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बोत्सवाना से लाए गए नौ चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचे
श्योपुर (मप्र), 28 फरवरी (सत्ता संदेश) बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों को शनिवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) पहुंचाया गया, इसके साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि देश में चीतों की आबादी फिर से बढ़ाने के लिए चार वर्षीय ‘चीता पुनर्वास योजना’ के तहत अफ्रीका से तीसरी बार चीतों को लाया गया है। इन चीतों को भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के विमान से लाया गया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव पार्क में तैयार बाड़ों में इन चीतों को छोड़ेंगे।
श्योपुर की जनसंपर्क अधिकारी अवंतिका श्रीवास्तव ने संवाददाताओं को बताया कि बोत्सवाना से चीतों को भारतीय वायुसेना के विमान से ग्वालियर लाया गया और वहां से वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए उन्हें केएनपी पहुंचाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को यहां लाया जा चुका है।
‘प्रोजेक्ट चीता’ के निदेशक उत्तम शर्मा ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई है। वायुसेना ने फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से तथा सितंबर 2022 में नामीबिया से चीतों को भारत पहुंचाया था।
उन्होंने कहा, ‘‘अधिक चीतों के आने से भारत के चीता पुनर्वास कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार के सहयोग से हम जल्द से जल्द इनकी संख्या 50 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं।’’
 शर्मा ने बताया कि तीन चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया है, जबकि 36 चीते कूनो में ही हैं।
अधिकारियों ने कहा कि विलुप्तप्राय प्रजातियों को सामान्यतः एक ही आवास में नहीं रखा जाता, क्योंकि किसी संक्रामक बीमारी के फैलने पर पूरी आबादी को खतरा रहता है।
चीता करीब सात दशक पहले भारत से विलुप्त हो गया था।
पिछले वर्ष उद्यान में 12 शावकों का जन्म हुआ था, जिनमें से तीन शावकों समेत छह की मौत हो गई। इस वर्ष सात फरवरी से 18 फरवरी के बीच दो बार में नौ शावकों का जन्म हुआ। वर्ष 2023 से अब तक केएनपी में कुल 39 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 27 जीवित हैं।
नामीबिया से लाई गई ‘ज्वाला’ और ‘आशा’, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई ‘गामिनी’, ‘वीरा’ और ‘निरवा’ तथा भारत में जन्मी ‘मुखी’ ने केएनपी में शावकों को जन्म दिया है।
पंजाबी फिल्मों ने हमारी संस्कृति को बचाए रखने और फैलाने में अहम भूमिका निभाई है – कृष्ण कुमार बावा


सनी की हिंदी फिल्म माता-पिता के सम्मान का संदेश देती है – मलकीत सिंह दाखा
लुधियाना: 19 फरवरी – (सत्ता संदेश) आज यहां प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष राजीव कुमार लवली और चेयरमैन गुरनाम सिंह धालीवाल के नेतृत्व में पंजाबी फिल्म ‘सनी दी हनी’ के कलाकारों के लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए पंजाब के पूर्व मंत्री मलकीत सिंह दाखा ने कहा कि सनी की फिल्म माता-पिता का सम्मान करने के बारे में है। यह एक संदेश देती है, इसलिए हमें युवा पीढ़ी के लिए इस प्रेरणादायक फिल्म के कलाकारों को बधाई देनी चाहिए। श्री दाखा ने कहा कि पंजाब के कलाकारों ने आज पूरी दुनिया में नाम कमाया है, जब हम हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों का इस्तेमाल करते हैं, तो कई कलाकार पंजाब और पंजाबी मिट्टी से आए हैं। मालवा सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष कृष्ण कुमार बावा ने कहा कि पंजाबी फिल्मों ने हमारी संस्कृति को बचाए रखने और संदेश को फैलाने में अहम भूमिका निभाई है, इसी तरह यह फिल्म ‘सनी दी हनी’ एक सार्थक संदेश देने में सफल रही है। श्री बावा ने कहा कि इस फिल्म के नायक बीन जौजा और नायिका मुग्धा ने अपने अभिनय से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया है। मोੋਹੇ ਹਨ । इस भावी अवसर पर फिल्म के निर्देशक मनजिंदर सिंह के साथ-साथ फिल्म के नायक ‘बीन जौजा’ और अभिनेता रूपिंदर रूपी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर फिल्म ‘सनी दी हनी’ का एक विशेष शो भी दिखाया गया। इस शो के बाद फाउंडेशन के अध्यक्ष राजीव कुमार लवली ने सभी का स्वागत किया और कहा कि हमें अच्छे सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों की जरूरत है। इसीलिए हम सनी की हिंदी फिल्म को जी आए कहते हैं। श्री लवली फिल्म के निर्माता, निर्देशक और निर्देशक हैं। कलाकारों की कड़ी मेहनत की प्रशंसा की और कहा कि यह फिल्म युवा पीढ़ी को अपने माता-पिता का सम्मान करना सिखाती है। एक संदेश देती है। महान लोक गायक श्री मुहम्मद सादिक और कनाडा से विशेष रूप से आए लोक गायक सतिंदरपाल सिंह सिधवां प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के चेयरमैन गुरनाम सिंह धालीवाल ने कहा कि फाउंडेशन कलाकारों को शुरू से ही बढ़ावा देता है क्योंकि स. जगदेव सिंह जस्सोवाल ने पंजाबी की स्थापना की थी। हमेशा साहित्य और कलाकारों को संरक्षण दिया है। इस मौके पर उन्होंने मलकीत सिंह दाखा, मुहम्मद सादिक, कृष्ण कुमार बावा और कला प्रेमियों के एक ग्रुप से मुलाकात की। धन्यवाद दिया।
तस्वीर: प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान सनी की हिंदी फिल्म आनंद का आनंद लेते हुए। श्री मुहम्मद सादिक, राजीव कुमार लवली, मलकीत सिंह दाखा, कृष्ण कुमार बावा और कला को सम्मानित करते हुए।

