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संसदीय कार्य मंत्रालय ने सक्रिय भागीदारी और ठोस परिणामों के साथ स्वच्छता पखवाड़ा-2026 का समापन किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

संसदीय कार्य मंत्रालय ने 16 से 30 अप्रैल, 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा-2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इसमें मंत्रालय के सभी विभागों/प्रकोष्ठों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। पखवाड़े भर चलने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप स्वच्छता, सफाई, अभिलेख प्रबंधन और कार्यस्थल सुधार पर ध्यान केंद्रित करना था।

यह पखवाड़ा 16 अप्रैल, 2026 को संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव द्वारा सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाए जाने के साथ शुरू हुआ। स्वच्छता संबंधी संदेशों को मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जागरूकता को और बढ़ाया गया।

17 अप्रैल, 2026 को एक समर्पित अभिलेख प्रबंधन और डिजिटलीकरण अभियान चलाया गया। इस दौरान 92 फाइलों का डिजिटलीकरण किया गया, 60 फाइलों की समीक्षा की गई, अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची के अनुसार 40 भौतिक फाइलों को हटा दिया गया और 38 ई-फाइलों को बंद कर दिया गया।

पूरे पखवाड़े में व्यापक स्वच्छता एवं रखरखाव कार्य किए गए। इनमें सीपीडब्ल्यूडी द्वारा सभी कमरों में बिजली के उपकरणों की सफाई और फ्यूज्ड बल्ब/ट्यूबलाइटों की मरम्मत के साथ-साथ कार्यालयों, गलियारों और सार्वजनिक क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान शामिल था। आवश्यकतानुसार कमरों की सफेदी भी कराई गई।

ग्रीन ऑफिस इनिशिएटिव के तहत, कार्यस्थल के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के बागवानी विभाग ने इनडोर पौधे लगाए।

29 अप्रैल, 2026 को संसदीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मंत्रालय के विभिन्न विभागों/कार्यालयों में स्वच्छता और सफाई मानकों का आकलन करने के लिए निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण के आधार पर ही स्वच्छता मानकों के अनुसार विभागों का वर्गीकरण भी किया गया।

यह स्वच्छता पखवाड़ा 30 अप्रैल, 2026 को एक समारोह के साथ संपन्न हुआ। इसमें संसदीय कार्य सचिव ने शीर्ष तीन प्रदर्शन करने वाले अनुभागों को स्मृति चिन्ह वितरित किए। इस अवसर पर अपर सचिव भी उपस्थित थे। समारोह के दौरान, सचिव ने अन्य अनुभागों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अनुभागों का अनुकरण करने और स्वच्छता मानकों तथा अपने कार्यस्थलों के समग्र वातावरण को बेहतर बनाकर और अधिक सुधार के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया।

संसदीय कार्य मंत्रालय ने स्वच्छता, कुशल अभिलेख प्रबंधन और एक स्थायी कार्य वातावरण को शासन के अभिन्न घटकों के रूप में संस्थागत रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

श्री आशुतोष गोवारिकर को 57वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए महोत्सव निदेशक नियुक्त किया गया है

दिल्ली / सत्ता संदेश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गोवा में आयोजित होने वाले भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के 57वें संस्करण के लिए प्रख्यात फिल्म निर्माता श्री आशुतोष गोवारिकर को महोत्सव निदेशक नियुक्त किया है।

श्री गोवारिकर एक प्रख्यात फिल्म निर्माता हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा में विशिष्ट योगदान दिया है। आईएफएफआई के साथ उनका जुड़ाव कई दशकों से है, जो सिनेमाई कलाओं और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म संस्कृति के विकास के प्रति उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है।

अपनी नियुक्ति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री गोवारिकर ने कहा, “गोवा में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 57वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के महोत्सव निदेशक के रूप में सेवा करना मेरे लिए अत्यंत गौरव और खुशी की बात है। इस महोत्सव के विकास का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। 1984 में इसमें भाग लेने से लेकर 2024 तक, जब मैंने अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा के लिए जूरी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, इससे जुड़े रहना मेरे लिए एक यादगार अनुभव रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा, “1952 से लेकर अब तक अनगिनत महोत्सव टीमों द्वारा दशकों से स्थापित, पोषित और विस्तारित की गई विरासत को आगे बढ़ाना मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है, इसके साथ ही जिम्मेदारी का एक नया अहसास भी होता है। मैं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गोवा सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।”

