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एशियाई खेल ट्रायल्स में हार के बाद भावुक हुईं विनेश फोगाट, बोलीं- ‘मैं फेल नहीं हुई हूं’

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Vinesh Phogat ने एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल्स से बाहर होने के बाद भी हार नहीं मानी है। महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में हारने के बाद उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह असफल नहीं हुई हैं और पहले से अधिक मजबूती के साथ वापसी करेंगी।

ट्रायल्स के दौरान विनेश का मुकाबला युवा पहलवान Meenakshi Goyat से हुआ, जिसमें उन्हें 4-6 से करीबी हार का सामना करना पड़ा। मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी रहा और अंत तक परिणाम को लेकर रोमांच बना रहा। हार के बाद जब विनेश से उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई तो उनके पहले शब्द थे, “मैं फेल नहीं हुई हूं।”

यह बयान न केवल उनकी मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है बल्कि उन चुनौतियों की भी झलक देता है जिनका सामना उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में किया है। भारतीय कुश्ती जगत की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल विनेश फोगाट ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन हर बार वापसी कर अपनी क्षमता साबित की है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति मिलने के बाद विनेश की वापसी पर पूरे देश की नजर थी। ट्रायल्स में उनका प्रदर्शन संघर्षपूर्ण रहा, लेकिन सेमीफाइनल में मिली हार के कारण उनका एशियाई खेलों के लिए चयन का सपना फिलहाल अधूरा रह गया।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शीर्ष खिलाड़ी के लिए हार करियर का अंत नहीं होती, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर होती है। विनेश का बयान इसी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने संकेत दिया कि वह भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी जारी रखेंगी और अपने खेल को और बेहतर बनाने पर ध्यान देंगी।

विनेश फोगाट भारतीय महिला कुश्ती की सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक रही हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते हैं। उनकी उपलब्धियों ने देश में महिला कुश्ती को नई पहचान दिलाई है।

कुश्ती प्रेमियों और खेल विश्लेषकों का मानना है कि अनुभव, तकनीकी कौशल और संघर्षशीलता के कारण विनेश अभी भी भारतीय कुश्ती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनकी हार के बावजूद उनके प्रति प्रशंसकों का समर्थन कायम है।

सेमीफाइनल में जीत दर्ज करने वाली मीनाक्षी गोयत के लिए यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। युवा पहलवान ने दबाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को हराया और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

हालांकि ट्रायल्स का यह अध्याय विनेश के लिए निराशाजनक रहा, लेकिन उनके शब्द—“मैं फेल नहीं हुई हूं”—यह संकेत देते हैं कि वह इस हार को अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देख रही हैं। खेल जगत में ऐसे ही जज्बे को एक सच्चे चैंपियन की पहचान माना जाता है।

पश्चिम बंगाल: 3 जून से अन्नपूर्णा योजना की पहली किस्त जारी, महिलाओं को मिलेंगे ₹3000

पश्चिम बंगाल / सत्ता संदेश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य सरकार की अन्नपूर्णा योजना के तहत पहली किस्त का भुगतान 3 जून से शुरू किया जाएगा। योजना के पात्र महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे 3,000 रुपये भेजे जाएंगे।

सीएम शुभेंदु ने क्या बताया?

कोलकाता में स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लाभार्थियों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकारी अधिकारी घर-घर जाकर महिलाओं को आवेदन पत्र भरने में मदद करेंगे, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे।


अन्नपूर्णा योजना के लिए 12 पन्नों का आवेदन फॉर्म जारी किया गया है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इस फॉर्म को लेकर विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि अत्यधिक दस्तावेजी प्रक्रिया के कारण कुछ वास्तविक लाभार्थी योजना से वंचित रह सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने आशंकाओं को किया खारिज 

