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मजदूरों की जिंदगी में एक नए सवेरे का आगाज़ हो रहा है- शिवराज सिंह चौहान

दिल्ली / सत्ता संदेश


मजदूर, किसान और गांव; तीनों को ताकत देगा नया ग्रामीण रोजगार कानून- शिवराज सिंह चौहान

विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम, VB–G RAM G Act की अधिसूचना जारी- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 1 जुलाई से ग्रामीण भारत में रोजगार का नया युग, अब 100 नहीं 125 दिन की गारंटी- शिवराज सिंह

1.51 लाख करोड़ रु. से बदलेगी गांवों की तस्वीर, रोज़गार से इंफ्रा तक बड़ा अभियान- शिवराज सिंह चौहान

समय पर मज़दूरी, देरी पर मुआवज़ा, काम न मिले तो बेरोज़गारी भत्ता- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह

भारत के ग्रामीण विकास इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित करते हुए केंद्र सरकार ने आज 11 मई 2026 को विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G RAM G Act के क्रियान्वयन की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसे 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कानून ग्रामीण गरीब, श्रमिक परिवारों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के जीवन में नई आशा, अधिक आय सुरक्षा और गांवों में बड़े पैमाने पर टिकाऊ विकास कार्यों का मार्ग खोलेगा।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल में मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि विकसित भारत जी-राम जी अधिनियम की अधिसूचना जारी कर दी गई है और 1 जुलाई से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार चाहने वाले मजदूर भाई-बहनों को अब साल में 100 नहीं, 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीच के समय में मनरेगा के सारे प्रावधान लागू रहेंगे और अधूरे काम 1 जुलाई के पहले तक मनरेगा के अंतर्गत ही पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राज्यों से व्यापक स्तर पर सलाह-मशविरा कर नियम बनाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन सरकार की चिंता यह है कि ट्रांजिशन पीरियड में कोई भी मजदूर भाई-बहन रोजगार से वंचित न हो, और इसकी संपूर्ण व्यवस्था कर दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत जी-राम जी के अंतर्गत अधिकांश राज्यों को अपेक्षित तैयारी के लिए अधिकतम छह माह का समय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 1 जुलाई तक कोई राज्य अपेक्षित तैयारी नहीं कर पाया, तो 1 जुलाई के बाद कामों का फंडिंग पैटर्न विकसित भारत जी-राम जी योजना के अंतर्गत होगा।

शिवराज सिंह ने कहा कि योजना के तहत रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अपने बजट में 95,000 करोड़ रु. से अधिक की राशि का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि राज्यों ने भी अपने-अपने बजट में इसे लागू करने के लिए प्रावधान किया है और केंद्र व राज्यों की कुल राशि 1,51,000 करोड़ रु. से अधिक होगी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मजदूरों को भुगतान DBT के माध्यम से उनके बैंक या डाकघर के खातों में किया जाएगा। कोशिश होगी कि तीन दिन के अंदर भुगतान हो, लेकिन अधिकतम 15 दिन के भीतर प्रक्रियाएं पूरी कर उनके खाते में पैसा पहुंच जाए। उन्होंने कहा कि 15 दिन के भीतर पैसा नहीं आने पर मजदूर भाई-बहन विलंबित भुगतान के पात्र होंगे और देरी से भुगतान करने पर अतिरिक्त राशि देनी पड़ेगी।

शिवराज सिंह ने कहा कि मांगने पर यदि रोजगार नहीं मिला, तो बेरोज़गारी भत्ता भी देना पड़ेगा। उन्होंने इसे मजदूरों के हित की व्यापक योजना बताते हुए कहा कि 1,51,000 करोड़ रु. से अधिक की सालाना धनराशि से गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर के काम बड़े पैमाने पर होंगे।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, गांवों में अधोसंरचना, सड़क, पुल, पुलिया, स्कूल, आंगनवाड़ी भवन, खेतों से जुड़े जरूरी काम किए जा सकेंगे। आजीविका मूलक कार्यों के तहत स्वयं सहायता समूहों की दीदियों और एफपीओ के लिए वर्किंग शेड जैसी अधोसंरचनाएं भी बनाई जा सकेंगी। प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए नदी किनारे के गांवों या जलभराव वाले क्षेत्रों में रिटेनिंग वॉल जैसे कार्य भी इस योजना के अंतर्गत किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारी साथियों को पर्याप्त और समय पर वेतन का भुगतान हो, इसके लिए प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विश्वास जताया कि मजदूरों की जिंदगी में एक नए सवेरे का आगाज़ हो रहा है और विकसित भारत के लिए विकसित गांव बनाने का संकल्प यह योजना पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई से ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम की शुरुआत

