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1 मई से देश में 4 बड़े बदलाव: कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल और ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू

बिजनेस डेस्क: आज, 1 मई 2026 से देश में चार महत्वपूर्ण आर्थिक और नियामक बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता और उद्योगों पर पड़ेगा।कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में ₹994 तक की भारी वृद्धि की है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 से बढ़कर ₹3071.50 हो गई है। इस बदलाव के कारण रेस्टोरेंट में खाना, चाय-नाश्ता और शादियों की कैटरिंग महंगी होने की आशंका है। राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ऑनलाइन गेमिंग के लिए नए नियम: देश में आज से ‘ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026’ प्रभावी हो गए हैं, जिसके तहत ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (OGAI) का गठन किया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जबकि सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। अब विदेशी गेमिंग कंपनियों को भी भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। यूजर्स की सुरक्षा के लिए गेम्स में उम्र की सीमा और पेरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर्स देना अनिवार्य होगा।

ईंधन निर्यात शुल्क में कटौती: केंद्र सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। डीजल पर ड्यूटी ₹55.5 से घटाकर ₹23 प्रति लीटर और ATF पर ₹42 से घटाकर ₹33 प्रति लीटर कर दी गई है। इससे रिलायंस और नायरा जैसी रिफाइनिंग कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

ओपेक से अलग हुआ यूएई: वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव यह है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आज से तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC और OPEC+ से अलग हो गया है। ओपेक की पाबंदियों से बाहर होने के बाद यूएई अब तेल उत्पादन बढ़ा सकेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने की संभावना है। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को अपनी आपूर्ति में विविधता लाने का अवसर मिलेगा।

सीएसआईआर-आईएमटेक के पूर्व छात्र प्रो. गोबरधन दास नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान, चंडीगढ़ ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के निदेशक प्रो. गोबरधन दास को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ति पर हार्दिक बधाई दी। प्रो. दास ने वर्ष 1997 में सीएसआईआर-आईएमटेक से प्रतिरक्षा विज्ञान मेजबान-रोगजनक संबंध में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और सीएसआईआर-आईएमटेक के विशिष्ट पूर्व छात्र, प्रो. दास ने प्रतिरक्षा विज्ञान और संक्रामक रोगों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने अपने वैज्ञानिक प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण चरण सीएसआईआर-आईएमटेक में पूरा किया, जहाँ उन्होंने जैव चिकित्सा अनुसंधान में अपने भविष्य के योगदान की नींव रखी।


प्रोफेसर दास, जिन्होंने पूर्व में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आणविक चिकित्सा विशेष केंद्र में प्रोफेसर और अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है, प्रतिरक्षा विज्ञान, संक्रामक रोगों और कोशिका जीव विज्ञान में अपने शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं, विशेष रूप से तपेदिक के रोगजनन पर उनके कार्य के लिए। उनका वैज्ञानिक करियर लगभग तीन दशकों तक फैला हुआ है और इसमें येल विश्वविद्यालय, ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल, क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन में अग्रणी शोध कार्य शामिल हैं।

वर्षों से, वे भारतीय विज्ञान में एक अग्रणी व्यक्ति के रूप में उभरे हैं और अपने कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की है। उनका शानदार शैक्षणिक और शोध करियर वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार और नेतृत्व का प्रमाण है। नीति आयोग में उनकी नियुक्ति उनकी व्यापक विशेषज्ञता और राष्ट्रीय नीति निर्माण में सार्थक योगदान देने की उनकी क्षमता की मान्यता है।

सीएसआईआर-आईएमटेक के निदेशक डॉ. सौविक मैती ने कहा, “हमें प्रोफेसर गोबर्धन दास की उपलब्धियों पर अपार गर्व है। सीएसआईआर-आईएमटेक से देश के सर्वोच्च नीति-निर्माण निकायों में से एक तक का उनका सफर वास्तव में प्रेरणादायक है। हमें विश्वास है कि उनकी दूरदृष्टि और विशेषज्ञता भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।” उन्होंने आगे कहा कि पूरा समुदाय इस उपलब्धि का जश्न मनाता है और प्रोफेसर दास को राष्ट्र के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनकी नई भूमिका में अपार सफलता की कामना करता है।

