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भारत एआई क्रांति के अगले चरण का नेतृत्व करने को तैयार: माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी

नयी दिल्ली/ सत्ता संदेश

वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी Microsoft के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत अपने मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम और विशाल डेवलपर समुदाय के दम पर कृत्रिम मेधा (एआई) के अगले चरण की तैनाती में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल ढांचा, इंटरनेट की व्यापक पहुंच और तकनीकी प्रतिभा का बड़ा आधार इसे वैश्विक एआई विकास के केंद्र के रूप में उभरने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत एआई आधारित नवाचारों और अनुप्रयोगों के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे एआई तकनीक के व्यावहारिक उपयोग के नए अवसर बन रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वित्त और शासन जैसे क्षेत्रों में एआई के बढ़ते उपयोग से देश में डिजिटल परिवर्तन को और गति मिलेगी।

माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी के अनुसार, भारत न केवल एआई तकनीक का उपयोग करने वाला बड़ा बाजार है, बल्कि यह एक ऐसा देश भी है जहां बड़ी संख्या में डेवलपर्स और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर नवाचार में योगदान दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे कि आधार, यूपीआई और अन्य ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म एआई के प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। इससे न केवल सेवाओं की दक्षता बढ़ेगी बल्कि पारदर्शिता और पहुंच में भी सुधार होगा।

अधिकारी ने कहा कि एआई के अगले चरण में जिम्मेदार और सुरक्षित तकनीक के विकास पर जोर होगा, और भारत इस दिशा में वैश्विक मानकों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में एआई नवाचारों का वैश्विक हब बन सकता है, जहां तकनीक और प्रतिभा दोनों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

मारुति सुजुकी ने खर्च में कटौती के लिए उठाए कदम, जरूरत पर वर्क फ्रॉम होम और विदेश यात्राओं पर रोक लागू

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Maruti Suzuki India Limited ने परिचालन खर्च कम करने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने के लिए कई अहम कदम उठाने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि परिस्थितियों के अनुसार ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा दी जाएगी और विदेश यात्राओं पर अस्थायी रूप से रोक लगाई जाएगी।

कंपनी ने यह जानकारी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की, जिसमें उसने कहा कि वह प्रधानमंत्री Narendra Modi की मितव्ययिता (austerity) की अपील को गंभीरता से ले रही है और साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

मारुति सुजुकी ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण कंपनी अपने संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

कंपनी के अनुसार, जहां संभव होगा वहां कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जाएगी, जिससे परिचालन में लचीलापन बना रहे और यात्रा व अन्य खर्चों में कमी लाई जा सके। इसके साथ ही गैर-जरूरी विदेशी दौरों पर रोक लगाने का निर्णय भी लिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर की सप्लाई चेन और लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में कंपनियां पहले से ही लागत नियंत्रण और दक्षता बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं।

मारुति सुजुकी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय ऑटो सेक्टर मांग और वैश्विक आपूर्ति परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। कंपनी ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में भी वह स्थिति के अनुसार अपने परिचालन में आवश्यक बदलाव करती रहेगी।

KYC के 2025-26 अंतिम आंकड़े जारी, ‘वोकल फॉर लोकल’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने पिछले 12 सालो में विकास और परिवर्तन की असाधारण यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई जो अब तक सर्वाधिक है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी अब केवल पारंपरिक उत्पाद नहीं रह गई है बल्कि यह ‘नए भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन गई है। खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन में नए मानदंड स्थापित करते हुए देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार किया और उसे दिशा दी है।

केवीआईसी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनंतिम आंकड़े जारी किए

नई दिल्ली में राजघाट के गांधी दर्शन पर स्थित केवीआईसी के कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए इसके अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में विगत 12 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने विगत वर्षों में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2024-25 में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी प्रकार, वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2023-24 में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है

अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह उल्लेखनीय प्रदर्शन न केवल ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान कर रहा है बल्कि भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रभावशाली मार्गदर्शन, महात्मा गांधी से मिली प्रेरणा और देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत लाखों कारीगरों की कड़ी मेहनत को इस उपलब्धि का श्रेय दिया। केवीआईसी के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि जहां वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्राम उद्योग उत्पादों का उत्पादन 26,109 करोड़ रुपये का था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें लगभग पांच गुना वृद्धि हुई जो 380 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,25,296 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31,154 करोड़ रुपये थी वहीं इसमें लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई जो 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में 1,87,105 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह अब तक बिक्री का उच्चतम आंकड़ा है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

