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दिल्ली के साकेत में भीषण हादसा: भरभराकर गिरी इमारत, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

नेशनल डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहाँ एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।हादसे का विवरण और बचाव कार्य: जानकारी के अनुसार, दमकल विभाग को इस घटना की सूचना शाम करीब 7:45 बजे मिली। बताया जा रहा है कि एक खंडहर इमारत पास की ही एक रिहायशी इमारत पर गिर गई, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।

घटनास्थल पर स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और आपातकालीन मेडिकल टीमें मौजूद हैं और राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।अब तक का अपडेटमलबे से अब तक 4 से 5 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुँचाया गया है।

बचाव दल मलबे में फंसे अन्य संभावित लोगों की तलाश के लिए लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।सुरक्षा के मद्देनजर आसपास की दुकानों और मकानों को खाली करा लिया गया है।

प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया: मौके पर पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उनकी पहली प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की सुरक्षा की प्रार्थना की और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं से बचाव कार्य में सहयोग करने की अपील की है।

Triumph 400 सीरीज हुई महंगी: बाइक की कीमतों में ₹5,000 तक का इजाफा, देखें सभी मॉडलों की नई प्राइस लिस्ट

गैजेट डेस्क: अगर आप ट्रायम्फ (Triumph) की दमदार 400cc सीरीज की बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपकी जेब पर अब थोड़ा ज्यादा बोझ पड़ने वाला है। कंपनी ने भारत में अपनी लोकप्रिय मोटरसाइकिल रेंज की कीमतों में 2,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है।इन मॉडलों की बढ़ी कीमतें यह बदलाव ट्रायम्फ की 350cc और 400cc मोटरसाइकिल रेंज के सभी चार प्रमुख मॉडलों पर लागू किया गया है।

स्पीड टी4 (Speed T4): इस मॉडल की कीमत में 4,000 रुपये की वृद्धि हुई है। अब यह 1.95 लाख रुपये के बजाय 1.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) में मिलेगी। लॉन्च के बाद से इस मॉडल की कीमत में यह पहली बार बदलाव किया गया है।

स्पीड 400 (Speed 400): इसमें 2,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे इसकी नई कीमत 2.34 लाख रुपये हो गई है।

स्क्रैम्बलर 400 एक्ससी (Scrambler 400 XC): इसकी कीमत 5,000 रुपये बढ़कर अब 2.94 लाख रुपये हो गई है।

थ्रक्सटन 400 (Thruxton 400): इस मॉडल की कीमत में भी 5,000 रुपये का इजाफा हुआ है, और अब इसकी नई कीमत 2.70 लाख रुपये है।

इंजन और परफॉर्मेंस: कीमतों में बदलाव के साथ ही इंजन आउटपुट में भी कुछ अंतर देखे गए हैं। स्पीड टी4 अब 29 hp की पावर और 31 Nm का टॉर्क जनरेट करती है। वहीं, स्पीड 400 और स्क्रैम्बलर 400 XC अब 37 hp की पावर देती हैं, जबकि थ्रक्सटन 400 40 hp की पावर के साथ रेंज में सबसे ऊपर है।

लोकप्रियता बरकरार: भारत में ट्रायम्फ की ये बाइक्स अपने शानदार डिजाइन और दमदार परफॉर्मेंस के कारण काफी लोकप्रिय हैं। हालांकि अब इन्हें खरीदने के लिए ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक पैसे खर्च करने होंगे, फिर भी एक्सपर्ट्स इसे बाजार में एक अच्छा विकल्प मान रहे हैं।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव नहीं: अर्जुन राम मेघवाल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के पास फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने संबंधी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से समय-समय पर ऐसी मांगें उठती रही हैं।

मेघवाल ने कहा कि भारत के संविधान की व्यवस्था के अनुसार पशुपालन, कृषि और गोसंरक्षण से जुड़े कई विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसी कारण गोहत्या से संबंधित कानून देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हैं और राज्य सरकारें अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस विषय पर निर्णय लेती हैं।