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए, भारत सरकार ने 11 मई को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।

विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक समेकित (इंटीग्रेटेड), भविष्य उन्मुख एवं उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) आधारित ग्रामीण परिवर्तन के नए युग की शुरुआत करता है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। यह बढ़ी हुई गारंटी आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण आय में वृद्धि करने तथा ग्राम स्तर पर सतत विकास को समर्थन देने के उद्देश्य से लाई गई है।

अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को उनकी रोजगार मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसा न होने की स्थिति में श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।

यह अधिनियम समयबद्ध और पारदर्शी मजदूरी भुगतान पर विशेष बल देता है। मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में किया जाता रहेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) पाने के पात्र होंगे।

भारत सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए बजट अनुमान चरण में अब तक का सर्वाधिक आवंटन है।

राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यह आवंटन ग्रामीण अवसंरचना विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन तथा ग्रामीण आय में वृद्धि को नई गति प्रदान करेगा।

बिना किसी बाधा के, सुचारु और श्रमिक-केंद्रित ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए नए अधिनियम के लागू होने की तिथि तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत रोजगार बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे। 30 जून तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य संरक्षित रहेंगे और विकसित भारत–जी राम जी के प्रावधानों के अनुरूप उन्हें सुचारु रूप से नई व्यवस्था में समाहित किया जाएगा। ग्रामीण श्रमिकों को समय पर कार्य उपलब्ध कराना और मजदूरी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारत सरकार ने रोजगार की मांग के पैटर्न और मैदानी आवश्यकताओं के अनुरूप राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पर्याप्त श्रम बजट उपलब्ध कराया है, ताकि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने से पूर्व की अवधि में किसी भी ग्रामीण परिवार को असुविधा का सामना न करना पड़े।

वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मान्य रहेंगे। जिन श्रमिकों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकते हैं। केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा, तथा ई-केवाईसी पूर्ण कराने हेतु राज्य सरकारों द्वारा मैदानी स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं जारी रहेंगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विभिन्न नियमों के ड्राफ्ट राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किए जा रहे हैं, जो निम्नानुसार हैं:

  • मानक(नॉरमेटिव) आवंटन हेतु वस्तुनिष्ठ मानदंडों से संबंधित नियम
  • संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियम
  • राष्ट्रीय स्तर पर संचालन समिति के नियम
  • केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम
  • प्रशासनिक व्यय नियम
  • शिकायत निवारण नियम
  • मजदूरी एवं बेरोजगारी भत्ते के भुगतान की प्रक्रिया संबंधी नियम
  • अतिरिक्त व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम
  • बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में योजना व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम

महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में सुचारु ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियमों में उपयुक्त प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिन्हें शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा। उपर्युक्त अन्य नियमों के प्रारूप भी तैयार कर लिए गए हैं और उन्हें सार्वजनिक परामर्श हेतु जल्द प्रकाशित किया जाएगा।

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 से ग्रामीण रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की अपेक्षा है। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए यह अधिनियम सशक्त, समृद्ध और विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