खादी के वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। इनका उत्पादन वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का था जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,974 करोड़ रुपये हो गया। यह लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, खादी वस्त्रों की बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,869 करोड़ रुपये हो गई है जो इसमें लगभग 628 प्रतिशत की वृद्धि है। खादी के प्रति प्रधानमंत्री के निरंतर प्रोत्साहन और इसके प्रचार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार के विस्तार में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री के नए कीर्तिमान

ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। वर्ष 2013-14 में ग्रामोद्योग सामग्रियों का उत्पादन जहां 25,298 करोड़ रुपये था वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है जो इसमें लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार, उनकी बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,79,236 करोड़ रुपये हो गई जो लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। ग्रामोद्योग क्षेत्र ने रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोग कार्यरत थे वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.99 करोड़ हो गया जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को उजागर करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से प्रेरित होकर ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि देखी गई है। परिणामस्वरूप, यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार को मजबूत करने और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है।

रोजगार सृजन में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि

केवीआईसी ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। खादी और ग्रामोद्योग से संबंधित गतिविधियों में वर्ष 2013-14 में क्रमिक रूप से वृद्धि के साथ रोजगार 1.30 करोड़ था जो इस क्षेत्र में 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया। इससे ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की महत्वपूर्ण भूमिका उजागर होती है।

पीएमईजीपी ने स्वरोजगार और उद्यमिता को नई गति प्रदान की है

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयां स्थापित की गईं और इन इकाइयों के लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के बदले सरकारी खर्च पर 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वित्तीय सहायता वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए। योजना की शुरूआत से अब तक कुल 10,84,679 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के बदले 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वित्तीय सहायता वितरित की गई है। इस पहल के माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत टूल-किट के वितरण के माध्यम से कारीगरों का सशक्तीकरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अब तक 51,230 इलेक्ट्रिक पॉटरी व्हील, 2,46,099 मधुमक्खी पालन के लिए बक्से और मधुमक्खियों के छत्ते, 2,674 स्वचालित और पैडल से चलने वाली अगरबत्ती बनाने की मशीनें, 7,669 जूते बनाने और मरम्मत करने के टूल-किट, 836 पेपर प्लेट और दोना बनाने की मशीनें, एसी मरम्मत, मोबाइल मरम्मत, सिलाई, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर के लिए 7,571 टूल-किट, काष्ठ शिल्प, बेकार लकड़ी से बने सामान और लकड़ी के खिलौने बनाने के लिए 5,138 मशीनें और ताड़ के गुड़, तेल घानी निकालने और इमली प्रसंस्करण के लिए 1,789 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं। इस योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 37,769 मशीनें, टूल-किट और उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। विगत चार वर्षों की समीक्षा से संकेत मिलता है कि 2022-23 में 21,874, 2023-24 में 29,540, 2024-25 में 38,904 और 2025-26 में 37,769 मशीनें और उपकरण वितरित किए गए। इस प्रकार, ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अब तक कुल 3,23,006 मशीनें, टूल-किट और उपकरण वितरित किए हैं और इस प्रकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केवीआईसी के प्रयासों के माध्यम से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा

केवीआईसी ने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इनमें से 47,382 प्रशिक्षु महिलाएं थीं जो कुल संख्या का लगभग 59 प्रतिशत हैं। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत 2025-26 के दौरान 28,180 महिला उद्यमियों ने व्यावसायिक इकाइयां स्थापित कीं जिससे 3,09,980 महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए। यह आंकड़ा महिला उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5,00,000 कारीगरों में से 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के साथ यह क्षेत्र महिला नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य कर रहा है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में 275% तक की वृद्धि

कारीगरों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 4 रुपये प्रति गट्ठर से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति गट्ठर हो गया है। यह पारिश्रमिक में लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

