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भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के प्रतिप्रतिबद्धता

या

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: विश्व के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्र

का निर्माण

  • श्री राजेश अग्रवाल

भारत का यूरोप के साथ 250 ईसा पूर्व से एक समृद्ध व्यापारिक संबंध रहा है, जो सिल्क रोड
से भी पहले की अवधि है। अगले 2000 वर्षों के अधिकांश हिस्से के दौरान, भारतीय मसलिन,
कपास, हस्तशिल्प, मसाले, पन्ना और रत्न अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सबसे पसंदीदा वस्तुओं में
शुमार होते थे, जिनमें से अधिकांश यूरोप तक पहुँचती थीं। इन शानदार वस्तुओं के भुगतान के
तौर पर भारत को सोना और चांदी मिलते थे। अपने सुनहरे दिनों में, भारत-यूरोप व्यापार ने
मात्रा और पैमाने की दृष्टि से अभूतपूर्व वृद्धि हासिल की।
एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के माध्यम से इस संबंध को सुदृढ़ करने के प्रयास 2007 में
शुरू हुए थे। गंभीर मतभेदों के कारण 2013 में बातचीत को रोकना पड़ा, क्योंकि कई मुद्दों पर
दोनों पक्षों के विचार अलग थे। 2022 में बातचीत फिर से शुरू हुई और चुनौतियों की जटिलता
के बावजूद इसे केवल दोनों राजनेताओं की मजबूत प्रतिबद्धता और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण
अंतिम रूप दिया जा सका। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस व्यापार समझौते को दोनों पक्षों ने

बातचीत के माध्यम से पूरा किया है, वह अस्थिर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नियम-आधारित
व्यापार संबंध की पुष्टि करता है। यह समझौता ऐतिहासिक है सिर्फ इसलिए नहीं कि इसमें
शामिल विषय और क्षेत्र व्यापक हैं; समझौता ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि दोनों पक्षों को
ऐसे मुद्दों पर साझा रुख अपनाना पड़ा, जो कठिन और जटिल थे।
सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता: भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता शायद हाल के समय में
किया गया सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता है। यह दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में
से एक का निर्माण कर सकता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोग और 28 देश शामिल होंगे और
जो वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत है। इसके अलावा, यह समझौता मुद्दों और चिंताओं के
समाधान के सन्दर्भ में आधुनिक और नवीन है। इस समझौते में व्यापार संबंध को प्रगाढ़ करने
के लिए अद्यतन और मूल विषयों के साथ-साथ प्रक्रिया-संबंधी प्रावधान भी हैं। यह समझौता
वस्तु और सेवा; दोनों के लिए बाजार पहुंच और नियामक बाधाओं के समाधान के लिए एक
नया मॉडल स्थापित करता है, जो पारंपरिक विषयों को नवाचार-तत्वों के साथ सुदृढ़ करता है।
उदाहरण के लिए, उत्पत्ति के नियमों का अध्याय सुनिश्चित करता है कि केवल वही उत्पाद
जिनका पर्याप्त प्रसंस्करण या उत्पादन साझेदार देशों में हुआ है, उन्हें मूल देश का प्रमाण दिया
जाएगा; इसे विस्तृत और जटिल उत्पाद-विशिष्ट नियमों के माध्यम से हासिल किया गया है, जो
मौजूदा और नयी आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुरूप हैं। इसके अलावा, यह समझौता बौद्धिक संपदा
संरक्षण को पुनर्स्थापित करता है और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व सूचना प्रवाह को बढ़ावा देने पर
अतिरिक्त ध्यान केंद्रित करता है।
वस्तु और सेवाओं के लिए बाजार खोलना: समझौते का मुख्य ध्यान दोनों पक्षों के विशाल और
व्यापक बाजारों को एक-दूसरे के लिए खोलना है। यह समझौता भारत के निर्यात व्यापार मूल्य
के 99 प्रतिशत से अधिक के लिए बाजार पहुँच प्रदान करता है, जिसमें कम से कम 90 प्रतिशत
भारतीय निर्यात को समझौते के लागू होने पर तुरंत निःशुल्‍क प्रवेश की सुविधा मिलेगी। विशेष
रूप से, श्रम-सघन वस्तुएँ जैसे वस्त्र और परिधान, चमड़ा, रत्न और आभूषण, लकड़ी और लकड़ी
की शिल्पकला और समुद्री उत्पादों को जल्दी लाभ मिलेगा। यह रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि-
प्रसंस्करण उद्योग और खनिज जैसे उद्योगों को भी जीवंत ईयू सामान्य बाजार में अपने निर्यात
को विविधता देने में सक्षम करेगा। हालांकि, भारत ने ईयू वाहन के लिए बाजार पहुँच की
अनुमति दी है, लेकिन इसे चरणबद्ध और सन्तुलित तरीके से टैरिफ कोटा के माध्यम से अंतिम
रूप दिया गया है। इसी तरह, यूरोपीय संघ की शराब पर भारत की छूट घरेलू उद्योग के हितों
की रक्षा करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वर्ग में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है।