सोमनाथ से सिंदूर तक: पुनरुत्थानशील भारत की भावना

75 वर्ष पहले किया गया भव्य सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा भारत के
सभ्यतागत गौरव की पुनर्स्थापना का निर्णायक क्षण था। इसने भारत की उस दृढ़ता और
संकल्प को पुनः स्थापित किया, जो प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’
मिशन का मूल आधार है।
इस पवित्र उपलब्धि की 75वीं वर्षगांठ राष्ट्र को भारतीय सभ्यता की मजबूत नींव और शक्ति
पर सर्वोच्च विश्वास प्रदान करती है, जो 1,000 वर्षों तक कट्टरपंथियों द्वारा मंदिर पर किए
गए भीषण हमलों को झेलने के बाद भी और अधिक सशक्त होकर उभरी।
गुजरात के शांत समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर हर आक्रमण के बाद खंडहरों से अपनी पूरी
भव्यता के साथ फिर उठ खड़ा हुआ। कई मायनों में इसका इतिहास भारत के अतीत का
प्रतिबिंब है, जहाँ हमारे शांतिप्रिय लोगों ने अपनी आस्था, संस्कृति और विरासत पर हुए क्रूर
हमलों के बाद फिर से मजबूती से वापसी की।
जैसा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, जिस प्रकार सोमनाथ को नष्ट करने के लिए बार-बार
षड्यंत्र और प्रयास हुए, उसी प्रकार विदेशी आक्रमणकारियों ने सदियों तक भारत को समाप्त
करने की कोशिश की। फिर भी न तो यह पूजनीय तीर्थ नष्ट हुआ और न ही भारत।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सोमनाथ पर हमलों का उद्देश्य लूटपाट से ज़्यादा खतरनाक
था। उन्होंने कहा, “यदि हमले केवल लूट के लिए होते, तो एक हजार वर्ष पहले हुई पहली
बड़ी लूट के बाद ही रुक गए होते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोमनाथ की पवित्र मूर्ति को
अपवित्र किया गया, मंदिर के स्वरूप को बार-बार बदला गया। और हमें यह सिखाया गया
कि सोमनाथ को केवल लूट के लिए नष्ट किया गया था। घृणा, उत्पीड़न और आतंक का यह
क्रूर इतिहास हमसे छिपाया गया।”
नेहरू का विरोध- स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण के मिशन का
नेतृत्व किया। यह नवस्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय आत्मविश्वास की प्रारंभिक अभिव्यक्तियों में से
एक था। लेकिन इस प्रयास की राह में भी मुश्किलें आईं। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री

जवाहरलाल नेहरू ने इसके ऐतिहासिक लोकार्पण समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र
प्रसाद के शामिल होने का औपचारिक तौर पर विरोध किया। इसके बावजूद राष्ट्रपति ने 11
मई 1951 को मंदिर का लोकार्पण किया।
सदियों के क्रूर उत्पीड़न के बाद इस पुनर्निर्माण ने भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और
सभ्यता पर गर्व के बीज बोए। काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के
पुनरुद्धार से लेकर अयोध्या में भव्य राम मंदिर तक; केदारनाथ के पुनर्जीवन से लेकर असंख्य
धरोहर स्थलों के संरक्षण तक — भारत अपनी सभ्यता की कहानी को गरिमा और उद्देश्य के
साथ पुनः स्थापित कर रहा है। इन प्रयासों से पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है और स्थानीय
लोगों के लिए रोजगार एवं व्यापार के अनेक अवसरों का सृजन हो रहा है।
वैश्विक पहचान- सोमनाथ की ही भांति भारत भी और अधिक सशक्त होकर उभरा है। यह
विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ अपनी समृद्ध विरासत
और आधुनिकता के अद्वितीय संगम के लिए वैश्विक पहचान बना रहा है। 2014 में जब देश
भारी बहुमत से मोदी सरकार को सत्ता में लाया, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रिकॉर्ड 175
देशों के समर्थन से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया। योग आज एक
वैश्विक वेलनेस मुहिम बन चुका है, जिसने दुनिया की सभी संस्कृतियों के लोगों को लाभ
पहुंचाया है।
एक दशक बाद, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पश्चिम एशिया में संयुक्त अरब अमीरात सरकार
द्वारा उपहार में दी गई भूमि पर बने एक भव्य मंदिर का लोकार्पण किया। इससे पहले,
प्रधानमंत्री ने बहरीन में 200 वर्ष पुराने मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था।
वह नियमित रूप से प्रवासी भारतीयों से संवाद करते हैं जिससे वे भारतीय सांस्कृतिक
विरासत का गौरवशाली दूत बन जाते हैं।
आयुष और योग का वैश्वीकरण-भारत की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना और
पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से जुड़े पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसरों का सृजन करना, हाल के
वर्षों में भारत द्वारा विकसित देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का
महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। हमारे कारीगरों, श्रमिकों, किसानों, मछुआरों, छोटे व्यवसायों और
स्टार्टअप्स के लिए लाभकारी वैश्विक अवसरों का सृजन करने के साथ-साथ ये समझौते
प्रधानमंत्री के “विकास भी, विरासत भी” के विजन को आगे बढ़ाते हैं।
हाल ही में न्यूजीलैंड के साथ संपन्न एफटीए पारंपरिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं
में भारत की वैश्विक पहुँच में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसमें आयुष चिकित्सकों और योग
प्रशिक्षकों के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक एवं ज्ञान-आधारित पेशेवरों को न्यूजीलैंड में
कार्य करने के लिए वीजा कोटा प्रदान किया गया है।
यह एफटीए आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के व्यापार के लिए
अनुकूल वातावरण तैयार करता है तथा आयुष को समकालीन और वैश्विक रूप से प्रासंगिक
स्वास्थ्य समाधान के रूप में स्थापित करता है।

ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापार समझौतों में भी इसी प्रकार के
प्रावधान हैं। यूरोपीय संघ के साथ एफटीए आयुष चिकित्सकों को भारत में प्राप्त
व्यावसायिक योग्यता के आधार पर यूरोपीय देशों में सेवाएँ देने की अनुमति देगा। यह
यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में आयुष वेलनेस सेंटर और क्लीनिक बनाने में भी मदद करता
है।
नई चुनौतियों पर विजय-जहाँ एक ओर भारत की सांस्कृतिक विरासत दुनिया का ध्यान
आकृष्‍ट कर रही है, वहीं देश कट्टरपंथियों के निशाने पर बना हुआ है, जो आतंकवाद और
घुसपैठ के माध्यम से भारत की सामंजस्यपूर्ण विरासत को बिगाड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में नया भारत ऐसी चुनौतियों का ज़ोरदार जवाब देता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से भारत ने आतंकवादियों और सीमा पार मौजूद उनके संरक्षकों
को करारा सबक सिखाया। हाल के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने
उन दलों को नकार दिया, जो घुसपैठियों का समर्थन कर रहे थे, वोट-बैंक की राजनीति कर
रहे थे और भारत की सांस्कृतिक विरासत को कमजोर कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि
ऑपरेशन सिंदूर और सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण, दोनों की वर्षगांठ में कुछ ही दिनों का
अंतर है। ये दोनों ही भारत की दृढ़ता और शक्ति को दर्शाती हैं।
सोमनाथ की कहानी अंततः राजनीति से कहीं आगे है। यह एक ऐसी सभ्यता की दास्‍तान है,
जिसने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। अपने पुनर्निर्माण के 75 वर्ष बाद, आज सोमनाथ
केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की दृढ़ता, निरंतरता और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का कालजयी
प्रतीक बनकर खड़ा है।
(लेखक केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हैं।)

सोमनाथ : आस्था, संकल्प और पुनर्जागरण की अनंत धारा

न हन्यते हन्यमाने शरीरे
(शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती।)
— भगवद्गीता 2.20

श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक में निहित भाव और भारतीय सभ्यता की सनातन चेतना का सबसे जीवंत स्वरूप गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र के दक्षिणी तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर में दिखाई देता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले सोमनाथ ने इतिहास में अनेक आक्रमणों और विनाश को सहा, लेकिन हर बार फिर खड़ा हुआ और उसकी आरती, घंटियों और श्रद्धा की ध्वनि कभी थमी नहीं।

भारतीय इतिहास के हजारों वर्षों में सनातन धर्म ने कई तरह की चुनौतियों का सामना किया। राजनीतिक परिवर्तन, आक्रमण और सत्ता परिवर्तन के दौर में मंदिरों, मठों और ज्ञान केंद्रों को नुकसान पहुंचाया गया, उनकी संरचनाएं बदली गईं और उन्हें संरक्षण देने वाली व्यवस्थाएं भी प्रभावित हुईं। इसके बावजूद भारतीय आध्यात्मिक परंपरा न केवल जीवित रही, बल्कि समय के साथ स्वयं को पुनर्स्थापित भी करती रही। इसकी सबसे बड़ी शक्ति यही रही कि संस्थागत क्षति और राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद इसकी आत्मा कभी समाप्त नहीं हुई।

प्राचीन और मध्यकालीन भारत में मंदिर केवल पूजा के स्थल नहीं थे, बल्कि आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन के भी केंद्र थे। राजसत्ता से उनके गहरे संबंध के कारण वे युद्ध और संघर्ष के समय सबसे पहले निशाने पर आए। महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ पर किया गया आक्रमण इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक है। फारसी ग्रंथों में इसे विजय के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि भारतीय परंपरा में इसे पीड़ा, संघर्ष और पुनर्निर्माण की कथा के रूप में याद किया गया। लेकिन ऐतिहासिक सत्य यह है कि सोमनाथ कभी श्रद्धा से विलुप्त नहीं हुआ। चालुक्य शासकों सहित अनेक राजाओं ने इसका पुनर्निर्माण कराया और यह निरंतर आस्था का केंद्र बना रहा। ऐसी अनेक घटनाएं भारत के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती हैं।