सरकारी खरीद, प्रदर्शनी में बिक्री और राष्ट्रीय ध्वजों की मांग में वृद्धि

इसके साथ ही, खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी खरीद बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये हो गई है जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग में वृद्धि को दर्शाती है। इसी प्रकार, खादी उत्पादों की प्रदर्शनियों और विपणन की पहलों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री हुई जिससे बाजार विस्तार और उपभोक्ताओं की सहभागिता को मजबूती मिली है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये थी वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.35 करोड़ रुपये हो गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन अभियानों के प्रभाव और खादी के उपयोग के प्रति जनता में बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित करती है।

जोया अख्तर के प्रोडक्शन हाउस से 66 हार्ड डिस्क चोरी, ऑफिस बॉय समेत दो गिरफ्तार, बांद्रा पुलिस की कार्रवाई

मुंबई / सत्ता संदेश

फिल्मकार Zoya Akhtar और Reema Kagti के प्रोडक्शन हाउस से फिल्मों और वेब सीरीज से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा की चोरी का मामला सामने आया है। मुंबई पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक ऑफिस बॉय भी शामिल है।

पुलिस के अनुसार, यह मामला मुंबई के Mumbai स्थित प्रोडक्शन कंपनी “टाइगर बेबी डिजिटल एलएलपी” से जुड़ा है, जहां से कुल 66 हार्ड डिस्क चोरी होने की पुष्टि हुई है। इन हार्ड डिस्क में आगामी फिल्मों और वेब सीरीज से संबंधित संवेदनशील और महत्वपूर्ण डेटा संग्रहीत था।

यह चोरी सोमवार को उस समय सामने आई जब कंपनी की कार्यकारी सहायक महजबीन शेख ने बांद्रा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि ऑफिस से हार्ड डिस्क अचानक गायब पाई गईं, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस को संदेह हुआ कि चोरी में कंपनी के अंदरूनी कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है। तकनीकी निगरानी और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में एक आरोपी ऑफिस बॉय बताया जा रहा है, जो कंपनी के दफ्तर में कार्यरत था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि चोरी की गई हार्ड डिस्क का इस्तेमाल या बिक्री कहां और किस उद्देश्य से की जानी थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में कोई बड़ा नेटवर्क या बाहरी व्यक्ति भी शामिल है।

अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल कंटेंट चोरी का यह मामला फिल्म इंडस्ट्री के लिए गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है, क्योंकि ऐसे डेटा में अनरिलीज़्ड फिल्मों और वेब सीरीज की जानकारी होती है, जिसका दुरुपयोग होने का खतरा रहता है।

फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है और सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है।

असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में 1,500 से अधिक छात्रों को दिया गया प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का प्रशिक्षण

गुवाहाटी/ सत्ता संदेश

असम के Manas National Park और इसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले 1,500 से अधिक स्कूली छात्रों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। यह जानकारी वन विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को दी।

यह जागरूकता अभियान विभिन्न संपर्क कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों को जंगलों, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। अधिकारियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।

यह पहल ‘मानस मित्र कार्यक्रम’ के तहत की गई, जिसे Manas National Park and Tiger Reserve Authority ने स्थानीय समुदायों और संरक्षण प्रयासों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किया है।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और वन अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि कैसे वन्यजीवों और जंगलों का संरक्षण मानव जीवन के लिए आवश्यक है। साथ ही उन्हें यह भी समझाया गया कि अवैध शिकार, वनों की कटाई और पर्यावरण प्रदूषण किस तरह प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के जरिए स्थानीय समुदायों और युवाओं को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में पर्यावरण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

छात्रों ने भी इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सवाल पूछे। कई छात्रों ने भविष्य में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने की इच्छा भी जताई।

वन विभाग का मानना है कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों से न केवल छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है, बल्कि स्थानीय समुदायों और राष्ट्रीय उद्यान के बीच सहयोग भी मजबूत होता है।

महाराष्ट्र के नासिक में प्याज किसानों का प्रदर्शन, खरीद मूल्य के विरोध में राजमार्ग जाम