हालांकि, मुख्यमंत्री ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सरकार पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के साथ योजना लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि महिलाओं के लिए निर्धारित लाभ किसी गैर-पात्र व्यक्ति या पुरुष के खाते में न पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि महिलाओं के लिए निर्धारित लाभ लेने के आरोप में कई पुरुषों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार चुनावी घोषणापत्र ‘संकल्प पत्र’ में किए गए सभी वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा की घोषणा

अधिकारी ने यह भी घोषणा की कि 1 जून से पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संचालित बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने बताया कि राज्य का बजट 22 जून को पेश किया जाएगा, जो राज्य की जनता की अपेक्षाओं को पूरा करेगा।

राष्ट्रीय खेल 2027 की तैयारियों की समीक्षा, मेघालय में बनेगा 150 करोड़ रुपये का हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर

शिलांग / सत्ता संदेश

केंद्रीय खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने अगले वर्ष आयोजित होने वाले 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया और मेघालय में 150 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक हाई-एल्टीट्यूड (ऊंचाई पर स्थित) प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।

शिलांग में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में Conrad Sangma, केंद्रीय खेल एवं युवा कार्य राज्य मंत्री Raksha Khadse, P. T. Usha, मेघालय के खेल मंत्री तथा पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के खेल विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं, खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों के आवास, परिवहन, सुरक्षा और प्रतियोगिता स्थलों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेल केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि खेल संस्कृति को मजबूत करने और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

मांडविया ने कहा कि मेघालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यहां के खिलाड़ियों ने बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, फुटबॉल, वेटलिफ्टिंग और अन्य खेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ऐसे में हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना क्षेत्र के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेने से खिलाड़ियों की सहनशक्ति, फेफड़ों की क्षमता और प्रदर्शन में सुधार होता है। यही कारण है कि दुनिया के कई प्रमुख खेल राष्ट्र अपने एथलीटों को ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं। मेघालय में प्रस्तावित केंद्र भारतीय खिलाड़ियों को विदेश जाने के बजाय देश में ही उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करेगा।

बैठक में राष्ट्रीय खेलों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों में खेल पर्यटन, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि इस आयोजन से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा और खेलों के प्रति युवाओं की रुचि और मजबूत होगी।

Indian Olympic Association की अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा कि राष्ट्रीय खेल भविष्य के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। उन्होंने आयोजन की तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मेघालय खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तेजी से आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित कर रहा है।

केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ और अन्य खेल विकास योजनाओं के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। खेल मंत्रालय का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के जरिए भारत वैश्विक खेल प्रतिस्पर्धाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों के साथ-साथ हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर की घोषणा को भारतीय खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण वातावरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

वित्त मंत्रालय की मासिक समीक्षा: आर्थिक गतिविधियों में नरमी की आशंका, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण मजबूत

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Ministry of Finance ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा है कि आने वाले महीनों में सामान्य से कम मानसून और कुछ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की संभावित सुस्ती के कारण उपभोग मांग पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का निकट भविष्य का परिदृश्य सतर्क आशावाद के साथ मजबूत बना हुआ है।

वित्त मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में आय और उपभोग का स्तर काफी हद तक मानसून पर निर्भर करता है। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और उपभोक्ता मांग प्रभावित हो सकती है। इसका असर विशेष रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्यों और ग्रामीण बाजारों पर देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव, ऊर्जा कीमतों में बदलाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की धीमी वृद्धि जैसी परिस्थितियां वैश्विक आर्थिक वातावरण को प्रभावित कर रही हैं। इसके बावजूद भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है।

समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया कि देश में बुनियादी ढांचा निवेश, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, सेवा क्षेत्र की मजबूती और सरकारी पूंजीगत व्यय आर्थिक वृद्धि को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। सार्वजनिक निवेश के साथ-साथ निजी निवेश में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार और बढ़ती उपभोक्ता मांग है। हालांकि यदि मानसून कमजोर रहता है, तो ग्रामीण खपत पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में विकास की गति प्रभावित हो सकती है।

