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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अस्पताल में भर्ती: घुटने का होगा ऑपरेशन

पंजाब डेस्क : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह को मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, उनके घुटनों का ऑपरेशन होना है, जिसके चलते उन्हें अस्पताल लाया गया है। फोर्टिस अस्पताल के प्रवक्ता ने उनकी भर्ती की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि यह कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या (सीरियस इश्यू) नहीं है।

आई एम बैक इन द गेम‘: कैप्टन अमरिंदर सिंह पिछले कुछ समय से सर्जरी के कारण सक्रिय राजनीति से दूर थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने जोरदार वापसी के संकेत दिए थे। 30 नवंबर को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था, “आई एम बैक इन द गेम” (मैं वापस खेल में हूं)। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे भाजपा नहीं छोड़ रहे हैं और न ही कांग्रेस में वापसी का उनका कोई इरादा है।

2027 के चुनावों पर नजर: अक्टूबर 2025 में फरीदकोट और अन्य स्थानों पर भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होते हुए कैप्टन ने खुद को “फिट और एक्टिव” घोषित किया था। उन्होंने कहा था कि वे 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से भाजपा को मजबूत करने की अपील भी की थी।

राजनीतिक रणनीति: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल के दिनों में पंजाब की राजनीति, गैंगस्टर और ड्रग्स जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने पंजाब में SAD-BJP गठबंधन की आवश्यकता और 2027 के चुनावों के लिए अपनी विशेष रणनीति पर भी चर्चा की है, जो उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन में लौटने की बड़ी घोषणा मानी जा रही है।

फगवाड़ा-लुधियाना हाईवे पर भीषण सड़क हादसा: LPU के तीन छात्रों की दर्दनाक मौत, कार के उड़े परखच्चे

पंजाब डैस्क: पंजाब के फगवाड़ा-लुधियाना हाईवे पर गांव चाचोकी के पास मंगलवार को एक रूह कंपा देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें तीन होनहार छात्रों की जान चली गई। यह हादसा एक तेज रफ्तार कार और ट्रक (टाटा 407) के बीच आमने-सामने की टक्कर के कारण हुआ। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसके चिथड़े उड़ गए।

मृतकों की पहचान: हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवक फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के छात्र थे। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:

साहिल मोहम्मद (23), निवासी फिल्लौर, जालंधर।

दलजीत भट्टी (20), निवासी फिल्लौर, जालंधर।

अरमान मेहमी (17), निवासी फिल्लौर, जालंधर।

कैसे हुआ हादसा? सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF) के अनुसार, तीनों छात्र अपनी इटियोस कार (PB 10 DS 5210) में फगवाड़ा से फिल्लौर की तरफ जा रहे थे। कार की रफ्तार बहुत अधिक थी, जिस कारण वह अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलटियां खाती हुई हाईवे के दूसरी तरफ से आ रहे एक ट्रक से जा भिड़ी। इस हादसे में ट्रक चालक विजय कुमार भी घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हाईवे पर लगा लंबा जाम: इस भयानक हादसे के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त वाहनों को रास्ते से हटवाया और यातायात सुचारू किया। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए फगवाड़ा के सिविल अस्पताल भेज दिया है।

मोगा में प्रवासी मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग: यूपी-बिहार के मजदूरों को बनाया निशाना, दो गंभीर रूप से घायल

पंजाब डेस्क : पंजाब के मोगा जिले में जीरा रोड पर स्थित एक सेलर (चावल मिल) में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों पर मंगलवार सुबह रूह कंपा देने वाला हमला हुआ। काम खत्म कर अपने कमरों की ओर लौट रहे मजदूरों पर मोटरसाइकिल सवार तीन अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

घटना का विवरण: जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 11 बजे 7 से 8 प्रवासी मजदूर पल्लेदारी का काम खत्म कर अपने किराये के कमरे पर जा रहे थे। जैसे ही वे सेलर से कुछ ही दूरी पर पहुंचे, एक बाइक पर आए हमलावरों ने उन पर कई राउंड फायर किए। गोलियों की आवाज सुनकर इलाके में दहशत फैल गई और मजदूर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

पीड़ितों की स्थिति: इस हमले में दो मजदूर, अशोक कुमार और सुबोध माझी, गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उन्हें तुरंत मोगा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सोशल मीडिया पर ली हमले की जिम्मेदारी: हैरान करने वाली बात यह है कि इस हमले की जिम्मेदारी लाडी भलवान और निरवेर सिंह नाम के व्यक्तियों ने ली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर गोलियां चलाते हुए एक वीडियो साझा किया और प्रवासी मजदूरों के खिलाफ नफरत भरी बातें लिखीं। पोस्ट में लिखा गया कि “यूपी और बिहार से आकर पंजाब को अपने बाप की जागीर समझ रहे हैं” और वे पंजाब का माहौल खराब कर रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई: घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।