सीएसआईआर-आईएमटेक सूक्ष्मजीव विज्ञान में उत्कृष्टता का एक राष्ट्रीय केंद्र है, जिसकी स्थापना 1984 में हुई थी। आईएमटेक का विजन और मिशन मौलिक खोजों द्वारा सुदृढ़ एक ट्रांसलेशनल इकोसिस्टम का निर्माण करना और अत्याधुनिक प्रक्रियाओं और प्लेटफार्मों के साथ स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करना है।
बुद्ध पूर्णिमा पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णनने दिया करुणा का संदेश

चित्रा पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, जब मंदिरों में उत्सव मनाए जा रहे हैं, मैं प्रार्थना करता हूँ कि हर घर में खुशी और समृद्धि आए। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर अपने सभी भाइयों और बहनों को शुभकामनाएँ देते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

भारत ने दुनिया को जो अनेक उपहार दिए हैं, उनमें से बौद्ध धर्म सर्वोच्च है। भगवान गौतम बुद्ध का जीवन और उनकी शिक्षाएँ आज भी विश्वभर के लाखों लोगों के जीवन को आलोकित कर रही हैं। भारत ने दुनिया को आत्मबोध का महत्व सिखाया। “बुद्ध” शब्द ही “जाग्रत व्यक्ति” का संकेत देता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि मानवता को आत्मज्ञान का मार्ग दिखाने वाली इस महान आत्मा का जन्म और ज्ञान प्राप्ति, दोनों एक ही दिन हुए।

राजकुमार सिद्धार्थ का पालन-पोषण वैभव और ऐश्वर्य के बीच हुआ। 29 वर्ष की आयु में उन्होंने आध्यात्मिक सत्य की खोज के लिए अपने महल, पत्नी, पुत्र और सभी सांसारिक संपत्तियों का त्याग कर दिया। छह वर्षों की कठोर साधना के बाद उन्होंने बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे परम ज्ञान प्राप्त किया और बुद्ध बन गए। चार आर्य सत्यों की प्राप्ति और नैतिक आचरण के मार्ग ने एक नए दर्शन की शुरुआत की, जिसने विश्व इतिहास में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। सारनाथ (वाराणसी के पास) में उन्होंने पाँच तपस्वियों को अपना पहला उपदेश दिया। “धर्मचक्र प्रवर्तन” के नाम से प्रसिद्ध इस उपदेश ने बौद्ध धर्म की नींव रखी और बौद्ध परंपरा की औपचारिक शुरुआत की।

समय के साथ असंख्य लोग उनकी शिक्षाओं से प्रेरित हुए। मगध के राजा बिंबिसार ने राजगीर में वेणुवन विहार दान किया। धनी अनाथपिंडिक ने जेतवन वन को स्वर्ण मुद्राओं से ढँककर वहाँ विहार निर्माण के लिए दान दिया। ऐसे कार्य भारत में प्राचीन काल से चली आ रही धार्मिक आस्था और दानशीलता के गहरे विश्वास को दर्शाते हैं।

इन विहारों के माध्यम से चार आर्य सत्यों का प्रचार हुआ—इच्छा दुख का मूल है; इच्छा का त्याग करने से दुख दूर किए जा सकते हैं; और अष्टांगिक मार्ग का पालन कर दुखों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। बुद्ध ने उपदेश दिया: अतीत पर मत सोचो, वर्तमान में जियो; ईमानदारी में शक्ति है; मन सभी कार्यों का मूल है, इसलिए सकारात्मक सोच विकसित करो; कठिन समय में भयभीत होकर पीछे मत हटो; जीवन एक व्यक्तिगत यात्रा है, इसे आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाओ; शब्दों से आघात पहुँच सकता है, इसलिए मधुर वाणी बोलो; प्रेम और अहिंसा आवश्यक हैं; निरंतर सीखते रहो।

बौद्ध दर्शन को मणिमेकलाई और कुंडलकेशी जैसे तमिल साहित्यिक ग्रंथों में सुंदर रूप से प्रस्तुत किया गया है। यद्यपि समय के साथ कई प्राचीन ग्रंथ लुप्त हो गए हैं, उनका योगदान अमूल्य है।