नासिक/ सत्ता संदेश

महाराष्ट्र के Nashik जिले में सोमवार को प्याज किसानों ने सरकार द्वारा तय किए गए खरीद मूल्य के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना देते हुए यातायात को पूरी तरह बाधित कर दिया, जिससे कई घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि प्याज का मौजूदा खरीद मूल्य उनकी लागत के मुकाबले बेहद कम है, जिससे खेती करना घाटे का सौदा बनता जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

किसानों ने बताया कि खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत के बावजूद प्याज का बाजार मूल्य काफी नीचे बना हुआ है। इसी वजह से बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है और कई किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा। उन्होंने सरकार से प्याज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने और खरीद व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।

यह विरोध ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र में प्याज उत्पादन और कीमतों को लेकर पहले भी कई बार किसान आंदोलन कर चुके हैं। राज्य में प्याज की खेती बड़े पैमाने पर होती है और इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ता है।

झारखंड के लोहरदगा में दर्दनाक हादसा, जंगली हाथी के हमले में महिला की मौत

झारखंड / सत्ता संदेश

झारखंड के Jharkhand स्थित Lohardaga जिले में मंगलवार तड़के एक दर्दनाक घटना में जंगली हाथी के हमले से एक महिला की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना भंडारा थाना क्षेत्र के बेदल तंगरा टोली गांव में हुई, जहां एक जंगली हाथी ने अचानक गांव में प्रवेश कर हमला कर दिया। इस हमले में 35 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे हाथी ने कुचल दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ समय से जंगली हाथियों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे लोगों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है।

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। वन विभाग के अधिकारियों ने मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से हाथियों के बढ़ते हमलों पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि जंगलों से भटककर हाथी अक्सर गांवों में घुस आते हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है।

वन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि हाथियों की निगरानी के लिए टीमों को सक्रिय किया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जा रही है। साथ ही लोगों को सतर्क रहने और रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर है और ग्रामीणों ने मृतका के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

आयकर विभाग निदेशालय ने नए आयकर अधिनियम, 2025 एवं 2026 पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

आयकर विभाग (इंटेलिजेंस एवं क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन) निदेशालय, चंडीगढ़ द्वारा PRARAMBH, 2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत 25 मई को चंडीगढ़ एवं फरीदाबाद में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम रोहित शर्मा, IRS, निदेशक आयकर, चंडीगढ़ तथा गगन कुंद्रा, IRS, अतिरिक्त निदेशक आयकर, चंडीगढ़ के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) की NIRC चंडीगढ़ शाखा एवं फरीदाबाद शाखा के सहयोग से किया गया। इस संगोष्ठी में ICAI के सदस्यों, बार एसोसिएशन के सदस्यों, बैंकरों एवं तहसीलदारों ने सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम का उद्देश्य नए आयकर अधिनियम, 2025 एवं नए आयकर नियम, 2026 तथा I&CI निदेशालय से संबंधित SFT एवं SRA की फाइलिंग हेतु नए प्रपत्र 97, 98, 165, 166 एवं 167 के प्रावधानों के संबंध में स्पष्टता प्रदान करना था।

इस जागरूकता कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग AI-सक्षम “कर साथी” चैटबॉट का प्रदर्शन था। उपस्थित प्रतिभागियों को चैटबॉट की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई तथा बताया गया कि AI-सक्षम चैटबॉट “कर साथी” विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध है। इसी उद्देश्य से “कर साथी” पर एक विशेष डेस्क भी स्थापित की गई, ताकि प्रतिभागियों को आयकर वेबसाइट पर उपलब्ध नए AI टूल्स का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

प्रतिभागियों को आयकर अधिनियम, 1961 के नियम 114E के अंतर्गत Statement of Financial Transactions (SFT) दाखिल करने की समय-सीमा एवं प्रक्रिया के संबंध में जागरूक किया गया। साथ ही उन्हें वित्त वर्ष 2025-26 हेतु SFT को 31 मई 2026 तक समयबद्ध एवं सही तरीके से दाखिल करने के लिए प्रेरित किया गया।