दिल्ली सरकार अप्रैल में लाडली योजना के स्थान पर ‘लखपति बिटिया योजना’ शुरू करेगी

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार 2008 की लाडली योजना के स्थान पर अप्रैल में ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ शुरू करेगी।

यह योजना महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 2008 में शुरू की गई मौजूदा ‘दिल्ली लाडली योजना’ का उन्नत संस्करण होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम एक अप्रैल को उन्नत योजना शुरू करेंगे और पुरानी लाडली योजना को बंद कर देंगे।”

उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए सरकार द्वारा जल्द ही एक अलग डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा।

गुप्ता ने कहा कि उन्नत योजना को लागू करने की वित्तीय लागत लगभग 160 करोड़ रुपये होगी और प्रति परिवार दो लड़कियों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जब हम सत्ता में आए, तो हमें पता चला कि इस योजना के लिए धनराशि बैंकों में…अप्रयुक्त पड़ी हुई है। हमारी सरकार ने लगभग 41,000 लाभार्थी लड़कियों का पता लगाया है, जिन्हें हम 100 करोड़ रुपये वितरित करने की योजना बना रहे हैं।”

बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में 27 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये गये

मुंबई, छह अक्टूबर (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राकांपा नेता बाबा सिद्दीकी की 2024 में हुई हत्या के मामले में 27 आरोपियों के खिलाफ मकोका और बीएनएस के तहत आरोप तय किए। इन आरोपियों ने खुद को बेगुनाह बताया है।

विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या, मकोका, शस्त्र अधिनियम और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किये।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत आपराधिक सुनवाई में आरोप तय करना पहला चरण होता है, जहां अदालत सबूतों के आधार पर आरोपों को औपचारिक रूप देती है।

सिद्दीकी (66) की 12 अक्टूबर, 2024 की रात को मुंबई के बांद्रा (पूर्व) इलाके में उनके बेटे जीशान के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

इस मामले में गिरफ्तार किए गए 27 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है।

जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को पुलिस के आरोप पत्र में वांछित आरोपी दिखाया गया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अनमोल बिश्नोई ने कथित तौर पर अपराध सिंडिकेट पर भय और दबदबा कायम करने के इरादे से सिद्दीकी की हत्या की साजिश रची थी।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी : मांडविया

इंदौर (मध्यप्रदेश), 10 फरवरी (भाषा) केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अमल में आने पर भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और भारतीय उद्यमियों व निर्यातकों को ‘दोगुना फायदा’ होगा।

मांडविया ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा,‘‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के असर से भारत की अर्थव्यवस्था में अच्छी तेजी आएगी।’’

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते पर दोनों देशों के बीच सहमति बनने से पहले अमेरिका ने भारतीय सामान पर ऊंचा शुल्क लगा दिया था, इसके बावजूद भारत का निर्यात बढ़ा क्योंकि भारतीय निर्यातकों ने इस स्थिति को अवसर के रूप में इस्तेमाल करते हुए नये बाजार ढूंढ लिए।

श्रम एवं रोजगार मंत्री ने कहा,‘‘व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटा दिया है। इससे हमारे निर्यातकों की पहुंच फिर से अमेरिकी बाजार तक हो गई है।’’

मांडविया ने कहा कि व्यापार समझौते से भारत के उद्यमियों और निर्यातकों को दोगुना फायदा होगा, क्योंकि अब उनके पास अमेरिका के साथ ही नये बाजार भी हैं।

उन्होंने यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ भारत के सिलसिलेवार व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि अब इन समझौतों में विदेशों में काम करने वाले भारतीय कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को भी शामिल किया जा रहा है, जबकि पिछली सरकारों में ऐसा नहीं किया जाता था।

मांडविया ने वर्ष 2026-27 के आम बजट की सराहना करते हुए कहा कि इसे वर्ष 2047 में देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के अनुरूप तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि समग्र विकास पर केंद्रित बजट के प्रावधानों से देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, रोजगारों में इजाफा होगा और आधारभूत ढांचा मजबूत होगा।