सेवाओं के व्यापार के लिए भारत-ईयू व्यापार संबंध में महत्वपूर्ण संभावनाएँ हैं। इस समझौते के
तहत भारत ने 144 सेवा क्षेत्रों में ईयू की प्रतिबद्धताएँ प्राप्त की हैं, जो कि अभूतपूर्व है। इसके
अलावा, गतिशीलता पर अध्याय यह सुनिश्चित करता है कि पेशेवरों और संविदा सेवा प्रदाताओं
का अस्थायी प्रवेश और निवास सरल और भरोसेमंद होगा, जिसका अर्थ है कि भारत के
प्रतिभाशाली सेवा पेशेवर ईयू बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। वित्तीय सेवाओं पर
संलग्नक भारत और ईयू के बीच इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर अधिक सहभागिता का
प्रावधान करता है, जिसमें भारत की डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे यूपीआई में तकनीकी
विशेषज्ञता का उपयोग शामिल है। यह समझौता आयुष और पारंपरिक चिकित्सा कर्मियों को भी
अधिक निश्चितता के साथ ईयू में अपनी सेवाएँ प्रदान करने की संभावना पेश करता है।
मुक्त और न्यायसंगत व्यापार को बढ़ावा देना: मुक्त व्यापार समझौता दो बड़े बाजारों के बीच
मुक्त, न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
व्यापार और सतत विकास अध्याय सतत विकास संबंधी चिंताओं के संदर्भ में सहयोग का एक
नया मॉडल प्रस्तुत करता है। यह अध्याय दोनों पक्षों के श्रम या पर्यावरण मानकों में तालमेल
बिठाये बिना दोनों पक्षों के व्यापार संबंध में सतत विकास के उद्देश्य को समग्र रूप से एकीकृत
करता है। इस सहभागिता का मुख्य उद्देश्य नीति संवाद, तकनीकी सहायता और वित्तीय
उपकरणों और संसाधनों को जुटाने पर है। दोनों पक्षों ने त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, गैर-उल्लंघन
शिकायतें और स्वतंत्र परिशिष्ट जैसी व्यवस्थाओं पर भी बातचीत की है, जो कुछ नीति उपायों
या उत्पाद-विशिष्ट उपायों के संबंध में उनकी विशिष्ट चिंताओं का समाधान कर सकते हैं।
असल चुनौती यह थी कि कुछ महत्वपूर्ण हितधारकों, जैसे कि डेयरी और कृषि क्षेत्र, की चिंताओं
और संवेदनशीलताओं की अनदेखी किए बिना बाजार खोलने के उच्च महत्वाकांक्षा को हासिल
किया जा सके। छोटे और सीमांत किसानों और कुछ उद्योग क्षेत्रों की आय और जीवनयापन की
चिंताएं हमारे मन में सबसे पहले थीं। ईमानदारी से कहें तो, इस मामले में यूरोपीय संघ ने
आवश्यक लचीलापन भी दिखाया।
भारत की एफटीए रणनीति का पूरक: आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान के युग में, भारत-ईयू मुक्त
व्यापार समझौता; भारत-यूके एफटीए, ईएफटीए और अन्य व्यापक व्यापार समझौतों से हुए लाभ
में पूरक की भूमिका निभाएगा। 2021 से, भारत ने 9 व्यापक व्यापार समझौते किए हैं और
अगले कुछ महीनों में कई प्रमुख आर्थिक साझेदारी समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता

कर रहा है। भारत-ईयू व्यापार समझौते का निष्कर्ष भारत की नई आर्थिक और व्यापारिक पहलों
को तेज करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता विस्तारित बाजार पहुंच, नजदीकी आर्थिक एकीकरण और
विशेष रूप से अनिश्चित और अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में रणनीतिक स्वायत्तता और सुदृढ़ता
प्राप्त करने में एक बड़ा कदम है। जैसा कि आर्थिक इतिहासकार उल्लेख करते हैं, आर्थिक
समृद्धि सबसे अच्छे तरीके से तब प्राप्त की जा सकती है जब राष्ट्र न्यायपूर्ण, नियम-आधारित
और पूर्व अनुमान योग्य कानूनी रूपरेखा और संस्थानों के आधार पर व्यापार करते हैं। भारत-ईयू
मुक्त व्यापार समझौता समय पर खरे उतरे इस सिद्धांत को बनाए रखने का प्रयास करता है।

(लेखक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव हैं।)

दिल्ली में न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस, एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज

 नयी दिल्ली, सात फरवरी (भाषा) दिल्ली में शनिवार को न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत से 2.4 डिग्री सेल्सियस कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी।

मौसम विभाग ने दिन के दौरान तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है और अधिकतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है जो सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक है।

सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्षिक आर्द्रता 82 प्रतिशत दर्ज की गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 214 दर्ज किया गया जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।

सीपीसीबी के वर्गीकरण के अनुसार, शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 को ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।

राजस्थान का पत्थर उद्योग नई ऊंचाइयां छूने के लिए तैयार: मुख्यमंत्री शर्मा

राजस्थान शर्मा

जयपुर, चार फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि राजस्थान का पत्थर उद्योग नई ऊंचाइयां छूने के लिए पूरी तरह तैयार है और सरकार इस उद्योग को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी उद्यमियों से राज्य में मिलकर पत्थर उद्योग को देश में सिरमौर बनाने की अपील की। शर्मा ‘इंडिया स्टोन मार्ट’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी और कुशल नेतृत्व में आज भारत वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनकर उभर रहा है।

शर्मा ने कहा, “‘मेक इन इंडिया‘ और ‘आत्मनिर्भर भारत‘ की महत्वाकांक्षी परिकल्पना ने उद्योगों को नई दिशा और नया विश्वास दिया है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय ग्रेनाइट, संगमरमर और ‘सैंडस्टोन’ दुनियाभर में प्रसिद्ध है तथा भारत पत्थर निर्यातक के साथ मूल्य संवर्धन व नवाचार का केंद्र भी बन रहा है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने पत्थर उद्योग सहित सभी प्रकार के उद्योगों के लिए निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अनेक नीतियां लागू कीं है, जिससे निवेश करना आसान हुआ है और आर्थिक विकास, नवाचार एवं रोजगार सृजन के भी कई नए मार्ग खुले हैं।

शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय उद्योगों के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी, जिससे उद्योगपति दूसरे राज्यों की तरफ पलायन करने लगे थे और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी कम हो गए थे।

उन्होंने कहा कि लेकिन मौजूदा सरकार द्वारा प्रत्येक कार्य निष्पक्षता और पारदर्शिता से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि राज्य की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2030 तक 350 बिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाया जाए।