1952 में स्थापित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव एशिया के प्रमुख फिल्म समारोहों में से एक है और यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैश्विक सिनेमा में उत्कृष्टता प्रदर्शित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।

आईएफएफआई के बारे में

सन् 1952 में स्थापित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) दक्षिण एशिया में सिनेमा का सबसे पुराना और सबसे प्रतिष्ठित उत्सव है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन भारत के राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएउफडीसी) और गोवा सरकार के मनोरंजन संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव वैश्विक सिनेमाई मिलन स्थल के रूप में विकसित हुआ है। यहां, फिर से तैयार की गई क्लासिक्स नई प्रतिभाओं के साथ संवाद स्थापित करते हैं, और दिग्गज फिल्मकार निडर नवोदित कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं।

आईएफएफआई की अनूठी ऊर्जा का स्रोत इसका गतिशील मिश्रण है। इसमें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, चुनिंदा देशों पर केंद्रित कार्यक्रम, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि समारोह और जीवंत वेव्स फिल्म बाजार शामिल हैं, जहां विचार, सहयोग और रचनात्मक साझेदारियां आकार लेती हैं। नवंबर 2026 में गोवा के शानदार तटीय परिवेश में आयोजित होने वाला आईएफएफआई का 57वां संस्करण एक और भी व्यापक मंच प्रदान करेगा। यह भाषाओं, विधाओं, प्रौद्योगिकियों और कहानी कहने की परंपराओं के एक समृद्ध विस्तृत श्रेणी को एक साथ लाएगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ब्रिक्स महिला कार्य समूह की पहली प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई


इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी

दिल्ली /सत्ता संदेश

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत, 30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से ब्रिक्स महिला कार्य समूह की प्रथम प्रारंभिक बैठक आयोजित की।

इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके साथ ही, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों, और संयुक्त राष्ट्र महिला व भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) जैसे ज्ञान भागीदारों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अपर सचिव, सुश्री कैरालीन खोंगवार देशमुख ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और चर्चाओं के लिए माहौल तैयार किया।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय: ‘प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण’ से प्रेरित होकर, इस बैठक में वैश्विक स्तर पर महिलाओं की प्रमुख समस्याओं और साझा चिंताओं पर गहन चर्चा हुई, जिन्हें चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बांटा गया। इनमें शासन और नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका; वित्तीय और डिजिटल समावेशन; महिला उद्यमिता और कौशल विकास; तथा जलवायु कार्रवाई, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महिलाओं की भूमिका शामिल है।

इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी गई।

ब्रिक्स सदस्य देशों ने अपने वक्तव्यों में भारत को उसकी अध्यक्षता के लिए बधाई दी, और सहयोग एवं सीखने की भावना को अपनाते हुए इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का स्वागत और समर्थन किया।

इन चर्चाओं का निष्कर्ष उन प्रमुख परिणामों में योगदान देगा, जो केरल के कोच्चि में आयोजित होने वाली ब्रिक्स महिला कार्य समूह की बैठक (6–7 जुलाई 2026) और ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक (8–9 जुलाई 2026) में सामने आएंगे।

गोल्डन टेंपल पहुंचीं एक्ट्रेस पलक तिवारी: नीले सूट में माथा टेका, आधे घंटे बैठकर सुनी गुरबाणी; साझा किया अनुभव

पंजाब डेस्क : बॉलीवुड अभिनेत्री और श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी ने हाल ही में अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल (दरबार साहिब) का दौरा किया। यह उनके जीवन की स्वर्ण मंदिर की पहली यात्रा थी।

श्रद्धालु के रूप में टेका माथा : पलक तिवारी यहाँ एक आम श्रद्धालु की तरह पहुँचीं। उन्होंने नीले रंग का सूट पहना था जिस पर गुलाबी फूलों और हरी पत्तियों की कढ़ाई बनी हुई थी। मर्यादा का पालन करते हुए उन्होंने अपना सिर दुपट्टे से ढक रखा था। उन्होंने दरबार साहिब में माथा टेका और आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।

