दुनियाभर में बजेगा भारतीय रुपये का डंका! RBI ने अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए पेश किया ‘मास्टर प्लान’
बिजनेस डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका अंतिम लक्ष्य भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक प्रमुख करेंसी बनाना है। हाल ही में करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी और उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए उठाए गए सख्त कदम केवल तात्कालिक स्थिति को संभालने के लिए थे और इन्हें स्थायी नहीं माना जाना चाहिए।
सट्टेबाजी रोकने के लिए उठाए गए थे कदम : आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी. रवि शंकर ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पिछले महीने उठाए गए कदम अत्यधिक सट्टेबाजी के कारण थे, न कि डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती या कमजोरी की वजह से। उन्होंने कहा कि बाजार में कुछ गतिविधियों के कारण अमेरिकी डॉलर की कृत्रिम (artificial) कमी पैदा हो रही थी, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक था।
बाजार की ताकतों पर निर्भर करेगा रुपये का भविष्य: रवि शंकर के अनुसार, भविष्य में रुपये का मूल्य बाजार की ताकतों (मांग और आपूर्ति) द्वारा निर्धारित होगा। केंद्रीय बैंक केवल तभी हस्तक्षेप करेगा जब उसे बाजार में अत्यधिक या अस्थिर करने वाला उतार-चढ़ाव दिखाई देगा। आरबीआई का दीर्घकालिक उद्देश्य एक ऐसा वैश्विक बाजार बनाना है जहां कोई भी उपयोगकर्ता, जिसे रुपये से जुड़ा जोखिम है, वह उपलब्ध वित्तीय उत्पादों का उपयोग कर सके।
अंतरराष्ट्रीयकरण के प्रति प्रतिबद्धता : आरबीआई ने हाल ही में रुपये के डेरिवेटिव्स पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को आंशिक रूप से वापस लेना शुरू कर दिया है। डिप्टी गवर्नर ने दोहराया कि “नेट ओपन पोजिशंस” पर लगी सीमाओं को हटाना और रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण करना बैंक की प्राथमिकता है और एक बार स्थिति सामान्य होने पर कामकाज पहले की तरह उदार हो जाएगा।

