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NISCPR-RIS के बीच विज्ञान एवं नवाचार नीति को मजबूत करने के लिए MoU पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, नीति और कूटनीति के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए, राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान ने 6 मई को विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह सहयोग संयुक्त अनुसंधान, नीति विश्लेषण, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से किया जाएगा। यह साझेदारी विज्ञान नीति, संचार, कूटनीति और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में कार्य को बढ़ावा देगी, साथ ही समावेशी एवं सतत विकास के लिए संयुक्त परियोजनाओं, प्रकाशनों, नीतिगत संवादों, कार्यशालाओं और जनसंपर्क गतिविधियों का संचालन करेगी।

RIS के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी असमानताओं जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए विज्ञान कूटनीति को एक महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने आईटीईसी पाठ्यक्रम, आईजीओटी कर्मयोगी प्रशिक्षण, भारतीय विज्ञान कूटनीति मंच के प्रकाशन और दक्षिण एवं आईबीएसए फैलोशिप के माध्यम से वैश्विक साझेदारी सहित आरआईएस की पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

CSIR-NISCPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने इस साझेदारी को विकासशील देशों के लिए एक सहयोगात्मक और पारस्परिक लाभप्रद प्रयास बताया, जो कार्य समूहों और संयुक्त प्रकाशनों पर केंद्रित है। उन्होंने विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में NISCPR की भूमिका के साथ-साथ CSIR के अनुसंधान एवं विकास तंत्र, एचआईवी दवा नवाचारों, 15 ओपन-एक्सेस पत्रिकाओं पर प्रकाश डाला।

डॉ. राजन सुधेश रत्ना ने विकासशील देशों में विकास के एक प्रेरक के रूप में विज्ञान कूटनीति और सहयोग को मजबूत करने में दक्षिण के माध्यम से आरआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। CSIR-NISCPR के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. योगेश सुमन ने ग्रामीण आजीविका और सतत विकास के लिए CSIR प्रौद्योगिकियों के प्रसार में NISCPR की भूमिका पर बल दिया।

RIS की सलाहकार डॉ. स्नेहा सिन्हा ने कहा कि विज्ञान कूटनीति पर कार्यशालाओं और शोध सहित पूर्व के सहयोगों ने भविष्य के जुड़ाव के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। उन्होंने भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन से पहले भारत-अफ्रीका सहयोग पर केंद्रित विकासशील देशों में विज्ञान कूटनीति पर गोलमेज सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रौद्योगिकी साझाकरण तथा विज्ञान कूटनीति के दृष्टिकोण को एक संयुक्त रिपोर्ट में एकीकृत करने पर जोर दिया।

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