परिक्रमा में बैठकर सुनी गुरबाणी : जानकारी के अनुसार, पलक ने स्वर्ण मंदिर की परिक्रमा में लगभग आधे घंटे तक बैठकर गुरबाणी कीर्तन सुना। उन्होंने वहां के शांत और आध्यात्मिक वातावरण को महसूस किया। हालांकि उन्होंने मीडिया से कोई औपचारिक बात नहीं की, लेकिन सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें साझा करते हुए अपने अनुभव को खास बताया। पलक ने लिखा कि यहाँ आकर उन्हें वैसा ही महसूस हुआ जैसा उन्होंने सोचा था।

बॉलीवुड में करियर: पलक तिवारी ने साल 2023 में सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। अपनी पहली ही फिल्म में उन्हें कई बड़े सितारों के साथ काम करने का मौका मिला था।

इंस्टाग्राम पर हुआ प्यार, बगीचे में पकड़े जाने पर ग्रामीणों ने मंदिर में कराई शादी

नेशनल डेस्क : बिहार के वैशाली जिले के पातेपुर इलाके में एक अनोखा मामला प्रकाश में आया है, जहाँ दो बच्चों की माँ को उसके प्रेमी के साथ ग्रामीणों ने रंगे हाथों पकड़ लिया और फिर मंदिर में दोनों की शादी संपन्न करा दी। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इंस्टाग्राम से शुरू हुई प्रेम कहानी : मिली जानकारी के अनुसार, पातेपुर निवासी खुशी कुमारी की शादी साल 2022 में राजीव पासवान के साथ हुई थी और उनके दो छोटे बेटे भी हैं,। हालांकि, पिछले एक साल से खुशी का संपर्क इंस्टाग्राम के जरिए परदेशी कुमार नाम के एक युवक से हुआ। धीरे-धीरे यह जान-पहचान प्यार में बदल गई और दोनों ने चोरी-छिपे मिलना शुरू कर दिया।

बगीचे में पकड़े गए, मंदिर में हुई शादी : बुधवार शाम जब खुशी और परदेशी पातेपुर के एक आम के बगीचे में संदिग्ध अवस्था में मिल रहे थे, तभी ग्रामीणों की नजर उन पर पड़ गई,। मौके पर भारी हंगामा शुरू हो गया और बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने मामले को पंचायत के बजाय सीधे मंदिर ले जाने का फैसला किया। नगर पंचायत के छपकी पोखर स्थित एक मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर ग्रामीणों ने दोनों की शादी करवा दी।

पति ने अपनाने से किया इनकार: इस घटना के बाद खुशी के पहले पति राजीव पासवान ने अपनी पत्नी को वापस अपनाने से साफ इनकार कर दिया है। राजीव का कहना है कि जब पत्नी खुद किसी गैर मर्द के साथ रहना चाहती है और प्रेमी उसे रखने के लिए तैयार है, तो वह उसे अब अपने साथ नहीं रखेंगे,। वहीं, खुशी ने भी दृढ़ता से कहा है कि वह अपने पहले पति के पास नहीं जाएगी और अब अपना जीवन प्रेमी परदेशी के साथ ही बिताएगी,।

श्रीलंका क्रिकेट में शर्मनाक करतूत: नहाती महिलाओं का वीडियो बनाने के आरोप में 2 अंडर-19 क्रिकेटर गिरफ्तार

स्पोर्टस डेस्क : आईपीएल 2026 के रोमांच के बीच श्रीलंका क्रिकेट जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक खबर सामने आई है। श्रीलंका की अंडर-19 क्रिकेट टीम के दो खिलाड़ियों को कोलंबो के एक होटल में महिलाओं के नहाने का वीडियो बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

होटल के बाथरूम में की फिल्मिंग : यह घटना कोलंबो के नराहेनपीटा इलाके के एक होटल की है, जहां श्रीलंका की अंडर-19 टीम ठहरी हुई थी। पुलिस के अनुसार, होटल में ठहरी कुछ महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बाथरूम में मोबाइल फोन के जरिए छिपकर फिल्मिंग की जा रही है। शिकायत मिलते ही स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन दोनों युवा क्रिकेटरों को हिरासत में ले लिया। पुलिस अब इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि क्या इन वीडियो को इंटरनेट पर साझा किया गया है।

