भीषण गर्मी से थमी ’10-मिनट डिलीवरी’ की रफ्तार; दोपहर में काम नहीं कर रहे डिलीवरी पार्टनर्स
बिजनेस डेस्क : देश में बढ़ती भीषण गर्मी (हीटवेव) ने क्विक कॉमर्स कंपनियों के 10-मिनट डिलीवरी मॉडल के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। दोपहर के व्यस्त घंटों में, जब तापमान चरम पर होता है, तब बड़ी संख्या में डिलीवरी पार्टनर्स काम करने से बच रहे हैं, जिससे कंपनियों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
डिलीवरी पार्टनर्स की कमी के कारण: तेज धूप और लू के अलावा, कई डिलीवरी पार्टनर्स चुनाव और फसल कटाई के चलते अपने गृह राज्यों में लौट गए हैं, जिससे मेट्रो शहरों में मैनपावर की भारी कमी हो गई है। वहीं दूसरी ओर, गर्मी के कारण आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, जूस, पंखे और कूलर जैसे उत्पादों की मांग में 15-20% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। कुछ क्षेत्रों में तो मांग सामान्य से 2-3 गुना तक बढ़ गई है, जिससे प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कंपनियों के प्रयास और राहत के कदम: हालात संभालने के लिए Amazon, Flipkart Minutes और BigBasket जैसी कंपनियां डिलीवरी पार्टनर्स को लुभाने के लिए अतिरिक्त इंसेंटिव दे रही हैं। दोपहर के समय राइडर्स को प्रति डिलीवरी 8-15 रुपये अतिरिक्त दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, कंपनियों ने राइडर्स की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
हीट-इंडेक्स मॉनिटरिंग और डॉक्टर से सलाह की सुविधा। इलेक्ट्रोलाइट्स, हाइड्रेशन और रेस्टिंग फैसिलिटी (आराम करने की जगह) उपलब्ध कराना। ऐप में ‘समर एसेंशियल्स’ का अलग सेक्शन बनाना ताकि जरूरी सामान जल्दी पहुंचाया जा सके।इस बीच, ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन ने सरकार से मांग की है कि गिग वर्कर्स के लिए हीटवेव प्रोटेक्शन को अनिवार्य किया जाए।
यह संकट दर्शाता है कि मांग अधिक होने के बावजूद, चरम मौसम की स्थिति में सप्लाई बनाए रखना ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक बड़ी कमजोरी साबित हो रही है।