वित्त मंत्रालय ने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। खाद्य पदार्थों की कीमतें, मौसम की स्थिति और वैश्विक कमोडिटी बाजार आने वाले महीनों में महंगाई के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार और नीति निर्माता मूल्य स्थिरता बनाए रखने तथा विकास को गति देने के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और तकनीकी क्षेत्र में निवेश जैसे कारक भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश से भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कुछ अल्पकालिक चुनौतियां अवश्य हैं, लेकिन व्यापक आर्थिक संकेतक अभी भी सकारात्मक बने हुए हैं। मजबूत बैंकिंग प्रणाली, बढ़ता निवेश और सरकारी सुधार कार्यक्रम विकास को सहारा दे सकते हैं।

कुल मिलाकर वित्त मंत्रालय का आकलन यह दर्शाता है कि मानसून और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है और निकट भविष्य में वृद्धि की संभावनाएं बरकरार हैं, हालांकि नीति निर्माताओं को सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

यूपीएससी सफलता का झूठा श्रेय लेना पड़ा भारी, वाजीराम एंड रवि पर 7 लाख रुपये का जुर्माना

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Central Consumer Protection Authority (सीसीपीए) ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में सफल अभ्यर्थियों का श्रेय लेने संबंधी भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के मामले में Vajiram & Ravi पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

प्राधिकरण के अनुसार, संस्थान ने ऐसे विज्ञापन प्रकाशित किए थे जिनसे यह आभास होता था कि यूपीएससी परीक्षा में सफल हुए कई अभ्यर्थियों की सफलता में उसकी प्रत्यक्ष भूमिका रही है, जबकि उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर इन दावों को भ्रामक माना गया।

सीसीपीए ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार के विज्ञापन छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित कर सकते हैं तथा किसी संस्थान की वास्तविक उपलब्धियों के बारे में गलत धारणा पैदा कर सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत किसी भी सेवा प्रदाता को ऐसे दावे करने की अनुमति नहीं है जो तथ्यों से परे हों या उपभोक्ताओं को भ्रमित करें।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों को लेकर नियामक संस्थाएं अधिक सतर्क रुख अपना रही हैं। हाल के वर्षों में कई संस्थानों पर सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरों का उपयोग कर बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार करने के आरोप लगते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता मुख्य रूप से अभ्यर्थी की मेहनत, अध्ययन और तैयारी पर निर्भर करती है। ऐसे में कोचिंग संस्थानों द्वारा सफलता का पूर्ण श्रेय लेने वाले विज्ञापनों को लेकर पारदर्शिता आवश्यक है।

उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे अन्य कोचिंग संस्थानों को भी अपने प्रचार-प्रसार में सावधानी बरतने का संदेश जाएगा।

सीसीपीए लगातार ऐसे मामलों की निगरानी कर रहा है जिनमें उपभोक्ताओं को प्रभावित करने के लिए भ्रामक विज्ञापन, झूठे दावे या अधूरी जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों और अभिभावकों को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध हो।

विश्लेषकों के अनुसार, इस कार्रवाई से शिक्षा क्षेत्र में विज्ञापन मानकों को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है और भविष्य में कोचिंग संस्थानों के प्रचार अभियानों पर अधिक नियामकीय निगरानी देखने को मिल सकती है।

टांडा नगर काउंसिल चुनाव में AAP का दबदबा, 15 में से 10 वार्डों पर जीत


होशियारपुर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: जसप्रीत सिंह सैनी


पंजाब के होशियारपुर जिले के टांडा उड़मुड़ नगर काउंसिल चुनाव में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 15 में से 10 वार्डों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार 5 वार्डों में विजयी रहे। मतगणना शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। 26 मई को हुए नगर काउंसिल चुनाव की मतगणना 29 मई को पूरी की गई। अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर एवं अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी निकास कुमार ने बताया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न हुई।