वहीं उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार पत्थर उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन राज्य के पत्थर से जुड़े उद्यमियों को वैश्विक पटल पर आगे ले जाने के लिए सहायक सिद्ध होगा।

प्रधानमंत्री मोदी के वडोदरा संयंत्र से पहले टाटा-एयरबस विमान के आपूर्ति समारोह में शामिल होने की संभावना

सिंगापुर मोदी एयरबस  

(गुरदीप सिंह)

सिंगापुर, पांच फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के टाटा-एयरबस की वडोदरा ‘असेंबली लाइन’ से रक्षा मंत्रालय को एक सैन्य परिवहन विमान की आपूर्ति किए जाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है।

यह आपूर्ति वर्ष की दूसरी छमाही में की जा सकती है।

एयरबस के अध्यक्ष (अंतरराष्ट्रीय) और कार्यकारी समिति के सदस्य वाउटर वान वर्श ने बुधवार को ‘सिंगापुर एयरशो’ में पत्रकारों के साथ बातचीत में यह जानकारी दी और कहा कि सैन्य परिवहन विमान ‘सी295’ टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस के संयुक्त उद्यम वडोदरा असेंबली लाइन से निकला पहला ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद होगा।

‘सी295’ के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले 70 प्रतिशत घटक भारत से लिए गए हैं जबकि 30 प्रतिशत आयातित हैं। इनमें कनेक्टिकट मुख्यालय वाली प्रैट एंड व्हिटनी का इंजन लगा है।

वडोदरा संयंत्र से रक्षा मंत्रालय के साथ हुए अनुबंध के तहत बनने वाले 56 विमान में से 40 विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। अब तक 16 विमान एयरबस की स्पेन स्थित इकाई से आपूर्ति किए जा चुके हैं।

वान वर्श ने कहा, ‘‘ यह एक बड़ा कदम है। बाकी सभी विमान भारत की ‘असेंबली लाइन’ से आएंगे।’’

उन्होंने कहा कि भविष्य में वडोदरा संयंत्र से क्षेत्रीय बाजारों को भी विमान आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है।

वान वर्श ने कहा, ‘‘ पिछले कुछ वर्ष में भारत में हमारी मजबूत वृद्धि हुई है और हमने इंजीनियरिंग तथा डिजिटल के लिहाज से भारत को अपने प्रमुख केंद्रों में शामिल किया है।’’

उन्होंने बताया कि एयरबस का बेंगलुरु परिचालन अब बड़े परिसर में स्थानांतरित किया जा रहा है।

वर्श ने भारत तथा भारतीय प्रतिभाओं के साथ कंपनी के मजबूत और लगातार बढ़ते संबंधों को रेखांकित किया और कहा कि दिल्ली कार्यालय सहित देश में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्य किया जा रहा है।

राकांपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की दौड़ में नहीं हूं : प्रफुल्ल पटेल

महाराष्ट्र राकांपा

मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने मंगलवार को कहा कि वह दिवंगत नेता अजित पवार के स्थान पर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल नहीं हैं।

पटेल ने अफसोस जताया कि पिछले हफ्ते विमान दुर्घटना में पवार की मौत के बाद पार्टी द्वारा लिए गए फैसलों के बारे में वे लोग बात कर रहे हैं जिनका राकांपा से कोई संबंध नहीं है।

राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, ‘‘सुनेत्रा पवार का विधायक दल के नेता के रूप में चुनाव हमारा अधिकार है। हम अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप निर्णय लेंगे।’’

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की रिक्ति को भरने का आश्वासन देते हुए पटेल ने कहा, ‘‘मैं अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हूं। इस समय किसी अन्य मुद्दे पर बोलना उचित नहीं है।’’

इससे पहले, अजित पवार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पार्टी कार्यालय में राकांपा नेता ने कहा कि पार्टी उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में अपने भविष्य की योजना बनाएगी।