केंद्रीय बजट में मध्यप्रदेश को पिछले वर्षों के मुकाबले कम राशि मिलने के अनुमान पर मांडविया ने कहा कि सरकार के वित्तीय अनुशासन के मुताबिक बजट में हर प्रदेश को उसका उचित आवंटन प्रदान किया गया है।

मांडविया के पास युवा एवं खेल मामलों का प्रभार भी है।

हालांकि, पाकिस्तान सरकार द्वारा टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ कोलंबो में 15 फरवरी को होने वाले मैच के बहिष्कार का फैसला वापस लेने के बारे में पूछे गए सवालों पर केंद्रीय मंत्री ने चुप्पी साधे रखी और कोई जवाब नहीं दिया।

नरवणे ने अपनी किताब का लिंक 2023 में साझा किया था, वह झूठ नहीं बोलेंगे: राहुल
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की पुस्तक को लेकर एक प्रकाशक ने इसके प्रकाशित नहीं होने की बात की है, लेकिन खुद नरवणे ने 2023 में एक टवीट् करके अपनी पुस्तक को खरीदने की अपील करते हुए एक लिंक साझा किया था।
 राहुल ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि उन्हें नरवणे की बात पर भरोसा है तथा उनकी किताब में कुछ ऐसी बाते हैं जो सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को असहज कर सकती हैं।
   दिल्ली पुलिस ने नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है।
  उसने सोमवार को एक बयान में कहा था, ‘‘दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया मंच और ऑनलाइन समाचार मंचों पर प्रसारित हो रही उन सूचनाओं का संज्ञान लिया है जिनमें दावा किया गया है कि 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' नामक पुस्तक की एक प्रति सक्षम अधिकारियों से अनिवार्य मंजूरी के बिना प्रसारित की जा रही है।’’
राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में कहा, ‘‘नरवणे का एक ट्वीट है जिसमें उन्होंने कहा है, “मेरी किताब का लिंक फ़ॉलो कीजिए। अब या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या ‘पेंगुइन’ (प्रकाशक) झूठ बोल रहा है। मुझे नहीं लगता कि पूर्व थलसेना प्रमुख झूठ बोलेंगे। पेंगुइन कहता है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन किताब अमेजन पर उपलब्ध है। जनरल नरवणे ने 2023 में ट्वीट किया है कि कृपया मेरी किताब ख़रीदिए। मैं पेंगुइन के बजाय नरवणे जी पर भरोसा करता हूं।’’
 उन्होंने सवाल किया कि क्या पेंगुइन पर नरवणे से ज़्यादा भरोसा किया जा सकता है?
     राहुल गांधी ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि नरवणे जी ने अपनी किताब में कुछ ऐसे बयान दिए हैं जो भारत सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं। स्पष्ट है कि आपको यह तय करना होगा कि पेंगुइन सच बोल रहा है या पूर्व थलसेना प्रमुख।’’
      कांग्रेस नेता ने एक पोस्टर भी दिखाया, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए यह दर्शाया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुक गए।
सीगल इंडिया को 1,700 करोड़ रुपये की 220 मेगावाट सौर परियोजना का मिला ठेका
 नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) सीगल इंडिया को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड से बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) से जुड़ी 220 मेगावाट की सौर परियोजना का ठेका मिला है। इसकी अनुमानित लागत 1,700 करोड़ रुपये है।
 कंपनी ने मंगलवार को बयान में कहा कि यह परियोजना शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिये हासिल की गई।
 सीगल इंडिया लिमिटेड को मध्य प्रदेश के मुरैना सोलर पार्क में यूनिट-1 (220 मेगावाट) के विकास के लिए रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (आरयूएमएसएल) से नौ फरवरी 2026 का आशय पत्र (एलओए) मिला।
 परियोजना के लिए उद्धृत शूल्क 2.70 रुपये प्रति यूनिट है जबकि अनुमानित परियोजना मूल्य (जीएसटी सहित) करीब 1,700 करोड़ रुपये है।
 इस परियोजना की निर्माण अवधि 24 महीने और इसके बाद परिचालन अवधि 25 वर्ष की होगी।
 कंपनी ने कहा कि इस परियोजना से मध्य प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है और यह भारत के व्यापक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को समर्थन देगी।