संगोष्ठी के दौरान सरिता अग्रवाल, IRS, सहायक निदेशक आयकर (I&CI), चंडीगढ़ ने नए आयकर अधिनियम, 2025 की प्रमुख विशेषताओं, I&CI निदेशालय की भूमिका तथा SFT फाइलिंग से संबंधित अनुपालन आवश्यकताओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। वहीं फरीदाबाद में विकास परिहार, आयकर अधिकारी (I&CI), फरीदाबाद ने सत्र को संबोधित किया। कार्यक्रम के अंतर्गत एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें सरिता अग्रवाल, IRS ने प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर एवं स्पष्टीकरण प्रदान किए।

कार्यक्रम का समापन हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर आयकर अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने पर बल देते हुए किया गया।

एआई का जनजातीय भाषाओं में संवादः समावेशी विकास का द्योतक या जनजातीय गरिमा को प्रौद्योगिकी का समर्थन 

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

हमारे देश भर में फैले जंगलों, पहाड़ियों और दूरदराज की बस्तियों में, एक शांत लेकिन सफल परिवर्तन चल रहा है। जनजातीय समुदाय लंबे समय से भारत की विकास गाथा के केंद्र में अपने उचित स्थान का इंतजार कर रहे थे। आज वे राष्ट्र की प्रगति के सक्रिय वास्तुकार के रूप में उभर रहे हैं। जनजातीय गरिमा उत्सव की यही भावना है: विकसित भारत की यात्रा का एक राष्ट्रीय उत्सव, जहां प्रगति भूगोल या परिस्थिति का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का समान रूप से अधिकार है।

महत्वाकांक्षा का पैमाना

यह समझने के लिए कि प्रौद्योगिकी जनजातीय विकास के लिए अपरिहार्य क्यों हो गई है, किसी को पहले चुनौती की व्यापकता को समझना चाहिए। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन), धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए), राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन और संबंधित पहलों में 549 जिलों और 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,911 ब्लॉकों के 63,000 से अधिक गांवों को शामिल किया गया है, जिससे 5.5 करोड़ से अधिक आदिवासी नागरिक लाभान्वित हुए हैं। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) पर विशेष ध्यान देने के साथ, इन प्रयासों का उद्देश्य आवास, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, कनेक्टिविटी और आजीविका जैसी आवश्यक सेवाओं का सम्पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करना है। इस तरह के विविध और विस्तृत इलाके में हर परिवार तक पहुंचने के लिए ऐसी प्रणाली की आवश्यकता होती है जो डेटा-संचालित, कनेक्टेड और उत्तरदायी होती है और यही हम तैयार कर रहे हैं।

इस वर्ष जनजातीय गरिमा उत्सव का आयोजन लगभग चार विषयगत सप्ताह के आसपास किया जा रहा है, जो एक साथ जनजातीय विकास के पूर्ण आयाम को दर्शाते हैं। उद्घाटन का विषय, “विकास के एक वाहक के रूप में प्रौद्योगिकी”, इस बात को दर्शाता है कि कैसे डिजिटल सिस्टम, विज्ञान और नवाचार भारत के कुछ दूरस्थ समुदायों तक शासन और अवसर का विस्तार करने में मदद कर रहे हैं। इस दृष्टिकोण के केंद्र में एक सरल सिद्धांत निहित है: जनजातीय भाषाओं, संस्कृतियों, विरासत और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का पर्याप्त सम्मान करते हुए विकास को अंतिम दूरी तक पहुंचना चाहिए। 

प्रौद्योगिकी द्वारा जनजातीय गरिमा को बढ़ावा 

उद्देश्य के साथ निर्देशित होने पर प्रौद्योगिकी क्या हासिल कर सकती है, इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण बिरसा 101 यानी सिकल सेल रोग के लिए भारत की पहली स्वदेशी सीआरआईएसपीआर-आधारित जीन थेरेपी है। सिकल सेल रोग लंबे समय से जनजातीय आबादी के लिए स्वास्थ्य की एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है और भारत अब समानता और पहुंच में निहित उन्नत विज्ञान के साथ उस चुनौती का जवाब दे रहा है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से अनुसंधान, नैदानिक परीक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का समर्थन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। सीएसआईआर-आईजीआईबी में हाल ही में एक संगोष्ठी में वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और सिकल सेल योद्धाओं को एक साथ लाया गया, जो वैज्ञानिक प्रगति और प्रयासों के पीछे की मानवीय तात्कालिकता दोनों को दर्शाता है।

