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नगर काउंसिल टांडा के सफाई कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की।

टांडा/ सत्ता संदेश

मुलाजिम एक्शन कमेटी पंजाब के आह्वान पर नगर काउंसिल टांडा के सफाई कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर पिछले दस दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखी गई है। आज कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।

इस मौके पर संबोधित करते हुए कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से पहले पार्टी नेताओं और मुख्यमंत्री द्वारा कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के वादे किए गए थे, लेकिन साढ़े चार साल बीत जाने के बावजूद भी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक टांडा शहर में यह हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी।

नगर काउंसिल के सफाई कर्मचारियों ने नगर काउंसिल के गेट पर पुतला टांगकर विरोध प्रदर्शन किया और शहर में रोष मार्च निकाला। इस दौरान किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने भी उनका समर्थन किया।

धरने के दौरान संगठन से जुड़े कर्मचारियों के साथ-साथ विभिन्न ट्रेडों के मजदूर भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस प्रदर्शन को उस समय और बल मिला जब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जिला प्रधान परमजीत सिंह भुल्ला बाठ अपने साथियों सहित कर्मचारियों के समर्थन में धरने पर पहुंचे और हर तरह के सहयोग का ऐलान किया। इस मौके पर परमजीत सिंह भुल्ला बाठ ने सफाई कर्मचारियों को संगठित रहने की अपील करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया।

इस अवसर पर कर्मचारियों और समर्थकों द्वारा शहर में रोष मार्च भी निकाला गया। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अपने चुनावी वादों को तुरंत पूरा करे और कर्मचारियों की मांगों को मानकर उनका समाधान करे।

इस मौके पर प्रधान माया, चेयरमैन जसपाल बाई, सकरमैन जतिंदर हंस के अलावा काला, नीरज भट्टी, जसपाल, मणि, मंजू, पांडी, बिपन, विजय, नीरज मट्टू, गुलशन, दीपक हंस, अभिनाश हंस, रानी, भोली परवीन, लखविंदर कौर, ममता, परमजीत पम्मा, करण, अभिनाश, अमरजीत, शेखर, संदीप, रेनू, शीतल कुमार, निशान बंटी, रोकी, विजय, पप्पू, राधा रानी, रमन, बृज, जानवी, पूनम, पिंकी, रजनी, नवनीत, परमजीत सिंह, रवि पाल तथा किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

यदि किडनी खराब हो रही है तो रात को जरूर दिखेंगे ये 5 लक्षण, इन्हें नजरअंदाज न करें क्योंकि आपकी जान भी जा सकती है!

(1) रात को बार-बार पेशाब आना

कई लोग रात में पेशाब करने के लिए जागते हैं, लेकिन अगर आपको बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस हो, तो यह किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है।

जब किडनी सही से काम नहीं करती, तो शरीर की तरल पदार्थों को ठीक से फिल्टर नहीं किया जाता, जिससे पेशाब की आवृत्ति प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति किडनी फेल होने का संकेत हो सकती है।

(2) रात को बहुत प्यास लगना

किडनी फेल होने से शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके कारण रात को बहुत प्यास लग सकती है। यदि आपको रात में बार-बार पानी पीने की आदत हो, तो यह किडनी की समस्या का दूसरा संकेत हो सकता है। इस लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह शरीर में पानी के असंतुलन का संकेत है।

(3) पेशाब करते समय दर्द और जलन

किडनी की समस्याएं पेशाब की नलियों में संक्रमण या जलन पैदा कर सकती हैं, जिससे पेशाब करते समय दर्द और जलन हो सकती है। यह किडनी के संक्रमण या अन्य गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है। अगर आपको पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

(4) पेशाब में खून आना

पेशाब में खून आना किडनी के संक्रमण, पथरी या अन्य गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है। अगर आपको अपने पेशाब में खून दिखाई दे, तो यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह स्थिति गंभीर किडनी समस्या का संकेत हो सकती है, जिसे तत्काल चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता होती है।

