 25,886 के स्तर पर बंद हुआ। गौरतलब है कि गिफ्ट निफ्टी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड करता है और भारतीय बाजार खुलने से पहले दलाल स्ट्रीट के माहौल का संकेत देता है।

इन सेक्टरों को होगा बड़ा फायदा: टैरिफ रद्द होने से भारत से अमेरिका को निर्यात करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। बाजार खुलने पर निवेशकों की नजर विशेष रूप से इन सेक्टरों पर रहेगी:

-फार्मा (दवाएं),

-रत्न और आभूषण,

-कपड़ा उद्योग (टेक्सटाइल),

-स्मार्टफोन और समुद्री उत्पाद-

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से भारत के लगभग 55 प्रतिशत निर्यात को सीधा फायदा पहुंचेगा।

शुक्रवार की मजबूती ने बनाया आधार : बीते शुक्रवार को भी भारतीय बाजार हरे निशान में बंद हुए थे। सेंसेक्स 316.57 अंक की बढ़त के साथ 82,814.71 पर और निफ्टी 116.90 अंक उछलकर 25,571.25 के स्तर पर बंद हुआ था। जानकारों का मानना है कि शुक्रवार की इस रिकवरी और अमेरिकी कोर्ट के फैसले से सोमवार को बाजार में ‘पैसों की बारिश’ हो सकती है,।(डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के लिए है। निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें।)

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका: IEEPA के जरिए टैरिफ लगाने पर रोक, जवाब में राष्ट्रपति ने तत्काल लागू किया 10% ग्लोबल टैरिफ

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा कानूनी झटका लगा है, जिसमें कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के उनके फैसले पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से यह फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैरिफ लगाने के लिए 1977 के इस एक्ट का इस्तेमाल करके अपने कानूनी अधिकार का उल्लंघन किया है। कोर्ट के अनुसार, IEEPA अथॉरिटीज का इस्तेमाल रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता।

ट्रंप की जवाबी कार्रवाई और 10% ग्लोबल टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप ने “बहुत बुरा फैसला” करार दिया है। हालांकि, इस कानूनी शिकस्त के तुरंत बाद ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ को “तत्काल प्रभाव” से लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके लिए उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जो उन्हें 150 दिनों के लिए अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लगाने की अनुमति देता है।

वित्त मंत्री ने दिया वैकल्पिक रास्तों का भरोसा : अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि भले ही IEEPA के इस्तेमाल पर रोक लगी है, लेकिन टैरिफ रेवेन्यू में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन अब सेक्शन 232 और सेक्शन 301 जैसी वैकल्पिक कानूनी शक्तियों (Alternative Legal Authorities) का इस्तेमाल करेगा। प्रशासन का अनुमान है कि इन अन्य तरीकों को अपनाने से 2026 में टैरिफ से होने वाली कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या है IEEPA कानून? इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) 1977 में बनाया गया एक अमेरिकी संघीय कानून है। यह राष्ट्रपति को ‘नेशनल इमरजेंसी’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेनदेन को रेगुलेट करने, एसेट्स फ्रीज करने और अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले देशों के साथ व्यापार पर रोक लगाने के व्यापक अधिकार देता है। अब तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसका इस्तेमाल 77 बार नेशनल इमरजेंसी घोषित करने के लिए किया है।

ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठेगा पर्दा! राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान- ‘एलियंस और UFOs की सभी गोपनीय फाइलें सार्वजनिक करेगा अमेरिका’

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा ऐलान किया है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और आम लोगों के बीच हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार एलियंस (Aliens), बाहरी जीवन और अनजान उड़ती चीजों (UFOs) से जुड़ी उन गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने जा रही है, जिन्हें दशकों से छिपाकर रखा गया था।

एजेंसियों को जारी करने के निर्देश: राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे युद्ध सचिव (Secretary of War) और अन्य संबंधित विभागों तथा एजेंसियों को निर्देश देंगे कि वे सरकारी फाइलों में मौजूद अनजान हवाई घटनाओं (UAP) और अंतरिक्ष यानों से जुड़ी जानकारियों की पहचान करें और उन्हें आम जनता के लिए जारी करने की प्रक्रिया शुरू करें।

