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अमित शाह ने बीकानेर में भारत-पाक सीमा सुरक्षा मजबूत करने को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

राजस्थान/ सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के बीकानेर में सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे जिलों से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर एवं फलोदी के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट व पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सीमा प्रबंधन को सशक्त एवं व्यापक बनाया जाए।

बैठक में प्रत्येक सीमावर्ती जिले के लिए 360 डिग्री सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्णय लिया गया। इस एकीकृत प्रयास में स्थानीय नागरिकों, राज्य सरकार की मशीनरी और सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे सीमा प्रबंधन को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0-15 किलोमीटर के दायरे में हो रहे अवैध निर्माणों को जमींदोज करने का निर्देश दिया।

अमित शाह ने BSF, CBDT, NCB और राज्य सरकार की मशीनरी के साथ समन्वित सीमा प्रबंधन रणनीति अपनाए जाने पर बल दिया, ताकि घुसपैठ, नारकोटिक्स तस्करी, अतिक्रमण, आतंकवादी फंडिंग और अन्य सीमा-पार अपराधों पर शिकंजा कसा जा सके।

गृह मंत्री ने जिला मजिस्ट्रेटों को जिम्मेदारियाँ सौंपते हुए निर्देश दिया कि वे सभी बैंकों में पूर्ण कानूनी एवं वित्तीय अनुपालन सुनिश्चित करें, प्रमुख व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का सत्यापन करें, उनके फंडिंग स्रोतों की जांच करें, म्यूल खातों एवं शेल कंपनियों को ट्रैक करें, फर्जी आधार कार्डों की पहचान करें तथा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करें।

साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर अपराधों के त्वरित निवारण के लिए ‘1930’ कॉल सेंटर का प्रभावी उपयोग किया जाए तथा क्षेत्र में कानून प्रवर्तन व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने के लिए तीन नए आपराधिक कानूनों का पूर्ण रूप से कार्यान्वयन किया जाए।

बैठक के दौरान वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के सफल एवं प्रभावी कार्यान्वयन पर विशेष बल दिया गया, जिसके माध्यम से अंतिम छोर तक शासन को सुदृढ़ करना, आर्थिक अपराधों को रोकना, बुनियादी सुविधाओं की कमी पूरी करना तथा सीमावर्ती जनसंख्या को समर्थन देना सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, सीमावर्ती गांवों में सभी सरकारी योजनाओं का 100% सैचुरेशन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

बैठक में रेखांकित किया गया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। साथ ही, केन्द्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देकर सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

WHO-ICHI फ्रेमवर्क और पारंपरिक चिकित्सा स्वास्थ्य संहिता पर दो दिवसीय परामर्श बैठक संपन्न

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (एएसयू) चिकित्सा पद्धतियों के लिए स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीएचआई) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड (एनएचआईसी) के विकास पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और परामर्शदात्री चर्चा का आयोजन किया। यह आयोजन 25-26 मई को ऑनलाइन माध्यम से किया गया।

आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) और दाता समझौते के बाद इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को डब्ल्यूएचओ के आईसीएचआई ढांचे से जोड़ना है। इसका लक्ष्य एएसयू नैदानिक ​​हस्तक्षेपों के लिए विश्व स्तर पर मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से मजबूत कोडिंग शब्दावली विकसित करना है, ताकि सीमा पार डेटा आदान-प्रदान को सक्षम बनाया जा सके, नैदानिक ​​अनुसंधान को मजबूत किया जा सके और बीमा एकीकरण सहित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा दिया जा सके।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप हस्तक्षेप वर्गीकरणों के रणनीतिक महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने, दस्तावेज़ीकरण नियमों को मजबूत करने और डिजिटल स्वास्थ्य परितंत्र में अंतरसंचालनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

उद्घाटन एवं तकनीकी सत्र

केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के उप महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत के स्वागत भाषण के साथ उद्घाटन सत्र का शुभारंभ हुआ। अपने संबोधन में आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को सुदृढ़ करने में मानकीकृत हस्तक्षेप शब्दावली के महत्व पर चर्चा की।

डब्ल्यूएचओ के तकनीकी अधिकारी डॉ. नेनाद कोस्टांजेक समेत डब्ल्यूएचओ डेटा मानक और सूचना विज्ञान टीम के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने एएसयू हस्तक्षेप वर्गीकरण को वैश्विक स्वास्थ्य सूचना विज्ञान मानकों के साथ संरेखित करने के लिए भविष्य के रोडमैप और तकनीकी आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया।

इस दो दिवसीय बैठक में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए अलग-अलग सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें मसौदा दस्तावेजों की विस्तृत तकनीकी समीक्षा, जांच-पड़ताल के अलावा विशेषज्ञ परामर्श भी शामिल रहा। तीनों अनुसंधान परिषदों के लगभग 30 वैज्ञानिकों के साथ-साथ आईटीआरए, एआईआईए, नियम और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के संकाय सदस्यों ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।

तैयार अंतिम प्रारूप जुलाई 2026 में होने वाली आगामी डब्ल्यूएचओ-आईसीएचआई एएसयू अल्फा ड्राफ्ट संपादकीय कार्यशाला का आधार बनेगा।

जम्मू में टूटा पुल बना ग्रामीणों की मुसीबत, जान जोखिम में डाल नदी पार कर स्कूल और धार्मिक स्थलों तक पहुंच रहे लोग

जम्मू,/ सत्ता संदेश

Jammu and Kashmir के कई ग्रामीण इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं, जहां पुल बह जाने के कारण गांवों का संपर्क स्कूलों, धार्मिक स्थलों और आसपास के क्षेत्रों से पूरी तरह कट गया है। मजबूरी में ग्रामीण अब कामचलाऊ नावों और अस्थायी साधनों के सहारे उफनती नदी पार कर रहे हैं, जिससे हर दिन हादसे का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार हाल की बारिश और तेज बहाव के चलते नदी पर बना पुराना पुल क्षतिग्रस्त होकर बह गया। इसके बाद कई गांवों के लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है, जबकि धार्मिक स्थलों तक जाने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है। मजबूरी में स्थानीय लोगों ने छोटी नावों और अस्थायी लकड़ी के सहारों से नदी पार करने का इंतजाम किया है। हालांकि तेज बहाव और खराब मौसम के कारण यह सफर बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराने के बावजूद पुल निर्माण का काम शुरू नहीं किया गया।

क्षेत्र के निवासियों ने कहा कि बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है। यदि जल्द नया पुल नहीं बनाया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल अस्थायी पुल या सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पुल निर्माण और वैकल्पिक संपर्क बहाल करने को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होता, तब तक उनकी परेशानियां कम नहीं होंगी।

इस घटना ने एक बार फिर दूरदराज ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमजोर स्थिति को उजागर कर दिया है, जहां एक पुल टूटने से हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो जाती है।

एक्सप्लेनर: चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी में NASA, कैसे बनेगा ‘लूनर बेस’?

NASA अब सिर्फ चांद पर इंसानों को भेजने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वहां स्थायी बेस बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की यह महत्वाकांक्षी योजना भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रयोगों और मंगल मिशन की तैयारी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। सवाल यह है कि आखिर चांद पर बेस क्यों बनाया जा रहा है, यह कैसे काम करेगा और इंसानों के लिए वहां रहना कितना चुनौतीपूर्ण होगा?

क्यों जरूरी है चांद पर बेस?

NASA का मानना है कि चांद भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक “स्टॉपओवर स्टेशन” बन सकता है। पृथ्वी की तुलना में चांद का गुरुत्वाकर्षण काफी कम है, इसलिए वहां से अंतरिक्ष यान लॉन्च करना आसान और कम खर्चीला होगा। वैज्ञानिकों का उद्देश्य चांद पर लंबे समय तक इंसानों को सुरक्षित रखने की तकनीक विकसित करना है, ताकि भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजा जा सके।

आर्टेमिस मिशन की क्या भूमिका?

चांद पर बेस बनाने की योजना Artemis Program के तहत आगे बढ़ रही है। इस मिशन का उद्देश्य इंसानों को दोबारा चांद पर उतारना और वहां टिकाऊ उपस्थिति स्थापित करना है। NASA आने वाले वर्षों में चांद के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) क्षेत्र में बेस स्थापित करने की योजना बना रहा है, क्योंकि वहां पानी के बर्फीले भंडार मिलने की संभावना है।

चांद पर इंसान कैसे रहेंगे?

लूनर बेस में विशेष मॉड्यूल बनाए जाएंगे, जहां अंतरिक्ष यात्री रह सकेंगे। इनमें ऑक्सीजन, बिजली, पानी और तापमान नियंत्रण जैसी सुविधाएं होंगी। वैज्ञानिक सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए करने की योजना बना रहे हैं। चांद की मिट्टी यानी ‘रेगोलिथ’ का उपयोग निर्माण सामग्री के रूप में भी किया जा सकता है।

सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

चांद पर वातावरण नहीं है, जिससे वहां अत्यधिक गर्मी और ठंड का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा अंतरिक्ष विकिरण (Radiation), उल्कापिंडों का खतरा और सीमित संसाधन बड़ी चुनौती हैं। वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जो अंतरिक्ष यात्रियों को इन खतरों से सुरक्षित रख सके।

दुनिया की नजर चांद पर क्यों?