इस प्रकार महाकाव्य “मणिमेकलाई” (अधिरै पिचैयिटा काथै : 84-90) बौद्ध धर्म के सार को स्पष्ट करता है। बुद्ध ने पाँच नैतिक सिद्धांतों पर विशेष बल दिया—अहिंसा, चोरी न करना, कामाचार से बचना, सत्य बोलना और नशे से दूर रहना। उन्होंने सिखाया कि मन ही सभी चीजों का मूल है; सकारात्मक विचार और सद्कर्म ही व्यक्ति और समाज में संतुलन और शांति ला सकते हैं। इसी कारण उन्हें “एशिया का प्रकाश” कहा जाता है।

मुझे नरेंद्र मोदी के “मन की बात” कार्यक्रम में कहे गए शब्द याद आते हैं: “भगवान गौतम बुद्ध का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने सिखाया कि शांति हमारे भीतर से शुरू होती है और स्वयं पर विजय सबसे बड़ी जीत है।”

बुद्ध की शिक्षाओं की परिवर्तनकारी शक्ति इस बात से स्पष्ट होती है कि उन्होंने सम्राट अशोक जैसे योद्धा शासक को शांति और करुणा का समर्थक बना दिया। अशोक ने शिलालेखों और स्तूपों के माध्यम से बौद्ध सिद्धांतों का प्रचार किया। सांची स्तूप और सारनाथ के स्तूप आज भी विश्वभर के लोगों को आकर्षित करते हैं। सारनाथ का सिंह स्तंभ आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।

भिक्षुओं और परिवार के सहयोग से अशोक ने पूरे एशिया में बौद्ध धर्म का प्रसार किया। महावंश के अनुसार उनके पुत्र महेंद्र ने इसे श्रीलंका तक पहुँचाया। माना जाता है कि बौद्ध भिक्षुओं ने तमिलनाडु में भी इस धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बौद्ध भिक्षुओं ने बिना भेदभाव के निःशुल्क चिकित्सा और शिक्षा प्रदान की। उन्होंने त्रिपिटक जैसे पवित्र ग्रंथों की शिक्षा दी, जातक कथाएँ सुनाईं और ध्यान के माध्यम से लोगों को मानसिक शांति की ओर अग्रसर किया। दान—विशेषकर भूखों को भोजन कराना—को एक मूल कर्तव्य माना गया।

हजारों वर्षों से इस भूमि पर अनेक आध्यात्मिक विचारधाराएँ विकसित हुई हैं। चाहे बौद्ध धर्म हो या जैन धर्म, भारत ने सभी को एकता की भावना से अपनाया है। बौद्ध धर्म ने जीवनपर्यंत सीखने पर विशेष जोर दिया और बड़े पैमाने पर शिक्षण संस्थान स्थापित किए। पाँचवीं शताब्दी में नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान का प्रमुख केंद्र बना, जहाँ लगभग 10,000 विद्यार्थी और 1,500 विद्वान थे।

इसी प्रकार कांचीपुरम, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे केंद्रों ने भारत की बौद्धिक शक्ति को विश्व के सामने प्रस्तुत किया। चीन के भिक्षु फाह्यान और विद्वान ह्वेनसांग जैसे लोग भारत आए और यहाँ अध्ययन किया।

सिद्धार्थ की कठोर तपस्या से द्रवित होकर सुजाता ने उन्हें खीर अर्पित की, जिससे उन्हें पुनः शक्ति मिली। बुद्ध पूर्णिमा के दिन हम इस करुणा को खीर बनाकर स्मरण करते हैं।

“प्रेम ही आनंद का स्रोत है; प्रेम ही संसार का प्रकाश है; और प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति है”—बुद्ध की ये शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। मैं प्रार्थना करता हूँ कि प्रेम और शांति पूरे विश्व में फैले।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का किया उद्घाटन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नवाचार और समावेशिता पर 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया: कहा, सर्वोत्तम प्रथाएं भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार दे रहीं हैं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में समग्र स्वास्थ्य सेवा की दिशा में हुए परिवर्तनकारी बदलावों का उल्‍लेख किया, अग्रिम पंक्ति सेवा वितरण और स्वास्थ्य परिणाम सुदृढ़ करने की पहल का शुभारंभ

आयुष्मान आरोग्य मंदिर निवारक देखभाल को सुदृढ़ बनाते हैं; केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पर जोर देते हुए मृत्यु दर और रोग भार में कमी का उल्लेख किया

मजबूत और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली स्‍थापित करने के लिए गैर-संचारी रोगों की उपचरात्‍मक प्रक्रिया मजबूत बनाना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का कार्यान्वयन बढ़ाना और अंतिम छोर तक प्रभावी स्वास्थ्य सेवा वितरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केयर अभियान, डिजिटल स्वास्थ्य विस्तार और निवेश वृद्धि के माध्यम से हरियाणा के स्वास्थ्य सेवा बदलाव का उल्‍लेख किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 80वें दौर के निष्कर्षों में कहा गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल पर जेब से होने वाला औसत व्यय शून्य हो गया है, जिससे नि:शुल्‍क स्वास्थ्य सेवा पहुंच मजबूत हुई है:

10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहल आरंभ किए गए, जिनमें सर्वश्रेष्ठ अभ्यास संकलन, 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट, स्वस्थ भारत और जननी पोर्टल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम दूसरा चरण शामिल हैं

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव की उपस्थिति में नवाचार एवं समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं विषय पर 10वें राष्ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।

यह सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में विशिष्ट नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथा प्रदर्शित करने का प्रमुख मंच है, जिसका उद्देश्य देश भर में समावेशी, सुलभ और सस्ते दर पर स्वास्थ्य सेवा विस्तारित करना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में सम्मेलन की मेजबानी के लिए हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त करते हुए और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने में राज्य की सराहना की। श्री नड्डा ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन दर्शाता है कि व्यावहारिक, जमीनी स्तर पर संचालित रणनीतियां सामूहिक रूप से प्रभावी और दायित्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आकार दे सकती है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर आरंभ किए गए पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए कामकाज सुगम बनाना, सेवा वितरण बेहतर बनाना और स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि इनका लक्ष्य कुशल, एकीकृत और सेवा प्रदाताओं एवं लाभार्थियों दोनों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील प्रणालियों को सक्षम बनाना है।

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हुए बदलावों की चर्चा करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश ने विकसित भारत के दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्‍होंने कहा कि इस यात्रा में एक अहम पड़ाव उपचारात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और समग्र स्वास्थ्य सेवा ढांचे की ओर बदलाव है। उन्होंने बताया कि 2002 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित थी, पर 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति से स्वास्थ्य सेवा के निवारक, संवर्धक, उपचारात्मक और उपशामक पहलुओं को शामिल कर उल्‍लेखनीय बदलाव आया है, जिससे अधिक समावेशी और जन-केंद्रित प्रणाली सुनिश्चित हुई है।

श्री नड्डा ने 1 लाख 85 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जो अब करोड़ों के लिए प्राथमिक संपर्क केन्‍द्र के रूप में कार्य करते हैं। इन केंद्रों ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को काफी मजबूत बनाया है, जिसमें 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा) जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की बड़े पैमाने पर जांच शामिल है।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने समेकन और गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 50 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों के तहत प्रमाणित किया गया है, फिर भी गुणवत्ता प्रमाणन को और अधिक बढ़ाने और लगातार बेहतर प्रदर्शन और सकारात्‍मक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए नियमित आकलन मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रमुख स्वास्थ्य उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसवों (मान्यता प्राप्त चिकित्सा केंद्र-अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव) में 79 प्रतिशत से 89 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती है। उन्‍होंने कहा मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है और पिछले कई वर्षों से इसमें निरंतर प्रगति रही है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने हाल के वैश्विक अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि भारत ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी की है। उन्होंने रोग नियंत्रण में भी भारत की प्रगति का लेख किया। उन्‍होंने कहा कि विश्व की लगभग एक-छठीं जनसंख्या होने के बावजूद, भारत में वैश्विक मलेरिया के बोझ का केवल छोटा हिस्सा है। इसी प्रकार, भारत में तपेदिक के मामलों में वैश्विक औसत से अधिक तेजी से गिरावट आई है और उपचार दायरा 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

श्री नड्डा ने जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में हासिल प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिनमें 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया जाना, 2015 में नवजात शिशुओं में होने वाले टिटनेस का उन्मूलन और ट्रेकोमा (बैक्टीरिया से होने वाला आंखों के अत्यंत संक्रामक संक्रमण है, का जन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय न होना शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार, भारत अब ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत निकट भविष्य में काला-अजार के उन्मूलन की दिशा में अग्रसर है।

उभरती चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ बोझ की चर्चा की और प्रभावी जांच, समय पर निदान और निरंतर देखभाल के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि देश भर में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग (निवारक स्वास्थ्य प्रक्रिया जिसके द्वारा रोग के कोई लक्षण न होने पर भी, किसी आबादी में बीमारी की संभावना या शुरुआती संकेतों का पता लगाया जाता है) की गई है, लेकिन अब समय पर अनुवर्ती कार्रवाई, उपचार और रेफरल तंत्र (रोगी को कम सुविधाओं वाले केंद्र से बेहतर विशेषज्ञों, संसाधनों या सेवाओं वाले उच्च केंद्र में भेजा जाना) सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

श्री नड्डा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बेहतर योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित जमीनी स्तर के अधिकारियों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रावधानों के बारे में अधिक जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने उत्‍तरदायित्‍व और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए समय पर निधियों के उपयोग, हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल और जन प्रतिनिधियों के साथ सक्रिय भागीदारी के महत्व पर भी बल दिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन सफलता का राज उनके प्रभावी और समयबद्ध उपयोग में निहित है। सुदृढ़ शासन, बेहतर संचार और अंतिम छोर तक कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भारत के लिए सशक्त, समावेशी और भविष्योन्‍मुखी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण होगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़़ बनाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और आपसी ज्ञान को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में शिखर सम्मेलन के महत्व का उल्‍लेख किया

हरियाणा की पहल की चर्चा करते हुए, उन्होंने केयर अभियान की जानकारी दी, जिसके तहत 188 केंद्रों में मरीजों के परिवारों को घर पर देखभाल में सहायता के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने ई-संजीवनी माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य में राज्य की प्रगति का उल्‍लेख किया, जिसके तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मरीजों को विशेषज्ञों से जोड़ने वाले प्रतिदिन लगभग 2 हजार टेलीकंसल्टेशन आयोजित किए जा रहे हैं।

श्री सैनी ने बताया कि हरियाणा ने अपने स्वास्थ्य बजट में 32.89 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो लगभग 14 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा बुनयादी ढांचे के विस्तारित किए जाने का भी उल्‍लेख किया, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 के 6 से बढ़कर अब 17 हो गई है और एमबीबीएस की सीटें 700 से बढ़कर 2,710 पहुंच गई हैं।

गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पर जोर देते हुए उन्होंने कि राज्य के 1,479 स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने सेवा वितरण में हासिल प्रमुख उपलब्धियों की भी चर्चा की, जिनमें सभी जिला अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विभाग की स्थापना, आपातकालीन देखभाल के लिए 500 एम्बुलेंस के नेटवर्क और 22 जिला अस्पतालों में नि:शुल्‍क डायलिसिस सेवाएं (रक्त से हानिकारक विषाक्त पदार्थों, अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट को साफ करती है) उपलब्ध कराना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने सबके लिए सुलभ, कम खर्च वाले और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मजबूत बनाने की लिए राज्य की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य में स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्‍लेख किया, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ बनाना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और नि:शुल्‍क दवाओं तक पहुंच में सुधार शामिल है।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय कैंसर संस्थान और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के सहयोग के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में कदम के रूप में ह्यूमन पेपिलोमावायरस टीकाकरण के कार्यान्वयन की भी चर्चा की। श्रीमती आरती सिंह राव ने राज्‍य का स्वास्थ्य बजट में 2014 के 2,640 करोड़ रुपये से बढ़कर 14 हजार करोड़ रुपये होने का उल्लेख किया और बड़े पैमाने पर गैर-संचारी रोगों की जांच पर राज्य के केन्द्रित ध्‍यान की चर्चा की। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाने की हरियाणा की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित, संदर्भ-विशिष्ट समाधानों को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज है। उन्होंने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्‍लेख किया जो स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन सूचना प्रणाली, जननी और ई-संजीवनी जैसे प्लेटफार्मों पर आभा आईडी के एकीकरण को सक्षम बनाती है, जिससे दक्षता में सुधार होता है और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

केन्द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने कहा कि स्वस्थ भारत पोर्टल कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही अंतरसंचालनीय मंच में शामिल कर अभिसरण की दिशा में बड़ा कदम है, जबकि जननी प्लेटफॉर्म वास्तविक समय निगरानी और डिजिटल एकीकरण द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल मजबूत बनाने में सहायक है।

17वें संयुक्त समीक्षा मिशन की रिपोर्ट की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्यों को जन भागीदारी और कार्यान्वयन मजबूत करने के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करती है। उन्होंने गैर-संक्रामक रोगों में हो रही वृद्धि से निपटने के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का दूसरा चरण और बच्चों के लिए मधुमेह संबंधी दिशानिर्देश शीघ्र निदान और निरंतर देखभाल में सहायक होंगे।

स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने गुणवत्तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल में हुए सुधारों की भी चर्चा की। जिनमें 48 हजार से अधिक भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक-अनुरूप और 50 हजार से अधिक राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक-प्रमाणित सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही उन्‍होंने तपेदिक मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने अग्नि सुरक्षा ऑडिट (इमारत या कार्यस्थल में आग के खतरों से संबंधित व्यवस्थित और तकनीकी मूल्यांकन जिसमें अग्निशमन प्रणालियों की जांच करना, शॉर्ट सर्किट, ज्वलनशील सामग्री जैसे संभावित खतरों की पहचान और नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना), लू से निपटने के उपाय और रोगाणुरोधी प्रतिरोध से निपटने के प्रयासों सहित मजबूत तैयारियों के उपायों को भी रेखांकित किया।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के स्वास्थ्य पर घरेलू उपभोग के 80वें दौर के सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल के लिए जेब से होने वाला औसत व्यय अब शून्य है, जो आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए नि:शुल्‍क और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।

10वें राष्ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन में कई प्रमुख पहल का शुभारंभ किया गया, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रतिरूपणीय नवाचारों पर सर्वोत्तम अभ्यास संकलन, 17वीं सामान्य समीक्षा मिशन रिपोर्ट, स्वस्थ भारत पोर्टल, जननी पोर्टल, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण के साथ ही बच्चों और किशोरों में मधुमेह पर एक मार्गदर्शन दस्तावेज शामिल हैं

17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट

(भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रमुख वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट

सीआरएम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक वार्षिक निगरानी गतिविधि है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और संबंधित प्रासंगिक कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा और मूल्यांकन के लिए प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।

इस वर्ष, सीआरएम का 17वां चरण सत्रह राज्यों – आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आयोजित किया गया। यह व्यापक अभ्यास कॉमन रिव्यू मिशन प्रक्रिया की समावेशिता को दर्शाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विभिन्न संदर्भों का प्रतिनिधित्व हो और देश भर में निगरानी में नवाचार शामिल किए जाएं। एक साथ कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल कर मिशन उत्‍तरदायित्‍व बढ़ाता है, अंतर-शिक्षण को बढ़ावा देता है और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ बनाने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

स्वस्थ भारत पोर्टल

यह एक एकीकृत मंच है जिसे कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही डिजिटल इंटरफ़ेस पर प्राप्‍त करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें बार-बार लॉगिन करने और डेटा दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त की गई है जिससे यह पोर्टल स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर प्रशासनिक बोझ में कमी लाकर सभी स्तरों पर सेवा वितरण में दक्षता बढ़ाता है।

आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ और चिकित्सा अधिकारी सहित भारत के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी कार्यक्रम रिपोर्टिंग में कई अनुप्रयोगों के उपयोग में प्राय: काफी समय लगाते हैं। स्वस्थ भारत पोर्टल एकीकृत मंच प्रदान करके इस चुनौती का समाधान करता है, जिससे डेटा तक आसान पहुंच, उसका विश्लेषण और स्थानीय स्तर पर निगरानी और साक्ष्य-आधारित योजना के लिए उनका उपयोग संभव हो पाता है। यह पोर्टल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अनुरूप है और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता के साथ एकीकरण का समर्थन करता है, जिससे रोगी स्वास्थ्य अभिलेखों का निर्बाध और सुरक्षित आदान-प्रदान संभव होता है। इसे व्यापक और अंतःसंचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने के लिए तैयार किया गया है, जो आगे स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रजिस्ट्री (हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री जैसी राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों के साथ एकीकृत होगा।