ओबामा पर लगाए गंभीर आरोप; ट्रंप का यह बयान पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस इंटरव्यू के बाद आया है जिसमें ओबामा ने स्वीकार किया था कि एलियंस ‘असली’ हैं, हालांकि उन्होंने उन्हें कभी देखा नहीं है। ट्रंप ने ओबामा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने गोपनीय जानकारी लीक करके बड़ी गलती की है। ट्रंप ने कहा, “मैं नहीं जानता कि वे असली हैं या नहीं, लेकिन ओबामा को वह जानकारी नहीं देनी चाहिए थी”।

एरिया 51 और पेंटागन के राज सालों से दुनिया भर के लोग : अमेरिका के ‘एरिया 51’ (Area 51) और पेंटागन की पुरानी रिपोर्ट्स की मांग कर रहे हैं। ट्रंप की बहू लारा ट्रंप ने भी हाल ही में संकेत दिया था कि राष्ट्रपति के पास अंतरिक्ष यान और एलियंस से जुड़ा एक विशेष भाषण तैयार है, जिसे सही समय पर दिया जाएगा।

विवादों से ध्यान हटाने की कोशिश? राजनीतिक गलियारों में ट्रंप के इस कदम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि यह ‘एपस्टीन फाइल्स’ जैसे विवादों से ध्यान हटाने की एक कोशिश हो सकती है, जबकि अन्य इसे ट्रंप की ‘पारदर्शिता’ की नीति का हिस्सा मान रहे हैं, जैसा कि उन्होंने पहले जॉन एफ कैनेडी की फाइलों के साथ किया था।

अमेरिका का ईरान पर महा-हमले का प्लान तैयार: ट्रंप को सौंपी गई ‘किल लिस्ट’, दर्जनों नेताओं के खात्मे से तख्तापलट की तैयारी

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका अगले कुछ घंटों या हफ्तों में ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस और पेंटागन द्वारा तैयार की गई एक विस्तृत ब्रीफिंग दी गई है, जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के कई विकल्प शामिल हैं।

नेताओं की ‘किल लिस्ट’ और तख्तापलट का लक्ष्य : इस योजना का सबसे खतरनाक हिस्सा ईरान में शासन परिवर्तन (रेजीम चेंज) करना है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने एक ‘किल लिस्ट’ तैयार की है जिसमें ईरान के दर्जनों राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाने की योजना है। इस सूची में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान खामेनेई शासन को उखाड़ फेंकना है।

परमाणु ठिकाने और मिसाइल सेंटर निशाने पर : अमेरिकी सेना की हिट लिस्ट में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाएं सबसे ऊपर हैं। इन हमलों के लिए अमेरिका ने मध्य पूर्व में 150 फाइटर जेट और 12 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, जो 2003 के इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। इस अभियान को “मिडनाइट हैमर” जैसे पिछले ऑपरेशनों से भी बड़ा और निरंतर चलने वाला हवाई युद्ध बताया जा रहा है।

ईरान की तैयारी और कूटनीतिक चुनौतियां: संभावित हमले को देखते हुए ईरान ने भी अपने परमाणु केंद्रों को बंकरों में बदलना शुरू कर दिया है और अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिका के लिए एक चुनौती यह है कि खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई ने अपनी धरती का उपयोग अमेरिकी हमले के लिए करने देने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रंप के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

ट्रंप से मुलाकात कर ईरान के साथ व्यापक वार्ता पर जोर देंगे नेतन्याहू

तेल अवीव, 10 फरवरी (एपी) प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साथ महत्वपूर्ण परमाणु वार्ताओं को व्यापक रूप देने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से मंगलवार को वाशिंगटन का दौरा करेंगे।

अमेरिकी सैन्य तैयारियों के बीच पिछले सप्ताह यह वार्ता फिर से शुरू हुई थी।

इजराइल लंबे समय से ईरान से यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने, मिसाइल कार्यक्रम में कटौती करने और क्षेत्र भर के आतंकवादी समूहों से संबंध तोड़ने की मांग करता रहा है। ईरान ने हमेशा इन मांगों को खारिज करते हुए कहा है कि वह प्रतिबंधों में ढील के बदले ही अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं स्वीकार करेगा।