(5) नींद से बार-बार जागना

किडनी की समस्या के कारण शरीर में विषैले तत्व जमा हो सकते हैं, जो नींद को प्रभावित कर सकते हैं। जब किडनी शरीर से विषाक्त तत्वों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह शरीर में ज़हर का कारण बन सकता है, जिससे व्यक्ति को नींद से बार-बार जागने की समस्या हो सकती है।

आईटी नियम दूसरा संशोधन, 2026: भारत के डिजिटल शासन की दिशा में एक बड़ा कदम
  • श्री वैभव गग्गर, सुश्री काम्या वहिल

भारत का डिजिटल इकोसिस्टम तेज़ी से विकसित हुआ है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब लोगों के संवाद करने और जानकारी तक पहुंचने के तरीकों में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। इससे जवाबदेही और ऑनलाइन नुकसान से जुड़ी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं और मौजूदा नियामक व्यवस्था को इसके अनुरूप विकसित होने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में प्रस्तावित बदलाव, जो 30 मार्च 2026 को प्रकाशित किए गए, भारत की डिजिटल नियामक प्रणाली में प्रक्रियागत कमियों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन ड्राफ्ट संशोधनों का उद्देश्य भाग-II के तहत मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण, परामर्श और दिशा-निर्देशों के अनुरूप इंटरमीडियरीज़ की अनुपालना को मजबूत करना तथा भाग-III के तहत डिजिटल मीडिया कंटेंट नियमन प्रणाली की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है।

सबसे पहले, नियम 3(1)(जी) और 3(1)(एच) के तहत डेटा संरक्षण और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जिम्मेदारियों से संबंधित स्पष्टीकरण दिया गया है। प्रस्तावित संशोधन स्पष्ट करता है कि रिकॉर्ड सुरक्षित रखने से जुड़े नियम अन्य लागू कानूनों के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों के अतिरिक्त होंगे। इससे वह अस्पष्टता दूर होती है, जिसके कारण कभी-कभी इंटरमीडियरीज़ अलग-अलग या न्यूनतम अनुपालन वाला दृष्टिकोण अपनाते थे। आईटी अधिनियम डिजिटल प्लेटफॉर्मों को अकेले काम करने की अनुमति नहीं देता। उन्हें आपराधिक प्रक्रिया कानून, वित्तीय नियमों और उनके उद्योग से जुड़े अन्य नियमन का भी पालन करना होता है। इस दृष्टि से यह स्पष्टीकरण उचित और आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संशोधन रिकॉर्ड सुरक्षित रखने से संबंधित है, न कि डेटा तक पहुंच से। ऐसे डेटा का खुलासा कानूनी प्रक्रियाओं और संवैधानिक सुरक्षा के अधीन रहेगा। हालांकि, इस तरह का सामान्य सुरक्षा प्रावधान यह आशंका भी पैदा कर सकता है कि इंटरमीडियरीज़ उपयोगकर्ता डेटा को अनिश्चितकाल तक सुरक्षित रखें, क्योंकि विभिन्न कानूनी व्यवस्थाएं बिना आवश्यकता, उद्देश्य-सीमा या अनुपातिकता का उल्लेख किए ऐसी शर्तें लागू कर सकती हैं। यदि भविष्य में ऐसी चिंताएं सामने आती हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी किया जा सकता है।

