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प्राइवेट कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: 2026 में 9.1% तक बढ़ेगी सैलरी, चीन और अमेरिका को पछाड़कर भारत सबसे आगे

बिजनेस डेस्क : भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और टैलेंट की बढ़ती मांग के बीच प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। ‘Aon India’ के 32वें वार्षिक सैलरी इंक्रीज सर्वे के अनुसार, साल 2026 में भारतीय कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 9.1% की बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह आंकड़ा साल 2025 में दर्ज की गई 8.9% की वृद्धि से भी अधिक है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के मजबूत जॉब मार्केट को दर्शाता है।

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आगे भारत: सैलरी बढ़ोतरी के मामले में भारत दुनिया के विकसित देशों को पीछे छोड़ने की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक:

—-भारत: 9.1%

—-चीन: 4.8%

—-अमेरिका: 4.3%

—-यूनाइटेड किंगडम: 4.1%

—-जापान और जर्मनी: लगभग 3.7% – 3.9%

इसके अलावा, जहां विकसित देशों की जीडीपी ग्रोथ 2% से कम रहने की संभावना है, वहीं भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान है।

इन सेक्टरों में होगी सबसे ज्यादा बढ़ोतरी: सर्वे के अनुसार, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) में सबसे ज्यादा सैलरी बढ़ सकती है। इनके अलावा ऑटोमोबाइल, वाहन निर्माण, इंजीनियरिंग डिजाइन और रिटेल जैसे क्षेत्रों में भी औसत से अधिक इजाफा होने की उम्मीद है। कंपनियां विशेष रूप से टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग जैसे स्किल्ड रोल्स में अधिक निवेश कर रही हैं।

नौकरी छोड़ने वालों की संख्या में कमी: अच्छी खबर यह भी है कि अब कर्मचारी अपनी नौकरियों में अधिक स्थिरता दिखा रहे हैं। नौकरी छोड़ने की दर (Attrition rate) घटकर 16.2% पर आ गई है, जो 2023 में 18.7% थी। यह महामारी से पहले वाली स्थिरता की वापसी का संकेत है।

नए ‘वेज कोड’ का दिखेगा असर: भारत में नए लेबर कोड लागू होने के बाद कंपनियां अपने सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 35% कंपनियां बेसिक सैलरी बढ़ाने की योजना बना रही हैं ताकि 50% वेज नियम का पालन किया जा सके। करीब 73% कंपनियां फिलहाल इन नए नियमों के वित्तीय प्रभाव को समझने में जुटी हैं।

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