राज्यों में अलग-अलग हैं कानून

कानून मंत्री ने बताया कि देश के कई राज्यों में गोहत्या पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लागू है, जबकि कुछ राज्यों में अलग-अलग शर्तों के तहत इसकी अनुमति दी जाती है। इसलिए इस विषय पर पूरे देश में एक समान कानूनी व्यवस्था वर्तमान में लागू नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अपने-अपने कानूनों और नीतियों के अनुसार इस विषय का प्रबंधन करती हैं और केंद्र सरकार के समक्ष इस समय ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जिस पर विचार किया जा रहा हो।

लंबे समय से उठती रही है मांग

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने तथा देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध की मांग विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा वर्षों से उठाई जाती रही है। समर्थकों का तर्क है कि गाय का भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है। वहीं इस विषय को लेकर अलग-अलग राज्यों और समुदायों में भिन्न दृष्टिकोण भी देखने को मिलते हैं।

संवैधानिक और राजनीतिक महत्व का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि गोसंरक्षण और गोहत्या से जुड़ा मुद्दा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में राज्यों को पशुधन संरक्षण और विशेष रूप से गायों एवं दुधारू पशुओं के संरक्षण के लिए प्रयास करने की सलाह दी गई है, लेकिन कानून बनाने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों के पास है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विषय समय-समय पर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता रहा है, लेकिन वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने अथवा पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने की दिशा में कोई औपचारिक पहल नहीं की जा रही है।

मेघवाल के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल केंद्र सरकार के एजेंडे में ऐसा कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है और इस विषय से जुड़े निर्णय राज्यों की नीतियों और कानूनों के अनुसार ही संचालित होते रहेंगे।

दिल्ली में शराब की दुकान पर गोलीबारी और लूट के प्रयास की जांच में अवैध हथियारों के नेटवर्क का खुलासा

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज क्षेत्र में स्थित एक सरकारी शराब की दुकान पर हुई गोलीबारी और लूट के प्रयास के मामले की जांच के दौरान अवैध हथियारों की आपूर्ति करने वाले एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई 24 मई को हुई उस सनसनीखेज घटना की जांच के दौरान की गई, जिसमें बदमाशों ने मध्य दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में एक सरकारी शराब की दुकान को निशाना बनाया था। घटना के दौरान लूटपाट का विरोध करने पर अपराधियों ने दुकान के सेल्समैन पर हमला किया, उसे चाकू मारकर घायल कर दिया और गोलीबारी भी की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया। इसी कड़ी में पुलिस को अवैध हथियारों की आपूर्ति करने वाले एक संगठित नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके बाद विशेष अभियान चलाकर एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी से कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हथियार कहां से लाए गए, किन लोगों तक उनकी आपूर्ति की जाती थी और क्या इस नेटवर्क का संबंध अन्य आपराधिक घटनाओं से भी है।

अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में अवैध हथियारों की तस्करी और आपूर्ति पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इस मामले में सामने आया नेटवर्क केवल एक स्थानीय गिरोह तक सीमित है या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध हथियारों की उपलब्धता लूट, डकैती, हत्या और संगठित अपराध जैसी घटनाओं को बढ़ावा देती है। ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

पुलिस ने बताया कि पहाड़गंज गोलीबारी मामले के मुख्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए भी अभियान जारी है। गिरफ्तार व्यक्ति से मिली जानकारी के आधार पर आगे की छापेमारी और जांच की जा रही है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने के साथ अवैध हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला और उससे जुड़े अन्य अपराधियों के बारे में भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

हेगसेथ ने भारत-पाक संघर्षविराम पर ट्रंप के दावे का किया समर्थन, भारत को बताया हिंद-प्रशांत रणनीति का प्रमुख साझेदार

सिंगापुर / सत्ता संदेश

अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने शनिवार को राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने तथा संघर्षविराम स्थापित करने में अमेरिकी भूमिका का उल्लेख किया था। साथ ही हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का एक प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार बताया।

सिंगापुर में आयोजित Shangri-La Dialogue के दौरान अपने संबोधन और बातचीत में हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क में रहता है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की कूटनीतिक पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय रूप से किया जाना चाहिए और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। नई दिल्ली कई अवसरों पर इस नीति को स्पष्ट रूप से दोहरा चुकी है।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर जोर

हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, समुद्री सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को और करीब लाती है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत के योगदान की सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग, खुफिया साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर वैश्विक नजर

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दक्षिण एशिया, चीन, ताइवान, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। भारत और अमेरिका दोनों ने क्षेत्रीय स्थिरता तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हेगसेथ का बयान एक ओर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देता है कि अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक रणनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखता है।

हालांकि भारत-पाक संबंधों में अमेरिकी भूमिका को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना रखते हैं, विशेषकर रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में।

जल जीवन मिशन की पानी टंकी में भारी रिसाव, ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल

जबलपुर/ सत्ता संदेश

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुलोन गांव में Jal Jeevan Mission के तहत निर्मित पानी की टंकी में बड़े पैमाने पर रिसाव सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण टंकी शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त होने लगी है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई पानी की टंकी से लगातार पानी रिस रहा है। कई स्थानों पर दरारें और सीपेज दिखाई देने के कारण लोगों को निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह है। उनका कहना है कि जिस परियोजना से गांव की पेयजल समस्या का समाधान होना था, वही अब सवालों के घेरे में आ गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया और परियोजना में भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से हुआ होता तो नई टंकी में इतनी जल्दी रिसाव की समस्या सामने नहीं आती।

गांव के निवासियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से बनने वाली योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ग्रामीणों को वास्तविक लाभ मिल सके।

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। इस मिशन के तहत देशभर में जलापूर्ति ढांचे का निर्माण और विस्तार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण जलापूर्ति परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि जल भंडारण संरचनाओं में तकनीकी खामियां रह जाती हैं, तो न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है बल्कि ग्रामीणों को भी अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

स्थानीय प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थिति का निरीक्षण करने और तकनीकी जांच कराने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल कुलोन गांव के ग्रामीण जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि पानी की टंकी की खामियों को जल्द दूर कर उन्हें नियमित एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

बिरसा हरित ग्राम योजना ने बदली झारखंड के किसानों की तस्वीर, बंजर भूमि बनी आय का मजबूत स्रोत

रांची / सत्ता संदेश

झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनती जा रही है। कभी अनुपयोगी और बंजर पड़ी भूमि अब फलदार पौधों, हरित खेती और बागवानी गतिविधियों के जरिए किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रही है। योजना के प्रभाव से हजारों ग्रामीण परिवारों को रोजगार और अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिले हैं।

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य बंजर और परती भूमि का उत्पादक उपयोग करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। इसके तहत किसानों को आम, अमरूद, नींबू, कटहल, पपीता और अन्य फलदार पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही पौधारोपण, सिंचाई और रखरखाव के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत बड़ी मात्रा में अनुपयोगी भूमि को बागवानी क्षेत्र में परिवर्तित किया गया है। इससे न केवल हरित आवरण बढ़ा है बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आय का नया साधन भी मिला है। कई गांवों में ऐसे किसान सामने आए हैं जिन्होंने पहले खाली पड़ी जमीन पर फलदार पौधे लगाए और अब उनकी फसल से नियमित आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसे ग्रामीण रोजगार से जोड़ा गया है। पौधारोपण, सिंचाई, रखरखाव और फसल प्रबंधन के कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड जैसे राज्य, जहां बड़ी मात्रा में भूमि वर्षो तक अनुपयोगी पड़ी रहती है, वहां ऐसी योजनाएं कृषि और पर्यावरण दोनों दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकती हैं। बागवानी आधारित खेती किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर और स्थायी आय देने की क्षमता रखती है।

योजना का पर्यावरणीय प्रभाव भी उल्लेखनीय माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से हरित क्षेत्र में वृद्धि हुई है, मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा मिला है और स्थानीय जैव विविधता को भी लाभ पहुंचा है। इसके अलावा जल संरक्षण और सूक्ष्म जलवायु सुधार में भी ऐसे प्रयास सहायक साबित हो रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के कई लाभार्थियों का कहना है कि योजना ने उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। जहां पहले भूमि बेकार पड़ी रहती थी, वहीं अब वही जमीन परिवार की आय बढ़ाने का माध्यम बन गई है। कई किसानों ने फल उत्पादन के साथ-साथ सब्जी और अन्य सहायक कृषि गतिविधियां भी शुरू की हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है और किसानों को बाजार, भंडारण तथा प्रसंस्करण सुविधाओं से जोड़ा जाता है, तो यह झारखंड के ग्रामीण विकास मॉडल की एक बड़ी सफलता बन सकती है।