दूसरा, प्रस्तावित नियम 3(4) मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श, स्पष्टीकरण और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत बाध्यकारी दायित्व बनाने का प्रयास करता है। धारा 79 के तहत इंटरमीडियरीज़ को तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए सीमित दायित्व से सुरक्षा प्राप्त थी, बशर्ते वे उचित प्रक्रिया का पालन करें और अवैध गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी न करें। यह प्रावधान उन्हें बड़े पैमाने पर उपयोगकर्ता सामग्री की निगरानी करने की बाध्यता से बचाता था। सुप्रीम कोर्ट ने ‘श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ’ मामले में कहा था कि “सेफ हार्बर” सिद्धांत इंटरमीडियरीज़ को तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने से बचाता है, जब तक कि वे अवैध गतिविधि की “वास्तविक जानकारी” मिलने पर कार्रवाई करते हैं। इस सिद्धांत ने प्लेटफॉर्मों को सूचना प्रवाह में निष्पक्ष बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लेकिन तब से डिजिटल इकोसिस्टम काफी बदल चुका है। प्लेटफॉर्म अब केवल निष्क्रिय मध्यस्थ नहीं रहे। उनका विशाल आकार और एल्गोरिद्म आधारित कार्यप्रणाली ऑनलाइन नुकसान और जनमत को प्रभावित करने के तरीकों को बदल चुकी है। ऐसे में केवल अदालत के आदेश या औपचारिक नोटिस पर आधारित मॉडल धीरे-धीरे अप्रभावी साबित हो रहा है। नियम 3(4) शासन व्यवस्था को अधिक लचीला बनाकर इस कमी को दूर करने का प्रयास करता है। यह कंटेंट हटाने के लिए कानूनी आदेश की आवश्यकता समाप्त नहीं करता, बल्कि प्रशासनिक साधनों के माध्यम से प्लेटफॉर्मों के संचालन को दिशा देने की कोशिश करता है। हालांकि, अत्यधिक हस्तक्षेप को लेकर चिंताएं भी जायज़ हैं। चूंकि “सेफ हार्बर” हमेशा शर्तों पर आधारित रहा है, इसलिए उचित आचरण के मानक समय के साथ बदल सकते हैं। इसे अधिक वैध और संतुलित बनाने के लिए यह आवश्यक होगा कि ऐसे परामर्श और SOP पारदर्शिता के साथ जारी किए जाएं, जिनमें प्रकाशन, तर्कसंगत कारण और जहां संभव हो, हितधारकों से परामर्श शामिल हो।

तीसरा, संशोधन प्रस्तावित करता है कि नियम 8.1 की उपधारा में बदलाव कर भाग-III के नियम 14, 15 और 16 को केवल प्रकाशकों पर ही नहीं, बल्कि इंटरमीडियरीज़ और उनके प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रकाशित समाचार एवं समसामयिक घटनाओं से जुड़े कंटेंट पर भी लागू किया जाए। “उपयोगकर्ता” और “प्रकाशक” के बीच का अंतर हमेशा स्पष्ट नहीं होता। यह डिजिटल मीडिया निगरानी ढांचे के दायरे का महत्वपूर्ण विस्तार है, जो पहले मुख्यतः संगठित समाचार प्रकाशकों तक सीमित था। संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्रोत से आने वाले कंटेंट के गंभीर उल्लंघनों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। इससे पारंपरिक प्रकाशकों और समान प्रकार की गतिविधियों में लगे डिजिटल माध्यमों के बीच नियामक समानता को बढ़ावा मिलेगा।

इस प्रकार, संशोधन नियामक समानता को मजबूत करता है और मौजूदा ढांचे की संरचनात्मक कमियों को दूर करने का प्रयास करता है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि भाग-III का उपयोग केवल गंभीर और प्रणालीगत नुकसान पहुंचाने वाली उपयोगकर्ता-जनित सामग्री तक सीमित रहना चाहिए। अत्यधिक सख्ती से लागू किए जाने पर वैध राजनीतिक अभिव्यक्ति और खोजी पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है। इसलिए मंत्रालय यह विचार कर सकता है कि नियम 14 से 16 के तहत हस्तक्षेप स्पष्ट मानकों — जैसे पहुंच, प्रभाव और जोखिम — के आधार पर किया जाए तथा न्यूनतम प्रतिबंधात्मक उपाय अपनाए जाएं। इससे खुले और बहुलतावादी डिजिटल सार्वजनिक क्षेत्र को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

