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संसद में राहुल गांधी का तीखा तंज: केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू को कहा ‘मेरा गद्दार दोस्त’

नई दिल्ली: लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान एक बार फिर भारी हंगामा और तीखी बयानबाजी देखने को मिली। सदन में उस समय माहौल काफी गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘मेरा गद्दार दोस्त’ (My Traitor Friend) कहकर संबोधित किया।

पुरानी दोस्ती और राजनीतिक दलबदल: राहुल गांधी की यह टिप्पणी उस समय आई जब रवनीत बिट्टू सदन की कार्यवाही के दौरान बार-बार हस्तक्षेप कर रहे थे। गौरतलब है कि रवनीत सिंह बिट्टू लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं और उन्हें राहुल गांधी के करीबी दोस्तों में गिना जाता था।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिट्टू कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे, जिसके बाद से दोनों नेताओं के बीच तल्खी बढ़ गई है।

सदन में मचा शोर : राहुल गांधी के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे असंसदीय व्यवहार करार दिया। भाजपा सांसदों का कहना है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वहीं, कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि यह राहुल गांधी का बिट्टू के दलबदल पर एक व्यंग्यात्मक कटाक्ष था।संसद की कार्यवाही के दौरान यह वाकया सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

मणिपुर से हटा राष्ट्रपति शासन: युमनाम खेमचंद ने ली नए मुख्यमंत्री पद की शपथ, राज्यपाल अजय भल्ला ने दिलाई जिम्मेदारी

नैशनल डेस्क : मणिपुर में लगभग एक साल से चल रहा राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया है। बुधवार, 4 फरवरी 2026 को युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इंफाल के लोकभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल अजय भल्ला ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन खत्म करने का ऐलान किया था।

कौन हैं युमनाम खेमचंद? 62 वर्षीय युमनाम खेमचंद मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं। पेशे से इंजीनियर रहे खेमचंद पूर्ववर्ती बीरेन सरकार में नगर प्रशासन और आवास विभाग के मंत्री रह चुके हैं। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का करीबी माना जाता है।

राजनीतिक घटनाक्रम और चयन: खेमचंद को मंगलवार को भाजपा मुख्यालय में हुई बैठक में विधायक दल का नेता चुना गया था। इस चुनाव के लिए भाजपा आलाकमान ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को पर्यवेक्षक (Observer) नियुक्त किया था। हालांकि मुख्यमंत्री की दौड़ में गोविंद दास और टी. विश्वजीत सिंह के नाम भी आगे थे, लेकिन अंततः खेमचंद के नाम पर मुहर लगी। 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा के पास 37 विधायक हैं, जबकि एनडीए सहयोगियों (NPP और NPF) को मिलाकर यह संख्या और अधिक है।

राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि: मणिपुर में पहली बार 13 फरवरी 2025 को 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसे बाद में अगस्त 2025 में 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था। यह कदम मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद पैदा हुए हालातों और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद उठाया गया था।

इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हुए हैं।नए मुख्यमंत्री के सामने अब राज्य में शांति बहाल करना और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास पैदा करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

अबोहर: पैसे के लेन-देन में खूनी खेल, नौजवान की बेरहमी से हत्या, दोस्त की हालत नाजुक

पंजाब डेस्क : पंजाब के अबोहर स्थित भागसर गांव में पैसे के विवाद को लेकर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ गांव के ही कुछ युवकों ने एक नौजवान की तेजधार हथियारों से हमला कर और पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस हमले में मृतक का एक दोस्त भी गंभीर रूप से घायल हुआ है।

उधार दिए पैसे मांगना पड़ा भारी: मृतक की पहचान प्रहलाद के रूप में हुई है, जो शादीशुदा था और एक बच्चे का पिता था। मृतक के भाई विनोद कुमार के अनुसार, प्रहलाद ने गांव के ही कुछ युवकों को कुछ समय पहले पैसे उधार दिए थे। जब प्रहलाद उनसे अपने पैसे वापस मांगता, तो आरोपी पैसे देने से बचने के लिए लगातार झूठे वादे कर रहे थे।