बिरसा हरित ग्राम योजना इस बात का उदाहरण बनकर उभरी है कि सही नीति, सामुदायिक भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से बंजर भूमि को भी समृद्धि और रोजगार का आधार बनाया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस पर भारत ने दोहराई संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र / सत्ता संदेश

भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर United Nations शांति अभियानों के प्रति अपनी ‘‘अटूट प्रतिबद्धता’’ दोहराते हुए उन वीर शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने विश्व के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयासों के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधियों ने उन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और नागरिक कर्मियों के योगदान को याद किया, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के तहत सेवा देते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान शहीद शांतिरक्षकों की स्मृति में श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उसकी भूमिका केवल एक सहभागी देश की नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सहयोग के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सबसे बड़े और सबसे विश्वसनीय योगदानकर्ताओं में से एक रहा है।

भारत का संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में योगदान सात दशकों से अधिक पुराना है। इस दौरान हजारों भारतीय सैनिकों और अधिकारियों ने अफ्रीका, एशिया और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न मिशनों में भाग लिया है। कई भारतीय शांतिरक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में सेवा देते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन संघर्ष प्रभावित देशों में युद्धविराम बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवीय सहायता पहुंचाने और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत की पेशेवर सैन्य क्षमता और निष्पक्ष दृष्टिकोण के कारण उसके शांतिरक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान प्राप्त है।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक शांति अभियानों की चुनौतियां पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। आतंकवाद, गृहयुद्ध, मानवीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों में शांतिरक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि देश भविष्य में भी संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सक्रिय योगदान देता रहेगा और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस हर वर्ष उन लाखों पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मिशनों के तहत सेवा दी है। यह दिन उन शांतिरक्षकों की स्मृति को भी समर्पित है जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

भारत ने इस अवसर पर एक बार फिर यह संदेश दिया कि विश्व में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संवाद और संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, और इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

ट्रंप के वादों और हकीकत के बीच फासला, अमेरिकी श्रमिकों को नहीं मिला अपेक्षित आर्थिक लाभ

वॉशिंगटन / सत्ता संदेश

अमेरिका में रोजगार, विनिर्माण और मजदूर वर्ग की आय बढ़ाने के वादों के साथ सत्ता में लौटे राष्ट्रपति Donald Trump की आर्थिक नीतियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई अर्थशास्त्रियों और श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि तमाम बड़े वादों और नीतिगत घोषणाओं के बावजूद अमेरिकी श्रमिकों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया है।

ट्रंप ने अपने चुनावी अभियानों में बार-बार यह दावा किया था कि उनकी नीतियां अमेरिकी उद्योगों को पुनर्जीवित करेंगी, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ाएंगी और विदेशी प्रतिस्पर्धा से प्रभावित श्रमिकों को राहत प्रदान करेंगी। उन्होंने विशेष रूप से चीन के साथ व्यापार असंतुलन, विदेशी आयात और अमेरिकी नौकरियों के पलायन को प्रमुख मुद्दा बनाया था।

हालांकि कई आर्थिक अध्ययनों और श्रम बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक तस्वीर अधिक जटिल है। कुछ क्षेत्रों में निवेश और रोजगार बढ़ने के बावजूद व्यापक स्तर पर श्रमिकों की वास्तविक आय, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल रोजगार सृजन के आंकड़े किसी अर्थव्यवस्था की पूरी कहानी नहीं बताते। महंगाई, आवास लागत, स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी आम श्रमिक की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं। यदि मजदूरी की वृद्धि इन खर्चों की तुलना में धीमी रहती है, तो श्रमिकों की वास्तविक क्रय शक्ति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाता।