सिर्फ NASA ही नहीं, बल्कि China, Russia और कई अन्य देश भी चांद मिशनों पर तेजी से काम कर रहे हैं। चांद को भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज संसाधनों और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र माना जा रहा है।

भविष्य की अंतरिक्ष दुनिया की शुरुआत

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चांद पर स्थायी बेस बन जाता है, तो यह मानव इतिहास में अंतरिक्ष युग का सबसे बड़ा कदम साबित हो सकता है। इससे अंतरिक्ष पर्यटन, वैज्ञानिक खोजों और दूसरे ग्रहों पर मानव मिशनों का रास्ता खुल सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव पर चीन की बड़ी टिप्पणी, पाकिस्तान की ‘सक्रिय मध्यस्थता’ का किया समर्थन

China ने अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में Pakistan की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए “सक्रिय मध्यस्थता” बेहद जरूरी है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने संयुक्त राष्ट्र में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान निकाल सकती है।

वांग यी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन उन सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करता है जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल करने तथा टकराव को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

चीन ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई या दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए होना चाहिए। वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जो तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता को क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन लगातार खुद को वैश्विक शांति और मध्यस्थता के समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी बीजिंग कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर चुका है। वहीं पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से मुस्लिम देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज, सिद्धरमैया ने बुलाई अहम मंत्रिमंडलीय बैठक; अटकलों पर लग सकता है विराम

बेंगलुरु / सत्ता संदेश

Siddaramaiah द्वारा बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल सहयोगियों की अहम बैठक बुलाए जाने के बाद Karnataka की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चल रही नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता संतुलन की अटकलों के बीच इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों के साथ मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, सरकार के कामकाज और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से राज्य की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिनमें नेतृत्व परिवर्तन, मंत्रिमंडल फेरबदल और पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री द्वारा अचानक बुलाई गई बैठक ने राजनीतिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है। हालांकि सरकार की ओर से इसे नियमित प्रशासनिक बैठक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं।

बताया जा रहा है कि बैठक में सरकार की विकास योजनाओं, आगामी राजनीतिक रणनीति और पार्टी संगठन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा राज्य में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और जनता से जुड़े मामलों की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल रहने की संभावना है।

विपक्षी दल भी इस बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है और इसी कारण अचानक बैठक बुलाने की जरूरत पड़ी है। वहीं सत्तारूढ़ Indian National Congress के नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और मुख्यमंत्री नियमित रूप से मंत्रियों के साथ समन्वय बैठक करते रहते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बैठक के बाद कर्नाटक की राजनीति में चल रही कई अटकलों पर विराम लग सकता है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया बैठक के जरिए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर किसी तरह की भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

असम में UCC पर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने बताया ‘भाजपा का एजेंडा’; व्यापक चर्चा के बिना कानून लाने का विरोध

गुवाहाटी / सत्ता संदेश

Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बुधवार को सदन में पेश किए गए ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे Bharatiya Janata Party का “राजनीतिक एजेंडा” करार दिया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर बिना व्यापक सामाजिक और कानूनी परामर्श के कानून लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

विपक्ष के नेताओं ने सदन में कहा कि प्रस्तावित यूसीसी विधेयक राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप था कि यह कानून समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, विधि विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करनी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि असम जैसे बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी राज्य में किसी भी समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले स्थानीय परंपराओं, जनजातीय रीति-रिवाजों और विभिन्न समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है।

वहीं सरकार की ओर से विधेयक का समर्थन करते हुए कहा गया कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित करना है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम साबित होगा। सरकार ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान की भावना के अनुरूप है और इससे राज्य में कानूनी समानता को बढ़ावा मिलेगा।

विधानसभा में हुई तीखी बहस के बीच यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूसीसी को लेकर असम में राजनीतिक बयानबाजी और जनचर्चा और तेज हो सकती है। विपक्ष जहां इसे सामाजिक विभाजन का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे सुधारवादी कदम के रूप में पेश कर रही है।

खेल परिसरों को मिलेगा नया जीवन, बिहार सरकार अपनाएगी PPP और CSR मॉडल : खेल मंत्री श्रेयसी सिंह

पटना / सत्ता संदेश

बिहार सरकार अब राज्य के खेल परिसरों को केवल निर्माण तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह सक्रिय और उपयोगी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। बिहार की खेल मंत्री Shreyasi Singh ने बुधवार को कहा कि जिला खेल भवन-सह-व्यायामशाला, स्टेडियम, खेल मैदान और अन्य खेल परिसरों के प्रभावी संचालन के लिए खेल विभाग सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल तथा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) सहयोग को अपनाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में खेल अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है, लेकिन अब समय आ गया है कि इन परिसरों को नियमित गतिविधियों, प्रशिक्षण शिविरों और प्रतियोगिताओं के माध्यम से जीवंत बनाया जाए। सरकार का लक्ष्य खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और ग्रामीण स्तर तक खेल संस्कृति को मजबूत करना है।

खेल मंत्री ने कहा कि कई खेल परिसर निर्माण के बाद पर्याप्त उपयोग नहीं होने के कारण अपनी क्षमता के अनुरूप लाभ नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में निजी संस्थाओं और कॉरपोरेट कंपनियों के सहयोग से इन परिसरों का संचालन, रखरखाव और आधुनिक सुविधाओं से विकास किया जाएगा। इससे खिलाड़ियों को प्रशिक्षकों, फिटनेस सुविधाओं, आधुनिक उपकरणों और बेहतर खेल वातावरण का लाभ मिल सकेगा।

उन्होंने बताया कि PPP मॉडल के तहत निजी एजेंसियों की भागीदारी से खेल परिसरों में पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं CSR फंड के जरिए कंपनियां खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने, खेल सामग्री उपलब्ध कराने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग कर सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य में नई प्रतिभाएं उभरकर सामने आएंगी।

Bihar सरकार की इस पहल को राज्य में खेल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं का बड़ा केंद्र बन सकता है।

भीषण गर्मी से बचने शिमला पहुंचे सैलानी, 72 घंटे में 70 हजार वाहन शहर में दाखिल

शिमला / सत्ता संदेश

मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पर्यटक हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी वजह से शिमला में वाहनों का भारी दबाव देखने को मिल रहा है और शहर के कई हिस्सों में बार-बार जाम की स्थिति बन रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 दिनों में शिमला में कुल 6 लाख 31 हजार वाहन पहुंचे हैं। इनमें से करीब 70 हजार वाहन सिर्फ पिछले 72 घंटों में शहर में दाखिल हुए।

हालांकि पर्यटन सीजन अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है, लेकिन ‘पहाड़ों की रानी’ शिमला पहले ही पर्यटकों और वाहनों से भर चुकी है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करने की अपील की है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने बताया कि पिछले 24 दिनों में चंडीगढ़-कालका मार्ग से लगभग 3 लाख 70 हजार वाहन शिमला पहुंचे हैं। इसके अलावा किन्नौर, बिलासपुर और कुल्लू मार्ग से भी बड़ी संख्या में पर्यटक वाहनों का आगमन हुआ है।

उन्होंने कहा कि अचानक बढ़े पर्यटक दबाव के कारण शहर की पुरानी पार्किंग समस्या और गंभीर हो गई है। पिछले एक सप्ताह में 1 लाख 54 हजार 450 वाहन शिमला पहुंचे, जबकि केवल पिछले 72 घंटों में करीब 70 हजार वाहनों की एंट्री दर्ज की गई।

यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए प्रशासन ने शिमला को पांच जोनों में बांटा है और प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है। ट्रैफिक कंट्रोल में सहायता के लिए स्वयंसेवकों की भी मदद ली जा रही है।

जाम कम करने के लिए पुलिस वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर रही है। ऊपरी शिमला जाने वाले वाहनों को शोगी-मेहली मार्ग से भेजा जा रहा है ताकि शहर के मुख्य मार्गों पर दबाव कम किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि जून महीने में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद 31 मई के बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

आमतौर पर हिमाचल प्रदेश में पर्यटन सीजन जून के पहले सप्ताह में चरम पर पहुंचता है, लेकिन इस वर्ष उत्तर और पश्चिम भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण पर्यटन सीजन समय से पहले ही शुरू हो गया है।

SIR कराना चुनाव आयोग का अधिकार…मतदाता सूची पुनरीक्षण की वैधता पर SC की मुहर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

बिहार में चुनाव आयोग के एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ दाखिल याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयोग के पास एसआईआर करने का अधिकार है। उसने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। कोर्ट का कहना है कि आयोग ने बिहार की वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन का आदेश देकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन नहीं किया। इस तरह के अभ्यास से वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित हुई और निष्पक्ष चुनाव में मदद भी मिली।

NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स समेत कई संगठनों और लोगों की ओर से दायर याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाओं के इस समूह में SIR से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। खासतौर से बिहार में आयोग द्वारा निर्देशित गहन पुनरीक्षण से यह चुनौती मूल रूप से संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व कानून 1950 की धारा 21(3) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चुनाव आयोग के उस फैसले से पैदा हुई है, जिसमें बिहार के सभी विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर का निर्देश दिया गया था।

 अहम मुद्दों पर विश्लेषण जरूरी

“बिहार में जनसांख्यिकीय भिन्नताओं, शहरीकरण और बड़े पैमाने पर लोगों के इधर-उधर जाने के कारण वोटर लिस्ट में पर्याप्त परिवर्तन होने की वजह से यह प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया गया था. इसलिए, चुनावी प्रक्रिया की अखंडता की रक्षा करने, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के संवैधानिक दायित्व का पालन करते हुए चुनाव आयोग ने बिहार से इसे शुरू किया और फिर राष्ट्रव्यापी विशेष पुनरीक्षण करने का संकल्प लिया”

CJI सूर्यकांत ने फैसला सुनाते हुए आगे कहा कि दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करने और घटनाक्रमों का अवलोकन करने के बाद पक्षों की ओर से पेश दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि इन 3 अहम मसलों का विश्लेषण आवश्यक है।

SIR से निष्पक्ष चुनाव में मदद मिलीः SC

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आयोग ने बिहार में एसआईआर का आदेश देकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन नहीं किया, क्योंकि इस तरह के अभ्यास से वोटर लिस्ट की शुद्धता हुई, साथ ही स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव में मदद भी मिली। कोर्ट ने आगे कहा कि हम इस बात से भी पूरी तरह संतुष्ट हैं कि एसआईआर द्वारा प्राप्त किया जाने वाला मकसद स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से सीधा जुड़ा हुआ है।

कोर्ट ने आगे कहा, “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव महज मतदान की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करते. वे असल में की सत्यनिष्ठा, सटीकता और विश्वसनीयता पर निर्भर करते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव हैं।

“आयोग द्वारा दर्ज किए गए कारण, यानी अंतिम गहन संशोधन के बाद से चार 4 से अधिक का समय बीत जाना, कई सालों से बड़े पैमाने पर नामों का जुड़ना और हटना, तीव्र शहरीकरण, प्रवासन और इसके परिणामस्वरूप मतदाता सूचियों में पुनरावृत्ति और अशुद्धियों की संभावना, स्पष्ट रूप से उस मूलभूत सत्यनिष्ठा को बनाए रखने की दिशा में निर्देशित हैं।

आयोग के SIR कराने का अधिकारः SC

देश की सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सुनाया है कि आयोग को एसआईआर अभ्यास आयोजित करने का अधिकार था और उसने किसी भी वैधानिक या संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया। इस सबके पीछे का मकसद स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव से है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि इस प्रक्रिया से पहले से रजिस्टर्ड लोगों की नागरिकता की अनुमानित मान्यता समाप्त हो जाती है। कोर्ट ने राजनीतिक दलों और गैर सरकारी संगठनों द्वारा एसआईआर को चुनौती देने वाले इस आम तर्क को भी खारिज कर दिया कि यह एक बहिष्करणकारी प्रक्रिया है।

4 हफ्ते में काटे गए लोगों के नाम भेजेंः SC

कोर्ट ने आगे कहा कि वोटर स्थिति को साबित करने के लिए निर्धारित दस्तावेज आम तौर पर हर वोटर्स के पास उपलब्ध होते हैं और वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित करने के काम से इनका सीधा संबंध है। साथ ही कोर्ट ने आयोग से संदिग्ध नागरिकता के कारण वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों के नाम 4 हफ्ते के अंदर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने को कहा है, जो उनकी नागरिकता निर्धारित करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया अपनाएगा।

नागरिकता से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में शामिल करने या बाहर करने के उद्देश्य से नागरिकता पर सीमित जांच कर सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग किसी मतदाता की नागरिकता का निर्धारण नहीं कर सकता। वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए आयोग द्वारा नागरिकता का निर्धारण फाइनल नहीं है , क्योंकि संदिग्ध वोटर को लिस्ट से हटाए जाने के बाद पर्याप्त अवसर देने के बाद केंद्र सरकार द्वारा इसकी पूरी तरह से जांच की जानी आवश्यक है।