ब्रेकिंग न्यूज़
ट्रंप से मुलाकात कर ईरान के साथ व्यापक वार्ता पर जोर देंगे नेतन्याहू

तेल अवीव, 10 फरवरी (एपी) प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साथ महत्वपूर्ण परमाणु वार्ताओं को व्यापक रूप देने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से मंगलवार को वाशिंगटन का दौरा करेंगे।

अमेरिकी सैन्य तैयारियों के बीच पिछले सप्ताह यह वार्ता फिर से शुरू हुई थी।

इजराइल लंबे समय से ईरान से यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने, मिसाइल कार्यक्रम में कटौती करने और क्षेत्र भर के आतंकवादी समूहों से संबंध तोड़ने की मांग करता रहा है। ईरान ने हमेशा इन मांगों को खारिज करते हुए कहा है कि वह प्रतिबंधों में ढील के बदले ही अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं स्वीकार करेगा।

नेतन्याहू बुधवार तक वाशिंगटन में रहेंगे।

उन्होंने अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर में ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से और अधिक कठोर कार्रवाई की वकालत की है।

पिछले साल ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर 12 दिन तक किए गए हमलों में इजराइल का साथ अमेरिका ने दिया था।

विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड के खिलाफ अपनी याचिका वापस ली

 चेन्नई, 10 फरवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अभिनेता-नेता विजय अभिनीत तमिल फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माताओं को उनकी वह याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी, जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को फिल्म को सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

यह याचिका न्यायमूर्ति पी. टी. आशा के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी और उन्होंने फिल्म के निर्माता मेसर्स केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी को याचिका वापस लेने की अनुमति दी। न्यायाधीश ने याचिका को ‘‘वापस ली गई’’ मानते हुए खारिज कर दिया।

निर्माता कंपनी ‘केवीएन प्रोडक्शन’ ने पहले ही मद्रास उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को पत्र लिखकर सेंसर बोर्ड के खिलाफ मामला वापस लेने के अपने इरादे से अवगत करा दिया था।

इससे पहले, नौ जनवरी को न्यायमूर्ति आशा ने केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सीबीएफसी को फिल्म को सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था। उन्होंने पांच जनवरी को क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा भेजे गए उस पत्र को भी रद्द कर दिया था, जिसमें यह बताया गया था कि एक शिकायत के आधार पर सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष ने मामले को पुनरीक्षण समिति (रिवाइजिंग कमेटी) को भेज दिया है।

हालांकि, उसी दिन मुख्य न्यायाधीश एम. एम. श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने सीबीएफसी द्वारा दायर अपील पर एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पीठ ने 20 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पीठ ने 27 जनवरी को अपील स्वीकार करते हुए एकल न्यायाधीश के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें सीबीएफसी को फिल्म को तत्काल सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, पीठ ने याचिका को खारिज करने के बजाय फिल्म निर्माताओं को याचिका में उपयुक्त संशोधन करने का अवसर दिया और इसे मूल रिकॉर्ड में बहाल कर दिया।

मामले के अनुसार, 22 दिसंबर को निर्माताओं को चेन्नई स्थित क्षेत्रीय अधिकारी से सूचना मिली थी कि पांच सदस्यीय जांच समिति ने फिल्म देखने के बाद इसके प्रदर्शन और सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने की सिफारिश की है। इसके बाद जांच समिति के एक सदस्य की शिकायत के आधार पर सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष ने 22 दिसंबर के पत्र को रोकते हुए मामले को पुनरीक्षण समिति को भेजने का निर्णय लिया, जिसकी जानकारी पांच जनवरी को फिल्म निर्माताओं को दी गई थी।

12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल: 30 करोड़ मजदूर उतरेंगे सड़कों पर, 600 जिलों में कामकाज ठप्प होने की आशंका

नेशनल डेस्क : केंद्र सरकार की कथित “मजदूर विरोधी और किसान विरोधी” नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी (बृहस्पतिवार) को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया गया है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त संगठन द्वारा बुलाई गई इस हड़ताल में देश भर से कम से कम 30 करोड़ मजदूरों के शामिल होने की उम्मीद है।

600 जिलों में दिखेगा व्यापक असर: ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने जानकारी दी कि इस बार हड़ताल का असर देश के लगभग 600 जिलों में देखने को मिलेगा, जो पिछले साल के 550 जिलों की तुलना में अधिक है। उन्होंने बताया कि ट्रेड यूनियनों ने इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर मजबूत तैयारियां की हैं।