साजिश के तहत किया हमला: घटना उस समय हुई जब प्रहलाद अपने दोस्त जग्गा सिंह को गांव छोड़ने जा रहा था। आरोपियों ने पहले से ही साजिश रच रखी थी और रास्ते में उन पर तेजधार हथियारों से हमला बोल दिया। चीखें सुनकर परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे और दोनों को अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने प्रहलाद को मृत घोषित कर दिया। जग्गा सिंह की हालत गंभीर होने के कारण उसे बठिंडा रेफर किया गया है।

पुलिस की कार्रवाई: घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए हैं। बहाववाला पुलिस ने प्रहलाद के शव को पोस्टमार्टम के लिए अबोहर अस्पताल के मुर्दाघर में रखवा दिया है। पीड़ित परिवार ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

संसद में भारी हंगामा: पीएम मोदी का भाषण टला, राहुल गांधी और भाजपा सांसद के बीच छिड़ा ‘किताबों का युद्ध’

नेशनल डेस्क : लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के कारण बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब टल गया, जिसके बाद सदन को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। जैसे ही शाम 5 बजे कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस, टीएमसी और समाजवादी पार्टी के सांसद तख्तियां लेकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को बोलने से रोका जा रहा है, जिसके विरोध में उन्होंने सदन की कार्यवाही ठप कर दी।

सदन में ‘किताबों की जंग‘ : बुधवार को संसद के भीतर किताबों को लेकर एक अनोखा संग्राम देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब लेकर सदन पहुंचे और मीडिया के सामने दावा किया कि हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी क्योंकि वे भारतीय सीमा में घुस आए थे। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे 100 किताबें लेकर संसद पहुंच गए और कहा कि नेहरू-गांधी परिवार के इतिहास का सच सामने आना चाहिए। इस जुबानी जंग के कारण कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।

प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के तीखे हमले : सदन के बाहर भी सियासी पारा काफी चढ़ा रहा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह “डर गए” हैं और इसीलिए सदन में नहीं आए। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ हुई नई ट्रेड डील पर गंभीर सवाल उठाए। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इस डील से भारतीय किसान बर्बाद हो जाएंगे और सरकार चीन को भारतीय बाजार सौंप रही है जबकि चीन हमारी जमीन पहले ही छीन चुका है।

नेहरू-इंदिरा की निंदा पर राज्यसभा में हंगामा: सिर्फ लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी की निंदा वाली किताबें लहराए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। शाम 5 बजे जब लोकसभा दोबारा शुरू हुई, तो विपक्षी सांसद पोस्टर लेकर केंद्रीय मंत्रियों के पास तक पहुंच गए, जिससे सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लगातार तीसरे दिन भी लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी।English Tags: PM Modi Speech, Lok Sabha Adjourned, Rahul Gandhi Book War, Nishikant Dubey, Parliament Protests, Priyanka Gandhi, Akhilesh Yadav, US-India Trade Deal, Budget 2026, National News India

सरकार गठन से पहले मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाया गया

मणिपुर राष्ट्रपति शासन

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) मणिपुर में नयी सरकार गठन से पहले बुधवार को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया।

मणिपुर में राजग विधायक दल के नेता वाई खेमचंद सिंह बुधवार शाम को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

मणिपुर में 13 फरवरी, 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था। साठ-सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, लेकिन राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद यह निलंबित कर दी गई थी।

राष्ट्रपति की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया, ‘‘संविधान के अनुच्छेद 356 के उपखंड (2) द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मैं, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मणिपुर राज्य के संबंध में 13 फरवरी, 2025 को उक्त अनुच्छेद के तहत मेरे द्वारा जारी की गई उद्घोषणा को चार फरवरी, 2026 से रद्द करती हूं।’’

पिछले साल नौ फरवरी को मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक जारी रही जातीय हिंसा के बाद बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस्तीफे दे दिया था, जिसके बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।

ओडिशा में 21 लाख रुपये के इनामी माओवादी का आत्मसमर्पण, मलकानगिरी ”नक्सल मुक्त” जिला घोषित