सोमनाथ का इतिहास केवल एक आक्रमण की कहानी नहीं है। प्राचीन काल से ही प्रभास पाटन एक महान तीर्थभूमि रहा है। इसे विभिन्न ग्रंथों और परंपराओं में प्रभास-पट्टन, शिव-पट्टन और प्रभास-तीर्थ जैसे नामों से जाना गया। यहां तीन पवित्र नदियों का संगम होता है और यही वह स्थान माना जाता है जहां भगवान श्रीकृष्ण के देहत्याग के बाद उनका अंतिम संस्कार हुआ। निकट ही वैराग्य क्षेत्र और गोपी तालाब स्थित हैं, जहां से गोपी चंदन प्राप्त होता है। इस संपूर्ण क्षेत्र की यात्रा को भारतीय तीर्थ परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है। काठियावाड़ और गुजरात की प्राचीन धरोहरों पर आधारित कई ऐतिहासिक अभिलेखों और पुरातात्विक रिपोर्टों में भी इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है।

सोमनाथ भारत की समावेशी सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है। यह शैव और वैष्णव परंपराओं के अद्भुत संगम का केंद्र है और हमें यह याद दिलाता है कि भारतीय संस्कृति हमेशा से बहुलतावादी और समावेशी रही है।

स्वतंत्र भारत में सोमनाथ के पुनर्जागरण का आधुनिक अध्याय 12 नवंबर 1947, दीपावली के दिन आरंभ हुआ, जब देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस पवित्र स्थल का दौरा किया। विभाजन की पीड़ा के बीच सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। यह केवल एक मंदिर के पुनर्निर्माण का निर्णय नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को पुनर्जीवित करने का एक ऐतिहासिक प्रयास था। इसके बाद सोमनाथ को एक सांस्कृतिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ हुआ।

11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में प्रातःकाल संपन्न हुई प्राण-प्रतिष्ठा ने पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक स्मृति और आत्मविश्वास को नई शक्ति प्रदान की।

आज जब भारत ‘भारत@2047’ की ओर बढ़ रहा है, तब सोमनाथ से जुड़े ये सभ्यतागत मूल्य और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। तकनीकी बदलाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में भारत दुनिया को यह संदेश देता है कि विकास का अर्थ करुणा को त्यागना नहीं है और शक्ति का अर्थ संयम को छोड़ देना नहीं है। सोमनाथ हमें सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व केवल सामर्थ्य से नहीं, बल्कि स्मृति, विवेक और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से निर्मित होता है।

इसी दृष्टि से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026-27” की परिकल्पना की गई है। यह वर्षभर चलने वाला राष्ट्रीय आयोजन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक निरंतरता और सभ्यतागत चेतना को समर्पित है। सदियों तक अनेक बार विध्वंस झेलने के बाद भी जिस प्रकार समाज के सामूहिक संकल्प से सोमनाथ पुनः स्थापित होता रहा, वह भारत की सांस्कृतिक आत्मशक्ति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत उदाहरण है।

8 से 11 जनवरी 2026 के बीच प्रारंभ हुए इस पर्व के माध्यम से दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ावों को स्मरण किया जा रहा है – 1026 में सोमनाथ पर हुए प्रथम दर्ज आक्रमण के एक हजार वर्ष और स्वतंत्रता के बाद 1951 में पुनर्निर्मित मंदिर के पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष।

इस आयोजन का उद्देश्य सोमनाथ को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक स्मृति के प्रतीक के रूप में स्थापित करना है। 11 मई 2026 को आयोजित होने वाले प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम तक देशभर में यात्राएं, सांस्कृतिक आयोजन, संवाद, शैक्षिक कार्यक्रम और विभिन्न ज्योतिर्लिंगों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, जिलों और शिवालयों में समन्वित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, जो श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, सोमनाथ ने एक नए पुनर्जागरण का दौर देखा है। प्रशासनिक सुधार, आधारभूत संरचना का विकास, धरोहर संरक्षण और सांस्कृतिक पहलों ने सोमनाथ को एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त किया है। पर्यावरणीय संतुलन और महिला-सशक्तिकरण आधारित सेवा पहलों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि भारतीय सभ्यतागत मूल्य आधुनिक जिम्मेदारियों और समावेशिता के साथ कैसे आगे बढ़ सकते हैं।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आधुनिक समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक प्रयास है। यह हमें याद दिलाता है कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं है। इसकी वास्तविक शक्ति उन मूल्यों, परंपराओं और जिम्मेदारियों में है, जिन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता रहा है। इसी कारण आज सोमनाथ केवल पुनर्निर्मित मंदिर नहीं, बल्कि एक जीवंत तीर्थ है।