अंत में, नियम 14 में “शिकायतों” शब्द को बदलकर “मामलों” किए जाने का प्रस्ताव एक प्रतिक्रियात्मक से अधिक सक्रिय नियामक दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है। अंतर-विभागीय समिति (IDC) अब केवल व्यक्तिगत शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सरकार द्वारा संदर्भित व्यापक और प्रणालीगत मुद्दों पर भी विचार कर सकेगी। ऐसे समय में, जब संगठित दुष्प्रचार अभियान जैसी समस्याएं व्यक्तिगत शिकायतों के दायरे से बाहर होती हैं, यह लचीलापन समयानुकूल और आवश्यक दोनों है। हालांकि, IDC के अधिकार क्षेत्र के विस्तार के साथ प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। विचार किए गए “मामलों” की प्रकृति का समय-समय पर खुलासा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन संस्थागत विश्वसनीयता को मजबूत करेगा तथा मनमानी हस्तक्षेप की आशंकाओं को कम करेगा।

समग्र रूप से देखा जाए तो, ये ड्राफ्ट संशोधन भारत की इंटरमीडियरी जवाबदेही प्रणाली को आधुनिक बनाने का एक व्यावहारिक प्रयास हैं। वे यह स्वीकार करते हैं कि स्थिर कानूनी सिद्धांत तेजी से बदलती तकनीकी वास्तविकताओं का पूर्ण समाधान नहीं दे सकते। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती इनके क्रियान्वयन में निहित है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि विस्तारित नियामक शक्तियों का उपयोग पारदर्शी, अनुपातिक और इंटरनेट के खुले स्वरूप को बनाए रखने वाले तरीके से किया जाए। यदि सावधानीपूर्वक लागू किया गया, तो ये सुधार जवाबदेही और नवाचार के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं, बिना स्वतंत्र अभिव्यक्ति को कमजोर किए।

(लेखक श्री वैभव गग्गर वरिष्ठ अधिवक्ता और सुश्री काम्या वहिल अधिवक्ता हैं।)

आकाशवाणी के 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वॉकाथॉन का आयोजन

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

आकाशवाणी के गौरवपूर्ण 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शनिवार सुबह एक भव्य वॉकाथॉन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आकाशवाणी चंडीगढ़, दूरदर्शन, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), सीसीडब्ल्यू सहित विभिन्न संस्थानों के 200 से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वॉकाथॉन को श्री सुमीत गोयल, डीडीजी एवं क्लस्टर हेड, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में उत्साह, एकजुटता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का विशेष वातावरण देखने को मिला।

इस अवसर पर विकास भट्ट, निदेशक (इंजीनियरिंग); श्रीमती पूनम अमृत सिंह, प्रोग्राम हेड, आकाशवाणी; अश्वनी कुमार, न्यूज़ हेड AIR; सुश्री आकांक्षा सक्सेना, न्यूज़ हेड DDK; श्री प्रीतम सिंह, निदेशक, पत्र सूचना कार्यालय चंडीगढ़; श्रीमती मीनाक्षी कालिया, एडीपी, आकाशवाणी; तथा श्री अश्वनी कुमार, प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव सहित विभिन्न सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

वॉकाथॉन को आम नागरिकों से भी अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। प्रातः भ्रमण करने वाले अनेक लोगों तथा आकाशवाणी के पुराने श्रोताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए आकाशवाणी से जुड़ी अपनी पुरानी यादें एवं अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए।

यह आयोजन आकाशवाणी और जनसामान्य के बीच दशकों पुराने आत्मीय संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्वास्थ्य, सद्भावना एवं सामूहिक सहभागिता का संदेश देने में सफल रहा।

भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए रूपरेखा” पर आधारित शोधपत्र पर जानकारी और सुझाव आमंत्रित

