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गांवों में बिना लाइसेंस खांसी की सिरप की बिक्री पर रोक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने वापस ली छूट

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने खांसी की दवाइयों की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री पर दी गई विशेष छूट को वापस ले लिया है। इस संबंध में मंत्रालय ने 29 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की थी, जिसे 30 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

पहले औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘के’ के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री के लिए कुछ लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट दी गई थी। अब संशोधन के तहत “सीरप” शब्द को हटाए जाने के बाद यह छूट समाप्त हो गई है।

इस फैसले के बाद छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी के माध्यम से ही किया जा सकेगा। बिना लाइसेंस के खांसी की सिरप बेचने की अनुमति नहीं होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह कदम दवाइयों के निर्माण, वितरण और बिक्री पर नियामक निगरानी को मजबूत करने तथा जन स्वास्थ्य सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे खांसी की दवाइयों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और पूरे देश में दवा बिक्री संबंधी नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने खांसी की दवाइयों के निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के सभी लाइसेंसिंग और नियामक प्रावधानों का सख्ती से पालन करें।

इस निर्णय को ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने खांसी की दवाइयों की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री पर दी गई विशेष छूट को वापस ले लिया है। इस संबंध में मंत्रालय ने 29 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की थी, जिसे 30 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

पहले औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘के’ के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री के लिए कुछ लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट दी गई थी। अब संशोधन के तहत “सीरप” शब्द को हटाए जाने के बाद यह छूट समाप्त हो गई है।

इस फैसले के बाद छोटे गांवों में खांसी की सिरप की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी के माध्यम से ही किया जा सकेगा। बिना लाइसेंस के खांसी की सिरप बेचने की अनुमति नहीं होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह कदम दवाइयों के निर्माण, वितरण और बिक्री पर नियामक निगरानी को मजबूत करने तथा जन स्वास्थ्य सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे खांसी की दवाइयों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और पूरे देश में दवा बिक्री संबंधी नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने खांसी की दवाइयों के निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के सभी लाइसेंसिंग और नियामक प्रावधानों का सख्ती से पालन करें।

इस निर्णय को ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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