21वीं सदी में आगे बढ़ते भारत के लिए सोमनाथ एक महत्वपूर्ण संदेश देता है — कोई भी सभ्यता तब मजबूत रहती है जब वह अपनी जड़ों से जुड़ी रहे, समय के साथ स्वयं को ढालती रहे और सभी को साथ लेकर चले।

सोमनाथ की यह विरासत हमें निरंतर प्रेरित करती रहे — उद्देश्यपूर्ण निर्माण करने के लिए, संतुलित आचरण के लिए और अपनी पहचान के प्रति सजग रहते हुए आगे बढ़ने के लिए।

जय सोमनाथ!

(लेखक केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, भारत सरकार है)

अमृतसर के मेहता रोड पर मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने कार सवार एक परिवार को मार दी टक्कर

अमृतसर / सत्ता संदेश

पत्रकार- विक्रमजीत सिंह / कैमरामैन- तरजिंदर सिंह

मामला अमृतसर के मेहता रोड गांव ओठिया से सामने आया है, जहां गांव छापा राम सिंह से अमृतसर आ रहे एक परिवार की कार को फोकल पॉइंट की तरफ से आ रहे दो युवकों ने टक्कर मार दी, जिससे कार बुरी तरह डैमेज हो गई, जबकि मोटरसाइकिल सवार एक युवक मौके से भाग गया और दूसरे को मौके पर मौजूद लोगों ने अस्पताल में भर्ती कराया। इस बारे में जानकारी देते हुए गांव छापा राम सिंह के रहने वाले सरदूल सिंह और उनके बेटे ने बताया कि वे मेहता रोड से अमृतसर की तरफ जा रहे थे कि अचानक मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने उनकी गाड़ी को एक तरफ से टक्कर मार दी, जिससे उनकी गाड़ी को भारी नुकसान हुआ। मोटरसाइकिल सवार युवकों में से एक, जो नशे में था, मौके से भाग गया और दूसरे को अस्पताल ले जाया गया। हमने मौके पर पुलिस को बुलाया और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। हम पुलिस प्रशासन से इंसाफ की मांग करते हैं। इस बीच, मौके पर पहुंचे ASI सतपाल सिंह ने कहा कि हम मौके पर पहुंच गए हैं और घटना की जांच कर ली गई है। हम जल्द ही अस्पताल पहुंचे युवकों से पूछताछ करेंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

PM मोदी की ‘सोना न खरीदने’ की अपील का बाज़ार पर बड़ा असर; सोने के भाव में गिरावट, जानें ताज़ा भाव

बिजनेस डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील का असर अब बाज़ार पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। सोमवार को बाज़ार खुलते ही सोने की वायदा कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में जारी उतार-चढ़ाव को भी इस बदलाव का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

MCX पर सोने का ताज़ा: भाव मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट गोल्ड का वायदा भाव आज 580 रुपये (0.38%) की गिरावट के साथ 1,51,944 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुँच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,52,530 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

सर्राफा बाज़ार की स्थिति : दिल्ली के स्थानीय सर्राफा बाज़ार में भी सोने के दामों में कमी देखी गई है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9% शुद्धता वाले सोने का भाव 100 रुपये टूटकर 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इसी प्रकार, 99.5% शुद्धता वाला सोना भी 100 रुपये सस्ता होकर 1,55,100 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया है।

चांदी की कीमतों में उछाल: जहाँ सोने के भाव गिरे हैं, वहीं चांदी के दाम में हल्की तेज़ी देखी गई है। जुलाई 2026 की एक्सपायरी वाली चांदी के दाम 400 रुपये से अधिक बढ़कर 2,62,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे।

वैश्विक बाज़ार का रुख: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 0.7% की बढ़त दर्ज की गई और यह 4,721 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और निवेशकों द्वारा की जा रही प्रॉफिट बुकिंग का असर बाज़ार पर निरंतर बना हुआ है।

नाईपर मोहाली में 11 से 22 मई तक आईटेक (ITEC) कार्यक्रम 2026 का आयोजन

“ग्लोबल साउथ में चिकित्सा उपकरण नीतियों को सक्षम बनाना” विषय पर  होगी चर्चा

मोहाली/सत्ता संदेश

राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर), मोहाली के चिकित्सा उपकरण विभाग द्वारा भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के अंतर्गत “ग्लोबल साउथ में चिकित्सा उपकरण नीतियों को सक्षम बनाना” विषय पर दो सप्ताह का अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 से 22 मई तक नाईपर,मोहाली, पंजाब के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना तथा विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। इस पहल के अंतर्गत 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों सहित शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया जाएगा, जहाँ वे चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों, नियामक ढाँचों, विनिर्माण प्रक्रियाओं, ट्रांस्लेश्नल रिसर्च तथा इनोवेटिव इकोसिस्टम पर विचार-विमर्श करेंगे।