शी-बॉक्स पोर्टल: कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा का डिजिटल कवच

लेखिका : श्रीमती सावित्री ठाकुर, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार

भारत जब 2047 में अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है, तब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने महिला-नेतृत्वित विकास को राष्ट्रीय प्रगति का केंद्र बिंदु बनाया है। महिलाओं की समावेशी आर्थिक वृद्धि में निर्णायक भूमिका को स्वीकार करते हुए सरकार ने ऐसा सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील कार्य वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे महिलाएं आत्मविश्वास के साथ कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ सकें। इसी दिशा में कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ के रूप में कार्य करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते एक दशक में महिला सशक्तिकरण को केवल एक नारा नहीं, बल्कि नीति, संरचना और प्रभावी क्रियान्वयन का विषय बनाया है। “नारी शक्ति” को राष्ट्र की उन्नति का आधार मानते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापक संस्थागत सुधार किए गए हैं। इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक उदाहरण है महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में प्रारंभ किया गया शी-बॉक्स पोर्टल, जो कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और न्याय तक सहज पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त डिजिटल मंच के रूप में उभरा है।

आज भारत में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। महिला श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7% हो गई। सरकारी और निजी क्षेत्रों के साथ-साथ नवप्रारंभ उद्यमों, सेवा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और असंगठित क्षेत्रों में भी महिलाएँ बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। ऐसे में यह अनिवार्य हो जाता है कि कार्यस्थल सुरक्षित, सम्मानजनक और भय-मुक्त हों। कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पोश अधिनियम) इसी उद्देश्य से बनाया गया था। मोदी सरकार ने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल सुशासन के तहत शी-बॉक्स पोर्टल को 29 अगस्त 2024 को तकनीकी सुधारों के साथ पुनः प्रारंभ किया, जिससे यह अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और पारदर्शी बन सके। यह पोर्टल देशभर में गठित आंतरिक समितियों (आंतरिक समिति – आईसी) और स्थानीय समितियों (स्थानीय समिति – एलसी) से संबंधित सूचनाओं का एक केंद्रीकृत भंडार प्रदान करता है।

शी-बॉक्स पोर्टल का उन्नत संस्करण महिलाओं को सीधे संबंधित आईसी या एलसी के पास शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। इससे शिकायत प्रक्रिया में होने वाली देरी और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप में कमी आती है। शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मंच सरकारी या निजी, संगठित या असंगठित — हर क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए समान रूप से सुलभ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार की महिला सुरक्षा की नीति किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि समावेशी है।

