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“रीसेंट एडवांसमेंट इन बायोइमेजिंग” पर NIPER मोहाली में कार्यशाला का आयोजन

मोहाली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर), मोहाली के चिकित्सा उपकरण विभाग ने “रीसेंट एडवांसमेंट इन बायोइमेजिंग” विषय पर चार दिवसीय कार्यशाला का 18 अगस्त 2026 को शुभारंभ किया। यह कार्यशाला 18 से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में वाइडफील्ड और कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी में हालिया विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसमें तकनीकी सत्र, प्रदर्शन और प्रतिभागियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल हैं।

कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. दुलाल पांडा, निदेशक, नाईपर, मोहाली ने किया। इस अवसर पर एसोसिएट डीन, रजिस्ट्रार, संकाय सदस्य, आमंत्रित विशेषज्ञ और प्रतिभागी उपस्थित थे। अपने स्वागत संबोधन में प्रो. दुलाल पांडा ने माइक्रोस्कोपी के विकास, विशेष रूप से कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी के एक शक्तिशाली आधुनिक जैविक और जैव-चिकित्सीय अनुसंधान उपकरण के रूप में विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोपी की परिवर्तनकारी भूमिका और ग्रीन फ्लोरोसेंट प्रोटीन (GFP) की खोज पर भी जोर दिया तथा बताया कि इमेजिंग में प्रगति ने शोधकर्ताओं को सेलुलर और मॉलिक्यूलर प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्टता और सटीकता के साथ देखने में सक्षम बनाया है।

निदेशक के संबोधन के बाद, प्रो. इप्सिता रॉय, एसोसिएट डीन, नाईपर, मोहाली ने तकनीकी प्रगति के महत्व पर जोर दिया और छात्रों को विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से संवाद करने तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से अनुभव प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यशाला के आयोजक डॉ. अजय कुमार, तथा सह-आयोजक प्रो. तरुण शर्मा और डॉ. दीपांकर दास, चिकित्सा उपकरण विभाग, ने प्रतिभागियों को प्रश्न पूछने, नई संभावनाओं का पता लगाने और पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सोचने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यशाला में वाइडफील्ड और कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी के मूल सिद्धांतों और नवीनतम विकास के साथ-साथ सिस्टम प्रदर्शन और बहुआयामी इमेजिंग में व्यावहारिक प्रशिक्षण से संबंधित सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। अंतिम दो दिन कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी का उपयोग करके व्यक्तिगत प्रयोगशाला नमूनों के अधिग्रहण और विश्लेषण के लिए समर्पित हैं, जिससे प्रतिभागियों को कार्यशाला के दौरान सीखी गई अवधारणाओं और तकनीकों को अपने स्वयं के शोध नमूनों पर लागू करने का अवसर मिलेगा।

कार्यशाला का उद्देश्य एडवांस्ड बायोइमेजिंग तकनीकों के बारे में प्रतिभागियों की समझ को मजबूत करना और उन्हें फार्मास्युटिकल, जैव-चिकित्सीय तथा जीवन-विज्ञान अनुसंधान में इन तकनीकों को लागू करने के लिए व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है।

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