मतगणना के परिणामों के अनुसार वार्ड नंबर 1 और 2 से कांग्रेस उम्मीदवार हिना वैद और बलदेव राम विजयी रहे। वार्ड नंबर 3 से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार सरोज बाला ने जीत हासिल की। वार्ड नंबर 4 और 5 से कांग्रेस के उम्मीदवार दविंदर सिंह और गुरप्रीत कौर ने बाजी मारी।
वहीं वार्ड नंबर 6 से सेठ राम, वार्ड नंबर 7 से नरेंद्र कौर, वार्ड नंबर 8 से हरमीत सिंह वड़ैच, वार्ड नंबर 10 से प्रवीण खन्ना, वार्ड नंबर 11 से गुरबख्श कौर, वार्ड नंबर 12 से हरी कृष्ण, वार्ड नंबर 13 से परमिंदर कौर, वार्ड नंबर 14 से मनजीत कौर और वार्ड नंबर 15 से जसवंत कौर आम आदमी पार्टी के टिकट पर विजयी रहे।

वार्ड नंबर 9 से कांग्रेस उम्मीदवार प्रीतपाल कौर ने जीत दर्ज की। इस तरह कुल 15 वार्डों में से आम आदमी पार्टी ने 10 और कांग्रेस ने 5 सीटों पर कब्जा जमाया।

अमृतसर पुलिस ने 218 NDPS मामलों का नशीला माल किया नष्ट

अमृतसर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: विक्रमजीत सिंह, कैमरामैन तरजिंदर सिंह, अमृतसर

पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस एक्ट के 218 मामलों में बरामद नशीले पदार्थों को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर के निर्देशों पर गठित ड्रग डिस्पोजल कमेटी की निगरानी में की गई। खन्ना पेपर मिल में बॉयलर के माध्यम से करोड़ों रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों को नष्ट किया गया।

डीसीपी इन्वेस्टिगेशन रविंदर पाल सिंह संधू की अध्यक्षता वाली ड्रग डिस्पोजल कमेटी, जिसमें एडीसीपी गुरप्रताप सिंह सहोता और एसीपी जसविंदर सिंह सदस्य के रूप में शामिल थे, ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत एनडीपीएस एक्ट के 218 मामलों में बरामद नशीले पदार्थों को नष्ट किया।

नष्ट किए गए माल में 11 किलो 550 ग्राम हेरोइन, 14 हजार 986 नशीले कैप्सूल, 4 हजार 677 नशीली गोलियां, 13 किलो 891 ग्राम नशीला पाउडर, 4 किलो 480 ग्राम चरस, 11 किलो 250 ग्राम भूकी, 5 किलो 523 ग्राम स्मैक, 213 इंजेक्शन तथा अन्य नशीले पदार्थ शामिल थे।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा और नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कपास उद्योग को बड़ी राहत: सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 तक आयात शुल्क से दी छूट

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने देश के वस्त्र और कपड़ा उद्योग को राहत देते हुए कपास के आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क से 30 अक्टूबर 2026 तक छूट देने की घोषणा की है। यह छूट अगले पांच महीनों तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना तथा कपास की कीमतों को नियंत्रित रखना है।

सरकार के इस फैसले से कपड़ा, धागा और परिधान उद्योग को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत लंबे समय से कपास की उपलब्धता और बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहा था। ऐसे में आयात शुल्क हटाए जाने से विदेशी बाजारों से कपास खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई क्षेत्रों में उत्पादन संबंधी चुनौतियों और वैश्विक मांग में बदलाव के कारण उद्योग पर दबाव बढ़ा था। आयात शुल्क में छूट से कच्चे माल की आपूर्ति बेहतर होने और उत्पादन लागत कम होने की संभावना है।भारत दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन घरेलू मांग और निर्यात आवश्यकताओं को देखते हुए समय-समय पर आयात की जरूरत भी पड़ती है। कपड़ा उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

उद्योग संगठनों का मानना है कि इस निर्णय से सूती धागे और कपड़ों के निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी। इससे निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है, क्योंकि कम लागत पर उत्पादन होने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

