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रुपया शुरुआती कारोबार में एक पैसे टूटकर 90.67 प्रति डॉलर पर

मुंबई, 16 फरवरी (भाषा) रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में एक पैसा टूटकर 90.67 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर मामूली वृद्धि और देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट का भी स्थानीय मुद्रा पर दबाव रहा।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.63 प्रति डॉलर पर मजबूत खुला। हालांकि फिर 90.67 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से एक पैसे की गिरावट दर्शाता है।

रुपया शुक्रवार को सीमित दायरे में कारोबार करता हुआ पांच पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.66 पर बंद हुआ था।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.93 पर रहा।

घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 71.53 अंक टूटकर 82,555.23 अंक पर जबकि निफ्टी 11.95 अंक फिसलकर 25,459.15 अंक पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 67.78 डॉलर प्रति बैरल रहा।

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 7,395.41 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, छह फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.711 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 717.064 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया।

भ्रष्टाचार के आरोपी यूक्रेन के पूर्व ऊर्जा मंत्री सीमा पर गिरफ्तार; देश छोड़कर भागने की फिराक में थे गालुशचेंको

इंटरनेशनल डेस्क : यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पूर्व ऊर्जा मंत्री जर्मन गालुशचेंको (German Galushchenko) को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें रविवार को उस समय हिरासत में लिया गया जब वे अवैध रूप से देश की सीमा (स्टेट बॉर्डर) पार कर भागने की कोशिश कर रहे थे।

100 मिलियन डॉलर का भ्रष्टाचार : घोटाला नेशनल एंटी-करप्शन ब्यूरो ऑफ यूक्रेन (NABU) के अनुसार, गालुशचेंको देश के ऊर्जा क्षेत्र में हुए एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश में शामिल हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह करीब 100 मिलियन डॉलर (लगभग 800 करोड़ रुपये से अधिक) की एक बड़ी स्कीम थी, जिसमें सरकारी न्यूक्लियर ऑपरेटर से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में हेरफेर की गई थी।

रिश्वत और अवैध लेनदेन के आरोप: गालुशचेंको पर आरोप है कि उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में अवैध वित्तीय प्रवाह (financial flow) को मैनेज करने में मदद की और ठेकेदारों को 10 से 15 प्रतिशत तक की रिश्वत देने के लिए मजबूर किया। यह घोटाला कथित तौर पर बिजनेसमैन तैमूर मिंडिच द्वारा रचा गया था, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह पहले ही यूक्रेन छोड़कर भाग चुका है।

युद्ध के समय भ्रष्टाचार से जनता में आक्रोश: यूक्रेन इस समय रूस के भीषण हमलों का सामना कर रहा है और उसका ऊर्जा ढांचा (Energy Infrastructure) पूरी तरह तबाह हो चुका है। ऐसे संकटपूर्ण समय में ऊर्जा क्षेत्र में हुए इस बड़े घोटाले और अधिकारियों की संलिप्तता ने यूक्रेन की जनता में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। गालुशचेंको उन कई मंत्रियों में शामिल थे जिन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पिछले साल नवंबर 2025 में अपने पदों से इस्तीफा दिया था।