बाइरैक निदेशक जितेंद्र कुमार ने IISER मोहाली में संभाला प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस का कार्यभार
मोहाली / सत्ता संदेश
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) मोहाली को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि प्रतिष्ठित जैव-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) जितेन्द्र कुमार ने 03 अगस्त, 2026 से संस्थान में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है।
डॉ. कुमार जैव-प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण, उद्यमिता तथा विज्ञान नीति के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। आईआईएसईआर मोहाली से जुड़ने से पूर्व वे भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक)के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने भारत के जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाइरैक में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नीति निर्माण, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण, वित्तपोषण तंत्र के विकास तथा जैव-प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्ट-अप्स के मार्गदर्शन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों से देश में जैव-प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार और उद्यमिता को उल्लेखनीय गति मिली।
बाइरैक से पूर्व वे बैंगलोर जैव नवाचार केंद्र के प्रबंध निदेशक भी रहे। यह केंद्र भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा कर्नाटक सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की संयुक्त पहल है। इस दायित्व के दौरान उन्होंने जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार तथा स्टार्ट-अप पारितंत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. कुमार ने जैव-प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. की उपाधि सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमटेक), चंडीगढ़ से, जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से संबद्ध है, प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय एट शिकागो तथा द ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में पोस्ट-डॉक्टोरल अनुसंधान किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने द ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी से प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं व्यावसायीकरण विषय में एमबीए भी प्राप्त किया, जो विज्ञान एवं नवाचार प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है। वर्ष 2009 में भारत लौटने के पश्चात उन्होंने आईकेपी नॉलेज पार्क, हैदराबाद में उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने स्टार्ट-अप्स तथा नवाचार पारितंत्र के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया।
अपने विशिष्ट व्यावसायिक जीवन के दौरान डॉ. कुमार ने जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार, अनुप्रयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रबंधन, इनक्यूबेशन तथा उद्यमिता के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने नवाचार पारितंत्र की स्थापना, अनेक जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप्स के मार्गदर्शन, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय जैव-प्रौद्योगिकी तथा स्टार्ट-अप नीतियों के निर्माण तथा अनेक उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रमों का सफल नेतृत्व किया है। उनके योगदान का प्रमाण उनके वैज्ञानिक शोध-पत्रों, पेटेंटों, नीति निर्माण संबंधी पहलों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त अनेक सम्मान एवं पुरस्कारों से मिलता है।
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल त्रिपाठी ने डॉ. जितेन्द्र कुमार का स्वागत करते हुए कहा, “मैं डॉ. जितेन्द्र कुमार का भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में हार्दिक स्वागत करता हूँ। प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं व्यावसायीकरण के क्षेत्र में उनका व्यापक अनुभव न केवल भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली में, बल्कि पूरे ट्राइसिटी क्षेत्र और उससे आगे भी एक सशक्त एवं जीवंत उद्यमशीलता संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस का पद ऐसे प्रतिष्ठित पेशेवरों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता की सर्वोच्च ऊँचाइयों को प्राप्त किया हो तथा जो अपने अनुभव एवं ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के इच्छुक हों।”
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के डीन (संकाय), प्रो. जसजीत सिंह बगला ने डॉ. कुमार का स्वागत करते हुए कहा, “हमें अत्यंत प्रसन्नता है कि डॉ. जितेन्द्र कुमार प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में आईआईएसईआर मोहाली से जुड़े हैं। जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्यमिता तथा विज्ञान नीति के क्षेत्र में उनका असाधारण नेतृत्व हमारे संस्थान के उस प्रयास को और अधिक सशक्त करेगा, जिसके माध्यम से मौलिक अनुसंधान को समाज एवं उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ा जा सके। नवाचार पारितंत्र के विकास तथा स्टार्ट-अप्स के संवर्धन में उनका अनुभव हमारे संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को अनुप्रयुक्त अनुसंधान तथा उद्यमशीलता से संबंधित नई संभावनाओं से जोड़ने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।”
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में डॉ. कुमार संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा नवप्रवर्तकों के साथ मिलकर अंतःविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देंगे, नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करेंगे, उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के मध्य सहयोग को सुदृढ़ करेंगे तथा वैज्ञानिक अनुसंधानों को समाज एवं उद्योग के लिए उपयोगी प्रौद्योगिकियों में रूपांतरित करने की दिशा में कार्य करेंगे।
उनकी नियुक्ति से भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के अनुप्रयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा नवाचार-आधारित शिक्षा को नई गति मिलने की अपेक्षा है।
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली को विश्वास है कि डॉ. कुमार की विशेषज्ञता एवं अनुभव के माध्यम से अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा उद्यमिता के क्षेत्रों में नए अवसर विकसित होंगे और संस्थान विज्ञान में उत्कृष्टता तथा उसके सामाजिक उपयोग के अपने उद्देश्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेगा।