साझा लक्ष्य स्पष्ट है: एक किफायती, एकमुश्त उपचारात्मक उपचार विकसित करना जो जरूरतमंद हर आदिवासी परिवार तक पहुंच सके। बीआईआरएसए 101 केवल चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि से भी बढ़कर है। यह एक घोषणा है कि भारत का सबसे उन्नत विज्ञान अपने सबसे पात्र समुदायों की सेवा करेगा।

यह दृढ़ विश्वास एक पहल से कहीं अधिक गहरा है। ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) और आयुर्जेनोमिक्स जैसे प्रयास दर्शाते हैं कि कैसे आधुनिक तकनीक आदिवासी समुदायों द्वारा लंबे समय से संरक्षित समृद्ध औषधीय और पारिस्थितिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, मान्यीकरण और संरक्षण में मदद कर सकती है।

समावेशन की यही भावना इस बात को आकार दे रही है कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जनजातीय विकास के साथ जोड़ा जा रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में, मंत्रालय ने एक सरल लेकिन दृढ विश्वास पर आधारित एआई-सक्षम प्लेटफार्मों की श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि भाषा एक बाधा नहीं है जिसे दूर किया जाना है, बल्कि एक पहचान है जिसका उत्सव मनाया जाना चाहिए। आदि वाणी, जनजातीय भाषाओं के लिए एआई-संचालित अनुवादक, टेक्स्ट-टू-टेक्स्ट और टेक्स्ट-टू-स्पीच अनुवाद, ओसीआर और आदिवासी भाषाओं में सरकारी योजना की जानकारी के वितरण का समर्थन करता है, जिससे नागरिकों को घर पर बोलने वाली भाषा में सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ने में सक्षम बनाया जाता है। ट्राइबॉट एक बहुभाषी संवादी एआई सहायक है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों को तत्क्षण मार्गदर्शन और शिकायत निपटारे में सहायता प्रदान करके इस प्रयास को और मजबूत करता है। भगवान बिरसा मुंडा सेल और आईआईटी दिल्ली के साथ आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान भी इन प्रयासों पर चर्चा की गई, जो जनजातीय भाषाओं के दीर्घकालिक संरक्षण और सुदृढ़ीकरण सहित एआई के सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और समुदाय-केंद्रित इस्तेमाल पर केंद्रित थी।

प्रौद्योगिकी सांस्कृतिक अभिकथन और आर्थिक सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली माध्यम भी बन रही है। आगामी ट्राइबएक्स प्लेटफॉर्म का उद्देश्य जनजातीय कलाओं, भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान, संगीत, शिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम बनाना है। इस प्रयास को पूरा करते हुए, जनजातीय भारत का प्रस्तावित जीआई संभावित कला और शिल्प एटलस भौगोलिक संकेत क्षमता के साथ जनजातीय हस्तशिल्प, वन उत्पादों और पारंपरिक कला रूपों का डिजिटल रूप से मानचित्रण करेगा, जिससे ब्रांडिंग, बाजार पहुंच और जनजातीय बौद्धिक विरासत की पहचान को मजबूत करने में मदद मिलेगी। पायलट आधार पर पांच राज्यों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों में इनोवेशन हब की योजना बनाई गई है, जो नवाचार के नेतृत्व वाले आदिवासी उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए डिजाइन और उत्पाद विकास सहायता, जीआईएस-आधारित योजना डैशबोर्ड और इनक्यूबेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर और आगे बढ़ेंगे। 

प्रौद्योगिकी जनजातीय समुदायों तक शासन के तरीके को समान रूप से बदल रही है। पीवीटीजी घरेलू सर्वेक्षणों के लिए पीएम-जनमन के तहत सर्वेक्षण सेतु दूरदराज के क्षेत्रों में कल्याण वितरण की तत्क्षण, जियो-टैग निगरानी को सक्षम बनाता है। 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में संचालित, इस प्लेटफॉर्म ने 8,552 सर्वेक्षणकर्ताओं के समर्थन के साथ पहले ही 3.43 लाख घरेलू प्रस्तुतियां दर्ज की हैं। इस तरह की डेटा-संचालित प्रणालियां यह सुनिश्चित करने में मदद करती हैं कि प्रत्येक पात्र परिवार की पहचान की जाए और उसे आवश्यक सेवाओं से जोड़ा जाए। इसके साथ ही मंत्रालय दावा प्रस्तुतीकरण, जीआईएस-आधारित मानचित्रण, वर्कफ्लो की निगरानी और शिकायत निवारण को सुव्यवस्थित करने के लिए एक एआई-सक्षम वन अधिकार अधिनियम शासन मंच विकसित कर रहा है। साथ में, ये पहल आदिवासी नागरिकों के लिए शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और सुलभ बना रही हैं।