 सीगल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रमनीक सहगल ने कहा, ‘‘ यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में हमारी मौजूदगी को मजबूत करती है। हम भारत के ऊर्जा बदलाव तथा कार्बन मुक्त उद्देश्यों के अनुरूप इसे कुशलता से पूरा करने को प्रतिबद्ध हैं।’’
दिन में दो-तीन कप कॉफी पीने से वृद्धावस्था में कम हो सकता है डिमेंशिया का खतरा
(ईफ़ होजेनवोर्स्ट, लफबरो यूनिवर्सिटी)  
लफबरो (ब्रिटेन), 10 फरवरी (द कन्वरसेशन) वैज्ञानिकों ने पाया है कि दिन में दो से तीन कप कॉफी पीने से डिमेंशिया होने का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है, लेकिन इससे अधिक मात्रा में कॉफी पीने से मस्तिष्क को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता।
एक व्यापक अध्ययन में 1,31,821 अमेरिकी नर्सों और स्वास्थ्य पेशेवरों को शामिल किया गया, जिनके स्वास्थ्य पर शुरुआती 40 साल की उम्र से लेकर 43 वर्षों तक नजर रखी गई। इस अवधि में 11,033 लोगों यानी करीब आठ प्रतिशत में डिमेंशिया हुआ। हालांकि, सीमित मात्रा में कैफीनयुक्त कॉफी या चाय पीने वालों में डिमेंशिया होने की संभावना कम पाई गई।
अध्ययन के अनुसार, 75 वर्ष या उससे कम आयु के लोगों में इसका प्रभाव सबसे अधिक देखा गया। रोजाना करीब 250-300 मिलीग्राम कैफीन (लगभग दो से तीन कप कॉफी) लेने वालों में डिमेंशिया का जोखिम 35 प्रतिशत तक कम पाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि इससे अधिक कैफीन लेने से कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला।
अध्ययन में शामिल महिलाओं ने बताया कि शुरुआत में वे प्रतिदिन औसतन साढ़े चार कप कॉफी या चाय पीती थीं, जबकि पुरुषों के लिए कॉफी की औसत खपत ढाई कप थी। अधिक कैफीन लेने वाले प्रतिभागी अपेक्षाकृत कम उम्र के थे, लेकिन वे शराब का अधिक सेवन करते थे, धूम्रपान करते थे और अधिक कैलोरी लेते थे, जो डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ाने वाले कारक माने जाते हैं।
शोध में यह भी पाया गया कि कैफीन रहित कॉफी पीने वालों में स्मृति क्षय तेज़ी से हुआ। शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि लोग नींद की समस्या, उच्च रक्तचाप या हृदय संबंधी उन समस्याओं के बाद कैफीन रहित कॉफी की ओर रुख करते हैं, जो स्वयं संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़ी हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि कैफीन मस्तिष्क में उस एडेनोसिन नामक रसायन को अवरुद्ध करता है, जो डोपामिन और एसिटाइलकोलाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को दबाता है। उम्र बढ़ने और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों में ये न्यूरोट्रांसमीटर कम सक्रिय हो जाते हैं और कैफीन इस गिरावट को कुछ हद तक रोक सकता है।
अध्ययन में यह भी कहा गया कि अधिक मात्रा में कैफीन लेने से नींद प्रभावित हो सकती है और चिंता बढ़ सकती है, जिससे मस्तिष्क को होने वाले लाभ कम हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने 1908 में प्रतिपादित यर्क्स-डॉडसन नियम का हवाला देते हुए कहा कि अत्यधिक उत्तेजना मस्तिष्क को कमजोर कर सकती है।
अन्य 38 अध्ययनों के विश्लेषण में भी समान परिणाम सामने आए, जिनके अनुसार कैफीन लेने वालों में डिमेंशिया का जोखिम, कैफीन न लेने वालों की तुलना में छह से 16 प्रतिशत तक कम पाया गया। इस व्यापक विश्लेषण में एक से तीन कप कॉफी को सबसे उपयुक्त मात्रा बताया गया।
शोधकर्ताओं ने हालांकि कहा कि ‘कप’ की मात्रा अलग-अलग हो सकती है और कॉफी में कैफीन की मात्रा उसके प्रकार और बनाने के तरीके पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बहुत कम मात्रा में कैफीन सतर्कता और मनोदशा में सुधार कर सकती है और अधिक मात्रा हमेशा बेहतर नहीं होती।
आईवीएफ परीक्षण के जरिए बच्चे के लंबे या होशियार होने के पूर्वानुमान जैसे सपने बेचे जा रहे हैं
(एलेक्स पॉलिआकोव, मेलबर्न यूनिवर्सिटी)