दिल्ली /सत्ता संदेश

एक प्रतिस्पर्धी वातावरण में तकनीकी में तेजी से परिवर्तन, जटिल कौशल मांग और संगठनात्मक नवाचार अर्थव्यवस्था में ज्ञान के बढ़ते महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इस संदर्भ में, अर्थव्यवस्था में ज्ञान के योगदान का आकलन करना और इसमें हो रहे परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत उपायों की सिफारिश करना आवश्यक हो गया है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक रूपरेखा विकसित करने का प्रयास कर रहा है। इस दिशा में पहले से कोई समान पहल न होने के कारण, यह प्रयास एक नई पहल है और इसमें विशेषज्ञों एवं अन्य हितधारकों के सहयोग की आवश्यकता है।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में फरवरी 2025 में हुई एक बैठक की सिफारिशों के आधार पर, इस उद्देश्य के लिए एक तकनीकी सलाहकार समूह (टीएजी) का गठन किया गया था। इसकी अध्यक्षता उस समय क्षमता विकास आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने की। इस समूह में विचार मंच, उद्योग निकायों, शिक्षाविदों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल थे। सितंबर 2025 में एक विचार-विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य मूर्त संसाधनों का वर्गीकरण विकसित करना और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उनके योगदान को मापने के लिए संभावित मात्रात्मक संकेतकों और डेटा स्रोतों की पहचान करना था। टीएजी के सुझावों, विचार-विमर्श सत्र से प्राप्त विचारों और विशेषज्ञों के साथ हुई बाद की चर्चाओं के आधार पर, भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक रूपरेखा पर एक आधार पत्र मंत्रालय में तैयार किया गया है। यह आधार पत्र https://mospi.gov.in/announcements पर उपलब्ध है।

इस शोधपत्र में निम्‍नलिखित चार अध्याय हैं:

अध्याय 1: ज्ञान और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था—अवधारणात्‍मक विचार

अध्याय 2: उपलब्ध पद्धतियाँ और मात्राएँ

अध्याय 3: भारत का पारंपरिक ज्ञान—आयाम एवं चुनौतियाँ, और

अध्याय 4: अर्थव्यवस्था में ज्ञान के योगदान का मूल्यांकन; एक रूपरेखात्मक परिचय।

पहले अध्याय में ज्ञान के आयामों, उसके सृजन और विकास पर वैचारिक विचार-विमर्श किया गया है, साथ ही इसमें अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव से संबंधित हालिया चर्चाओं पर भी विचार किया गया है। दूसरे अध्याय में अनुसंधान एवं विकास, बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अकादमिक संसाधनों के मूल्यांकन के लिए उपलब्ध पद्धतियों का वर्णन किया गया है और ज्ञान के इन घटकों के मूल्यांकन के लिए कुछ मापदंड प्रस्तुत किए गए हैं। तीसरे अध्याय में भारतीय अर्थव्यवस्था में पारंपरिक ज्ञान की भूमिका और विभिन्न कार्यों में इस पारंपरिक ज्ञान की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। इसमें इसके संरक्षण, प्रलेखन और वर्गीकरण से संबंधित साहित्य और पहलों की समीक्षा की गई है और संबंधित मापदंड प्रस्तुत किए गए हैं। अध्याय 4 में अर्थव्यवस्था पर ज्ञान के प्रभाव को समझने के लिए साक्ष्यों को एक व्यापक ढांचे में समेकित करने का प्रारंभिक प्रयास किया गया है और इसके आवश्यक घटकों को परिभाषित किया गया है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य सचिव श्री रतन पी. वाटल की अध्यक्षता में ज्ञान प्रणाली पर एक समिति का गठन किया है। इस समिति को अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक व्यावहारिक नीति पत्र तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। उपर्युक्त आधार पत्र ही व्यावहारिक नीति पत्र का आधार बनेगा।

सभी हितधारकों और आम जनता से परामर्श प्रक्रिया के अंतर्गत आधार पत्र पर टिप्पणियाँ और सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। अपनी जानकारी 15 जून 2026 तक   maneesh.jindal@mospi.gov.in और neeraj.kumar007[at]nic[dot]in ईमेल पतों पर इस मंत्रालय को भेजी जा सकती हैं। इससे इस रूपरेखा को शीघ्र अंतिम रूप देने में सहायता मिलेगी।