कोर्ट से मिली जमानत: गिरफ्तारी के बाद दोनों खिलाड़ियों को अलुथकाडे मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 5-5 लाख श्रीलंकाई रुपए (लगभग 1,564 अमेरिकी डॉलर) की व्यक्तिगत जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होनी तय हुई है।श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की स्थिति : हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले पर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) की ओर से अब तक खिलाड़ियों के खिलाफ किसी आधिकारिक कार्रवाई का ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि, बोर्ड वर्तमान में प्रशासनिक बदलावों के दौर से गुजर रहा है। पूर्व सांसद एरन विक्रमरत्ने की अध्यक्षता वाली ‘ट्रांसफॉर्मेशन कमिटी’, जिसमें कुमार संगाकारा, रोशन महानामा और सिदाथ वेट्टिमुनी जैसे दिग्गज शामिल हैं, जल्द ही इन खिलाड़ियों पर कड़ा फैसला ले सकती है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पीजीआईएमईआर के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

चंडीगढ़ /सत्ता संदेश
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए, जेपी नड्डा ने स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को “एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” हासिल करने के लिए बधाई दी, जो उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ उनके शिक्षकों, संकाय सदस्यों और उनके माता-पिता के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में पीजीआईएमईआर के योगदान की सराहना की।

जेपी नड्डा ने रेखांकित किया कि “पीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है।” उन्होंने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों के समर्पित प्रयासों ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई के स्नातकों के साथ संस्थान की साख जुड़ी होती हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान से उत्तीर्ण होने पर सभी छात्रों को बधाई दी।

जेपी नड्डा ने पथ-प्रदर्शक क्लिनिकल अनुसंधान और अग्रणी सर्जरी में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा “वर्तमान में पीजीआई में 850 से अधिक बाह्य परियोजनाएं और 100 से अधिक आंतरिक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो न केवल एक स्नातकोत्तर संस्थान के रूप में बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाती हैं।” उन्होंने एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण और यकृत प्रत्यारोपण में संस्थान की विशेषज्ञता की भी सराहना की।

जेपी नड्डा ने जोर देकर कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में नीतिगत निर्णयों की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि “20वीं सदी के अंत तक, भारत में केवल एक एम्स और एक स्नातकोत्तर संस्थान था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह नए एम्स की स्थापना शुरू की थी और पिछले 10 वर्षों में 16 और एम्स जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 23 हो गई है।”

स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के बारे में बात करते हुए, श्री नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टेम सेल अनुसंधान, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ सहित तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा “हालांकि तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य सेवा को बदल रही है, लेकिन मानवीय भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा “करुणा की अपनी ताकत होती है और यह चिकित्सा पद्धति के केंद्र में होनी चाहिए।” उन्होंने छात्रों को रोगियों और समाज के लाभ के लिए तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सहानुभूति और करुणा उनके काम का मार्गदर्शन करती रहे।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इसमें सार्थक योगदान देंगे, और साथ ही यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह स्नातकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाने का एक अवसर होता है। उन्होंने उन्हें बाहरी मान्यताओं से परे देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, और ईमानदारी से अपना आत्म-मूल्यांकन करने, लगातार सुधार करने, तथा अपने प्रयासों और समर्पण के माध्यम से बेहतर पेशेवर और बेहतर इंसान बनते हुए उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि स्नातक छात्र जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सीखना व्यावहारिक और जिम्मेदारी आधारित होगा। उन्होंने उन्हें इस समझ के साथ आगे बढ़ने और पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के मानकों और मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।

दीक्षांत समारोह में 682 उम्मीदवारों को डिग्री दी गई, जिनमें 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाते हुए 95 पदक (18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य) प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर और केंद्र सरकार तथा पंजाब एवं चंडीगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: 1962 में स्थापित और 1967 में ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है। एनआईआरएफ 2025 की मेडिकल श्रेणी में संस्थान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

क्षमता: संस्थान में 47 विशेषज्ञता विभागों में 2,233 बिस्तरों की क्षमता है।

रोगी सेवा: वार्षिक रूप से लगभग 27-28 लाख ओपीडी विजिट, 1 लाख इनपेशेंट प्रवेश और 95,000 से अधिक सर्जरी की जाती हैं।

आयुष्मान भारत: पीएम-जेएवाई (पीएम -जे ए वाई ) योजना के तहत लगभग 1.81 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।

