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अमृतसर दुर्गियाना मंदिर में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण दर्शन को उमड़ी भीड

अमृतसर / सत्ता संदेश

भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव देश-दुनिया में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में अमृतसर के प्रसिद्ध दुर्गियाना मंदिर में भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया और भोर होते-होते मंदिर परिसर में भक्तों की संख्या बढ़ती गई।

भगवान श्री कृष्ण के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दुर्गियाना मंदिर पहुंचे। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर को फूलों और आकर्षक रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। मंदिर परिसर में विशेष साफ-सफाई के साथ भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।

श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के दर्शन कर सुख-शांति और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते नजर आए। मंदिर परिसर में ‘जय श्री कृष्ण’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

दुर्गियाना मंदिर के पुजारी पंडित मेघा शाम लाल ने बताया कि सनातन धर्म में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग में इसी दिन आधी रात को भगवान श्री कृष्ण का अवतार हुआ था। इसी कारण हर वर्ष भक्त भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं।

उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर मंदिर में पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। मंदिर की सजावट के साथ भगवान की पूजा और जन्मोत्सव से जुड़े सभी धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी पूरी कर ली गई है।

पुजारी के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के जन्म के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। भगवान का पंचामृत, दूध, दही, शहद, चीनी और गंगाजल आदि से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाकर मक्खन, मिठाई और अन्य भोग अर्पित किए जाएंगे।

रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण के जन्म के अवसर पर विशेष आरती और पूजा का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है।

मंदिर के पुजारी राधे श्याम ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी जन्माष्टमी का पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद विशेष धार्मिक रस्में और अभिषेक किए जाएंगे। भक्त इस दौरान भगवान के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेंगे।

उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचार के प्रतीक कंस का अंत कर धर्म की स्थापना का संदेश दिया था। जन्माष्टमी का पर्व लोगों को सत्य, धर्म और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

दुर्गियाना मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। मंदिर परिसर ‘जय श्री कृष्ण’ के जयकारों से गूंज रहा है और पूरे क्षेत्र में भक्ति एवं उत्साह का माहौल बना हुआ है।


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