कई श्रम संगठनों का कहना है कि विनिर्माण क्षेत्र में कुछ सुधार जरूर देखने को मिले हैं, लेकिन स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी संरचनात्मक चुनौतियां अभी भी अमेरिकी श्रमिकों के सामने मौजूद हैं। इसके कारण पारंपरिक औद्योगिक नौकरियों में स्थायी वृद्धि सीमित रही है।

दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि उनकी व्यापार नीतियों, कर सुधारों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने अमेरिकी उद्योगों को मजबूती दी है। उनका कहना है कि आर्थिक लाभों का प्रभाव दीर्घकालिक होता है और कई क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम धीरे-धीरे दिखाई दे रहे हैं।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति का मूल्यांकन केवल राजनीतिक वादों के आधार पर नहीं किया जा सकता। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, तकनीकी परिवर्तन, ऊर्जा लागत, ब्याज दरें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां भी रोजगार और आय पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।

वर्तमान बहस यह संकेत देती है कि अमेरिकी राजनीति में श्रमिक वर्ग का मुद्दा अभी भी केंद्रीय विषय बना हुआ है। चाहे रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, दोनों दलों के लिए यह वर्ग चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि अमेरिकी श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार के लिए केवल संरक्षणवादी नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए कौशल विकास, आधुनिक उद्योगों में निवेश, शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को भी समान महत्व देना होगा।

इसी वजह से ट्रंप के आर्थिक वादों और श्रमिकों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को लेकर बहस आने वाले समय में भी अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था का प्रमुख मुद्दा बनी रहने की संभावना है।

सिंगापुर ओपन में भारतीय जोड़ी का धमाका, सात्विक-चिराग ने दुनिया की नंबर-1 जोड़ी को हराकर फाइनल में बनाई जगह

सिंगापुर / सत्ता संदेश

भारतीय बैडमिंटन के स्टार युगल खिलाड़ी Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Singapore Open सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। भारतीय जोड़ी ने सेमीफाइनल में विश्व नंबर एक और शीर्ष वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरियाई जोड़ी Kim Won-ho और Seo Seung-jae को सीधे गेम में हराकर बड़ा उलटफेर किया।

52 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में भारत की चौथी वरीय जोड़ी ने मौजूदा विश्व चैंपियन को 21-19, 21-18 से शिकस्त दी। इस जीत के साथ सात्विक और चिराग ने न केवल फाइनल का टिकट हासिल किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वे दुनिया की किसी भी शीर्ष जोड़ी को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

पहले गेम में दोनों जोड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। स्कोर लगातार बराबरी पर चलता रहा, लेकिन महत्वपूर्ण क्षणों में भारतीय जोड़ी ने संयम बनाए रखा और 21-19 से गेम अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में भी कोरियाई खिलाड़ी वापसी की कोशिश करते रहे, लेकिन सात्विक और चिराग ने आक्रामक खेल तथा बेहतरीन समन्वय के दम पर बढ़त बनाए रखी और 21-18 से मुकाबला जीत लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय जोड़ी की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका शानदार तालमेल, तेज रिफ्लेक्स और दबाव की स्थिति में शांत रहना है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों खिलाड़ियों ने विश्व बैडमिंटन में भारत की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि सामने विश्व नंबर एक और मौजूदा विश्व चैंपियन जोड़ी थी। ऐसे प्रतिद्वंद्वी को सीधे गेम में हराना किसी भी जोड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों के लिए यह प्रदर्शन उत्साहजनक है, खासकर ऐसे समय में जब देश के खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं। सात्विक और चिराग पहले भी कई बड़े खिताब जीत चुके हैं और अब उनके पास सिंगापुर ओपन का प्रतिष्ठित खिताब जीतने का अवसर है।

खेल विश्लेषकों का कहना है कि यदि भारतीय जोड़ी फाइनल में भी इसी लय और आत्मविश्वास के साथ खेलती है, तो उसके पास ट्रॉफी जीतने की मजबूत संभावना होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म उन्हें विश्व बैडमिंटन की सबसे खतरनाक पुरुष युगल जोड़ियों में शामिल करती है।

अब सभी की नजर फाइनल मुकाबले पर टिकी है, जहां सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी भारत को एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब दिलाने के इरादे से कोर्ट पर उतरेंगे।