प्रधानमंत्री मोदी के “डिजिटल इंडिया” दृष्टिकोण के अनुरूप, शी-बॉक्स पोर्टल महिलाओं को सुरक्षित, सरल और गोपनीय तरीके से शिकायत दर्ज करने और उसकी प्रगति का ऑनलाइन अनुश्रवण करने की सुविधा देता है। पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायत सीधे संबंधित कार्यस्थल की आंतरिक समिति या जिले की स्थानीय समिति तक पहुँचती है। गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि आंतरिक समिति की अध्यक्ष के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शिकायत का विवरण नहीं देख सकता, जिससे पीड़िता की पहचान सुरक्षित रहती है।

पोश अधिनियम के तहत सरकार का दायित्व है कि वह शिकायतों से संबंधित आँकड़ों का संधारण और निगरानी करे। इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी शिकायत की जाँच के लिए 90 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसका पालन सुनिश्चित करने में शी-बॉक्स पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय द्वारा डैशबोर्ड चेतावनी, ईमेल और संदेश के माध्यम से नियमित स्मरण-पत्र भेजे जा रहे हैं। यह सक्रिय प्रणाली मोदी सरकार की उत्तरदायित्व और परिणाम-आधारित शासन की सोच को दर्शाती है।

शी-बॉक्स पोर्टल की प्रभावशीलता में नोडल अधिकारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक कार्यस्थल पर नियुक्त नोडल अधिकारी, नियोक्ता, आंतरिक/स्थानीय समिति और शिकायतकर्ता के बीच समन्वय स्थापित करते हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि शिकायतें केवल दर्ज न हों, बल्कि उन पर समय पर और नियमानुसार कार्रवाई भी हो।

महिला-केंद्रित नीतियों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो आज देश में 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, और लखपति दीदी जैसी पहल के माध्यम से लाखों महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वहीं नमो ड्रोन दीदी जैसी अभिनव योजनाएँ महिलाओं को आधुनिक तकनीक, कृषि सेवाओं और उद्यमिता से जोड़ते हुए उन्हें नए और औपचारिक कार्यक्षेत्रों में प्रवेश का अवसर दे रही हैं। ऐसे में जब बड़ी संख्या में महिलाएँ पहली बार संगठित और औपचारिक कार्यस्थलों का हिस्सा बन रही हैं, शी-बॉक्स पोर्टल जैसा मंच उन्हें यह भरोसा देता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है — न केवल कानून बनाकर, बल्कि उसे ज़मीन पर प्रभावी और जवाबदेह ढंग से लागू करके।

बहुभाषी समर्थन, वास्तविक-समय अनुश्रवण और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को केवल एक कानूनी प्रावधान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे एक व्यवस्थित, भरोसेमंद और जवाबदेह संस्थागत ढांचे में परिवर्तित करता है।

शी-बॉक्स पोर्टल वास्तव में एक दूरदर्शी दृष्टि का सशक्त प्रतिबिंब है, जहाँ नारी शक्ति को भय से मुक्त कर, सम्मान और आत्मविश्वास के साथ कार्यस्थलों में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है, ताकि महिलाएँ अपनी पूरी क्षमता के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।

स्टालिन ने 1.31 करोड़ महिलाओं के खाते में पांच-पांच हजार रुपये सहायता राशि जमा करने की घोषणा की

चेन्नई, 13 फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी महिला लाभार्थी योजना के तहत 1.31 करोड़ महिला लाभार्थियों के खाते में पांच-पांच हजार रुपये जमा किए हैं।

स्टालिन ने इसके साथ ही यह भी घोषणा की कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पार्टी सत्ता में आती है तो वे मासिक सहायता दोगुनी करके 2,000 रुपये कर देंगे।

उन्होंने बताया कि कलैगनार महिला पात्रता योजना के लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे 5,000 रुपये जमा कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आपको आज सुबह 5,000 रुपये मिल गए होंगे। मैंने यह राशि इसलिए प्रदान करने का निर्णय लिया है क्योंकि कुछ स्वार्थी तत्व आगामी चुनाव का हवाला देकर योजना को स्थगित करने का प्रयास कर रहे हैं।’’

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘इसलिए, महिलाओं को मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता से वंचित करने के प्रयास का मुकाबला करने के लिए उन्होंने फरवरी से तीन महीने तक यह राशि प्रदान करने तथा इसके अलावा गर्मियों के दौरान उनके खर्चों को पूरा करने के लिए 2,000 रुपये भी प्रदान करने का निर्णय लिया है।’’

स्टालिन ने संदेश में कहा, ‘‘इतना ही नहीं, द्रमुक के इस साल सत्ता में वापस आने के बाद 1,000 रुपये की मासिक राशि बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दी जाएगी।’’

