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PM मोदी ने कूटनीतिक उपहारों के जरिए दुनिया को दिखाई भारत की जनजातीय विरासत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

पीएम नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में अपनी कूटनीतिक विदेश यात्राओं के दौरान विश्व के नेताओं को देश की स्वदेशी कला और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेष रूप से तैयार किए गए उपहार भेंट करके भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल को दर्शाया है।

स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को मध्य प्रदेश की परंपरागत गोंड पेंटिंग भेंट की गई जो भारत की जीवंत जनजातीय कला की विरासत का प्रतीक है। गोंड आदिवासी समुदाय की इस कला को अपने जटिल बिंदु-रेखा पैटर्न, चमकदार प्राकृतिक रंगों और प्रकृति से प्रेरित विषयों के चित्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। गोंड कला मध्य भारत के आदिवासी कारीगरों को स्थायी रूप से आजीविका के अवसर प्रदान करती रहती है।

वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को असम के मूगा रेशम की पारंपरिक शॉल और मणिपुर के तंगखुल नागा समुदाय की ओर से निर्मित शिरुई लिली की शॉल उपहार में दी गयी। अपनी विशिष्ट प्राकृतिक सुनहरी चमक और टिकाऊ होने के कारण प्रसिद्ध मूगा रेशम असम की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा का प्रतीक है और इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। वहीं, शिरुई लिली की शॉल तंगखुल नागा जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और कलात्मक परंपराओं को दर्शाती है। यह मणिपुर के दुर्लभ राज्य पुष्प शिरुई लिली से प्रेरित है।

संयुक्त अरब अमीरात की राजमाता को मणिपुर का काला चावल उपहार में दिया गया जो इस क्षेत्र के जनजातीय पहाड़ी समुदायों की ओर से पारंपरिक धरोहर के रूप से उगाया जाने वाला अनाज है। चक-हाओ की पहचान व्यापक रूप से अपने पौष्टिक और औषधीय गुणों के लिए है। यह इस क्षेत्र के मूलनिवासी समुदायों की पीढ़ियों से संरक्षित समृद्ध कृषि परंपराओं का प्रतीक है।

पीएम मोदी ने इन कूटनीतिक उपहारों के माध्यम से वैश्विक मंच पर भारत की जनजातीय परंपराओं, स्वदेशी शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया। साथ ही उन्होंने देश की कलात्मक और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने में आदिवासी समुदायों के अमूल्य योगदान को भी मान्यता दी।

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने खावड़ा में बढ़ाई ऊर्जा भंडारण क्षमता, बीईएसएस 3.37 गीगावाट घंटा तक पहुंचा

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Adani Green Energy Limited ने गुजरात के खावड़ा में अपनी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) क्षमता में बड़ा विस्तार किया है। कंपनी ने मंगलवार को जानकारी दी कि उसकी परिचालन बीईएसएस क्षमता बढ़कर 3.37 गीगावाट घंटा (GWh) तक पहुंच गई है।

कंपनी के बयान के अनुसार, मार्च 2026 में 1.37 गीगावाट घंटा की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने के बाद कुल परिचालन क्षमता में यह महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस विस्तार के साथ अदाणी ग्रीन एनर्जी ने देश में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

गुजरात का खावड़ा क्षेत्र देश के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना केंद्रों में शामिल हो चुका है। यहां सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के साथ आधुनिक बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीईएसएस तकनीक भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय उपयोग में लाने में मदद करती है। इससे ग्रिड स्थिरता बढ़ती है और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलता है।

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने कहा कि कंपनी भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को गति देने और बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा अवसंरचना विकसित करने के लिए लगातार निवेश कर रही है।

आरसीबी से भिड़ंत से पहले जीटी के सहायक कोच विजय दहिया का बड़ा बयान, बोले- ‘क्वालिफायर-1 एक जंग से कम नहीं’

गुजरात / सत्ता संदेश


आईपीएल के अहम मुकाबले क्वालिफायर-1 से पहले गुजरात टाइटंस (जीटी) के सहायक कोच विजय दहिया ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के खिलाफ होने वाले मैच को “जंग” करार दिया है। दहिया ने कहा कि दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक होने वाला है, क्योंकि दोनों ही टीमें फाइनल में जगह बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगी।