कार्यक्रम का उद्घाटन 11 मई 2026 को प्रातः 10:30 बजे नाईपर, मोहाली के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा द्वारा कन्वेंशन सेंटर, में किया जाएगा। बारह दिवसीय इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र, संस्थागत भ्रमण, फील्ड विजिट तथा नेटवर्किंग अवसरों का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम के प्रमुख विषय निम्नलिखित हैं :

• स्टेम सेल इंजीनियरिंग एवं बायो मेडिकल  उपकरण
• 3डी बायोप्रिंटिंग एवं टिश्यू इंजीनियरिंग
• बायोसेंसर एवं पैथोजन डीटेकशन  प्रौद्योगिकियाँ
• चिकित्सा उपकरणों का स्टेरिलाइजेशन एवं गुणवत्ता नियंत्रण
• रोबोटिक पुनर्वास उपकरण एवं बायोमैकेनिक्स
• ऑर्थोपेडिक नवाचार एवं जैव-चिकित्सीय फोटोथर्मल अनुप्रयोग
• कैंसर सेंसिंग एवं इमेजिंग प्रौद्योगिकियाँ
• भारत एवं वैश्विक स्तर पर चिकित्सा उपकरणों के नियामक ढाँचे
• जीएमपी-अनुपालक सुविधा संचालन एवं क्लीनरूम प्रक्रियाएँ
• पॉलिमर सामग्री एवं टिश्यू कंस्ट्रक्ट उपकरण
• चिकित्सा उपकरणों में बौद्धिक संपदा अधिकार एवं नीतिगत रणनीतियाँ

कार्यक्रम के दौरान भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों एवं संगठनों से आए विशिष्ट विशेषज्ञ अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।

प्रतिभागियों को एडवांस अनुसंधान एवं औद्योगिक संस्थानों का शैक्षिक भ्रमण भी कराया जाएगा, जिसमें सीएसआईआर-सीएसआईओ चंडीगढ़, नाबी मोहाली, नाईपर की केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला (सीआईएल) तथा नाईपर ,मोहाली की जीएमपी-अनुपालक क्लीनरूम सुविधाएँ शामिल हैं।

यह कार्यक्रम नवाचार-आधारित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा विकासशील देशों में किफायती एवं सुलभ चिकित्सा उपकरण इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कार्यक्रम का समापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह 22 मई 2026 को नाईपर, मोहाली में आयोजित किया जाएगा।

IPL 2026 Points Table: मुंबई और लखनऊ का सफर खत्म; प्लेऑफ की रेस में अब केवल 8 टीमें, टॉप पर कड़ी टक्कर

स्पोर्टस डेस्क : आईपीएल 2026 का सीजन अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। अंक तालिका में बड़े उलटफेर के साथ ही प्लेऑफ की जंग बेहद दिलचस्प हो गई है। ताजा समीकरणों के अनुसार, मुंबई इंडियंस (MI) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) आधिकारिक तौर पर टॉप-4 की रेस से बाहर हो गई हैं।

मुंबई और लखनऊ के लिए रास्ते बंद : दोनों टीमों (MI और LSG) ने अब तक 11-11 मैच खेले हैं, जिनमें से उन्हें केवल 3 में जीत मिली है। 6 अंकों के साथ ये टीमें अब अधिकतम 12 अंकों तक ही पहुँच सकती हैं, जो प्लेऑफ में क्वालीफाई करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, ये टीमें अपने बचे हुए मैचों में अन्य टीमों का समीकरण बिगाड़ सकती हैं।

टॉप-3 टीमों के बीच कांटे की टक्कर: प्लेऑफ की रेस अब केवल 8 टीमों के बीच बची है। अंक तालिका के शीर्ष पर आरसीबी (RCB), एसआरएच (SRH) और गुजरात टाइटंस के बीच जबरदस्त मुकाबला है, क्योंकि इन तीनों टीमों के 14-14 अंक हैं। हालांकि, इनमें से किसी ने भी अभी तक अपनी जगह पक्की नहीं की है।