ओडिशा मलकानगिरी माओवादी  

मलकानगिरी (ओडिशा), चार फरवरी (भाषा) ओडिशा का मलकानगिरी जनपद जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, 21 लाख रुपये के इनामी मओवादी सुखराम मरकाम के पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण के बाद बुधवार को “नक्सल-मुक्त” जिला घोषित किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में नौ माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद नबरंगपुर जिले को माओवाद मुक्त घोषित किए जाने के कुछ दिनों बाद यह घोषणा की गयी है।

मलकानगिरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) बिनोद पाटिल एच. ने बताया कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की क्षेत्र समिति के सदस्य मरकाम ने एक एसएलआर राइफल, गोला-बारूद और अन्य सामान भी पुलिस को सौंपा।

एसपी ने पत्रकारों से कहा कि भाकपा (माओवादी) के इस सक्रिय सदस्य के आत्मसमर्पण से मलकानगिरी नक्सल-मुक्त हो गया है।

मरकाम उर्फ ​​सुरेश उर्फ ​​योगेश संवाददाता सम्मेलन में मौजूद था।

मलकानगिरी को कभी ओडिशा में वामपंथी उग्रवाद का गढ़ माना जाता था।

पुलिस के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया “माओवादी हिंसा मलकानगिरी में शुरू हुई और राज्य के 30 में से 21 जिलों में फैल गई। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में सक्रिय ये उग्रवादी 90 के दशक में अक्सर मलकानगिरी में शरण लेने आते थे। बाद में उन्होंने पूरे ओडिशा में अपने नेटवर्क का विस्तार किया।”

एसपी ने कहा कि ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हिंसा की कई घटनाओं में शामिल रहे मरकाम ने मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी ने वामपंथी चरमपंथी समूह से संबंध तोड़ लिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास व्यक्त किया।

पुलिस अधीक्षक ने कहा, “मरकाम को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत दिए जाने वाले सभी लाभ मिलेंगे।”

तमिलनाडु में चार बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

तमिलनाडु बांग्लादेशी पकड़े

इरोड (तमिलनाडु), चार फरवरी (भाषा) भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में चार बांग्लादेशी नागरिकों को तमिलनाडु के इरोड जिले से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि मंगलवार को पेरुंदुरई पुलिस ने क्यू ब्रांच पुलिस के साथ पनिक्कमपलायम इलाके में औचक जांच की और इस दौरान वहां रह रहे चार लोगों से पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि चारों लोगों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वे पेरुंदुरई के पास स्थित कपड़े की कंपनी में काम करते हैं।

पुलिस के अनुसार चारों ने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश के रहने वाले हैं। पुलिस के अनुसार उसे उनके पास से कोई पासपोर्ट या वीजा नहीं मिला। पुलिस के अनुसार उन्होंने यह भी बताया कि कुछ बिचौलियों के जरिए उन्हें वस्त्र कंपनी में काम मिला था।

पुलिस ने चारों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें सलेम केन्द्रीय कारागार भेज दिया गया है। इस मामले की जांच जारी है।

व्यापार समझौते अनिश्चितताओं को खत्म करते हैं, पूंजी सृजन में आती है तेजी: सेबी प्रमुख पांडेय

व्यापार समझौते सेबी पांडेय

मुंबई, चार फरवरी (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को कहा कि अमेरिका जैसे देशों के साथ व्यापार समझौतों के जरिये व्यापारिक तनाव खत्म होने से अनिश्चितताएं दूर होती हैं जिससे पूंजी सृजन में तेजी आने में मदद मिलती है।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के विदेशी निवेशकों को देश में अधिक धन लगाने के लिए प्रेरित करने के सवाल पर पांडेय ने कहा कि ऐसे कदम निवेश संबंधी फैसलों को ‘‘प्रोत्साहित’’ कर सकते हैं।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘ मूल रूप से जब किसी नियामकीय कार्रवाई का बोझ हटता है और व्यापारिक तनाव खत्म होते हैं, तो पूंजी सृजन की प्रक्रिया हमेशा तेज होती है।’’’