ओडिशा और असम पूरी तरह रहेंगे बंद: महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, इस आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ओडिशा और असम में दिखेगा, जहाँ पूरी तरह से बंद रहने की संभावना है। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी आंदोलन का व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

किसान और छात्र संगठनों का समर्थन: इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि मजदूर यूनियनों ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है। कृषि मजदूर यूनियन इस दौरान ‘मनरेगा’ को बहाल करने की मांग पर विशेष ध्यान देंगे। सरकारी और निजी संस्थानों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों के मजदूर भी इसमें हिस्सा लेंगे। कई जगहों पर छात्र और युवा समूह भी इस अभियान का हिस्सा बन रहे हैं।

हड़ताल का मुख्य कारण: यूनियनों के समूह का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार की कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ है। ट्रेड यूनियनों का दावा है कि पिछली बार के 25 करोड़ मजदूरों के मुकाबले इस बार 30 करोड़ से कम मजदूर हिस्सा नहीं लेंगे।

रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 10 साल से मैकेनिक का काम कर रहा शख्स निकला बिश्नोई गैंग का गुर्गा, हथियार सप्लाई में बड़ा खुलासा

मनोरंजन डेस्क : बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपी आसाराम फासले, जो पिछले 10 सालों से एक गैरेज मैकेनिक के रूप में काम कर रहा था, असल में पिछले चार सालों से बिश्नोई गैंग के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

शुभम लोनकर से था प्रभावित: पुलिस सूत्रों के अनुसार, फासले पुणे के वारजे इलाके के एक गैरेज में काम करता था, जहाँ उसकी मुलाकात बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और रोहित शेट्टी केस के मास्टरमाइंड शुभम लोनकर से हुई। लोनकर के बढ़ते दबदबे को देखकर फासले उससे प्रभावित हुआ और अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए बिश्नोई गैंग में शामिल हो गया। धीरे-धीरे वह लोनकर का बेहद भरोसेमंद साथी बन गया।

हथियारों की सप्लाई में भूमिका: क्राइम ब्रांच का दावा है कि शुभम लोनकर के निर्देश पर ही आसाराम फासले ने स्वप्निल सकट (एक अन्य गिरफ्तार आरोपी) को वे हथियार सौंपे थे, जिनका इस्तेमाल अज्ञात शूटर ने रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग के दौरान किया था। हालांकि, पुलिस अभी भी इस बात की जांच कर रही है कि ये हथियार कहाँ से खरीदे गए थे और इसके लिए कितनी रकम का भुगतान किया गया था।

शूटर की तलाश जारी: इस सनसनीखेज वारदात को हुए 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी तक मुख्य शूटर को पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाई है। क्राइम ब्रांच की कई टीमें शूटर की तलाश में अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत के BRICS एजेंडे को मिला रूस का ‘शक्तिशाली’ समर्थन; आतंकवाद और ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस

इंटरनेशनल डेस्क : 1 जनवरी, 2026 को भारत ने औपचारिक रूप से ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता ग्रहण की है, जिसे रूस का भरपूर समर्थन मिला है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक हालिया साक्षात्कार में कहा कि भारत द्वारा प्रस्तुत एजेंडा न केवल आधुनिक है, बल्कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अत्यंत प्रासंगिक भी है।

आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति: भारत की अध्यक्षता में आतंकवाद-विरोधी उपायों पर विशेष बल दिया जा रहा है। लावरोव ने अफगानिस्तान और भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान गलियारे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस, संयुक्त राष्ट्र में भारत के साथ मिलकर वैश्विक आतंकवाद-विरोधी सम्मेलन के मसौदे को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

AI और सूचना तकनीक में सहयोग: भारत जल्द ही एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है, जिसके लिए रूस को आमंत्रित किया गया है। लावरोव के अनुसार, रूस इस एजेंडे में सक्रिय योगदान दे रहा है, क्योंकि वर्तमान में एआई के सैन्य उपयोग और इसे विनियमित करने वाले मानदंडों को स्थापित करना वैश्विक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, भारत ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सुरक्षा पर भी जोर दिया है।

वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांग: रूस ने भारत के उस एजेंडे का भी समर्थन किया है जो खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। लावरोव ने दोहराया कि ब्रिक्स देश आईएमएफ (IMF), विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे संस्थानों को खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि उनमें सुधार चाहते हैं। उनका लक्ष्य इन संस्थानों में ब्रिक्स देशों के वास्तविक आर्थिक महत्व के अनुसार आनुपातिक वोट और अधिकार प्राप्त करना है।

डॉलर का उपयोग और संप्रभुता: डॉलर के मुद्दे पर लावरोव ने राष्ट्रपति पुतिन के हवाले से कहा कि रूस अमेरिकी डॉलर का उपयोग करने से इनकार नहीं कर रहा है, लेकिन वह डॉलर को ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल किए जाने की नीति का विरोध करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिक्स के सदस्य देश अपनी संप्रभुता के किसी भी उल्लंघन को स्वीकार नहीं करेंगे।

बेंगलुरु: मसाज के दौरान कनाडाई महिला से छेड़छाड़, होटल प्रबंधन पर लगा मामला दबाने का आरोप

नेशनल डेस्क : कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित होटल में एक कनाडाई महिला ने मसाज के दौरान थेरेपिस्ट पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर महिला ने शहर के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

होटल प्रबंधन पर गंभीर आरोप: महिला का दावा है कि जब उसने इस घटना की जानकारी होटल प्रबंधन को दी, तो उन्होंने उसकी चिंताओं को गंभीरता से लेने के बजाय मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। महिला के अनुसार, होटल ने मसाज के लिए चुकाए गए 10,000 रुपये में से 7,000 रुपये वापस कर दिए और उसे इस मुद्दे को आगे न बढ़ाने की सलाह दी। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि थेरेपिस्ट ने उसे परेशान किया और अर्धनग्न अवस्था में दरवाजा भी खोल दिया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच: फिलहाल पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में स्पष्टता का अभाव है। पुलिस के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर होटल से मुआवजे के रूप में एक बड़ी राशि की मांग की थी, जिसे होटल द्वारा मना किए जाने के बाद उसने शिकायत दर्ज कराई।

शहर छोड़कर गई महिला: पीड़ित महिला बेंगलुरु में एक संगीत समारोह में अपनी प्रस्तुति देने वाली थी, लेकिन इस घटना से आहत होकर उसने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया और शहर छोड़कर चली गई है। पुलिस अब सीसीटीवी और अन्य सबूतों के आधार पर घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

T20 वर्ल्ड कप 2026: भारत के खिलाफ मैच खेलने को तैयार हुआ पाकिस्तान, लाहौर की बैठक में लिया ‘सरेंडर’ का फैसला

स्पोर्ट्स डेस्क : क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के खिलाफ ग्रुप स्टेज मैच न खेलने के अपने फैसले को वापस ले लिया है। अब चिर-प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान के बीच यह हाई-वोल्टेज मुकाबला निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 15 फरवरी, 2026 को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जाएगा।

ICC की सख्त चेतावनी के बाद झुका PCB: सूत्रों के अनुसार, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के प्रतिनिधियों और पीसीबी अधिकारियों के बीच लाहौर में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह सहमति बनी। इस बैठक में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि आईसीसी ने पाकिस्तान को मैच न खेलने की स्थिति में भारी वित्तीय दंड (Financial Penalty) और अन्य गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी, जिसके बाद पीसीबी को अपना रुख नरम करना पड़ा।

सरकार ने दी मंजूरी: पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया के माध्यम से आधिकारिक घोषणा की है कि उनकी टीम भारत के खिलाफ मैदान में उतरेगी। सरकार ने अपने बयान में कहा कि ‘स्पिरिट ऑफ क्रिकेट’ की रक्षा और मित्र देशों की अपील को ध्यान में रखते हुए टीम को खेलने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बांग्लादेश के क्रिकेट बोर्ड्स ने भी पाकिस्तान से यह मैच खेलने का आग्रह किया था।

कोई मांग नहीं मानी गई: रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने मैच खेलने के बदले आईसीसी के सामने कुछ शर्तें रखी थीं, लेकिन आईसीसी ने उनकी किसी भी मांग को स्वीकार नहीं किया है। आईसीसी की इस सक्रिय भूमिका से टूर्नामेंट की अखंडता बनी रहेगी और फैंस एक बार फिर दुनिया के सबसे रोमांचक मुकाबले का लुत्फ उठा सकेंगे।