हालांकि कुछ किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि सस्ते आयात से घरेलू किसानों को कीमतों के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को उद्योग और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। कपास आयात पर शुल्क छूट से वस्त्र उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल उद्योग जगत ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे आने वाले महीनों में कपड़ा क्षेत्र की वृद्धि को नई गति मिलेगी।

सीसीपीए ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा परिणामों से संबंधित भ्रामक दावों के लिए कोचिंग संस्‍थान पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

संस्थान ने सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई

सीसीपीए ने दोहराया है कि कोचिंग सेवाओं का चयन करने से पहले उपभोक्ताओं को उचित जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किया है जिसमें उस पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर भ्रामक विज्ञापन देने के लिए 7,00,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए।

मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ यह आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2023 में सफल हुए उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से इस्तेमाल करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

यूपीएससी सीएसई 2023 के परिणाम घोषित होने के बाद संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट (www.vajiramandravi.com) पर निम्नलिखित दावे प्रकाशित किए गए:

  • शीर्ष 10 में से 8 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • शीर्ष 50 में रैंक हासिल करने वाले 37 उम्‍मीदवार वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • “तथ्य: हर साल, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वाजीराम एंड रवि के छात्र होते हैं।”
  • विस्तृत जांच के बाद सीसीपीए ने निम्नलिखित बातें पाईं:
क्रम संख्यासंस्थान का दावासीसीपीए के निष्कर्ष
 शीर्ष 10 में से 8 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।8 में से 7 उम्मीदवारों ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 शीर्ष 50 में 37 रैंक धारक37 उम्मीदवारों में से 29 ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 “तथ्य: हर साल, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वजिराम एंड रवि के छात्र होते हैं।” 2021 में सफल उम्मीदवारों में से 86.36 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2022 में सफल उम्मीदवारों में से 78.31 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2023 में, सफल उम्मीदवारों में से 97.56 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2024 में सफल उम्मीदवारों में से 71.69 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।

उपर्युक्त महत्वपूर्ण जानकारी इन वर्षों में से किसी भी वर्ष संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं की गई थी।

सीसीपीए ने यह भी पाया कि आईजीपी एक ऐसा कार्यक्रम है जो तभी शुरू होता है जब कोई उम्मीदवार यूपीएससी सीएसई की प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाएं स्वतंत्र रूप से उत्तीर्ण कर लेता है। ये दोनों ही बेहद कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं हैं जिनमें संस्थान का कोई शैक्षणिक योगदान नहीं होता। संस्थान ने व्यापक सशुल्क कोचिंग कार्यक्रमों के विज्ञापनों के साथ ऐसे उम्मीदवारों को प्रमुखता से प्रदर्शित करके, चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम का खुलासा किए बिना, यह भ्रामक धारणा बनाई कि ये उम्मीदवार उसके पूर्ण-स्तरीय कोचिंग कार्यक्रमों के छात्र हैं।

सीसीपीए ने पाया कि सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों का खुलासा न करना, जिसमें यह जानकारी भी शामिल है कि क्या उम्मीदवारों ने पूर्ण-अवधि के कक्षा कार्यक्रम, वैकल्पिक विषय कोचिंग, परीक्षा श्रृंखला या अल्प अवधि के निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया था, अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन माना जाता है, क्योंकि यह संभावित उपभोक्ताओं को सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता से वंचित करता है। सीसीपीए ने माना कि विवादित विज्ञापन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28)(iv) के तहत “भ्रामक विज्ञापन” की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, जो महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने पर रोक लगाती है। यह आचरण अधिनियम की धारा 2(9) का भी उल्लंघन पाया गया, जो उपभोक्ताओं को सूचित होने का अधिकार प्रदान करती है।

अब तक, सीसीपीए ने छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले कोचिंग संस्थानों पर 1.46 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।