सेबी प्रमुख ने कहा कि अनिश्चितताओं के दूर होने से निवेश निर्णयों को बल मिलता है और पूंजी को लेकर अधिक समझ आती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ कुल मिलाकर मौजूदा हालात में कहा जा सकता है कि व्यापार से जुड़े जो समझौते हुए हैं, उनसे काफी हद तक अनिश्चितताएं दूर हुई हैं।’’

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूती देने के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा आयोजित एक सम्मेलन के इतर बातचीत करते हुए पांडेय ने वायदा-विकल्प सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने के सरकार के प्रस्ताव पर टिप्पणी करने से हालांकि इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ इस समय हम किसी भी नए कदम पर विचार नहीं कर रहे हैं और जो ढांचा हमने लागू किया है, वही जारी रहेगा।”

साप्ताहिक ‘एक्सपायरी’ पर एक सवाल और सेबी के इन्हें प्रतिबंधित करने पर विचार करने के सवाल पर उन्होंने दोहराया कि नियामक इस मामले में यथास्थिति बनाए रखेगा।

इस बीच, बॉन्ड बाजार को मजबूत करने की जरूरत पर पांडेय ने कहा कि सेबी के एक सर्वेक्ष्ण के अनुसार, अधिक निवेशक बॉन्ड बाजार की तुलना में क्रिप्टोकरेंसी के बारे में जानते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बॉन्ड बाजार में स्वागतयोग्य वृद्धि हुई है, लेकिन बाजार को और मजबूत करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इसमें शीर्ष रेटिंग वाली कंपनियों के अलावा अन्य जारीकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाना, अधिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम सुनिश्चित करना और वित्तीय सेवा क्षेत्र से बाहर की कंपनियों को भी इस मार्ग का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

पांडेय ने कहा कि पूंजी बाजार नियामक ने बॉन्ड बाजार के लिए ‘‘उचित विनियमन’’ का दृष्टिकोण अपनाया है। हालांकि, उन्होंने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी हितधारकों से साथ आने का आग्रह किया।

बीएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदररमन राममूर्ति ने एक निश्चित सीमा से अधिक वित्त जुटाने के लिए सार्वजनिक निर्गम के जरिये कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार तक पहुंच को अनिवार्य करने और जारीकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए कर छूट देने का सुझाव दिया।

बीएसई और एनएसई के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में हितधारकों ने अपनी मंशा को बेहतर तरीके से व्यक्त करने के लिए ‘‘ बॉन्ड्स – एक सशक्त बंधन’’ टैगलाइन (प्रचार पंक्ति) भी पेश की।

शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोपी पार्थ चटर्जी को विधानसभा की दो समितियों में शामिल किया गया

बंगाल पार्थ विधानसभा

कोलकाता, चार फरवरी (भाषा) शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर जेल में रहे पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा की दो समितियों में शामिल किया गया है।

एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, बहाला पश्चिम से विधायक चटर्जी को विधानसभा की पुस्तकालय समिति तथा आवास, अग्नि एवं आपातकालीन सेवाएं एवं आपदा प्रबंधन संबंधी स्थायी समिति में शामिल किया गया है।

शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद जुलाई 2022 में चटर्जी को मंत्री पद और तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों से भी हटा दिया गया था।

उनसे जुड़ी संपत्तियों से करोड़ों रुपये नकद बरामद होने के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। उन्हें पिछले साल 11 नवंबर को जमानत पर रिहा किया गया।

विधानसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि सदन के नियमों के तहत प्रत्येक निर्वाचित सदस्य का कम से कम दो समितियों में शामिल होना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा, “विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी का पार्थ को दो समितियों में शामिल करने का फैसला स्थापित संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप है, क्योंकि वह वर्तमान विधायक हैं और यह कोई खास रियायत नहीं है।’’

इस बीच, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि आगामी बजट सत्र के दौरान चटर्जी को सत्ता पक्ष की ओर स्थान दिया जाता है, तो इससे यह संकेत जाएगा कि तृणमूल भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर गंभीर नहीं है।

आंकड़ों के मामले में कच्चा हूं, इसलिए कमेंट्री नहीं करता: धोनी

खेल धोनी कमेंट्री 

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कमेंट्री करने की संभावना को लगभग खारिज कर दिया है और कहा कि वह आंकड़ों के मामले कच्चे हैं और इसलिए इस भूमिका में नहीं उतरते हैं जो संन्यास लेने के बाद खिलाड़ियों का सबसे प्रिय काम रहा है।

