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युवाओं को नशे से बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है – एसएसपी डॉ. दर्पण अहलूवालिया

खन्ना /सत्ता संदेश

एसएसपी के नेतृत्व में, “नशे के खिलाफ जंग” अभियान को नई दिशा मिली, स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय और मजबूत हुआ

एसएसपी डॉ. दर्पण अहलूवालिया ने समराला के सिविल अस्पताल स्थित नशामुक्ति केंद्र का दौरा किया

खन्ना पुलिस जिले ने नशा विरोधी अभियान को और तेज करते हुए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. दर्पण अहलूवालिया ने “नशा विरोधी जंग” अभियान के तहत आज समराला के सिविल अस्पताल स्थित नशामुक्ति केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों से बातचीत की और उन्हें नशा से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर एसएसपी ने समराला के एसएमओ और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक की। बैठक में मादक पदार्थों के उन्मूलन और पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय को मजबूत करने की प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती, बल्कि उपचार और जागरूकता भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।

एस.एस.पी. डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने कहा कि खन्ना पुलिस नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है और साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से मरीजों को दोबारा समाज से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर एक संयुक्त योजना के तहत काम करने की बात कही, ताकि नशे की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया कि वे इस अभियान में पूरा सहयोग देंगे और नशा मुक्ति सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। अंत में एस.एस.पी. ने लोगों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ इस लड़ाई में पुलिस का साथ दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

इस दौरान मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नवनीत कौर ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि नशा एक मानसिक और शारीरिक बीमारी है, जिसका इलाज संभव है, अगर मरीज को सही समय पर सही मदद मिले। उन्होंने बताया कि नशा छोड़ने वाले व्यक्तियों को केवल दवाइयों ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग और पारिवारिक सहयोग की भी जरूरत होती है।

डॉ. नवनीत कौर ने जोर देकर कहा कि समाज को नशे के आदी लोगों का तिरस्कार नहीं करना चाहिए, बल्कि उनकी मदद करनी चाहिए, ताकि वे फिर से सामान्य जीवन जी सकें। उन्होंने ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि हम सभी को इस मुहिम में सहयोग देना चाहिए।

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