केंद्रीय बजट से पहले सोने, चांदी के वायदा भाव में नौ प्रतिशत की भारी गिरावट

 नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने से पहले रविवार को वायदा कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में नौ प्रतिशत तक की गिरावट आई और ये अपने निचले ‘सर्किट’ स्तर पर पहुंच गईं। हाल ही में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली जारी रखी।
 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी।
 मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर, लगातार दूसरे सत्र में गिरावट जारी रही। सोने के अप्रैल में आपूर्ति वाले अनुबंधों का वायदा भाव 13,711 रुपये या नौ प्रतिशत टूटकर 1,38,634 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे एमसीएक्स पर वायदा कारोबार में इसने अपना निचला सर्किट स्तर छू लिया।
 एमसीएक्स पर चांदी के वायदा भाव में भी भारी गिरावट आई क्योंकि व्यापारियों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली जारी रखी। इसके परिणामस्वरूप मार्च में आपूर्ति वाले चांदी के अनुबंध की कीमत 26,273 रुपये या नौ प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,65,652 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई जो इसका निचला सर्किट स्तर है।
 वैश्विक वायदा बाजार अवकाश के कारण रविवार को बंद रहेंगे।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8 अरब डॉलर बढ़ा, 709.41 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

मुंबई, 30 जनवरी (भाषा) देश का विदेशी मुद्रा भंडार 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान 8.05 अरब डॉलर बढ़कर 709.41 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह जानकारी दी है।

इससे पिछले सप्ताह में कुल मुद्रा भंडार 14.16 अरब डॉलर बढ़कर 701.36 अरब डॉलर रहा था।

मुद्रा भंडार सितंबर, 2024 में 704.89 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंचा था, लेकिन हाल के दिनों में इस पर दबाव देखा गया। खासकर तब जब रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए मुद्रा भंडार का उपयोग किया गया।

केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 2.36 अरब डॉलर बढ़कर 562.88 अरब डॉलर हो गईं।

डॉलर के रूप में व्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर अमेरिकी मुद्राओं में मूल्य वृद्धि या मूल्यह्रास के प्रभाव शामिल होते हैं।

आरबीआई ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.63 अरब डॉलर बढ़कर 123.08 अरब डॉलर हो गया।

केंद्रीय बैंक ने बताया कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.73 अरब डॉलर हो गया

आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.70 अरब डॉलर हो गई।

प्रगति : शासन को इरादा नहीं,डिलिवरी परिभाषित करती है

लेखक टी.के. रामचंद्रन

सरकार के दो परिवर्तनकारी कदमों—पीएम गति शक्ति और प्रगति—काविशाल परियोजनाओं की योजनाबनाने, उन्हें कार्यान्वित करने और उनकी निगरानी करने पर गहरा असर पड़ा है। इस लेख में हम बाद वाले कदम के बारे में चर्चा कर रहे हैं।
प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंसएंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) प्रारूप के तहत आयोजित 50वीं उच्च-स्तरीय समीक्षा दर्शाती है कि शासन के प्रति भारत सरकारके रुख और उसे संचालित करने के तरीके में बहुत बड़ा बदलाव आया है। यह बदलाव नीयत से डिलिवरी की ओर, प्रक्रियागत अनुपालन से परिणामों की ओर तथा बिखरी हुई सत्ता से समन्वित एवं समयबद्ध कार्यान्वयन की ओर संकेतकरता है।इस प्रकार प्रगति केवल एक प्रशासनिक नवाचार भर नहीं है; बल्कि यह शासन की संरचना कीसोच-विचार कर की गई पुनर्रचना का प्रतिनिधित्व करता है।ऐसे में सवालयह उठता है कि जब शासन के अन्य मॉडल विफल रहे, तब यह मॉडल परिणाम देने में कैसे सफल हुआ?
प्रगति की आवश्‍यकता
सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी होना लगभग आम बात रही है। फिर भी, शायद ही कभी इस देरी कारण नीति में स्पष्ट जानकारी या वित्तीय मंजूरीका अभाव रहा। शासन प्रणालियों का बिखराव इस देरी का कारण रहा है। मंत्रालय ऊपरी से निचले स्तर तक या वर्टिकली कार्य करते हैं; राज्य और केंद्र क्रमिक रूप से काम करते हैं; और विवाद निपटाने के अधिकार-संपन्न मंच न होने के कारण, विवाद लंबित पड़ेरहते हैं। गतिविधियाँ बढ़ने के बावजूद जवाबदेही कमज़ोर होती जाती है। मुख्य समस्या कमज़ोर तालमेल और साइलो-बेस्ड समीक्षा तंत्र रहीहैं।
इसके परिणामस्वरूप, परियोजना की डिलिवरी का व्यापक उद्देश्य अक्सर कहीं खो जाता है। कई परियोजनाएँ जमीनी विवाद, पर्यावरण या वन मंज़ूरी, नियामक अनुमोदन, संविदा से जुड़े विवादोंया राज्यों के बीच तालमेल संबंधी चुनौतियों के कारण वर्षों तक अटकी रहीं। एक बहु-मंत्रालयीय और बहु-राज्यीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था में, जहाँ प्रत्येक संस्था अपने अधिकार क्षेत्र पर प्रभुत्व जमाए हुए होती है, किसी के लिए भी दूसरे को राजी करना कठिन हो जाता है।
जब परियोजना की पूर्ति में कई राज्यों और मंत्रालयों को योगदान देना होता है, तोबैठकें करने, चर्चा करने, फील्ड दौरे करने, समितियाँ बनाने और अंतहीन पत्राचार करने की पुरानी प्रक्रिया बेअसर साबित होती है। यह एक ऐसा तरीका था, जिसमें चर्चा को निर्णय, गतिविधि को काम, गति को प्रगति और केवल नीयत को उपलब्धि समझ लिया जाता था।
प्रगति का आगमन
प्रगतिनिर्णय लेने, समन्वय करने और लागू करने के तरीके को नए तरीके से डिजाइन कर लगातार बनी रहने वाली इन संरचनात्मक कमियों को दूर करता है। प्रणालीगत समन्वयक के रूप में काम करते हुएयह मंत्रालयों, राज्यों और जिलों के निर्णयकर्ताओं को एक ही संस्थागत और डिजिटल मंच पर लाता है। यह फ़ाइलों के आदान-प्रदान, क्षेत्राधिकार की अस्पष्टता और विभागीय पत्राचार के कारण होने वाली देरी को समाप्त करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कार्यान्वयन का विस्तृत दृष्टिकोण बहाल करता है, जिससे नेतृत्व फ़ाइलों की लंबित स्थिति के बजाय प्रणाली से संबंधित रुकावटों की पहचान कर सकता है।
प्रगतिके तहत होने वाली समीक्षा की अध्यक्षता करने में माननीय प्रधानमंत्री की भूमिका इसकी सफलता के लिए बहुत जरूरी है। उनका सीधा जुड़ाव इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि डिलिवरी राष्ट्रीय प्राथमिकता है और कार्यान्वयन की विफलताओं पर सर्वोच्च स्तर पर ध्यान दिया जाएगा। यह निर्णायक कार्रवाई को सुगम बनाता है और समीक्षा को परिणामों के लिए एक बाध्यकारी ढांचे में बदल देता है। इन समीक्षाओं के दौरान लिए गए निर्णय अंतिम, समयबद्ध और डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किए जाते हैं, जिससे जवाबदेही स्पष्ट और लागू करने योग्य होती है।