द्रमुक के अध्यक्ष स्टालिन ने कहा, ‘‘मैं बहनों से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों की शिक्षा संबंधी जरूरतों, दवाइयों या अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए इस राशि का विवेकपूर्ण उपयोग करें’’ और उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी सत्ता में वापस आए

AI कैसे बदल सकता है भारत के किसानों की तकदीर

लेखिका: सुश्री रुबल चिब, सह-संस्थापक, क्यूज़ेंस लैब्स

भारत में अब एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा सिर्फ नई तकनीक के रूप में नहीं हो रही है। ध्यान इस बात पर जा रहा है कि एआई आम लोगों की असली समस्याएँ कैसे हल कर सकता है। खेती और खाद्य क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, क्योंकि यहाँ समस्याएँ छोटी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था से जुड़ी हैं। यहाँ कोई भी तकनीक तभी सफल होगी जब वह मौसम, ढुलाई और बाज़ार जैसी स्थानीय परिस्थितियों को समझे।

भारत इतना भोजन पैदा करता है कि पूरी आबादी का पेट भर सके, फिर भी हर साल करीब 6.8 करोड़ टन खाना बर्बाद हो जाता है। कटाई के बाद 35 से 40 प्रतिशत फल और सब्जियाँ खराब हो जाती हैं। यह समस्या उत्पादन की कमी की नहीं, बल्कि सही समय पर सही जानकारी और बेहतर व्यवस्था न होने की है। यानी खेत से बाज़ार तक तालमेल की कमी है और फैसले समय पर नहीं हो पाते। ऐसे में भारतीय परिस्थितियों के अनुसार बनाया गया एआई इस नुकसान को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

क्यूज़ेंस लैब्स में हमने इस बात पर गौर किया कि भारत की डिजिटल व्यवस्था ने भुगतान, पहचान और सेवाओं को बदल दिया है, लेकिन खाने के क्षेत्र में गुणवत्ता की जाँच अब भी पुराने तरीकों से होती है। इसी सोच के साथ हमने QScan नाम की एआई तकनीक विकसित की, जो इन्फ्रारेड तकनीक और कृत्रिम सूंघने की मदद से फल-सब्जियों की अंदर की गुणवत्ता पहचानकर तुरंत काम आने वाली जानकारी देती है। उदाहरण के तौर पर कोई फल या सब्जी कितने दिन तक चल सकती है कितने दिन स्टोर कर सकते हैं इत्यादि। इसका मकसद कम मुनाफे पर काम करने वाले किसानों, दुकानदारों और ग्राहकों की उलझन कम करना है।

अनुभव बताते हैं कि एआई तभी सफल होगा जब वह भारत की वास्तविक परिस्थितियों को समझे। विदेशों के डेटा पर बने मॉडल भारत जैसे विविध देश में अक्सर सही काम नहीं करते, क्योंकि हर क्षेत्र में फसल, मौसम, भंडारण और बाज़ार अलग हैं। अगर एआई भारतीय हालात को नहीं समझेगा, तो वह बेकार साबित हो सकता है या गलत नतीजे भी दे सकता है। इसी कारण स्वदेशी एआई पर जोर देना समय की जरूरत है। सरकार की IndiaAI Mission पहल दिखाती है कि अब एआई को सिर्फ उन्नत तकनीक नहीं, बल्कि देश के विकास का जरूरी साधन माना जा रहा है। भारतीय डेटा, देश में बने समाधान और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए खास तकनीक को बढ़ावा देकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहाँ नवाचार सीधे लोगों की जरूरतों से जुड़ा हो।

खाद्य और खेती का क्षेत्र बताता है कि यह क्यों जरूरी है। अगर कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम हो जाए, तो किसानों की आय बढ़ेगी, खाने की कीमतें स्थिर रहेंगी और पानी, जमीन और ऊर्जा की बचत होगी। इससे पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा और पूरी व्यवस्था ज्यादा मजबूत बनेगी। एक और जरूरी पहलू है सबकी भागीदारी। एआई ऐसा होना चाहिए जो छोटे किसानों, स्थानीय भाषाओं और छोटे बाज़ारों में भी आसानी से काम कर सके। जो तकनीक लोगों पर फैसले थोपेगी, उस पर भरोसा नहीं बनेगा। लेकिन जो तकनीक छिपी जानकारी को आसान तरीके से सामने लाकर बेहतर फैसले लेने में मदद करेगी, वही लंबे समय तक टिकेगी और फैल सकेगी।