जननी पोर्टल

जननी – प्रसवपूर्व, प्रसव और नवजात शिशु की एकीकृत देखभाल की यात्रा – सेहत के साथ, देखभाल का हर कदम, हेतु एक सशक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ढांचे के अनुरूप है और इसे देश भर में प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य डेटा के विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करने के लिए तैयार किया गया है। जननी गर्भावस्था से पूर्व, गर्भावस्था, प्रसव और बचपन तक निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए जीवनचक्र दृष्टिकोण अपनाता है। यह एप्लिकेशन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापदंडों पर वास्तविक समय का उच्च-गुणवत्ता पूर्ण डेटा संग्रह करता है, जिससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं और विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों वाले बच्चों सहित कमजोर समूहों की शीघ्र पहचान करने और समय पर सहायता करायी जाती है। सेवा वितरण को डिजिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ एकीकृत कर जननी अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों और नीति निर्माताओं दोनों को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने को मजबूत करने, स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति सशक्त बनाता है।

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता टीम के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों के लिए एकीकृत प्रशिक्षण इस आधार को सुदृढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभिन्न कार्यक्रम-आधारित प्रशिक्षणों को एक ही, संरचित और योग्यता-उन्मुख ढांचे में संयोजित कर यह पहल सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाती है और साथ ही अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता बढ़ाती है। यह उन्हें रोकथाम और प्रारंभिक पहचान से लेकर उपचार और अनुवर्ती देखभाल तक व्यापक देखभाल प्रदान करने में सक्षम बनाती है, जिससे लोगों को सही समय पर, उनके घरों के करीब, सही देखभाल सुनिश्‍चित होता है। भारत की तकनीकी प्रगति के अनुरूप, आई गॉट कर्मयोगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म निरंतर सीखने को सक्षम बनाएंगे, जिससे कार्यबल अधिक अनुकूलनीय और भविष्य अनुरूप तैयार हो सकेगा।

यह पहल दो महत्वपूर्ण मायनों में विश‍िष्‍ठ है। यह सामुदायिक कार्यबल की क्षमता मजबूत करती है ताकि वे सहानुभूतिपूर्ण, संवेदनशील और उच्च गुणवत्ता पूर्ण देखभाल प्रदान कर सकें। दूसरा, यह उन महिलाओं को सशक्त बनाती है जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं। इस कार्यबल का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महिलाएं हैं, जिनमें आशा कार्यकर्ता, सहायक नर्स और दाई और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति के महत्व पर लगातार जोर दिया है , और यह पहल उस दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण है। अग्रिम पंक्ति में महिलाओं को शामिल कर भारत समुदायों में परिवर्तनकारी बदलाव ला रहा है।

एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों को समग्र, जन-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में सक्षम बनाएंगे, साथ ही समुदायों और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच विश्वास मजबूत करेंगे। यह केवल प्रशिक्षण सुधार नहीं बल्कि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण कदम है।

बच्चों और किशोरों में मधुमेह पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण और मार्गदर्शन दस्तावेज़

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण दिशानिर्देश 2013 के ढांचे से एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं, जो जन्मजात दोष, रोग, कमियां और विकासात्मक विलंब – इन चार विषमताओं के दृष्टिकोण को सुदृढ़ और विस्तारित करते हैं। नए दिशानिर्देश बच्चों में उभरती हुई स्थितियों और गैर-संक्रामक रोगों सहित, बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं।

मुख्य विशेषताएं

– अतिरिक्त जन्मजात स्थितियों, विकासात्मक और व्यवहार संबंधी चिंताओं और बचपन के गैर-संचारी रोगों को शामिल करते हुए विस्तारित दायरा
– बाल विकास संबंधी निगरानी, ​​बेहतर रेफरल प्रणाली और कार्यक्रम निगरानी के लिए सशक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म
– शीघ्र पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी सेवा वितरण तंत्रों को सुदृढ़ बनाना
– सामुदायिक जांच, सुविधाओं और दीर्घकालिक प्रबंधन के बीच मजबूत संबंधों के माध्यम से देखभाल की निरंतरता को बढ़ाना

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम विश्व स्तर पर सबसे बड़े बाल स्वास्थ्य जांच कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं।

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन में तकनीकी सत्र, पैनल परिचर्चा और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण वित्तीय सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी सहित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां शामिल रहीं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नवाचार पोर्टल के द्वारा चयनित सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा ज्ञानवर्धन और संभावित कार्यान्वयन हेतु प्रदर्शित किया जा रहा है।