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ईरान सीजफायर के बाद नाटो पर बरसे डोनाल्ड ट्रंप: “जब जरूरत थी तब साथ नहीं था NATO”; अब फिर छेड़ा ‘ग्रीनलैंड’ का पुराना विवाद

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के साथ युद्धविराम (Ceasefire) होने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नाटो (NATO) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्हाइट हाउस में नाटो सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट के साथ हुई एक निजी मुलाकात के बाद ट्रंप ने गठबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

नाटो की कड़ी आलोचना: ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “जब हमें उनकी जरूरत थी, तब नाटो वहां नहीं था और अगर हमें उनकी दोबारा जरूरत पड़ी तो वे वहां नहीं होंगे”। ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान नाटो देशों ने होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने में अमेरिका की मदद करने की उनकी अपील का विरोध किया था।

गठबंधन छोड़ने की धमकी: सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने इस ट्रांस-अटलांटिक सैन्य गठबंधन को छोड़ने के बारे में भी विचार किया था, क्योंकि कई यूरोपीय देश अमेरिकी हमलों का सीधे तौर पर विरोध कर रहे थे। नाटो सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट ने इस मीटिंग को ‘ईमानदार’ बताया, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गहरी असहमति थी।

ग्रीनलैंड चैप्टर फिर खुला: ईरान युद्ध की सुर्खियों के बीच ट्रंप ने अचानक ग्रीनलैंड का मुद्दा फिर से उठाकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने ग्रीनलैंड को “बड़ा, खराब तरीके से चलाया गया, बर्फ का टुकड़ा” करार दिया।

बता दें कि डेनमार्क के इस आर्कटिक इलाके पर ट्रंप का प्लान पहले भी नाटो के लिए बड़ा सिरदर्द रहा है और इसका फिर से जिक्र होना संकेत देता है कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।

तनाव का कारण: ट्रंप के बार-बार आह्वान के बावजूद कई यूरोपीय देश वैश्विक तेल की कीमतों को कम करने के लिए सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से बचते रहे, जिसे ट्रंप ने भरोसे की कमी माना है।

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