16 से 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाला India AI Impact Summit ऐसे समय पर हो रहा है जब दुनिया एआई के असर पर गंभीर चर्चा कर रही है। भारत के पास मौका है कि वह ऐसा रास्ता दिखाए जहाँ एआई आम लोगों के काम आए, स्थानीय जरूरतों को समझे और असली आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा हो। खेती, खाद्य आपूर्ति और जलवायु से जुड़ी चुनौतियाँ इस दिशा के केंद्र में हैं।
यह भी समझना जरूरी है कि एआई अपने-आप बदलाव नहीं लाता। इसके लिए सही समझ, सही नीति और मिलकर काम करना पड़ता है। लेकिन जब इसे सही तरीके से अपनाया जाता है, तो यह बिना शोर किए बड़े बदलाव ला सकता है।

इम्पैक्ट समिट के मद्देनजर असली चुनौती एआई को तेजी से अपनाने की नहीं, बल्कि सोच-समझकर सही जगह इस्तेमाल करने की है। आख़िर में सफलता का असली पैमाना यही होना चाहिए कि क्या एआई से भोजन की बर्बादी कम होती है, क्या किसानों की आय बढ़ती है और क्या देश की व्यवस्था मजबूत होती है।

मध्य प्रदेश: गेहूं चोरी के 45 साल पुराने मामले में आरोपी गिरफ्तार
खरगोन (मध्यप्रदेश), आठ फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के एक बुजुर्ग व्यक्ति को 45 साल पहले दर्ज गेहूं चोरी के एक मामले गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह जानकारी दी।
मंडलेश्वर की अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) श्वेता शुक्ला ने रविवार को बताया कि सलीम और छह अन्य ने 1980 में बालसमुंद के काकड़ इलाके में खेतों से गेहूं चुराया था। 
 उन्होंने कहा कि उस समय सलीम 20 साल का था।
अधिकारी ने बताया कि चोरी किए गए गेहूं की कीमत 100 रुपये थी और उस समय एक क्विंटल (100 किलोग्राम) अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमत 1.15 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
एसडीओपी ने बताया कि बलकवाड़ा थाना क्षेत्र के बलखड गांव का रहने वाला सलीम चोरी के बाद भाग गया और पड़ोसी धार जिले के बाग कस्बे में अपने बेटे के साथ किराने की दुकान चलाने लगा।
उन्होंने कहा कि यह मामला अदालतों में लंबित रहा जबकि सलीम के खिलाफ वारंट भी जारी किया गया था।
खलटका थाने के प्रभारी मिथुन चौहान ने बताया कि एक अन्य आरोपी की तलाशी के दौरान पुलिस को पता चला कि सलीम किराने की दुकान के जरिये जीवन यापन चला रहा है।
उन्होंने कहा कि पहचान की पुष्टि होने के बाद उसे शनिवार को गिरफ्तार किया गया। 
उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसका मानना था कि इतने सालों के बाद मामले को भुला दिया गया होगा और वह कानूनी कार्रवाई से बच गया है।
चौहान ने बताया कि सलीम को यहां एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के प्रतिप्रतिबद्धता

या

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: विश्व के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्र

का निर्माण

  • श्री राजेश अग्रवाल

भारत का यूरोप के साथ 250 ईसा पूर्व से एक समृद्ध व्यापारिक संबंध रहा है, जो सिल्क रोड
से भी पहले की अवधि है। अगले 2000 वर्षों के अधिकांश हिस्से के दौरान, भारतीय मसलिन,
कपास, हस्तशिल्प, मसाले, पन्ना और रत्न अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सबसे पसंदीदा वस्तुओं में
शुमार होते थे, जिनमें से अधिकांश यूरोप तक पहुँचती थीं। इन शानदार वस्तुओं के भुगतान के
तौर पर भारत को सोना और चांदी मिलते थे। अपने सुनहरे दिनों में, भारत-यूरोप व्यापार ने
मात्रा और पैमाने की दृष्टि से अभूतपूर्व वृद्धि हासिल की।
एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के माध्यम से इस संबंध को सुदृढ़ करने के प्रयास 2007 में
शुरू हुए थे। गंभीर मतभेदों के कारण 2013 में बातचीत को रोकना पड़ा, क्योंकि कई मुद्दों पर
दोनों पक्षों के विचार अलग थे। 2022 में बातचीत फिर से शुरू हुई और चुनौतियों की जटिलता
के बावजूद इसे केवल दोनों राजनेताओं की मजबूत प्रतिबद्धता और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण
अंतिम रूप दिया जा सका। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस व्यापार समझौते को दोनों पक्षों ने