प्रत्यारोपण: 2025 में 250 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए। संस्थान एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण (एसपीके) में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है।

अनुसंधान: डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा समर्थित 800 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं।

विस्तार: संगरूर (पंजाब), ऊना (हिमाचल प्रदेश) और फिरोजपुर (पंजाब) में सैटेलाइट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय पहुंच बढ़ सके।

नवाचार: संस्थान ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम’ और मरीजों की सहायता के लिए ‘प्रोजेक्ट सारथी’ जैसे नवाचार लागू किए हैं।

मजदूर दिवस 2026: 16 घंटे की गुलामी से 8 घंटे के अधिकार तक, जानें क्यों खून से लिखी गई है ‘मई दिवस’ की कहानी

नई दिल्ली: हर साल 1 मई की तारीख दुनिया भर में ‘मजदूर दिवस’ या ‘मई दिवस’ के रूप में मनाई जाती है। यह दिन केवल एक छुट्टी नहीं, बल्कि उन लाखों श्रमिकों के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने औद्योगिक क्रांति के दौरान अपने बुनियादी अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी।

संघर्ष की शुरुआत: 16 घंटे का काम और अमानवीय स्थितियाँ इस दिवस की जड़ें 19वीं सदी की औद्योगिक क्रांति में छिपी हैं। उस दौर में नई फैक्ट्रियां खुल रही थीं और मशीनीकरण बढ़ रहा था, लेकिन मजदूरों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। मजदूरों को दिन में 14 से 16 घंटे तक काम करना पड़ता था। न केवल पुरुष, बल्कि बच्चों से भी काम कराया जाता था और महिलाओं को बहुत कम मजदूरी दी जाती थी। कार्यस्थलों पर सुरक्षा का अभाव था और धूल-धुएं के बीच मजदूरों की सेहत बिगड़ रही थी।

‘8 घंटे’ की मांग और शिकागो का आंदोलन: शोषण के खिलाफ मजदूरों ने एकजुट होकर यूनियन बनाना शुरू किया। उनकी सबसे प्रमुख मांग थी कि काम के घंटे तय किए जाएं। उनका नारा था— “आठ घंटे काम, आठ घंटे आराम और आठ घंटे अपने लिए”। इसी मांग को लेकर 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो शहर में एक विशाल आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें करीब तीन लाख मजदूर सड़कों पर उतर आए।

हेमार्केट अफेयर: जब सड़कों पर बहा खून 3 मई 1886 को एक फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में कई मजदूर मारे गए। इसके विरोध में 4 मई को शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में एक शांतिपूर्ण सभा बुलाई गई। वहां अचानक हुए एक बम धमाके के बाद पुलिस ने भीड़ पर गोलियां चला दीं, जिसमें कई मजदूर और पुलिसकर्मी मारे गए। इस घटना को इतिहास में ‘हेमार्केट अफेयर’ के नाम से जाना जाता है। इस मामले में बाद में चार मजदूर नेताओं को फांसी दे दी गई।

वैश्विक मान्यता और भारत में शुरुआत : हेमार्केट की घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। साल 1889 में पेरिस में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह फैसला लिया गया कि हर साल 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा।भारत की बात करें तो यहाँ पहली बार 1 मई 1923 को चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में मजदूर दिवस मनाया गया था। इसका आयोजन ‘लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान’ ने किया था और इसी दिन पहली बार भारत में लाल झंडा फहराया गया था।

आज की चुनौतियां: भले ही आज कई श्रम कानून बन चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूरों की स्थिति अब भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। असंगठित क्षेत्र में आज भी कई जगह मजदूरों को 12 घंटे तक काम करना पड़ता है। न्यूनतम मजदूरी और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज की असली ताकत यही मेहनतकश लोग हैं और उनके अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य है।

1 मई से बदल गए ये 7 नियम: गैस सिलेंडर की कीमतों में उछाल, अब पहले जैसे नहीं रहेंगे ATM निकासी और UPI लेनदेन

बिजनेस डेस्क: आज, 1 मई 2026 से देश में आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बदल गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर आपकी रसोई के बजट से लेकर बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट तक पर पड़ेगा।

1. कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹993 महंगा : महीने के पहले ही दिन तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में करीब ₹993 की भारी बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की कीमतें स्थिर रखी गई हैं, लेकिन कॉमर्शियल गैस महंगी होने से बाहर का खाना-पीना महंगा हो सकता है।

2. गैस डिलीवरी के लिए अब OTP जरूरी: गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी में पारदर्शिता लाने और चोरी रोकने के लिए अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) अनिवार्य कर दिया गया है। अब आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी (OTP) को दिखाए बिना डिलीवरी बॉय आपको सिलेंडर नहीं देगा।

3. ATM से पैसे निकालना हुआ महंगा: RBI द्वारा इंटरचेंज फीस बढ़ाने के बाद कई बैंकों ने ATM निकासी के नियम कड़े कर दिए हैं। एचडीएफसी और बंधन बैंक जैसे बैंकों ने अब UPI के जरिए कैश निकालने को भी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल किया है। तय सीमा के बाद हर एक्स्ट्रा ट्रांजैक्शन पर ₹23 का शुल्क लगेगा, जबकि कम बैलेंस के कारण फेल ट्रांजैक्शन पर ₹25 का चार्ज देना होगा।

4. UPI ट्रांजैक्शन पर बढ़ी सख्ती ऑनलाइन: धोखाधड़ी को रोकने के लिए 1 मई से UPI लेनदेन में टू-स्टेप वेरिफिकेशन लागू किया जा सकता है। अब सिर्फ पिन डालना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लेनदेन को पूरा करने के लिए बायोमेट्रिक या किसी अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ सकती है।

5. हवाई ईंधन (ATF) पर नया शुल्क: सरकार ने हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर ₹33 प्रति लीटर की ड्यूटी निर्धारित की है। राहत की बात यह है कि तेल कंपनियों ने बढ़ी लागत का बोझ खुद उठाने का फैसला किया है, जिससे घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतें नहीं बढ़ी हैं और हवाई किराया स्थिर रहने की उम्मीद है।

6. क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड पॉइंट्स में कटौती: SBI समेत कई बड़े बैंकों ने आज से क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर में बदलाव किया है। अब रेंट पेमेंट या बिजली बिल जैसे यूटिलिटी बिलों के भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स कम कर दिए गए हैं या उन पर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन चार्ज लगा दिया गया है।

7. ऑनलाइन गेमिंग के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: आज से ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में नए नियम प्रभावी हो गए हैं। गेमिंग को अब मनी गेम्स, सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स के रूप में बांटा गया है। जिन गेम्स में पैसा शामिल है, उनके लिए अब रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा और उन पर सरकार की कड़ी निगरानी रहेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर),

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कियाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीजीआई चंडीगढ़ की विरासत, प्रतिष्ठित साख और अग्रणी चिकित्सा अनुसंधान, सर्जरी तथा एक मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में इसके योगदान पर प्रकाश डालापीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है: श्री नड्डाप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित सभी क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है: श्री नड्डा ने 2014 के बाद से चिकित्सा बुनियादी ढांचे के परिवर्तनकारी विस्तार पर प्रकाश डाला: एम्स की संख्या बढ़कर 23 हुई, मेडिकल कॉलेज 818 हुए और कुल मेडिकल सीटों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई दीक्षांत समारोह में 61 पीएचडी और 114 डीएम सहित 682 स्नातकों ने डिग्रियां प्राप्त कीं और 95 पदक प्रदान किए गए

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री नड्डा ने स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को “एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” हासिल करने के लिए बधाई दी, जो उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ उनके शिक्षकों, संकाय सदस्यों और उनके माता-पिता के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में पीजीआईएमईआर के योगदान की सराहना की।

श्री नड्डा ने रेखांकित किया कि “पीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है।” उन्होंने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों के समर्पित प्रयासों ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई के स्नातकों के साथ संस्थान की साख जुड़ी होती हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान से उत्तीर्ण होने पर सभी छात्रों को बधाई दी।

श्री नड्डा ने पथ-प्रदर्शक क्लिनिकल अनुसंधान और अग्रणी सर्जरी में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा “वर्तमान में पीजीआई में 850 से अधिक बाह्य (extramural) परियोजनाएं और 100 से अधिक आंतरिक (intramural) परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो न केवल एक स्नातकोत्तर संस्थान के रूप में बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाती हैं।” उन्होंने एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण और यकृत प्रत्यारोपण में संस्थान की विशेषज्ञता की भी सराहना की।