प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता के रूप में कार्य करती है। रीयल-टाइम डेटा, जियो-स्पैशियल विज़ुअलाइज़ेशन और क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ सीधे संवाद हितधारकों के बीच जानकारी की असमानता समाप्त करते हैं और निर्णयों को साक्ष्यों के आधार पर लिया जाना सुनिश्चित करते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रौद्योगिकी प्रशासनिक निर्णय क्षमता को बदलने के बजाय उसे सुदृढ़ करती है, जिससे प्रणाली के भीतर नेतृत्व की जिम्मेदारी और मजबूत होती है।
प्रगतिमें समापन पर जोर दिया जाता हैऔर यही बात उसे पहले के समीक्षा तंत्रों से अलग बनाती है। समस्याएँ तब तक सक्रिय रहती हैं, जब तक उन्हें हल नहीं किया जाता, और उन्हें लगातार कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा ट्रैक किया जाता है। केवल स्पष्टीकरण देना अब परिणामों का विकल्प नहीं है। समय के साथ, इस अनुशासन ने प्रशासनिक व्यवहार को बदल दिया है, जिससे मंत्रालयों और राज्यों को समस्याओं का पूर्वानुमान लगाने और उन्हें बढ़ने से पहले हल करने की प्रवृत्ति बढ़ी है
परिणाम
परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं और आकलन करने योग्य हैं। 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में तेज़ गति से काम हुआ गई है। हाल के वर्षों में, प्रगतिके तहत पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) की दस परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिससे अड़चनों का जल्द समाधान हुआ और तेज़ी सेकार्यान्वयन संभव हुआ। मैं उदाहरण के रूप में दो परियोजनाओं को प्रस्तुत करूँगा।
लोथल में राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएमएचसी) एक विशाल परियोजना है, जिसमें केंद्र सरकार के संस्कृति, रक्षा, विदेश, रेल और राजमार्ग जैसे कई मंत्रालयों के साथ-साथ गुजरात सरकार भी शामिल हैं। साथ ही, कई तटीय राज्यों के पवेलियन स्थापित किए जाने हैं, इसलिए संबंधित राज्य भी इस परियोजना का हिस्सा हैं। पिछले वर्ष एनएमएचसीपरियोजना को प्रगतिके एजेंडे में शामिल करने से कई स्तरों पर तुरंत कार्रवाई शुरू हो गई। सामान्यतः एजेंडे को प्रधानमंत्री द्वारा समीक्षा से कुछ महीने पहले सूचित किया जाता है, जिससे विभिन्न हितधारकों को प्राथमिकता के साथ मुद्दों को हल करने का अवसर मिलता है। परिणामस्वरूप, ज्यादातर मुद्दे जो आधिकारिक/मंत्रालय स्तर पर हल किए जा सकते हैं, पहले ही सुलझ जाते हैं और केवल मार्गदर्शन या दिशा की आवश्यकता वालेशेष जटिल मुद्दे ही वास्तविक समीक्षा के दौरान उठाए जाते हैं।
इसी तरह, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से गुजरने वाले राष्ट्रीय जलमार्ग (एनडब्ल्यू)-1 पर लागू की जा रही जल मार्ग विकास परियोजनाकी प्रगति के तहत दो बार समीक्षा की गई। यह परियोजना अब समापन चरण में है और अधिकांश लंबित मुद्दे हल हो चुके हैं।
प्रगति फोरम एक महत्वपूर्ण सत्य पर जोर देता है: सार्वजनिक मूल्य या पब्लिक वेल्यू केवल योजनाओं की घोषणा करने से नहीं, बल्कि मंजूर किए गए निवेश के नतीजों में परिणत होने से उत्पन्न होता है। अटकी हुई परियोजनाएँ केवल नीतियों को दोबारा निरुपित किए जाने के कारण ही आगे नहीं बढ़ी, बल्कि कार्यान्वयन के मार्ग को आसान बनाने और जवाबदेही लागू करने के कारण आगे बढ़ीं। प्रगतिका सहकारी संघवाद में योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मुख्य सचिवों और केंद्रीय सचिवों को एक ही रीयल-टाइम प्लेटफ़ॉर्म पर लाया जानाबंटी हुई जिम्मेदारी के स्थान पर परिणामों की साझा जिम्मेदारी स्थापित करता है।
प्रगति @50 इस बात का सबूत है कि शासन के नतीजे संस्था की संरचना पर निर्भर करते हैं। साइलो समाप्त करके, कार्यान्वयन का व्यापक दृष्टिकोण बहाल करके और कार्य समाप्त करने को प्राथमिकता देकर, प्रगति यह दर्शाता है कि असरदार शासन का आशय केवल कार्यभार बढ़ाना नहीं,बल्कि पहले से स्वीकृत कार्य को तेज़ी, गुणवत्ता और तालमेल के साथ पूराकरना है।समयबद्ध कार्यान्वयन सेवाओं तक त्वरित पहुँच कायम करता है, अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करता है, क्षेत्रीय असमानताओं को घटाता है और सरकार की शासन करने की क्षमता में जनता का विश्वास मजबूत करता है।
प्रगति केवल नेतृत्व-प्रधान डिलिवरी का रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि जटिल शासन को संचालित करने की रूपरेखा भी है। वैश्विक स्तर पर इसे मिल रही तवज्जो और प्रशंसा इसी बात का प्रमाण है।