बातचीत के माध्यम से पूरा किया है, वह अस्थिर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नियम-आधारित
व्यापार संबंध की पुष्टि करता है। यह समझौता ऐतिहासिक है सिर्फ इसलिए नहीं कि इसमें
शामिल विषय और क्षेत्र व्यापक हैं; समझौता ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि दोनों पक्षों को
ऐसे मुद्दों पर साझा रुख अपनाना पड़ा, जो कठिन और जटिल थे।
सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता: भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता शायद हाल के समय में
किया गया सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता है। यह दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में
से एक का निर्माण कर सकता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोग और 28 देश शामिल होंगे और
जो वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत है। इसके अलावा, यह समझौता मुद्दों और चिंताओं के
समाधान के सन्दर्भ में आधुनिक और नवीन है। इस समझौते में व्यापार संबंध को प्रगाढ़ करने
के लिए अद्यतन और मूल विषयों के साथ-साथ प्रक्रिया-संबंधी प्रावधान भी हैं। यह समझौता
वस्तु और सेवा; दोनों के लिए बाजार पहुंच और नियामक बाधाओं के समाधान के लिए एक
नया मॉडल स्थापित करता है, जो पारंपरिक विषयों को नवाचार-तत्वों के साथ सुदृढ़ करता है।
उदाहरण के लिए, उत्पत्ति के नियमों का अध्याय सुनिश्चित करता है कि केवल वही उत्पाद
जिनका पर्याप्त प्रसंस्करण या उत्पादन साझेदार देशों में हुआ है, उन्हें मूल देश का प्रमाण दिया
जाएगा; इसे विस्तृत और जटिल उत्पाद-विशिष्ट नियमों के माध्यम से हासिल किया गया है, जो
मौजूदा और नयी आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुरूप हैं। इसके अलावा, यह समझौता बौद्धिक संपदा
संरक्षण को पुनर्स्थापित करता है और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व सूचना प्रवाह को बढ़ावा देने पर
अतिरिक्त ध्यान केंद्रित करता है।
वस्तु और सेवाओं के लिए बाजार खोलना: समझौते का मुख्य ध्यान दोनों पक्षों के विशाल और
व्यापक बाजारों को एक-दूसरे के लिए खोलना है। यह समझौता भारत के निर्यात व्यापार मूल्य
के 99 प्रतिशत से अधिक के लिए बाजार पहुँच प्रदान करता है, जिसमें कम से कम 90 प्रतिशत
भारतीय निर्यात को समझौते के लागू होने पर तुरंत निःशुल्‍क प्रवेश की सुविधा मिलेगी। विशेष
रूप से, श्रम-सघन वस्तुएँ जैसे वस्त्र और परिधान, चमड़ा, रत्न और आभूषण, लकड़ी और लकड़ी
की शिल्पकला और समुद्री उत्पादों को जल्दी लाभ मिलेगा। यह रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि-
प्रसंस्करण उद्योग और खनिज जैसे उद्योगों को भी जीवंत ईयू सामान्य बाजार में अपने निर्यात
को विविधता देने में सक्षम करेगा। हालांकि, भारत ने ईयू वाहन के लिए बाजार पहुँच की
अनुमति दी है, लेकिन इसे चरणबद्ध और सन्तुलित तरीके से टैरिफ कोटा के माध्यम से अंतिम
रूप दिया गया है। इसी तरह, यूरोपीय संघ की शराब पर भारत की छूट घरेलू उद्योग के हितों
की रक्षा करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वर्ग में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है।