श्री नड्डा ने कहा कि “इतने प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना छात्रों के लिए गर्व की बात है” और उन्होंने स्वयं पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के अध्यक्ष के रूप में इस कार्यक्रम का हिस्सा होने पर गर्व व्यक्त किया।

श्री नड्डा ने जोर देकर कहा कि “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में नीतिगत निर्णयों की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि “20वीं सदी के अंत तक, भारत में केवल एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) और एक स्नातकोत्तर संस्थान था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह नए एम्स की स्थापना शुरू की थी और पिछले 10 वर्षों में 16 और एम्स जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 23 हो गई है।”

श्री नड्डा ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य देश भर में तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना है। चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि “मेडिकल कॉलेजों की संख्या एक दशक पहले के 387 से बढ़कर आज 818 हो गई है। स्नातक (यूजी) मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,26,000 से अधिक हो गई हैं, अगले पांच वर्षों में 75,000 और यूजी और पीजी सीटें जोड़ने का लक्ष्य है, जिनमें से 28,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही जोड़ने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया हैं। इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें 31,000 से बढ़कर लगभग 81,000-85,000 हो गई हैं।”

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां दृढ़ता, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। साथ ही, उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि “जहां बुनियादी शिक्षा एक अधिकार है, वहीं उच्च और व्यावसायिक शिक्षा एक विशेषाधिकार है जो महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश द्वारा समर्थित है।” उन्होंने बताया कि “सरकार द्वारा प्रति छात्र प्रति वर्ष लगभग 30-35 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रति छात्र 1.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।”

स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के बारे में बात करते हुए, श्री नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टेम सेल अनुसंधान, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ सहित तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा “हालांकि तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य सेवा को बदल रही है, लेकिन मानवीय भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा “करुणा की अपनी ताकत होती है और यह चिकित्सा पद्धति के केंद्र में होनी चाहिए।” उन्होंने छात्रों को रोगियों और समाज के लाभ के लिए तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सहानुभूति और करुणा उनके काम का मार्गदर्शन करती रहे।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इसमें सार्थक योगदान देंगे, और साथ ही यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह स्नातकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाने का एक अवसर होता है। उन्होंने उन्हें बाहरी मान्यताओं से परे देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, और ईमानदारी से अपना आत्म-मूल्यांकन करने, लगातार सुधार करने, तथा अपने प्रयासों और समर्पण के माध्यम से बेहतर पेशेवर और बेहतर इंसान बनते हुए उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि स्नातक छात्र जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सीखना व्यावहारिक और जिम्मेदारी आधारित होगा। उन्होंने उन्हें इस समझ के साथ आगे बढ़ने और पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के मानकों और मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।

दीक्षांत समारोह में 682 उम्मीदवारों को डिग्री दी गई, जिनमें 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाते हुए 95 पदक (18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य) प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर और केंद्र सरकार तथा पंजाब एवं चंडीगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: 1962 में स्थापित और 1967 में ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है। एनआईआरएफ 2025 की मेडिकल श्रेणी में संस्थान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

क्षमता: संस्थान में 47 विशेषज्ञता विभागों में 2,233 बिस्तरों की क्षमता है।

रोगी सेवा: वार्षिक रूप से लगभग 27-28 लाख ओपीडी विजिट, 1 लाख इनपेशेंट प्रवेश और 95,000 से अधिक सर्जरी की जाती हैं।

आयुष्मान भारत: पीएम-जेएवाई (पीएम -जे ए वाई ) योजना के तहत लगभग 1.81 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।

प्रत्यारोपण: 2025 में 250 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए। संस्थान एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण (एसपीके) में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है।

अनुसंधान: डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा समर्थित 800 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं।

विस्तार: संगरूर (पंजाब), ऊना (हिमाचल प्रदेश) और फिरोजपुर (पंजाब) में सैटेलाइट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय पहुंच बढ़ सके।

नवाचार: संस्थान ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम’ और मरीजों की सहायता के लिए ‘प्रोजेक्ट सारथी’ जैसे नवाचार लागू किए हैं।