(लेखक पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के पूर्व सचिव हैं)

दिल्ली में प्रदूषण और स्मॉग का कहर: AQI 400 के पार, 152 फ्लाइट्स कैंसिल और रोड ट्रैफिक पर असर

नेशनल डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण और घने स्मॉग की वजह से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। शुक्रवार, 19 दिसंबर, 2025 को दिल्ली में एयर क्वालिटी (AQI) 400 के आंकड़े को पार कर गई, जिसकी वजह से प्रशासन की सारी कोशिशें फेल होती दिख रही हैं। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, दिल्ली की हवा ‘गंभीर’ कैटेगरी में बनी हुई है।

फ्लाइट्स और रेल सर्विस पर असर—

घने स्मॉग और ज़ीरो विज़िबिलिटी की वजह से दिल्ली एयरपोर्ट से करीब 152 फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं। सुबह दिल्ली के पालम और IGI एयरपोर्ट पर विज़िबिलिटी बहुत कम दर्ज की गई, जिसकी वजह से कई फ्लाइट्स और ट्रेनें 6 से 7 घंटे की देरी से चल रही हैं। स्पाइसजेट की दिल्ली-अहमदाबाद फ्लाइट कैंसिल होने की वजह से एयरपोर्ट पर पैसेंजर्स ने जमकर हंगामा भी किया। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री और एयर इंडिया समेत कई एयरलाइंस ने पैसेंजर्स के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें एयरपोर्ट जाने से पहले फ्लाइट का स्टेटस चेक करने की सलाह दी गई है।पॉल्यूशन के आंकड़े और इलाके—

दिल्ली का एवरेज AQI 389 रिकॉर्ड किया गया है, लेकिन कई इलाकों में यह इससे कहीं ज़्यादा है। आनंद विहार में AQI 442 और ITO में 409 रिकॉर्ड किया गया, जबकि विवेक विहार 434 के साथ सबसे खराब रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि शनिवार तक एयर क्वालिटी ‘बहुत खराब’ रहेगी और रविवार को यह फिर से ‘गंभीर’ हो सकती है।

प्रशासन की सख्ती-–

बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए हैं:-

-‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू किया गया है, जिसके तहत बिना वैलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों को फ्यूल नहीं दिया जा रहा है। दिल्ली के बाहर से नॉन-BS-VI प्राइवेट गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। पहले ही दिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के 3,700 से ज़्यादा चालान काटे गए हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में घने कोहरे के साथ-साथ शीतलहर का प्रकोप बढ़ सकता है, जिसका सबसे ज़्यादा असर उत्तर प्रदेश और बिहार में देखने को मिलेगा।