भगवान वाल्मीकि तीर्थ सथल को मिलेगी नई पहचान, पंजाब सरकार ने 17.73 करोड़ रुपये के विकास कार्य शुरू किए

अमृतसर/ सत्ता संदेश

वाल्मीकि समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध — हरभजन सिंह ईटीओ

अमृतसर स्थित पावन भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल सरायन बोर्ड के चेयरमैन और पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में पावन वाल्मीकि तीर्थ को नई पहचान देने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्यों की शुरुआत की गई। पंजाब सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा करवाए जा रहे इन कार्यों का उद्घाटन राज्यसभा सदस्य Balbir Singh Seechewal, कैबिनेट मंत्री Harbhajan Singh ETO, विधायक Jasbir Singh Sandhu और अन्य आम आदमी पार्टी नेताओं द्वारा किया गया।

इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि भगवान वाल्मीकि जी के पावन तीर्थ स्थल के विकास के लिए पंजाब सरकार बड़े स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पवित्र स्थान देश-विदेश से आने वाली संगतों की आस्था का केंद्र है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान, कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ और स्थानीय विधायकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार द्वारा जारी किए गए फंड से श्रद्धालुओं की जरूरतें पूरी होंगी और तीर्थ स्थल की सुंदरता में भी बढ़ोतरी होगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि जब से वाल्मीकि तीर्थ एडवाइजरी बोर्ड का गठन हुआ है, तब से यहां विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि मार्च महीने में हुई बैठक के बाद सभी कार्यों का अनुमान तैयार करके मुख्यमंत्री को भेजा गया था, जिसके बाद पंजाब सरकार द्वारा 17 करोड़ 73 लाख रुपये जारी किए गए।

उन्होंने कहा कि यह राशि तीर्थ स्थल के सुधार, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने में इस्तेमाल की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अक्टूबर महीने में यहां राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा सामाजिक भाईचारे की भलाई के लिए प्रतिबद्ध रही है और वाल्मीकि समाज की भावनाओं का पूरा सम्मान करती है।

समारोह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाज के प्रमुख लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने पंजाब सरकार के इस प्रयास की सराहना की।

खालसा कॉलेज अमृतसर में बिहारी और कश्मीरी छात्रों के बीच झगड़ा, तनाव का माहौल

अमृतसर/ सत्ता संदेश

देर रात हॉस्टल में हुई कहासुनी ने हिंसक रूप धारण किया

बिहार के छात्रों ने वार्डन और कुछ शिक्षकों पर लगाए गंभीर आरोप

कश्मीरी और बिहारी छात्रों के बीच पुराने विवाद की बात भी आई सामने

Khalsa Engineering College के रणजीत एवेन्यू स्थित कैंपस में देर रात छात्रों के बीच हुए झगड़े ने कॉलेज का माहौल तनावपूर्ण बना दिया। जानकारी के अनुसार बिहार और कश्मीर से संबंधित छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जो बाद में हिंसक झगड़े में बदल गया। इस घटना में कुछ छात्रों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और कॉलेज प्रशासन दोनों जांच में जुटे हुए हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए बिहार के एक छात्र ने बताया कि वह खालसा कॉलेज में बीसीए की पढ़ाई कर रहा है। उसने आरोप लगाया कि हॉस्टल में पहले एक छात्र के साथ मारपीट की गई, जिसके बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। बिहार के छात्रों ने कहा कि कुछ कश्मीरी छात्रों ने पत्थरों और अन्य चीजों से बिहार के छात्रों पर हमला किया। उसका दावा है कि इस दौरान कुछ शिक्षक और वार्डन भी मौजूद थे, जिन पर छात्रों ने नशे की हालत में होने के आरोप लगाए हैं।