मेलबर्न, 10 फरवरी (द कन्वरसेशन) अपनी होने वाली संतान को लेकर संभावित माता-पिता पहले ही रोमांचित रहते हैं। अब उन्हें ऐसी आनुवंशिक जांचों के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है, जिनमें आईवीएफ के जरिए तैयार किये गए भ्रूण की विशेषताएं बताने का दावा किया जाता है जैसे कौन सा बच्चा सबसे लंबा, सबसे बुद्धिमान या सबसे स्वस्थ बनेगा।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये जांच अपने वादों को पूरा नहीं कर सकतीं। इनके लाभ बेहद सीमित हैं, जबकि मरीजों, बच्चों और समाज के लिए इससे जुड़े जोखिम वास्तविक और गंभीर हैं। विशेषज्ञों की राय है कि माता-पिता को अपने भावी बच्चों से जुड़े अहम फैसले लेते समय भ्रामक प्रचार नहीं, बल्कि सटीक जानकारी मिलनी चाहिए।
फिलहाल आईवीएफ के जरिए विकसित भ्रूणों की जांच कुछ आनुवंशिक बीमारियों से बचाव के लिए की जाती है, जो आमतौर पर एकल जीन से जुड़ी होती हैं, जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस। लेकिन हाल के वर्षों में सामने आई यह नई जांच हजारों जीनों के संयुक्त प्रभाव से जुड़े जटिल गुणों का अनुमान लगाने का दावा करती है।
 नई तकनीक में भ्रूणों के लिए तथाकथित ‘पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर’ तैयार किए जाते हैं, जिनके आधार पर हृदय रोग, अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों या बुद्धिमत्ता और कद जैसे गुणों का पूर्वानुमान लगाया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में ऐसी जांच उपलब्ध नहीं है, लेकिन अमेरिका की कई कंपनियां यह सुविधा दे रही हैं। कुछ कंपनियां भ्रूणों की हजारों विशेषताओं की जांच करने का दावा करती हैं और धुआंधार विज्ञापन के जरिए माता-पिता को आकर्षित कर रही हैं।
विशेषज्ञों के एक समूह ने इस तकनीक का मूल्यांकन किया और पाया कि इन जांचों से मिलने वाले पूर्वानुमान बेहद अनिश्चित हैं। गणितीय विश्लेषण के अनुसार, इससे होने वाला संभावित लाभ नगण्य है, जैसे आईक्यू में कुछ अंकों की बढ़ोतरी या कद में एक से तीन सेंटीमीटर का अंतर। इसके अलावा, देर से सामने आने वाली बीमारियों के बारे में वास्तविक लाभ का आकलन करना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि उनके परिणाम दशकों बाद सामने आएंगे।
शोधकर्ताओं ने कहा कि पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर उन लोगों के आंकड़ों पर आधारित हैं, जो आज 50-60 वर्ष की उम्र में हैं और जिन्होंने पूरी तरह अलग सामाजिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली स्थितियों में जीवन बिताया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के गुण और बीमारियां जीन और पर्यावरण के आजीवन पारस्परिक प्रभाव का नतीजा होती हैं, जिसे केवल आनुवंशिक जांच से नहीं समझा जा सकता।
विशेषज्ञों ने उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चे की बुद्धिमत्ता पर शुरुआती शिक्षा, पोषण, पारिवारिक सहयोग और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का गहरा असर पड़ता है। केवल आनुवंशिक स्कोर के आधार पर भविष्य की बुद्धिमत्ता तय करना व्यावहारिक नहीं है।
शोध में यह भी चेतावनी दी गई कि एक ही जीन कई गुणों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में किसी एक सकारात्मक गुण के चयन से अनजाने में किसी अन्य बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में मौजूदा दिशा-निर्देश गंभीर आनुवंशिक बीमारियों से बचाव के लिए भ्रूण जांच की अनुमति देते हैं, लेकिन पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर भविष्य के संभावित जोखिमों का अनुमान मात्र हैं, न कि चिकित्सीय निदान। ऐसे में इनका उपयोग नियामकीय अस्पष्टता के दायरे में आता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस तकनीक से जुड़े नैतिक सवाल भी गंभीर हैं और यह सामाजिक असमानताओं और भेदभाव को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने चेताया कि केवल इन जांचों के लिए आईवीएफ कराना, बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के, स्वस्थ बच्चे की संभावना को भी कम कर सकता है, क्योंकि आईवीएफ प्रक्रिया स्वयं कुछ जोखिमों से जुड़ी होती है।
उनका कहना है कि ‘‘सबसे अच्छा’’ बच्चा वह नहीं होता जिसका आनुवंशिक स्कोर सबसे ऊंचा हो, बल्कि वह होता है जो प्यार, अच्छे पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं वाले माहौल में जन्म लेता है।