भारत ने इस 44 वर्षीय खिलाड़ी की अगुवाई में आईसीसी की तीन ट्रॉफी जीती हैं लेकिन 2020 में संन्यास लेने के बाद से उन्होंने खेल से जुड़े मुद्दों पर शायद ही कभी अपने विचार व्यक्त किए हैं। क्रिकेट से उनका जुड़ाव अब केवल चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल में खेलने तक ही सीमित है।

धोनी ने यूट्यूब पर स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर जतिन सप्रू के साथ बातचीत के दौरान कहा, ‘‘कमेंट्री करना बहुत मुश्किल है। मुझे लगता है कि खेल का आंखों देखा हाल सुनाने और उस प्रक्रिया में खिलाड़ियों की आलोचना करने के बीच बहुत मामूली अंतर होता है। यह अंतर बहुत ही नाजुक होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अक्सर, आपको इस बात का अहसास भी नहीं होता कि आप जो कर रहे हैं वह शायद थोड़ा गलत है। आप हमेशा उस स्थिति में रहना चाहेंगे जहां आप खेल का वर्णन कर रहे हों। अगर आपको लगता है कि कुछ गलत है तो आप उसे खुलकर बोल देते हैं।’’

धोनी ने कहा, ‘‘लेकिन इसे पेश करना भी एक कला है। अपनी बात शालीनता से कैसे कही जाए ताकि किसी को बुरा न लगे। अगर टीम हार रही है तो उसके कुछ कारण होंगे और आपको उन कारणों को इस तरह से बताने का कौशल होना चाहिए कि किसी को बुरा न लगे। यही कमेंट्री की कला है।’’

इस काम की नाजुक प्रकृति के अलावा धोनी को लगता है कि वह आंकड़ों को याद नहीं कर पाते हैं जिस कारण वह इस काम के लिए खुद को फिट नहीं मानते हैं। यहां तक कि उन्हें अपने आंकड़े भी याद नहीं रहते हैं।

धोनी ने कहा,‘‘मैं आंकड़ों के मामले में अच्छा नहीं हूं। लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जो आंकड़ों के मामले में बहुत अच्छे हैं। वे आंकड़े जानते हैं। अगर आप मुझसे मेरे आंकड़ों के बारे में पूछेंगे, तो मैं ‘हम्म’ जैसा जवाब दूंगा। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो भारतीय क्रिकेट टीम या भारतीय खिलाड़ियों के ही नहीं बल्कि प्रत्येक युग के सभी खिलाड़ियों के आंकड़ों के बारे में जानते हैं।’’

अपने खेल के दिनों में कई बार कड़े फैसले लेने वाले धोनी से यह भी पूछा गया कि क्या उन्हें कभी क्रिकेट और जीवन के बारे में सलाह लेने की जरूरत पड़ी है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक अच्छा श्रोता हूं। मैं उन लोगों से बात करता हूं जिनके साथ मैं सहज महसूस करता हूं। लेकिन मैं बोलने से ज्यादा सुनने वाला व्यक्ति हूं। अगर मुझे किसी विषय के बारे में जानकारी नहीं है तो मैं ज्यादा नहीं बोलता क्योंकि सुनने से मुझे ज्यादा सीखने को मिलता है।’’

धोनी ने मुस्कराते हुए स्वीकार किया कि फोन पर जवाब देने में वह अब भी खुद को कच्चा मानते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उस तरह से संवाद करने में अच्छा नहीं हूं। मुझे आमने-सामने बैठकर लोगों से बात करना पसंद है। मैं फोन पर बात करने में खुद को सहज नहीं पाता हूं क्योंकि मैं किसी का चेहरा नहीं देख सकता। इसलिए फोन पर बात करने के मामले में मैं बहुत असहज महसूस करता हूं।’’

धोनी ने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘‘यह एक ऐसी चीज है जिसे मैं सुधारना चाहता हूं, लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने इसमें सुधार नहीं किया है।’’