विजय दहिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आरसीबी इस सीजन शानदार फॉर्म में नजर आई है और उसके पास कई मैच विनर खिलाड़ी मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि गुजरात टाइटंस की टीम दबाव में बेहतर प्रदर्शन करना जानती है और बड़े मुकाबलों का अनुभव भी रखती है।

उन्होंने कहा, “प्लेऑफ के मैच हमेशा अलग होते हैं। यहां छोटी-छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं। हमें हर विभाग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि एक जंग होगी।”

गुजरात टाइटंस की टीम ने लीग चरण में संतुलित प्रदर्शन किया है। बल्लेबाजी में जहां शीर्ष क्रम ने जिम्मेदारी निभाई, वहीं गेंदबाजों ने भी कई मुकाबलों में टीम को जीत दिलाई। दूसरी ओर, आरसीबी ने लगातार जीत दर्ज कर प्लेऑफ में जगह बनाई है, जिससे टीम का आत्मविश्वास काफी ऊंचा है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकाबला विराट कोहली, शुभमन गिल और दोनों टीमों के स्टार गेंदबाजों के प्रदर्शन पर काफी हद तक निर्भर करेगा। फैंस को एक हाई-वोल्टेज और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले की उम्मीद है।

वेस्टइंडीज दौरे के लिए श्रीलंका ने घोषित की तीन अलग-अलग टीमें, नए चयन पैनल का बड़ा फैसला

कोलंबो / सत्ता संदेश


श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के नए अंतरिम प्रशासन के तहत नियुक्त चयन पैनल ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए सोमवार को तीन अलग-अलग राष्ट्रीय टीमों की घोषणा कर दी। यह दौरा टेस्ट, वनडे और टी20 प्रारूप में खेला जाएगा, जिसके लिए चयनकर्ताओं ने अलग-अलग संयोजन तैयार किए हैं।

श्रीलंका की टीम वेस्टइंडीज में दो टेस्ट मैच, तीन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला खेलेगी। चयन पैनल ने युवा खिलाड़ियों और अनुभवी क्रिकेटरों के संतुलन पर विशेष ध्यान दिया है। नए प्रशासन के तहत यह पहला बड़ा चयन माना जा रहा है, जिस पर क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं।

क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, टीम चयन में खिलाड़ियों के हालिया प्रदर्शन, फिटनेस और विदेशी परिस्थितियों में खेलने के अनुभव को अहम आधार बनाया गया है। टेस्ट टीम में अनुभवी खिलाड़ियों को जगह दी गई है, जबकि सीमित ओवरों की टीमों में युवा चेहरों को मौका देकर भविष्य की तैयारी पर जोर दिया गया है।

वेस्टइंडीज का दौरा श्रीलंका के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि टीम आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की तैयारियों को मजबूत करना चाहती है। कैरेबियाई परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों की भूमिका अहम रहने की उम्मीद है।

क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि नए चयन पैनल के नेतृत्व में श्रीलंका की टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी और विदेशी जमीन पर जीत हासिल करने में सफल रहेगी।

उत्तराखंड में हाथियों की गणना अभियान शुरू, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से हुई विशेष कवायद की शुरुआत


देहरादून / सत्ता संदेश

उत्तराखंड में जंगली हाथियों की संख्या का सटीक आकलन करने के लिए राज्य वन विभाग ने विशेष गणना अभियान शुरू कर दिया है। इस महत्वपूर्ण कवायद की शुरुआत मंगलवार को प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से की गई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य राज्य में हाथियों की वास्तविक संख्या, उनके आवागमन के मार्ग और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति का अध्ययन करना है।

वन विभाग की टीमों के साथ वन्यजीव विशेषज्ञ, शोधकर्ता और प्रशिक्षित कर्मचारी इस अभियान में भाग ले रहे हैं। हाथियों की गिनती के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग, कैमरा ट्रैप और प्रत्यक्ष निगरानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सर्वेक्षण कई चरणों में पूरा किया जाएगा और इसके आंकड़े भविष्य की वन्यजीव संरक्षण योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व और तराई क्षेत्र हाथियों के प्रमुख आवास माने जाते हैं। बीते कुछ वर्षों में जंगलों के सिकुड़ने और मानव गतिविधियों के बढ़ने से हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में यह गणना अभियान संरक्षण रणनीति तैयार करने में मदद करेगा।

वन विभाग ने बताया कि हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील इलाकों की भी पहचान की जाएगी, ताकि गांवों और जंगलों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों की सही संख्या और उनके व्यवहार संबंधी आंकड़े मिलने से वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला, कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में रैगिंग रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी

भुवनेश्वर / सत्ता संदेश


ओडिशा सरकार ने राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को रैगिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने और छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को रैगिंग रोधी समितियों, निगरानी प्रकोष्ठों और विशेष दस्तों को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है।

सरकार ने छात्रावासों और संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने, नियमित औचक निरीक्षण करने और ड्यूटी रोस्टर लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। यह फैसला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की सिफारिशों के बाद लिया गया है।

अधिसूचना में एससी और एसटी समुदायों की रैगिंग रोधी समितियों में भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए तीन स्तरीय निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

सरकार ने नए छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, परिचय सत्र, काउंसलिंग सुविधाएं और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को अनिवार्य रूप से मजबूत करने की बात भी कही है।

पंजाबी लोक विरासत अकादमी, लुधियाना ने किताब “स्मृति प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच” लॉन्च की

लुधियाना / सत्ता संदेश

आज़ादी की लड़ाई के असल इतिहासकार प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए, शहीद भगत सिंह के भतीजे प्रो. जगमोहन सिंह ने चंडीगढ़ के पीपल्स कन्वेंशन सेंटर में कहा कि वे मेरे टीचर ही नहीं, बल्कि मेरे गाइड भी थे। मुझे याद है कि 1966 को मैं और राजिंदर सिंह चीमा, प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच के साथ संकल्प पर सवार होकर बाबा सोहन सिंह भकना से मिलने गांव भकना (अमृतसर) गए थे। बाबा भकना ने प्रोफेसर के उर्दू ज्ञान को ध्यान में रखते हुए अपनी ऑटोबायोग्राफी “जीवन संग्राम” उन्हें गुरमुखी स्क्रिप्ट में छपवाने के लिए दे दी थी। युवक केंद्र द्वारा लिखा गया यही पाठ देश का पहला बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण प्रकाशन बना। अजीत प्रकाशन ग्रुप के चीफ एडिटर डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द ने कहा कि प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच को हमेशा इस बात की चिंता रहती थी कि शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, लेकिन उनकी यादें और विचार नई पीढ़ी के मन में सही जगह नहीं बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर मुझे बाबा सोहन सिंह भकना और शहीद भगत सिंह की माता बीबी विद्या वती जी का सानिध्य पाने का सौभाग्य मिला तो इसका श्रेय भी प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच को जाता है। उन्होंने कहा कि जब पंजाब सरकार ने उन्हें ‘जंग-ए-आजादी’ के इतिहास से संबंधित यादगार का चेयरमैन नियुक्त किया तो उन्होंने सबसे पहले प्रो. वड़ैच से संपर्क किया। प्रो. वड़ैच ने उन्हें कई महत्वपूर्ण पुस्तकें और रेफरेंस मटीरियल भी दिए। डॉ. हमदर्द ने कहा कि प्रो. वड़ैच जितने महान विद्वान थे, उतने ही मिलनसार और सरल भी थे। उन्होंने कहा कि भले ही प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच जैसी शख्सियतें शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और मिशन समाज को रास्ता दिखाते रहेंगे। वे हमेशा रहेंगे। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम भी अपने शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों को अपने मन में जिंदा रखें।
उन्होंने कहा कि प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच और उनके साथियों ने जालंधर के लाडोवाली रोड में एक यूथ सेंटर बनाया, जिसमें राजिंदर सिंह चीमा, प्रिंसिपल एमएस परमार, प्रिंसिपल जसवंत सिंह गिल, सुदर्शन कुमार लांबड़ा और राय हौर हमारे साथी थे। सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) से ऑनलाइन अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रिंसिपल जसवंत सिंह गिल ने कहा कि भले ही प्रो. वड़ैच शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका प्यार, लेखन और विचार भविष्य में भी सार्थक रहेंगे।