(अंतिम आदेश निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखे जा सकते हैं: https://jagograhakjago.gov.in/CCPA_Orders/index.html )।

देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का लिया संकल्प

नेशनल खरीफ कॉन्फ्रेंस में पहली बार रात तक चला मंथन, खेतों में उतरेगा कृषि प्रगति का मिशन

राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्रियों का संकल्प: अपने खेतों में भी करेंगे प्राकृतिक खेती

कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा से समग्र कृषि विकास का संकल्प: ‘बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए’- श्री शिवराज सिंह

दो दिन हुआ गहन विमर्श, खेती के लिए नई दिशा: श्री शिवराज सिंह की पहल पर कृषि आत्मनिर्भरता का रोडमैप

धरती बचाओ, देश बचाओ: पूसा सम्मेलन में राष्ट्रीय ‘खेत बचाओ अभियान’ का श्री शिवराज सिंह ने किया आगाज़

केंद्र-राज्य-वैज्ञानिक एक मंच पर: खरीफ से पहले कृषि परिवर्तन का राष्ट्रीय खाका तैयार

नई दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में, देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे और देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का संकल्प लिया। यह केवल एक नियमित समीक्षा बैठक बनकर नहीं रही, बल्कि भारतीय कृषि के लिए संकल्प, समन्वय और ज़मीनी क्रियान्वयन का राष्ट्रीय मंच बनकर उभरी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पहले दिन राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने गहन विचार-विमर्श किया, जबकि दूसरे दिन भी श्री शिवराज सिंह चौहान पूरे समय रहे और उनकी मौजूदगी में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने पहली बार रात तक मंथन कर खरीफ, दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और ‘खेत बचाओ अभियान’ जैसे मुद्दों पर एक साझा दिशा तय की। सम्मेलन की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि श्री शिवराज सिंह की अपील पर कृषि मंत्रियों ने केवल नीतिगत समर्थन तक सीमित न रहते हुए, अपने निजी खेतों में भी प्राकृतिक खेती के प्रयोग का संकल्प लिया, ताकि किसानों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

राष्ट्रीय राजधानी के पूसा संस्थान में 28 और 29 मई को संपन्न राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि को केवल उत्पादन के प्रश्न के रूप में नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण, पोषण, किसान आय और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देख रही है। सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह ने किसानों को लाभ देने के लिए प्रक्रियाओं को सरल करने पर राज्य सरकारों से जोर देकर कहा।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में पहले दिन देशभर से आए राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, फसल नियोजन, जल प्रबंधन और क्षेत्रवार चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया। इस दौरान प्रारंभिक संबोधन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान हॉल में पीछे की तरफ एक प्रतिभागी के रूप में पूरे समय बैठे। अगले दिन श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने इस विचार-मंथन को आगे बढ़ाते हुए इसे नीतिगत प्रतिबद्धता और साझा संकल्प का स्वरूप दिया।

सम्मेलन के समापन पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिभागियों की गंभीरता, तन्मयता और मनोयोग की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इतने समर्पण के साथ अधिकारियों और मंत्रियों की भागीदारी बहुत कम अवसरों पर देखी है। उनका यह वक्तव्य सम्मेलन की उस भावना को रेखांकित करता है, जिसमें उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्वयं को केवल प्रशासक नहीं, बल्कि चिंतक, साधक और परिवर्तन के वाहक के रूप में प्रस्तुत किया।

इस कॉन्फ्रेंस से उभरकर सामने आया सबसे सशक्त संदेश रहा- ‘खेत बचाओ’ ही भविष्य बचाने का मंत्र है। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि खेत बचाने का अर्थ केवल कृषि भूमि की रक्षा नहीं, बल्कि धरती, पर्यावरण, देश और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। इसी सोच के साथ सम्मेलन में संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष बल दिया गया। श्री शिवराज सिंह का संदेश साफ था कि रासायनिक उर्वरकों के पूर्ण निषेध की बात नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक आवश्यकता के अनुसार, संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर जन-जागरण और संस्थागत अभियान चलाया जाए। यही कारण है कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को केंद्र, राज्य, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिक समुदाय का साझा राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात प्रमुखता से सामने आई।

इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए समन्वित तंत्र, मॉनिटरिंग व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष जैसी व्यवस्थाओं के गठन की बात भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा, ताकि यह केवल अपील बनकर न रह जाए, बल्कि एक परिणामकारी कार्यक्रम में बदले।

सम्मेलन की एक महत्त्वपूर्ण नई बात यह रही कि पहली बार राज्यों के कृषि मंत्रियों ने सार्वजिनक रूप से, प्राकृतिक खेती को केवल प्रचारित करने की बजाय स्वयं अपने खेतों में भी अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। चूंकि अधिकांश कृषि मंत्री स्वयं खेती-किसानी से जुड़े हैं, इसलिए यह निर्णय प्रतीकात्मक न होकर व्यवहारिक महत्व रखता है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का विचार यह रहा कि यदि नीति-निर्माता और जनप्रतिनिधि स्वयं छोटे स्तर पर भी प्राकृतिक खेती का मॉडल प्रस्तुत करेंगे, तो किसानों के बीच इसका संदेश अधिक विश्वसनीय और प्रेरक रूप में पहुंचेगा। गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों का उल्लेख भी इसी संदर्भ में प्रासंगिक माना गया, वहीं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने भी काफी देर तक सम्मेलन में सहभागिता कर एक विशेष सत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

इस महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट हुआ कि खरीफ रणनीति अब केवल मौसमी तैयारी तक सीमित नहीं रहेगी। इसे दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी की सेहत, इनपुट लागत के विवेकपूर्ण प्रबंधन, और कृषि उत्पादन बढ़ाने के समग्र एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी एक ओर उत्पादन बढ़ाना है, तो दूसरी ओर संसाधनों की सेहत भी बचानी है। यही इस सम्मेलन की नीति-दृष्टि का केंद्रीय बिंदु बनकर उभरा। मंथन का एक और महत्त्वपूर्ण पक्ष था- नीतिगत निर्णयों को जन-अभियान में बदलने की संचार रणनीति। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सम्मेलन के समापन सत्र में इस बात पर बल दिया कि जो निर्णय और अभियान तय हुए हैं, उनकी जानकारी विभिन्न प्रचार-प्रसार माध्यम से लगातार किसानों और आमजन तक पहुंचाई जाए। इससे कृषि सुधार कार्यक्रमों को प्रशासनिक फाइलों से निकालकर जनसहभागिता वाले अभियान में बदला जा सकेगा।

सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार कृषि प्रशासन में केवल योजनाओं की घोषणाभर नहीं, बल्कि साझा उत्तरदायित्व आधारित कार्य-संस्कृति विकसित करना चाहती है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि बड़ा लक्ष्य पाने के लिए बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए। यह पंक्ति इस सम्मेलन की मूल आत्मा बनकर उभरी, जहां मंत्री और अधिकारी दोनों ने अपने-अपने दायित्वों के निर्वहन में कोई कसर न छोड़ने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस को इसलिए भी अलग माना जा रहा है क्योंकि यहां कृषि को विभागीय विषय से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय मिशन मोड में देखने का आग्रह सामने आया। ‘खेत बचाओ अभियान’, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती के प्रायोगिक मॉडल, और दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता के लक्ष्य तय समयसीमा के साथ आगे बढ़ेंगे, जिससे यह मंथन आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित होगा।

सम्मेलन के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में सामूहिक संकल्प के साथ यह संदेश दिया गया कि जो कुछ इन दो दिनों के चिंतन में तय हुआ है, उसे ज़मीन पर उतारकर दिखाया जाएगा। यही इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है- विचार से संकल्प और संकल्प से क्रियान्वयन की ओर बढ़ता कृषि भारत।