नेतन्याहू बुधवार तक वाशिंगटन में रहेंगे।

उन्होंने अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर में ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से और अधिक कठोर कार्रवाई की वकालत की है।

पिछले साल ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर 12 दिन तक किए गए हमलों में इजराइल का साथ अमेरिका ने दिया था।

कनाडा और फ्रांस ने अमेरिका की धमकी को लेकर तनाव के बीच ग्रीनलैंड में वाणिज्य दूतावास खोले

नुक (ग्रीनलैंड), सात फरवरी (एपी) कनाडा और फ्रांस ने शुक्रवार को ग्रीनलैंड की राजधानी में अपने राजनयिक वाणिज्य दूतावास खोले।

यह कदम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी देश डेनमार्क और आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका अर्ध-स्वायत्त डेनिश क्षेत्र यानी ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कर रहा है।

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नुक में आधिकारिक रूप से देश के वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया। इस मौके पर कनाडा का ‘मैपल-लीफ’ झंडा फहराया गया और वहां मौजूद लोगों ने ‘‘ओ कनाडा’’ गीत गाया।

आनंद ने कहा, ‘‘आज इस झंडे को फहराने और औपचारिक रूप से वाणिज्यि दूतावास खोलने का महत्व यह है कि हम ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के साथ कई मुद्दों पर एकजुट होकर खड़े रहेंगे।”

फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने बताया कि ज्यां-नोएल पोइरियर ने शुक्रवार को महावाणिज्य दूत के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया। इससे फ्रांस ग्रीनलैंड में महावाणिज्य दूतावास स्थापित करने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया है।

फ्रांस ने कहा कि यह निर्णय जून में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की यात्रा के दौरान लिया गया था।

कनाडा ने 2024 में ही ग्रीनलैंड में वाणिज्य दूतावास खोलने का वादा किया था, यानी ट्रंप के हालिया ‘‘अधिग्रहण’’ संबंधी बयानों से पहले। लेकिन खराब मौसम के कारण उद्घाटन टल गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह डेनमार्क और उन सात अन्य देशों पर नए शुल्क लगाएंगे, जो ग्रीनलैंड पर कब्जे की उनकी मांग का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अचानक यह धमकी वापस ले ली थी।

ट्रंप के ऐलान से भारतीय मार्केट में जोश: रुपये में 3 साल में सबसे बड़ी तेज़ी, इन्वेस्टर्स ने कमाए 23 लाख करोड़ रुपये

बिज़नेस डेस्क: US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ कट के ऐलान के बाद भारतीय करेंसी और स्टॉक मार्केट में भारी उछाल आया है। मंगलवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 1.2% मज़बूत होकर 90.40 पर पहुंच गया, जो तीन साल से ज़्यादा समय में सबसे बड़ी तेज़ी है।

बड़ी टैरिफ कट और ट्रेड डील: प्रेसिडेंट ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच ट्रेड डील पर हुए समझौते से भारतीय करेंसी को बड़ी तेज़ी मिली है। ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने का ऐलान किया है, जिससे भारतीय एक्सपोर्ट पर दबाव और अनिश्चितता खत्म हो गई है। गौरतलब है कि साल 2025 में रुपया एशिया की सबसे कमज़ोर करेंसी थी, जो पूरे साल में करीब 5% और अकेले जनवरी में 2% से ज़्यादा गिरी थी।

स्टॉक मार्केट ने बनाया रिकॉर्ड: रुपये की मज़बूती के साथ ही स्टॉक मार्केट ने भी ऐतिहासिक वापसी की है। मार्केट का मेन इंडेक्स सेंसेक्स करीब 3,600 पॉइंट्स की बढ़त के साथ खुला और 85,000 के लेवल को पार कर गया।

निफ्टी 50 में भी ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई और इन्वेस्टर्स ने एक ही झटके में 23 लाख करोड़ रुपये कमाए। बजट के दिन मार्केट पर जो प्रेशर था, वह आज की तेज़ी से पूरी तरह खत्म हो गया है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस डील से फॉरेन इन्वेस्टर्स का भरोसा वापस आया है, जिससे इंडियन रुपये (INR) की डिमांड बढ़ी है।