छात्रों का कहना है कि कुछ बच्चों को कमरों में बुलाकर थप्पड़ मारे गए और उनके साथ बदसलूकी की गई। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की शिकायत पुलिस को दी गई, लेकिन अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। बिहार के छात्रों ने मांग की है कि जिन वार्डनों और छात्रों का इस घटना में नाम सामने आया है, उन्हें तुरंत निलंबित कर कॉलेज से बाहर निकाला जाए।

छात्रों ने यह भी कहा कि इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं और हर बार उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हॉस्टल में छात्रों के साथ धर्म और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव किया जाता है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन उन्हें पूरी सुरक्षा नहीं दे रहा, जबकि वे चार साल की फीस भरकर यहां पढ़ाई करने आए हैं।

दूसरी ओर, इस मामले को लेकर मीडिया से बातचीत करते हुए Jagjit Singh Walia ने कहा कि खालसा इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रों के बीच किसी मुद्दे को लेकर झगड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि पुलिस स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा न हो। उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने भी एक आंतरिक जांच समिति बनाई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।

डीसीपी ने कहा कि अभी तक किसी बड़ी चोट या हथियार इस्तेमाल होने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जो भी सबूत और तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर ही पुलिस कार्रवाई करेगी। उन्होंने लोगों और मीडिया से अपील की कि इस मामले को धर्म या किसी राज्य से जोड़कर न देखा जाए और अफवाहों से बचा जाए।

फिलहाल कॉलेज कैंपस में माहौल शांत बताया जा रहा है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों में घटना को लेकर चिंता बनी हुई है। पुलिस और कॉलेज प्रशासन की जांच जारी है और आने वाले दिनों में मामले से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।

बोरवेल में गिरे बच्चे को लगभग नौ घंटे बाद बचाया गया

होशियारपुर/सत्ता संदेश

डिप्टी कमिश्नर ने बच्चे को बचाने के लिए NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस, सिविल अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के अथक प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद किया

बचाव अभियान के दौरान पंजाब के जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल अंत तक मौजूद रहे

होशियारपुर, 15 मई: शुक्रवार शाम 4 बजे पास के गांव चक समाना में एक बोरवेल में गिरे चार साल के बच्चे को NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय निवासियों की मदद से लगभग नौ घंटे बाद सुरक्षित निकाल लिया गया।

बच्चे गुरकरन सिंह (हरिंदर और आशा का बेटा, जो मज़दूर हैं) को रात करीब 12:40 बजे बोरवेल से बाहर निकाला गया और तुरंत मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन और SSP संदीप कुमार मलिक ने शुरू से ही इस अभियान का नेतृत्व किया और इसे सफल बनाने के लिए टीमों के दृढ़ संकल्प की खूब सराहना की।

बचाव अभियान के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने कहा कि बच्चे को बचाने के बाद, उसे आगे की जांच के लिए एक मेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस में अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि यह घटना शाम करीब 4 बजे हुई थी और सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि गुरकरन अपने घर के पास ही एक खुले बोरवेल में गिर गया था, जिसे कल ही खोदा गया था। उन्होंने बताया कि बोरवेल के ठीक बगल में 30 फीट से ज़्यादा गहरा गड्ढा खोदने के बाद, बचाव टीमें बोरवेल के साथ बनाए गए एक संकरे रास्ते से शाफ़्ट तक पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्होंने बताया कि बोरवेल में गिरने के बाद बच्चा करीब 30 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था और बचाव अभियान में तेज़ी लाने के लिए मौके पर ज़रूरी मशीनरी मंगवाई गई थी। उन्होंने बताया कि ज़िला प्रशासन ने शाफ़्ट में एक कैमरा और ऑक्सीजन पाइप भी नीचे उतारा था, जिसकी मदद से फुटेज में बच्चे की हलचल देखी जा रही थी।

डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि NDRF की टीम, जिसमें 40 से ज़्यादा सदस्य शामिल थे, ने इस मुश्किल समय में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए इस अभियान को सुरक्षित रूप से सफल बनाया। इस बीच, पंजाब के जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और होशियारपुर से लोकसभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल, जो इस पूरे ऑपरेशन के दौरान मौके पर मौजूद थे, ने गुरकरन को बचाने के लिए सभी टीमों द्वारा किए गए अथक प्रयासों की सराहना की। डॉ. रवजोत ने कहा कि जिला प्रशासन ने NDRF, अन्य टीमों और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की थी, जिन्होंने गुरकरन की जान बचाई। सांसद डॉ. चब्बेवाल ने कहा कि यह एक बहुत ही नाजुक ऑपरेशन था और टीमों के लगातार प्रयासों के कारण, लगभग सात घंटे की मशक्कत के बाद इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

SSP संदीप कुमार मलिक ने भी बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव टीमों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि टीमों का जज्बा बहुत ही सराहनीय था, जिसके कारण गुरकरन की जान बच सकी। यह भी उल्लेखनीय है कि बचाव कार्यों के दौरान, सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी टीमों का हौसला बढ़ाया और विभिन्न तरीकों से उनकी मदद की

सहारनपुर: तंदूरी रोटी पर थूक लगाकर सेंकने का VIDEO वायरल, पुलिस ने होटल से दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक होटल का घिनौना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। इस वीडियो में एक कर्मचारी कथित तौर पर तंदूरी रोटी बनाने के दौरान उस पर मुंह से थूक लगाता और फिर उसे तंदूर में सेंकता हुआ दिखाई दे रहा है। मामला सामने आते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए होटल के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला? यह घटना सहारनपुर के चिलकाना थाना क्षेत्र के सरसावा रोड पर स्थित एक होटल की है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक युवक रोटी बेलने के बाद उस पर कुछ गिराता है, जिसे लोगों ने थूक बताकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी फैल गई और इसे लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ बताया गया।

पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की पहचान: इलाके के निवासी रोहित लम्बरदार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और होटल पर दबिश दी। पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनकी पहचान तंजीम और मोहम्मद महबूब के रूप में हुई है। तंजीम अम्बहेटा का रहने वाला है, जबकि महबूब बिहार का रहने वाला है जो यहाँ होटल में काम कर रहा था।

जांच के घेरे में होटल: पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वीडियो कितना पुराना है और क्या ग्राहकों को पहले भी ऐसा ही दूषित खाना परोसा जाता रहा है। प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा विभाग को भी मामले की सूचना दे दी है ताकि होटल के लाइसेंस और स्वच्छता मानकों की जांच की जा सके।

नितिन गडकरी से ₹100 करोड़ की फिरौती मांगने वाले जयेश पुजारी को 5 साल की सजा, जेल से दी थी जान से मारने की धमकी

नेशनल डेस्क : नागपुर जिला सत्र न्यायालय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को जान से मारने की धमकी देने और उनसे मोटी फिरौती मांगने के आरोपी जयेश पुजारी को दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला? दोषी जयेश पुजारी ने केंद्रीय मंत्री के कार्यालय में फोन कर 100 करोड़ और 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। फिरौती की रकम न देने पर उसने नितिन गडकरी को बम विस्फोट कर जान से मारने की धमकी भी दी थी।

जेल के अंदर से रची थी साजिश: जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जयेश पुजारी पहले से ही हत्या के एक मामले में कर्नाटक की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसने जेल में रहने के दौरान ही अवैध रूप से मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और गडकरी के कार्यालय में धमकी भरे फोन किए थे। नागपुर पुलिस की शिकायत पर मामले की सुनवाई हुई और विभिन्न धाराओं के तहत उसे सजा सुनाई गई है।

‘इंफ्रास्ट्रक्चर मैन’ के नाम से मशहूर हैं गडकरी: नितिन गडकरी को देश में सड़कों के जाल बिछाने के लिए ‘इंफ्रास्ट्रक्चर मैन’ कहा जाता है। हाल ही में वह अपने उस बयान के लिए भी चर्चा में रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका 90% काम समाजसेवा से जुड़ा है, इसलिए उन्हें चुनाव प्रचार की जरूरत महसूस नहीं होती।