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बंगाल में बड़ा संवैधानिक संकट: राज्यपाल ने भंग की विधानसभा, ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बाद लिया कड़ा एक्शन

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद एक बड़ा संवैधानिक मोड़ आ गया है। चुनाव में करारी हार के बावजूद ममता बनर्जी द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद, राज्यपाल आर.एन. रवि ने कड़ा रुख अपनाते हुए बंगाल विधानसभा को भंग कर दिया है।

ममता का आरोप और इस्तीफे से इनकार: हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की 293 सीटों में से 207 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जिससे बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, ममता बनर्जी ने करीब 100 सीटों पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए अपनी हार स्वीकार करने से मना कर दिया और मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जबरन हराया गया है।

राज्यपाल की संवैधानिक कार्रवाई : ममता बनर्जी के अड़ियल रुख को देखते हुए, राज्यपाल आर.एन. रवि ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए विधानसभा भंग करने का आदेश जारी किया। यह आदेश 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है, जिसके साथ ही 17वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया और ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल भी स्वाभाविक रूप से खत्म हो गया है।

9 मई को होगा नई सरकार का शपथ: ग्रहण दूसरी ओर, भाजपा ने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार रात कोलकाता पहुँच रहे हैं, जहाँ शुक्रवार को विधायक दल के नेता का चयन किया जाएगा।शपथ ग्रहण समारोह: 9 मई को रवींद्र जयंती के अवसर पर कोलकाता के ब्रिग्रेड मैदान में होगा।

प्रमुख अतिथि: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस समारोह में शामिल होंगे।

सुरक्षा: समारोह की सुरक्षा की जिम्मेदारी SPG, कोलकाता पुलिस और सेंट्रल फोर्सेज के पास होगी। इस ऐतिहासिक बदलाव के साथ बंगाल में 15 सालों के ममता बनर्जी के शासन का अंत हो गया है और 18वीं विधानसभा के गठन की तैयारी शुरू हो गई है।

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