सेवाओं के व्यापार के लिए भारत-ईयू व्यापार संबंध में महत्वपूर्ण संभावनाएँ हैं। इस समझौते के
तहत भारत ने 144 सेवा क्षेत्रों में ईयू की प्रतिबद्धताएँ प्राप्त की हैं, जो कि अभूतपूर्व है। इसके
अलावा, गतिशीलता पर अध्याय यह सुनिश्चित करता है कि पेशेवरों और संविदा सेवा प्रदाताओं
का अस्थायी प्रवेश और निवास सरल और भरोसेमंद होगा, जिसका अर्थ है कि भारत के
प्रतिभाशाली सेवा पेशेवर ईयू बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। वित्तीय सेवाओं पर
संलग्नक भारत और ईयू के बीच इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर अधिक सहभागिता का
प्रावधान करता है, जिसमें भारत की डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे यूपीआई में तकनीकी
विशेषज्ञता का उपयोग शामिल है। यह समझौता आयुष और पारंपरिक चिकित्सा कर्मियों को भी
अधिक निश्चितता के साथ ईयू में अपनी सेवाएँ प्रदान करने की संभावना पेश करता है।
मुक्त और न्यायसंगत व्यापार को बढ़ावा देना: मुक्त व्यापार समझौता दो बड़े बाजारों के बीच
मुक्त, न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
व्यापार और सतत विकास अध्याय सतत विकास संबंधी चिंताओं के संदर्भ में सहयोग का एक
नया मॉडल प्रस्तुत करता है। यह अध्याय दोनों पक्षों के श्रम या पर्यावरण मानकों में तालमेल
बिठाये बिना दोनों पक्षों के व्यापार संबंध में सतत विकास के उद्देश्य को समग्र रूप से एकीकृत
करता है। इस सहभागिता का मुख्य उद्देश्य नीति संवाद, तकनीकी सहायता और वित्तीय
उपकरणों और संसाधनों को जुटाने पर है। दोनों पक्षों ने त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, गैर-उल्लंघन
शिकायतें और स्वतंत्र परिशिष्ट जैसी व्यवस्थाओं पर भी बातचीत की है, जो कुछ नीति उपायों
या उत्पाद-विशिष्ट उपायों के संबंध में उनकी विशिष्ट चिंताओं का समाधान कर सकते हैं।
असल चुनौती यह थी कि कुछ महत्वपूर्ण हितधारकों, जैसे कि डेयरी और कृषि क्षेत्र, की चिंताओं
और संवेदनशीलताओं की अनदेखी किए बिना बाजार खोलने के उच्च महत्वाकांक्षा को हासिल
किया जा सके। छोटे और सीमांत किसानों और कुछ उद्योग क्षेत्रों की आय और जीवनयापन की
चिंताएं हमारे मन में सबसे पहले थीं। ईमानदारी से कहें तो, इस मामले में यूरोपीय संघ ने
आवश्यक लचीलापन भी दिखाया।
भारत की एफटीए रणनीति का पूरक: आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान के युग में, भारत-ईयू मुक्त
व्यापार समझौता; भारत-यूके एफटीए, ईएफटीए और अन्य व्यापक व्यापार समझौतों से हुए लाभ
में पूरक की भूमिका निभाएगा। 2021 से, भारत ने 9 व्यापक व्यापार समझौते किए हैं और
अगले कुछ महीनों में कई प्रमुख आर्थिक साझेदारी समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता

कर रहा है। भारत-ईयू व्यापार समझौते का निष्कर्ष भारत की नई आर्थिक और व्यापारिक पहलों
को तेज करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता विस्तारित बाजार पहुंच, नजदीकी आर्थिक एकीकरण और
विशेष रूप से अनिश्चित और अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में रणनीतिक स्वायत्तता और सुदृढ़ता
प्राप्त करने में एक बड़ा कदम है। जैसा कि आर्थिक इतिहासकार उल्लेख करते हैं, आर्थिक
समृद्धि सबसे अच्छे तरीके से तब प्राप्त की जा सकती है जब राष्ट्र न्यायपूर्ण, नियम-आधारित
और पूर्व अनुमान योग्य कानूनी रूपरेखा और संस्थानों के आधार पर व्यापार करते हैं। भारत-ईयू
मुक्त व्यापार समझौता समय पर खरे उतरे इस सिद्धांत को बनाए रखने का प्रयास करता है।

(लेखक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव हैं।)

दिल्ली में न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस, एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज

 नयी दिल्ली, सात फरवरी (भाषा) दिल्ली में शनिवार को न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत से 2.4 डिग्री सेल्सियस कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी।

मौसम विभाग ने दिन के दौरान तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है और अधिकतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है जो सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक है।

सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्षिक आर्द्रता 82 प्रतिशत दर्ज की गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 214 दर्ज किया गया जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।

सीपीसीबी के वर्गीकरण के अनुसार, शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 को ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।