प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच के भतीजे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट एस. राजिंदर सिंह चीमा ने कहा कि परिवार के फैसले के अनुसार, छह महीने के अंदर प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच की याद में एक मेमोरियल बुक तैयार की जाएगी। उनके बारे में लिखी हुई सामग्री हमें 31 अगस्त तक मुहैया कराई जाए, ताकि उसे समय पर पब्लिश किया जा सके। इस मौके पर यूनिस्टार के मालिक, जाने-माने विचारक हरीश जैन, पंजाबी ट्रिब्यून के पूर्व एडिटर और लेखक डॉ. स्वराजबीर, पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के पूर्व वाइस चेयरमैन डॉ. गुरदेव सिंह सिद्धू, देश भगत मेमोरियल हॉल से अमोलक सिंह, गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन के वर्ल्ड प्रेसिडेंट सुरिंदर मेहन सिंह संधू, स. मनोहर सिंह चुघा (मोगा) और नामधारी दरबार से सुवरन सिंह विर्क ने भी संबोधित किया। इस मौके पर पंजाबी लोक विरासत अकादमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि प्रो. वड़ैच न सिर्फ आजादी की लड़ाई के तथ्यात्मक इतिहासकार थे, बल्कि मौजूदा अन्याय और जुल्म के भी गवाह थे। वे युवाओं को विपक्ष के खिलाफ सोचने, समझने और एनालाइज करने के लिए गाइड भी थे। इस मौके पर पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना की ओर से गुरभजन गिल के एडिटर-इन-चीफ के तौर पर तैयार की गई किताब “स्मृति प्रो. डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द, प्रो. जगमोहन सिंह, राजिंदर सिंह चीमा, प्रोफ़ेसर वड़ैच की इकलौती बेटी डॉ. मिन्ना वड़ैच जाखड़ और डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने “मालविंदरजीत सिंह वड़ैच” को जनता को समर्पित किया।
मंच का संचालन करते हुए जाने-माने विद्वान सुखदेव सिंह सिरसा ने सभी को संबोधित किया और प्रोफ़ेसर मालविंदरजीत सिंह वड़ैच की जीवनी के अलग-अलग पहलुओं पर रोशनी डाली।
पूर्व MLA हरदेव अर्शी नज़र सिंह मानशाहिया, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन डॉ. हरदेव सिंह विर्क, इतिहासकार सीता राम बंसल,
मशहूर लेखक शमशेर सिंह संधू, लोक गायक हरदीप सिंह मोहाली, फ़िल्म एक्टर दर्शन औलख, ए.एस. पाल पंजाब बुक सेंटर, डॉ. मेघा सिंह शेरगिल, बलदेव सिंह सरन पूर्व CMD पंजाब पावर कॉर्पोरेशन, शबदीश, हमीर सिंह, डॉ. रौनकी राम पंजाब यूनिवर्सिटी, करम सिंह इतिहासकार के पोते हरप्रीत सिंह ढिल्लों और गुरजीत सिंह ढिल्लों राजपुरा, रमेश कुमार, पुरुषोत्तम बल्ली बरनाला, नील कमल बठिंडा, पंजाबी कवि डॉ. सुरिंदर गिल, गुरसेवक सिंह ढिल्लों नामधारी, डॉ. बलदेव सिंह सप्तऋषि, संजीवन सिंह, नरभिंदर सिंह, डॉ. करनबीर सिंह लायलपुर खालसा कॉलेज जालंधर, एस. गगनदीप सिंह विर्क मुख्य प्रशासक बाबा आया सिंह रियारकी कॉलेज तुगलवाला (गुरदासपुर), सुखदर्शन नत्त, नवदीप सिंह गिल, प्रसिद्ध पत्रकार बलजीत बल्ली, डॉ. चमन लाल पूर्व प्रोफेसर जेएनयू, गदर आंदोलन पर पहली डॉक्टरेट करने वाले डॉ. हरीश पुरी, यशपाल वर्गा चेतना, सारा पंजाब विश्वविद्यालय, रणजीत सिंह औलाख, कस्तूरी लाल, स्वदेश तलवार, देश सेवक के संपादक रिपुदमन रिप्पी, वरिष्ठ पत्रकार रमनिंदर भाटिया, पंजाबी ट्रिब्यून समाचार संपादक जसबीर समर, डॉ. जगतार सिंह जोगा, डॉ. जसपाल सिंह प्रिंसिपल, सरदारनी जसपाल कौर चीमा, सरदारनी जसविंदर कौर गिल लुधियाना मौजूद रहे।

सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन बोर्ड नियम और राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण नियम, 2026 अधिसूचित किए


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय खेल निकायों की मान्यता और शासन मानकों की देखरेख के लिए राष्ट्रीय खेल बोर्ड

खेल विवादों के त्वरित, स्वतंत्र और लागत प्रभावी समाधान को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकर

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल बोर्ड) नियम, 2026 और राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।

राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल बोर्ड) नियम, 2026 में बोर्ड की संरचना, अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल, वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों के साथ-साथ बोर्ड की शक्तियों और कार्यों का प्रावधान है।

नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय खेल बोर्ड में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होंगे जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 के अंतर्गत गठित खोज-सह-चयन समिति द्वारा अनुशंसित नामों के पैनल से की जाएगी।

राष्ट्रीय खेल बोर्ड राष्ट्रीय खेल निकायों को मान्यता प्रदान करने और शासन, वित्तीय एवं नैतिक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा।

राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण) नियम, 2026 में न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल, उनकी नियुक्ति एवं पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया, वेतन और भत्ते, सेवा शर्तें और न्यायाधिकरण की शक्तियों का प्रावधान है।

इन नियमों में डिजिटल कार्यान्वयन के लिए तकनीकी-कानूनी उपाय भी शामिल हैं, जिनमें विवादों, नोटिसों, प्रतिक्रियाओं, दस्तावेजों और स्पष्टीकरणों को प्रस्तुत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक समर्पित पोर्टल की अधिसूचना, साथ ही न्यायाधिकरण से संचार, आदेशों का प्रकाशन, आभासी सुनवाई और कार्यवाही तथा आदेशों से संबंधित अभिलेखों का रखरखाव शामिल है।

राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण देश में खेल संबंधी विवादों के लिए एक समर्पित न्यायिक निकाय के रूप में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य दीवानी अदालतों पर निर्भरता कम करना और खेल प्रशासन से संबंधित विवादों का स्वतंत्र, त्वरित, प्रभावी और किफायती तरीके से निपटारा सुनिश्चित करना है।

यह भी आशा की जाती है कि ट्रिब्यूनल मुकदमों की बहुलता को कम करेगा और खेल विवादों के त्वरित, सरल और अधिक सुलभ समाधान के लिए एक एकल-खिड़की व्‍यवस्‍था प्रदान करेगा।

पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी की कमर टूटी, केंद्र सरकार महंगाई रोकने में फेल: कुलवंत सिंह सिद्धू

लुधियाना / सत्ता संदेश

डीजल महंगा होने से धान के सीजन में किसानों पर बढ़ेगा बोझ और घरेलू बजट भी हिला, लोग परेशान: विधायक सिद्धू

केंद्र सरकार तुरंत दखल देकर लोगों को राहत दे: कुलवंत सिंह सिद्धू

तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के खिलाफ हलका आत्म नगर के विधायक सिद्धू ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

विधानसभा हलका आत्म नगर से विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने सोमवार को पिछले कुछ दिनों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की सख्त आलोचना करते हुए कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को बुरी तरह प्रभावित किया है और घरेलू बजट को हिलाकर रख दिया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि महंगाई ने जनता की “कमर तोड़” दी है और लोग अपने रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में राहत देने की बजाय केंद्र सरकार ने आम नागरिकों को अकेला छोड़ दिया है। विधायक सिद्धू ने कहा कि आर्थिक तंगी के समय में लोगों के साथ खड़े होना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन मोदी की अगुवाई वाली सरकार महंगाई को काबू करने और जनता को राहत देने में पूरी तरह असफल रही है।

विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने आने वाले झोने के सीजन पर चिंता जताते हुए कहा कि किसानों को अब ट्रैक्टरों, ट्यूबवेलों और अन्य कृषि मशीनरी के लिए डीजल पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से ढुलाई की लागत में भी इजाफा होगा, जिससे सब्जियों, फलों, अनाज और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम और बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग के परिवार और रोजाना दिहाड़ीदार लोग तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे और उन्होंने केंद्र सरकार से लोगों को राहत प्रदान करने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है।

अमृतसर में थाना सुल्तानविंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 1 किलो 409 ग्राम हेरोइन, पिस्टल और ड्रग मनी बरामदचार आरोपी गिरफ्तार, एसीपी साउथ प्रीत इंदर सिंह ने दी जानकारी

अमृतसर में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना सुल्तानविंड पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1 किलो 409 ग्राम हेरोइन, एक पिस्टल और ड्रग मनी बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रीत इंदर सिंह ने बताया कि पुलिस टीम द्वारा गुप्त सूचना के आधार पर विशेष अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान आरोपियों को काबू कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में हेरोइन, अवैध हथियार और नकदी बरामद की गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके।

पुलिस का कहना है कि जिले में नशा तस्करों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।