जनजातीय समुदाय: विकसित भारत के वाहक

एक क्षण ऐसा होता है, जो उस सार को पकड़ लेता है, जिसके लिए हम काम कर रहे होते हैं। यह किसी नीतिगत दस्तावेज या मंत्रिस्तरीय समीक्षा में नहीं पाया जाता है। यह तब पाया जाता है जब दूरदराज की बस्ती की एक आदिवासी महिला, तकनीक से, भाषा से सशक्त होती है और उसे इस बात का अहसास होता हो कि उसकी बात को राष्ट्र सुन रहा है। ऐसे में वह अपनी शर्तों पर सरकारी सेवाओं से जुड़ती है और पूरी गरिमा के साथ जवाब प्राप्त करती है। वह क्षण किसी यात्रा का अंत नहीं है। यह भारत की राष्ट्रीय गाथा में एक नए अध्याय की शुरुआत है।

जनजातीय गरिमा उत्सव इस संदेश को गर्व के साथ ले जाता है। जनजातीय समुदाय, अपनी दृढता, अपने पारिस्थितिक ज्ञान, अपनी कलात्मक परंपराओं और इस भूमि में अपनी गहरी जड़ों के साथ, विकसित भारत की दहलीज पर इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे इसके सबसे शक्तिशाली और प्रेरक वाहकों में शामिल हैं। जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी दूरियों को पाटती है, जैसे-जैसे विज्ञान उपचार प्रदान करता है, जैसा कि एआई जंगलों और पहाड़ियों की भाषाओं में बोलता है, और जैसे-जैसे शासन सबसे दूर के गांव के अंतिम परिवार तक पहुंचता है, हम हर दिन भारत के करीब आते हैं जो न केवल व्यापकता के रूप में विकसित है, बल्कि अपनी मानवता में परिपूर्ण है। यह वह विकसित भारत है जिसे हम माननीय प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित होकर एक साथ मिलकर निर्मित कर रहे हैं। 

(लेखिका भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव हैं) 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिक्किम का तीन दिवसीय दौरा शुरू किया, भारत-चीन सीमा का करेंगी दौरा

गंगटोक / सत्ता संदेश

राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने मंगलवार को सिक्किम के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे की शुरुआत की। इस दौरान वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत-चीन सीमा क्षेत्रों का भी दौरा करेंगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

राष्ट्रपति मुर्मू दोपहर लगभग 12 बजे सिक्किम की राजधानी Gangtok के लिबिंग हेलीपैड पर पहुंचीं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। राज्यपाल Om Prakash Mathur और मुख्यमंत्री Prem Singh Tamang ने स्वयं उपस्थित रहकर राष्ट्रपति का स्वागत किया।

आगमन के बाद राष्ट्रपति सीधे लोक भवन के लिए रवाना हुईं, जहां उनके प्रवास की व्यवस्था की गई है। अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति राज्य में कई आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी और विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी कर सकती हैं।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा विशेष रूप से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह भारत-चीन सीमा से लगे क्षेत्रों का भी निरीक्षण करेंगी। सिक्किम का यह इलाका सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और यहां सेना तथा सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण मौजूदगी रहती है।

राष्ट्रपति के इस दौरे को राज्य में विकास कार्यों, जनकल्याण योजनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति के आकलन के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्रशासन ने उनके दौरे को लेकर व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की हैं।

दौरे के दौरान राष्ट्रपति स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के लोगों से भी मुलाकात कर सकती हैं। इसके अलावा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

सिक्किम सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने इस दौरे को महत्वपूर्ण बताया है, जिससे राज्य के विकास और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उच्च स्तर पर संवाद को बल मिलने की उम्मीद है।