‘मैं वहां मर सकता था’: जेल में मौत के मुँह से लौटे फिल्ममेकर विक्रम भट्ट, सिस्टम की संवेदनहीनता पर बयां किया अपना दर्द
मनोरंजन डेस्क : मशहूर फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट, जो अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों को डराने के लिए जाने जाते हैं, हाल ही में उन्होंने अपने जीवन के एक वास्तविक और रूह कंपा देने वाले अनुभव को साझा किया है। पिछले साल दिसंबर में धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद उदयपुर सेंट्रल जेल में बिताए गए दिनों को याद करते हुए विक्रम भट्ट ने बताया कि कैसे वे मौत के करीब पहुँच गए थे।
जेल की वो खौफनाक रात: विक्रम भट्ट ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि जनवरी के मध्य में उदयपुर जेल की बैरक नंबर 10 में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। राजस्थान की कड़ाके की ठंड के बीच उन्हें इतना तेज बुखार था कि उनका शरीर आग की तरह तप रहा था। उन्होंने बताया कि चार कंबलों में लिपटे होने के बाद भी उनकी कंपकंपी कम नहीं हो रही थी।
सिस्टम की लापरवाही और ‘चमत्कारिक’ सुधार : विक्रम भट्ट ने जेल प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, जब उन्हें जेल के अस्पताल ले जाया गया, तो वहां न डॉक्टर थे और न ही थर्मामीटर। डॉक्टर ने उन्हें बाहर के अस्पताल ले जाने की सिफारिश की, लेकिन VIP सुरक्षा और आदिवासी मेले के प्रबंधन में व्यस्त होने का बहाना बनाकर प्रशासन ने उन्हें कई दिनों तक अस्पताल नहीं भेजा।
जब इलाज की उम्मीद खत्म हो गई, तो विक्रम ने ईश्वर का सहारा लिया। उन्होंने तेल-नमक छोड़ दिया और प्रार्थना करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि बिना किसी बाहरी चिकित्सा सहायता के उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा, जिसे वे किसी चमत्कार से कम नहीं मानते।
15 दिन बाद आई पुलिस : विक्रम भट्ट ने व्यंग्य करते हुए बताया कि जब वे पूरी तरह ठीक हो गए, उसके 15 दिन बाद पुलिस अधिकारी उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए आए। उन्होंने अधिकारियों से कहा, “सज्जनों, आप 15 दिन की देरी से आए हैं। शायद आप मेरा भूत देख रहे हैं”।
क्या था मामला? विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को दिसंबर 2023 में उदयपुर के एक व्यवसायी के साथ 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लगभग दो महीने जेल में बिताने के बाद, इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

