ब्रेकिंग न्यूज़
विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस: भारत ने 2030 के लक्ष्य से पहले 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि बहाल की

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस 2026 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत ने भूमि बहाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। उन्होंने कहा कि नीतिगत प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक नवाचार और जनभागीदारी के समन्वय से पर्यावरण बहाली को सतत विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जा सकता है।

हर वर्ष 17 जून को मनाया जाने वाला विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस, मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी वैश्विक चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि भारत ने बॉन चैलेंज के तहत वर्ष 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर क्षतिग्रस्त एवं वनों की कटाई से प्रभावित भूमि को बहाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें से अब तक 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि को बहाली प्रयासों के दायरे में लाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और सतत भूमि प्रबंधन की दिशा में निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के तहत पुनर्स्थापन गतिविधियों से लगभग 1.22 बिलियन व्यक्ति-दिवस रोजगार का सृजन भी हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलसंभर विकास घटक के अंतर्गत 27 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि का उपचार किया जा चुका है और 61.3 मिलियन से अधिक भू-टैग प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन परिसंपत्तियां विकसित की गई हैं।

मंत्री ने बताया कि ग्रीन इंडिया मिशन के तहत लगभग 1.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हरित एवं पुनर्स्थापन गतिविधियां संचालित की गई हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में सीएएमपीए समर्थित कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 3.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम वर्तमान में 81.53 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित हो रहा है, जो विश्व की सबसे बड़ी सामुदायिक वन प्रबंधन प्रणालियों में से एक है। इसके अतिरिक्त 1.21 लाख हेक्टेयर भूमि को कृषि वानिकी के अंतर्गत लाया गया है तथा लगभग 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों के बाहर बांस के वृक्षारोपण किए गए हैं।

श्री यादव ने बताया कि अरावली ग्रीन वॉल पहल एक महत्वपूर्ण भूदृश्य-स्तरीय पुनर्स्थापन कार्यक्रम के रूप में उभरी है और वित्त वर्ष 2025-26 में अपने वार्षिक लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं, मिष्टी कार्यक्रम के तहत वर्ष 2028 तक 54 हजार हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र के पुनर्स्थापन का लक्ष्य रखा गया है।

इस वर्ष विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस की थीम “चारागाह: पहचानें, सम्मान करें, पुनर्स्थापित करें” रखी गई है। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि चारागाह और घास के मैदान जैव विविधता संरक्षण, पशुधन आधारित आजीविका, कार्बन पृथक्करण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि भारत की शुष्क भूमि लगभग 228 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जबकि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 29.77 प्रतिशत हिस्सा, यानी 97.85 मिलियन हेक्टेयर भूमि, भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण से प्रभावित है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने इंडियन फॉरेस्टर के विशेष अंक और बॉन चैलेंज (2011-2020) पर भारत की दूसरी प्रगति रिपोर्ट का भी विमोचन किया। रिपोर्ट में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए भूमि बहाली प्रयासों, उनके सामाजिक-आर्थिक लाभों तथा पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण में उनकी भूमिका का विस्तृत विवरण दिया गया है।

इस अवसर पर वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव श्री सुशील कुमार अवस्थी, पर्यावरण मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव डॉ. एंजेला लुसिगी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में केंद्र एवं राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज संगठनों के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का समापन मरुस्थलीकरण की चुनौती से निपटने, भूमि बहाली को गति देने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित एवं टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *