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प्रधानमंत्री ने देश भर में बढ़ते तापमान के मद्देनजर देशवासियों से सावधानी बरतने का आग्रह किया

प्रधानमंत्री ने भीषण गर्मी के दौरान सतर्क रहने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और संवेदनशील लोगों की देखभाल करने का आह्वान किया

प्रधानमंत्री ने लोगों से पशु-पक्षियों और भीषण गर्मी से प्रभावित लोगों की मदद करने की अपील की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते तापमान के मद्देनजर देशवासियों से हर संभव सावधानी बरतने का आग्रह किया है।

श्री मोदी ने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, बाहर निकलते समय पानी साथ रखने और अत्यधिक गर्मी की स्थिति में दूसरों को पानी देकर उनकी मदद करने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने चक्कर आना, मतली और अत्यधिक थकान के लक्षणों के प्रति लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि कोई व्यक्ति अस्वस्थ दिखाई दे, कमजोरी या सिरदर्द महसूस कर रहा हो तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाकर पानी और ओआरएस उपलब्ध कराएं।

श्री मोदी ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और बाहर धूप में काम करने वाले लोग भीषण गर्मी के दौरान विशेष रूप से प्रभावित होते हैं और चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज़ करना हीटस्ट्रोक का कारण बन सकता है।

श्री मोदी ने लोगों से इस दौरान बुजुर्ग माता-पिता, दादा-दादी, नानी-नानी और अपने अन्य प्रियजनों का नियमित रूप से हालचाल पूछने तथा उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त आराम करने की सलाह देने का भी आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने करुणा पर बल देते हुए, नागरिकों से अपील की कि वे इस गर्मी में पशु-पक्षियों के लिए घरों, बालकनियों, छतों, दुकानों और कार्यालयों के बाहर पानी से भरे बर्तन रखें।

श्री मोदी ने श्रृंखलाबद्ध ‘एक्स’ पोस्ट में कहा:

“देश के विभिन्न हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है और इसके साथ कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। यह गर्मी हम सभी के लिए कष्टदायी है और मैं आप सभी से यथासंभव सावधानी बरतने का आग्रह करता हूं। कृपया पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बाहर निकलते समय अपने साथ पानी जरूर रखें। दूसरों को भी पानी पिलाएं। ऐसे मौसम में ऐसी करुणा बहुत मायने रखती है।”

“गर्मी से होने वाली परेशानी जैसे चक्कर आना, मतली या अत्यधिक थकान पर ध्यान दें। अगर आपके आस-पास किसी को असामान्य रूप से अस्वस्थता, कमजोरी महसूस हो या सिरदर्द हो, तो उन्हें तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाना सबसे अच्छा है। उन्हें पानी, ओआरएस आदि उपलब्ध कराएं जिससे उन्हें आराम मिले। बच्चे, बुजुर्ग और बाहर काम करने वाले लोग भीषण गर्मी में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इन चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है और यहां तक ​​कि हीटस्ट्रोक का कारण भी बन सकता है। ऐसे मौसम में, समय पर देखभाल और ध्यान देना बहुत जरूरी है।”

“जब भी संभव हो, इस भीषण गर्मी के दौरान अपने बुजुर्ग माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और प्रियजनों को फोन करके उनका हालचाल पूछें। उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने और जब भी संभव हो, आराम करने की सलाह दें।”

“आइए हम इस भीषण गर्मी में, अपने आसपास के पशु-पक्षी और जानवरों का भी ख्‍याल रखें। घर, बालकनी, छत, दुकान या दफ्तर के बाहर रखा एक छोटा कटोरा पानी किसी प्यासे पक्षी के लिए जीवनदान बन सकता है। इन कठिन दिनों में करुणा हमारा मार्गदर्शन करे।”

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने एसईसीएल के कार्य संचालन की समीक्षा की; छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

बुनियादी ढांचे और अस्पताल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए गए; अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइजर यूनिट का उद्घाटन भी किया गया

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने दक्षिण पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) का एक दिवसीय दौरा किया और कंपनी के परिचालन प्रदर्शन, अवसंरचना संबंधी पहलों और भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरे के दौरान उन्होंने रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य में कोयला उत्पादन, अवसंरचना विकास, रसद संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन चर्चाओं का मुख्य लक्ष्य प्रमुख विकास परियोजनाओं में तेजी लाना, परिचालन सुगम बनाना और कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक विकास व रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूती देना था। उन्होंने कोयला क्षेत्र के विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि सहयोगात्मक दृष्टिकोण से राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा में राज्य का योगदान और अधिक मजबूत होगा।

एसईसीएल मुख्यालय के अपने दौरे के दौरान, श्री सतीश चंद्र दुबे ने एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कोयला उत्पादन, ढुलाई, गुणवत्ता प्रबंधन, सुरक्षा, डिजिटलीकरण पहल, पर्यावरण स्थिरता उपायों, कोयला गैसीकरण परियोजनाओं, खदान बंद करने की गतिविधियों, सीएसआर पहल और कंपनी की भविष्य की कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में एसईसीएल के सीएमडी श्री हरीश दुहान, कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और एसईसीएल के अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री ने सुरक्षित और टिकाऊ खनन पद्धतियों, आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसईसीएल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उत्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, सुरक्षा मानकों और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में कंपनी के प्रयासों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि सीएसआर पहलों को कोयला क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस अवसर पर एसईसीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री हरीश दुहान ने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान, एसईसीएल ने कोल इंडिया के 100 मिलियन टन के संचयी उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में 26.86 मिलियन टन का सर्वोच्च योगदान दिया है। उन्होंने कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एसईसीएल की प्रतिबद्धता को दोहराया।

एसईसीएल के डिजिटल परिवर्तन की पहल के अंतर्गत, केंद्रीय मंत्री ने ई-डीएडीएएस (एसईसीएल में डिजाइन और ड्राइंग अनुमोदन) पोर्टल और अस्पताल प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-डीएडीएएस पोर्टल प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं से संबंधित इंजीनियरिंग डिजाइन और ड्राइंग की ऑनलाइन जांच, निगरानी और अनुमोदन को सुगम बनाएगा, जिससे पारदर्शिता, निगरानी और समयबद्ध निष्पादन में सुधार होगा। एचएमआईएस पोर्टल रोगी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और बेहतर अस्पताल प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से एसईसीएल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करेगा।

इस दौरे के दौरान, श्री दुबे ने बिलासपुर के इंदिरा विहार स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइजर यूनिट का भी उद्घाटन किया। उन्नत स्वचालित परीक्षण क्षमताओं से लैस यह मशीन रक्त विश्लेषण को तेज और अधिक सटीक बनाएगी और स्वास्थ्य सेवाओं में निदान क्षमता को बढ़ाएगी। उन्होंने इस केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया और चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में एसईसीएल के प्रयासों की सराहना की।

कांगो-युगांडा में इबोला का कहर, 900 से ज्यादा मामले, 200 मौतें, इबोल से लड़ने के लिए WHO सहित भारत ने उठाए बड़े कदम,

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

अफ्रीका में इबोला वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। जबकि 223 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। कांगों में इबोला से 112 संक्रमित और 11 मरीजों की मौत हुई है जबकि युगांडा में एक की मौत और 8 मरीजों को संक्रमित पाया गया है। डब्ल्यूएचओ चीफ टेड रोस ने कहा है कि हेल्थ एजेंसियां तेजी से काम कर रही हैं, लेकिन तेज संक्रमण की वजह से हालात चुनौतीपूर्ण हैं।

कहां से शुरू हुआ संक्रमण?

यह संक्रमण मई 2026 में कांगो के इटुरी प्रांत में पहली बार सामने आया था। यह इलाका लंबे समय से हिंसा और संघर्ष से प्रभावित है। यहां बड़ी संख्या में विस्थापित लोग और सोने की खदानों में काम करने वाले मजदूर रहते हैं। WHO का कहना है कि लोगों की लगातार आवाजाही की वजह से वायरस तेजी से फैल रहा है। अब यह संक्रमण नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांत तक पहुंच चुका है। साउथ किवु के कुछ हिस्सों पर M23 विद्रोही संगठन का कब्जा है।

कांगो में अस्पतालों से भागे मरीज

इबोला से लड़ाई के बीच कांगो में अस्पतालों और हेल्थ सेंटर्स पर हमले भी हो रहे हैं। पिछले हफ्ते इटुरी प्रांत के मोंगबवालु जनरल रेफरल अस्पताल पर लगातार दो दिन हमला हुआ। हमलावरों ने इलाज के लिए लगाए गए टेंट में आग लगा दी, जिसके बाद 18 इबोला मरीज अस्पताल से भाग गए। जांच में पता चला कि इन मरीजों में एक व्यक्ति इबोला पॉजिटिव था और वह अब भी लोगों के बीच घूम रहा है। पूर्वी कांगो में सशस्त्र संघर्ष की वजह से हेल्थ टीमें नहीं पहुंच पा रहीं हैं।

अगले दिन फिर हमला हुआ और 7 और मरीज भी भाग निकले। एक गंभीर मरीज भागने की कोशिश के दौरान मर गया। बताया गया कि कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के शव दफनाने के लिए अस्पताल से ले जाना चाहते थे। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इबोला से मरने वाले लोगों के शव बेहद संक्रामक होते हैं, बिना सुरक्षा के अंतिम संस्कार करने से संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

भारत में क्या कदम उठाए गए?

भारत ने कांगो और युगांडा से आने वाली उड़ानों पर कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू किए हैं, जिनमें एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग और विमान में संदिग्ध यात्रियों को अलग बैठाने जैसे नियम शामिल हैं। यात्रियों को हेल्थ को लेकर सेल्फ-डिक्लेरेशन देना होगा। भारत सरकार ने 24 मई को एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें नागरिकों को अगली सूचना तक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। वहीं केरल सरकार ने प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए 21 दिन क्वारंटाइन में रहना अनिवार्य कर दिया है।

युगांडा से 23 मई को बेंगलुरु लौटी एक महिला को हल्का शरीर दर्द होने पर एहतियातन सरकारी एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल में आइसोलेशन में रखा गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, महिला में शरीर दर्द के अलावा कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। उसका सैंपल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजा गया था, जांच रिपोर्ट में महिला इबोला निगेटिव पाई गई, जिसके बाद राहत मिली।

दुनिया भर में क्या कदम उठाए गए?

WHO ने 17 मई को कांगो में फैले बुंडीबुग्यो स्ट्रेन वाले इबोला को इंटरनेशनल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया। WHO के मुताबिक, यह संक्रमण सीमाओं के पार फैलने का खतरा पैदा कर रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर कार्रवाई जरूरी है। अफ्रीका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने 9 देशों को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है। इनमें अंगोला, बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, इथियोपिया, केन्या, रवांडा, दक्षिण सूडान, तंजानिया और जाम्बिया शामिल हैं। EU ने इबोला और ऐसे वायरस को ट्रैकर करने के लिए अफ्रीका CDC को करीब 22 करोड़ की फंडिंग दी है।

यूरोपीय देशों ने अफ्रीका से आने वाले रूटों पर स्पेशल पैसेंजर ट्रैकिंग सिस्टम एक्टिवेट किया है। 25 मई को इटली में इबोला के दो संदिग्ध मिले, हालांकि इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। अमेरिका ने कांगो, युगांडा और साउथ सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी है। इन देशों से आने वाले यात्रियों की विशेष जांच की जा रही है। कनाडा ने भी इन देशों के नागरिकों की यात्रा और इमिग्रेशन प्रक्रिया 90 दिनों के लिए रोक दी है। युगांडा ने कांगो से आने-जाने पर रोक लगा दी है और उड़ानें भी अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। वहीं कई अफ्रीकी देशों ने जांच, आइसोलेशन वॉर्ड और हेल्थ मॉनिटरिंग बढ़ा दी है।

इबोला कैसे फैलता है?

यह वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ, कपड़े, बिस्तर और मेडिकल उपकरणों के संपर्क से फैलता है. शुरुआत में बुखार, कमजोरी और शरीर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. बाद में उल्टी, दस्त और खून बहने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षण मलेरिया जैसी दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। इसी वजह से शुरुआती पहचान मुश्किल हो जाती है और संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

भीषण गर्मी का कहर: पीएम मोदी ने देशवासियों से की खास अपील, कहा- ‘जितनी सावधानी बरत सकें, जरूर बरतें’

नई दिल्ली: भारत के विभिन्न राज्यों में जारी भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। देश के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच चुका है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

सावधानी और हाइड्रेशन पर जोर : प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल के माध्यम से देशवासियों से आग्रह किया है कि वे इस मौसम में अत्यधिक सावधानी बरतें। उन्होंने लोगों को स्वयं को हाइड्रेटेड रखने और घर से बाहर निकलते समय अपने साथ पानी की बोतल रखने की सलाह दी है। पीएम ने विशेष रूप से बुजुर्गों का ध्यान रखने और उन्हें दोपहर की तेज धूप में बाहर न निकलने देने का सुझाव दिया है।

सामाजिक जिम्मेदारी और करुणा की अपील: पीएम मोदी ने इस कठिन समय में एक-दूसरे की मदद करने पर जोर देते हुए कहा कि यदि संभव हो तो किसी प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाएं। उन्होंने उन लोगों की भी सराहना की जो अपनी दुकानों या घरों के बाहर प्यासे लोगों के लिए मटके में जल रखते हैं।

पशु-पक्षियों का रखें ख्याल मानवीय: संवेदनाओं के साथ-साथ पीएम ने बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति भी करुणा दिखाने की अपील की है। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अपनी छत, बालकनी या ऑफिस के बाहर पानी से भरा एक छोटा बर्तन अवश्य रखें, जो इस प्रचंड गर्मी में किसी पक्षी के लिए जीवनदान साबित हो सकता है।

NEET पेपर लीक में CBI का एक्शन, डॉक्टर समेत दो और को किया अरेस्ट, अब तक 13 गिरफ्तार

दिल्ली / सत्ता संदेश

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में लातूर के डॉक्टर डॉ. मनोज शिरुरे भी शामिल हैं। CBI के मुताबिक, डॉ. शिरुरे ने तीन छात्रों को केमिस्ट्री के लीक पेपर दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इनमें एक आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक का बेटा भी शामिल बताया गया।

जांच में सामने आया कि पेपर आरोपी पी. वी. कुलकर्णी से हासिल किए गए थे। वहीं, दूसरा गिरफ्तार आरोपी तेजस हर्षदकुमार शाह है। तेजस पुणे के डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल अकादमी में फिजिक्स का फैकल्टी है। आरोप है कि उसने गिरफ्तार आरोपी मनीषा हवालदार से NEET-UG 2026 के लीक फिजिक्स प्रश्न हासिल किए थे।

मनीषा हवलदार को 6 दिन की CBI कस्टडी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीषा हवलदार को छह दिन की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है। वह 30 मई तक कस्टडी में रहेगी। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि मनीषा ने फिजिक्स का पेपर लीक कर उसे लोगो को सर्कुलेट किया है। सीबीआई ने कोर्ट से सह-आरोपियों से आमना-सामना कराने और मामले से जुड़े दूसरे लोगों की पहचान करने के लिए मनीषा की रिमांड मांगी है।

NTA ने अतीत से कोई सबक नहीं लिया- SC

नीट पेपर लीक मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें शीर्ष अदालत ने एनटीए को फटकार लगाई। साथ ही उसे, केंद्र और CBI को नोटिस भी भेजा। कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एजेंसी ने अतीत से कोई सबक नहीं लिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार, NTA और सीबीआई से इस मामले में जवाब मांगा है. मामले पर अगली सुनवाई 29 मई को होगी।

21 जून को होगा NEET UG री-एग्जाम

NEET UG री-एग्जाम 21 जून 2026 को आयोजित किया जाएगा। परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए बिहार, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों ने सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का ऐलान किया है। बता दें कि 3 मई को NEET UG परीक्षा में रद्द कर दिया गया था। अब 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित होगी, 22 लाख कैंडिडेट्स नीट री-एग्जाम में शामिल होंगे।

RCB vs GT Qualifier 1: IPL 2026 के फाइनल में पहुंची रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू, 3 गेंद में 2 गलतियों की वजह से हारा गुजरात

स्पोर्ट्स डेस्क : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने आईपीएल 2026 के पहले क्वालीफायर में गुजरात टाइटंस (GT) को एकतरफा मुकाबले में 92 रनों से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेले गए इस मैच में आरसीबी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 254 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में गुजरात की टीम केवल 162 रनों पर सिमट गई।

रजत पाटीदार की तूफानी पारी : आरसीबी की इस जीत के हीरो कप्तान रजत पाटीदार रहे, जिन्होंने महज 33 गेंदों में नाबाद 93 रन कूट डाले। उनकी इस पारी में 9 छक्के और 5 चौके शामिल थे। उनके अलावा विराट कोहली और क्रुणाल पंड्या ने भी 43-43 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया।

गुजरात की खराब फील्डिंग और ‘जीवनदान‘: गुजरात टाइटंस की हार की सबसे बड़ी वजह उनकी खराब फील्डिंग रही। रजत पाटीदार को एक ही ओवर में दो बार जीवनदान मिले। 14वें ओवर में जब पाटीदार सिर्फ 18 रन पर थे, तब प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर उनका कैच छूटा और उसी ओवर में कागिसो रबाडा ने भी उनका एक आसान कैच टपका दिया। इन गलतियों का फायदा उठाकर पाटीदार ने मैच गुजरात से छीन लिया।

गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन: बेंगलुरु के गेंदबाजों ने भी अपना दबदबा बनाए रखा। तेज गेंदबाज जैकब डफी ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए, जबकि रसिख सलाम डार और भुवनेश्वर कुमार को 2-2 विकेट मिले। गुजरात की ओर से राहुल तेवतिया ने अर्धशतक जमाया, लेकिन वह टीम को जीत दिलाने के लिए काफी नहीं था।

गुजरात के पास अभी एक और मौका : भले ही गुजरात टाइटंस यह मैच हार गई है, लेकिन उसके पास फाइनल में पहुंचने का एक और मौका है। वह अब दूसरे क्वालीफायर में हैदराबाद और राजस्थान के बीच होने वाले एलिमिनेटर मैच की विजेता टीम से भिड़ेगी।

आसाराम बापू को बड़ा झटका: राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रखी बरकरार, तुरंत सरेंडर करने का आदेश

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आसाराम बापू की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने बुधवार को यह अहम फैसला सुनाते हुए आसाराम को राहत देने से साफ इनकार कर दिया।

तुरंत सरेंडर का निर्देश: फिलहाल अंतरिम जमानत या पैरोल पर बाहर चल रहे आसाराम को अदालत ने तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही उनकी जमानत की अवधि 7 जुलाई तक बढ़ाई गई थी, लेकिन अब उन्हें वापस जेल जाना होगा।

सह-आरोपियों को मिली राहत: जहाँ एक ओर आसाराम की सजा को कोर्ट ने सही ठहराया, वहीं इसी मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने इन दोनों को सजा से बरी कर दिया है, जिन्हें निचली अदालत ने 20-20 साल की सजा सुनाई थी।

क्या है पूरा मामला? यह मामला अगस्त 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ यौन शोषण का आरोप लगा था। लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट में इस मामले पर 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक डे-टू-डे सुनवाई हुई थी, जिसके बाद आज फैसला सुनाया गया।

वोटर लिस्ट संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार में SIR प्रक्रिया को ठहराया सही, चुनाव आयोग की हुई बड़ी जीत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए निर्वाचन आयोग (EC) के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में सुधार के लिए SIR कराना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है और इससे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है शुद्धता: चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करते, बल्कि वे वोटर लिस्ट की सत्यनिष्ठा और सटीकता पर टिके होते हैं। कोर्ट ने माना कि बिहार में पिछले चार दशकों से कोई गहन संशोधन नहीं हुआ था, जिसके कारण वोटर लिस्ट में अशुद्धियों और नामों की पुनरावृत्ति की संभावना बढ़ गई थी।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज: NGO ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) और अन्य याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि यह प्रक्रिया “NRC जैसी” है और आयोग के पास इतने बड़े स्तर पर संशोधन की शक्ति नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने इन तर्कों को दरकिनार करते हुए आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा है। गौरततलब है कि इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 65 लाख लोगों के नाम हटाए गए थे, जिन्हें ‘मृत’, ‘प्रवासी’ या अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत पाया गया था।

मजीठा नगर काउंसिल चुनावों के दौरान मजीठिया का AAP सरकार पर हमला, कहा– लोकतंत्र को दबाने की कोशिश हो रही है

मजीठा / सत्ता संदेश

हाईकोर्ट के दखल से बचा लोकतंत्र, कई वार्डों में नामांकन रद्द करने और वोटों में छेड़छाड़ के लगाए आरोप

पोलिंग बूथ के पास नारेबाजी और धक्कामुक्की के आरोप, मजीठिया ने पुलिस और चुनाव अधिकारियों को दी चेतावनी

पोलिंग स्टाफ के लिए चाय-पानी और भोजन की व्यवस्था की मांग, कहा– कर्मचारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ड्यूटी निभा रहे हैं

मजीठा नगर काउंसिल चुनावों के दौरान वोट डालने पहुंचे शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और उनकी पत्नी एवं विधायक गनीव कौर मजीठिया ने मतदान के बाद पत्रकारों से बातचीत की। इस मौके पर मजीठिया ने कहा कि जब भी लोकतंत्र को मजबूत करने की बात आती है, उनका परिवार हमेशा आगे रहता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में अमन-शांति, भाईचारे और लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक को बिना किसी डर और दबाव के अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए।

मजीठिया ने दावा किया कि मजीठा नगर काउंसिल चुनावों के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें रिटर्निंग ऑफिसर और एसडीएम की बदली, अलग-अलग वार्डों में उम्मीदवारों के नामांकन पत्र रद्द करना, वोटर सूचियों में हेराफेरी और वोट काटने के मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के ध्यान में लाया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए हस्तक्षेप किया।

अकाली नेता ने चुनाव अधिकारियों और पोलिंग स्टाफ से अपील करते हुए कहा कि वीडियोग्राफी और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुनिश्चित की जाए और कोई भी अधिकारी सरकार को खुश करने के लिए ऐसी गलती न करे, जिसके कारण भविष्य में उसे जवाबदेह होना पड़े। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की निगरानी में पूरी चुनाव प्रक्रिया की समीक्षा होगी।

वोटिंग के दौरान पोलिंग बूथ के पास आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा नारेबाजी किए जाने का जिक्र करते हुए मजीठिया ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थक 100 मीटर की सीमा के भीतर मौजूद रहे और विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सबूत और वीडियो चुनाव आयोग तथा हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर को भेजे जाएंगे।

इसके अलावा मजीठिया ने पोलिंग स्टाफ की सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी निभा रहे अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के लिए चाय-पानी और भोजन का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए, क्योंकि वे पूरी रात और दिन लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

मजीठिया ने अंत में कहा कि लोग जिसे चाहे वोट दें, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली जीत तभी होगी जब जनता के फैसले को बिना किसी रुकावट के स्वीकार किया जाएगा।

मजीठा में चुनावी विवाद पर आमने-सामने आए बिक्रम मजीठिया और आप नेता तलबीर सिंह गिल

मजीठा / सत्ता संदेश

मजीठिया ने पुलिस और प्रशासन पर दबाव में काम करने के लगाए आरोप

आप नेता तलबीर सिंह गिल बोले – “मजीठा में अब गुंडागर्दी नहीं चलने देंगे”

दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट, धमकाने और चुनावी माहौल खराब करने के लगाए आरोप

मजीठा में नगर काउंसिल चुनावों के दौरान हुए विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और आम आदमी पार्टी के हल्का मजीठा इंचार्ज तलबीर सिंह गिल ने मीडिया के सामने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों पक्षों ने चुनावी माहौल खराब करने, गुंडागर्दी करने और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए बिक्रम मजीठिया ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के फोन आने के बाद पुलिस ने एक आरोपी को मौके से बाहर निकाल दिया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने कथित तौर पर मारपीट की और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई, उसे पुलिस हिरासत में लेकर आई थी, लेकिन बाद में दबाव के चलते छोड़ दिया गया। मजीठिया ने आरोप लगाया कि एसएसपी तक पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा था और शिकायत दर्ज करने से भी बचा जा रहा था।

मजीठिया ने कहा कि पूरी घटना की वीडियो मौजूद है, जिसमें पुलिस कथित आरोपी को पकड़कर बाहर लाती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि किसी की पगड़ी को हाथ लगाना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना बेहद गंभीर मामला है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक दबाव के जरिए मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के नेता तलबीर सिंह गिल ने अकाली दल पर बाहरी लोगों को बुलाकर माहौल खराब करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मजीठा में भाईचारे और शांति को खराब करने की कोशिश की गई, लेकिन अब इलाके के लोग ऐसी “गुंडागर्दी” बर्दाश्त नहीं करेंगे। गिल ने कहा कि उन्होंने हमेशा महिलाओं और बहनों का सम्मान किया है और मजीठा में आपसी भाईचारे को बनाए रखने के लिए काम किया है।

तलबीर सिंह गिल ने आरोप लगाया कि अकाली दल के समर्थक 20 से 25 गाड़ियों में भरकर आए और चुनावी माहौल खराब करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके पास पूरी घटना की वीडियो मौजूद है और वे सभी सबूत पुलिस को देंगे। गिल ने कहा कि यदि किसी ने कानून अपने हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

आप नेता ने कहा कि पुलिस प्रशासन और एसएसपी चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संभाल रहे थे, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर तनाव पैदा करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि मजीठा के लोग अब बाहरी लोगों की दादागिरी स्वीकार नहीं करेंगे और चुनावों को लोकतांत्रिक तरीके से ही होने दिया जाएगा।

घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है।