अन्य टीमों की दावेदारी-पंजाब किंग्स: 13 अंकों के साथ रेस में मजबूती से बनी हुई है।

-CSK और राजस्थान रॉयल्स: दोनों के पास 12-12 अंक हैं और वे भी प्लेऑफ के लिए अपनी दावेदारी ठोक रही हैं।

रिकॉर्ड्स की झड़ी: इस रोमांचक सीजन के बीच कुछ व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी बने हैं। भुवनेश्वर कुमार ने एक आईपीएल सीजन में चौथी बार 20 या उससे ज्यादा विकेट लेकर मलिंगा और बुमराह के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। वहीं, उर्विल पटेल ने मात्र 13 गेंदों में अर्धशतक जड़कर इतिहास रच दिया है।

EPFO का प्राइवेट ट्रस्टों पर बड़ा फैसला: अब नहीं दे पाएंगे मनमाना ब्याज; नियमों के उल्लंघन पर रद्द होगी छूट

बिजनेस डेस्क : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने निजी भविष्य निधि (PF) ट्रस्टों के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। ईपीएफओ ने एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है, जिसका उद्देश्य लगभग 32 लाख कर्मचारियों की 3.50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत को सुरक्षित करना है।

लाभों में समानता अनिवार्य: नई एसओपी के अनुसार, देश के 1250 से ज्यादा प्राइवेट ट्रस्टों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि उनके द्वारा दिए जाने वाले लाभ ईपीएफओ द्वारा दी जाने वाली शर्तों की तुलना में “बेहतर या कम से कम उनके बराबर” होने चाहिए। यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसकी ‘छूट’ वाली स्थिति (Exempt status) रद्द कर दी जाएगी।

ब्याज दरों पर लगी लगाम : एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, प्राइवेट ट्रस्ट अब अपने सदस्यों को मनमाना ब्याज नहीं दे सकेंगे। नए नियमों के मुताबिक, उच्च ब्याज दर को ईपीएफओ की ब्याज दर से अधिकतम 200 बेसिस पॉइंट्स (2%) ऊपर ही रखा जा सकता है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अपने कर्मचारियों को 30-34% तक का अत्यधिक ब्याज दे रही थीं, जिससे पीढ़ियों के बीच असमानता पैदा हो रही थी।

निष्क्रिय खातों का पैसा होगा ट्रांसफर : सदस्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, अब निष्क्रिय खातों (Idle accounts) और बिना केवाईसी (KYC) वाले खातों में जमा राशि को ब्याज सहित ईपीएफओ के केंद्रीय कोष में ट्रांसफर करना होगा।

दिग्गज कंपनियां आएंगी दायरे में : इस नए नियम से रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस, विप्रो, टाटा टी, लार्सन एंड टुब्रो और भेल (BHEL) जैसी बड़ी कंपनियां प्रभावित होंगी, जो अपने स्वयं के पीएफ ट्रस्ट का प्रबंधन करती हैं। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने इस नई और एकीकृत एसओपी को मंजूरी दे दी है।

PM मोदी की ‘त्याग’ वाली अपील पर राहुल गांधी का तीखा हमला; कहा- “ये उपदेश नहीं, 12 साल की नाकामी के सबूत हैं”

नेशनल डेस्क : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और खाड़ी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से तेल और सोने के इस्तेमाल में संयम बरतने की अपील पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की इस अपील को उनकी सरकार की विफलता का प्रमाण बताया है।

पीएम मोदी ने क्या की थी अपील? तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती तेल कीमतों का हवाला देते हुए जनता से पेट्रोल, डीजल और गैस का बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल करने का अनुरोध किया था। विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए उन्होंने जनता से कुछ विशेष आग्रह किए थे:अगले एक साल के लिए सोने की खरीद को टाल दें। निजी खिलाड़ियों के बजाय मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम (WFH) और ऑनलाइन मीटिंग्स को फिर से बढ़ावा दें।

राहुल गांधी का पलटवार: “ये नाकामी के सबूत हैं” राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पीएम मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों के शासन ने देश को इस मुकाम पर पहुंचा दिया है जहाँ जनता को बताया जा रहा है कि वे क्या खरीदें और कहाँ जाएं। उन्होंने इसे “उपदेश” के बजाय “नाकामी का सबूत” करार दिया।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपनी जवाबदेही से बचने के लिए हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं। उन्होंने पीएम मोदी को “Compromised PM” कहते हुए तंज कसा कि देश चलाना अब उनके बस की बात नहीं रही।