राजस्थान का पत्थर उद्योग नई ऊंचाइयां छूने के लिए तैयार: मुख्यमंत्री शर्मा

राजस्थान शर्मा

जयपुर, चार फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि राजस्थान का पत्थर उद्योग नई ऊंचाइयां छूने के लिए पूरी तरह तैयार है और सरकार इस उद्योग को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी उद्यमियों से राज्य में मिलकर पत्थर उद्योग को देश में सिरमौर बनाने की अपील की। शर्मा ‘इंडिया स्टोन मार्ट’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी और कुशल नेतृत्व में आज भारत वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनकर उभर रहा है।

शर्मा ने कहा, “‘मेक इन इंडिया‘ और ‘आत्मनिर्भर भारत‘ की महत्वाकांक्षी परिकल्पना ने उद्योगों को नई दिशा और नया विश्वास दिया है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय ग्रेनाइट, संगमरमर और ‘सैंडस्टोन’ दुनियाभर में प्रसिद्ध है तथा भारत पत्थर निर्यातक के साथ मूल्य संवर्धन व नवाचार का केंद्र भी बन रहा है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने पत्थर उद्योग सहित सभी प्रकार के उद्योगों के लिए निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अनेक नीतियां लागू कीं है, जिससे निवेश करना आसान हुआ है और आर्थिक विकास, नवाचार एवं रोजगार सृजन के भी कई नए मार्ग खुले हैं।

शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय उद्योगों के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी, जिससे उद्योगपति दूसरे राज्यों की तरफ पलायन करने लगे थे और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी कम हो गए थे।

उन्होंने कहा कि लेकिन मौजूदा सरकार द्वारा प्रत्येक कार्य निष्पक्षता और पारदर्शिता से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि राज्य की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2030 तक 350 बिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाया जाए।

वहीं उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार पत्थर उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन राज्य के पत्थर से जुड़े उद्यमियों को वैश्विक पटल पर आगे ले जाने के लिए सहायक सिद्ध होगा।

प्रधानमंत्री मोदी के वडोदरा संयंत्र से पहले टाटा-एयरबस विमान के आपूर्ति समारोह में शामिल होने की संभावना

सिंगापुर मोदी एयरबस  

(गुरदीप सिंह)

सिंगापुर, पांच फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के टाटा-एयरबस की वडोदरा ‘असेंबली लाइन’ से रक्षा मंत्रालय को एक सैन्य परिवहन विमान की आपूर्ति किए जाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है।

यह आपूर्ति वर्ष की दूसरी छमाही में की जा सकती है।

एयरबस के अध्यक्ष (अंतरराष्ट्रीय) और कार्यकारी समिति के सदस्य वाउटर वान वर्श ने बुधवार को ‘सिंगापुर एयरशो’ में पत्रकारों के साथ बातचीत में यह जानकारी दी और कहा कि सैन्य परिवहन विमान ‘सी295’ टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस के संयुक्त उद्यम वडोदरा असेंबली लाइन से निकला पहला ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद होगा।

‘सी295’ के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले 70 प्रतिशत घटक भारत से लिए गए हैं जबकि 30 प्रतिशत आयातित हैं। इनमें कनेक्टिकट मुख्यालय वाली प्रैट एंड व्हिटनी का इंजन लगा है।

वडोदरा संयंत्र से रक्षा मंत्रालय के साथ हुए अनुबंध के तहत बनने वाले 56 विमान में से 40 विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। अब तक 16 विमान एयरबस की स्पेन स्थित इकाई से आपूर्ति किए जा चुके हैं।

वान वर्श ने कहा, ‘‘ यह एक बड़ा कदम है। बाकी सभी विमान भारत की ‘असेंबली लाइन’ से आएंगे।’’

उन्होंने कहा कि भविष्य में वडोदरा संयंत्र से क्षेत्रीय बाजारों को भी विमान आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है।

वान वर्श ने कहा, ‘‘ पिछले कुछ वर्ष में भारत में हमारी मजबूत वृद्धि हुई है और हमने इंजीनियरिंग तथा डिजिटल के लिहाज से भारत को अपने प्रमुख केंद्रों में शामिल किया है।’’

उन्होंने बताया कि एयरबस का बेंगलुरु परिचालन अब बड़े परिसर में स्थानांतरित किया जा रहा है।

वर्श ने भारत तथा भारतीय प्रतिभाओं के साथ कंपनी के मजबूत और लगातार बढ़ते संबंधों को रेखांकित किया और कहा कि दिल्ली कार्यालय सहित देश में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्य किया जा रहा है।