सर्बानंद सोनोवाल ने गोवा के नए कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल का उद्घाटन किया, गोवा वाटर मेट्रो को मिली प्राथमिकता
गोवा / सत्ता संदेश
26 जून को पणजी में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गोवा के नए कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। 48.87 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस तटीय सुविधा का उद्देश्य समुद्री प्रशासन को सुदृढ़ करना, पोतों की निगरानी तथा नौवहन में सुधार करना तथा राज्य के सतत् समुद्री विकास के विज़न को समर्थन देना है।
गोवा राज्य अवसंरचना विकास निगम द्वारा विकसित यह जी+3 भवन 4,405 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है और यह कैप्टन ऑफ पोर्ट्स के वर्तमान कार्यालय की जगह लेगा, जो विभाग की बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त हो गया था। नदी के तट पर खड़े एक पोत की आकृति से प्रेरित यह नया टर्मिनल मांडवी नदी की ओर मुख किए हुए है और इसे प्रशासनिक केंद्र के साथ-साथ गोवा की समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने वाले एक प्रमुख स्थलचिह्न के रूप में डिजाइन किया गया है।
नया टर्मिनल नदी तट पर अधिक मज़बूती सुनिश्चित करने के लिए पाइल नींव तथा इस्पात और प्रबलित कंक्रीट की मिश्रित संरचना के साथ निर्मित किया गया है। कैप्टन ऑफ पोर्ट्स विभाग के कार्यालय के अतिरिक्त, इस भवन में आधुनिक यात्री सुविधाएँ, दोहरी ऊँचाई वाला सार्वजनिक लॉबी क्षेत्र, सम्मेलन सुविधाएँ, समुद्री एवं जल सर्वेक्षण कार्यालय, नैविगेशन कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर, रेडियो संचार केंद्र तथा सार्वजनिक सुविधाएँ भी शामिल हैं। लगभग 450 लोगों की बैठने की क्षमता वाला एक रूफटॉप एम्फीथिएटर, एक इनडोर रेस्तरां और एक खुला टैरेस भी इसमें शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले बारह वर्षों के दौरान भारत के समुद्री क्षेत्र में हुए परिवर्तन को रेखांकित करते हुए सोनोवाल ने कहा कि देश के बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हो गई है, जबकि पोतों का टर्नअराउंड समय 95 घंटे से घटकर 41 घंटे रह गया है। भारत के समुद्री नाविकों का कार्यबल बढ़कर 3.23 लाख से अधिक हो गया है, तटीय माल परिवहन दोगुने से अधिक हो गया है, क्रूज़ यात्रियों की आवाजाही में चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है तथा परिचालनरत राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या तीन से बढ़कर 32 हो गई है।
सोनोवाल ने मोरमुगाओ बंदरगाह प्राधिकरण के तीव्र विकास पर भी कहा कि वर्ष 2014 से अब तक 1,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली अवसंरचना परियोजनाएँ पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएँ कार्यान्वयनाधीन हैं। इनमें बर्थ संख्या 9 का पुनर्विकास, नए मत्स्य बंदरगाह सहित वास्को बे परियोजना, गहरे ड्राफ्ट वाले बर्थों के लिए कैपिटल ड्रेजिंग तथा आधुनिक नाविक क्लब शामिल हैं। मोरमुगाओ बंदरगाह भारत का पहला हरित बंदरगाह तथा हरित पोत प्रोत्साहन शुरू करने वाला पहला बंदरगाह भी बन गया है।

