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आईपीएल में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक, खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के लिए नया निर्देश जारी

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) ने इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) में खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों द्वारा स्मार्ट चश्मों (स्मार्ट ग्लासेस) के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस कदम को तकनीकी सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और मैच की निष्पक्षता बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब खेलों में वियरेबल टेक्नोलॉजी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और कई डिवाइस वास्तविक समय में वीडियो रिकॉर्डिंग, डेटा ट्रांसमिशन और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं। बोर्ड का मानना है कि इस तरह के उपकरण मैच के दौरान अनधिकृत संचार या संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पैदा कर सकते हैं।

नए निर्देश के तहत किसी भी खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ या मैच अधिकारी को मैदान के भीतर या ड्रेसिंग रूम क्षेत्र में स्मार्ट चश्मों का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी के पास ऐसे उपकरण पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल हटाने और संबंधित कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

बीसीसीआई के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम खेल की पारदर्शिता और “कॉन्टैक्टलेस डेटा एक्सेस” जैसे संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। बोर्ड पहले से ही मैच के दौरान संचार उपकरणों, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के उपयोग पर सख्त नियम लागू करता रहा है, और यह नया प्रतिबंध उसी नीति का विस्तार माना जा रहा है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक क्रिकेट में तकनीक का उपयोग प्रशिक्षण और प्रदर्शन विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण हो गया है, लेकिन मैदान के अंदर ऐसे उपकरणों पर नियंत्रण जरूरी है ताकि किसी भी तरह की अनुचित जानकारी लीक या रणनीतिक बढ़त न मिल सके।

फ्रेंचाइजी टीमों को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है और सभी को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। खिलाड़ियों के लिए प्री-मैच ब्रीफिंग में इस नियम को दोहराए जाने की संभावना है।

आईपीएल में पहले भी तकनीकी उपकरणों के उपयोग को लेकर समय-समय पर नियम कड़े किए जाते रहे हैं। इस नए प्रतिबंध को उसी दिशा में एक और सख्त कदम माना जा रहा है, जिससे लीग की निष्पक्षता और सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जा सके।

बिहार में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, मुख्यमंत्री ने तत्काल सर्वे के निर्देश दिए

पटना / सत्ता संदेश

Bihar के कई जिलों में अचानक आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते फसलों और पेड़ों पर लगे फलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने नुकसान का त्वरित आकलन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया है, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सके और प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत दी जा सके।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और फसलों व बागवानी को हुए नुकसान को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर राहत और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

अधिकारियों के अनुसार, कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं, मक्का, सब्जियों और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। पेड़ों से फल गिरने और खेतों में जलभराव जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के इस अचानक बदलाव से रबी और खरीफ सीजन के बीच संक्रमण काल में किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऐसे में समय पर सर्वे और मुआवजा वितरण बेहद महत्वपूर्ण है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित गांवों में तुरंत टीम भेजकर नुकसान का आकलन करें और रिपोर्ट तैयार करें।

फिलहाल सरकार की प्राथमिकता प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे आगामी कृषि सीजन की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

तमिलनाडु में ‘अग्नि नक्षत्रम’ समाप्त, कई जिलों में बारिश का पूर्वानुमान; तापमान में गिरावट के आसार

चेन्नई / सत्ता संदेश

Tamil Nadu में भीषण गर्मी के चरम दौर ‘अग्नि नक्षत्रम’ के समाप्त होने के बाद मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के 15 से अधिक जिलों में आने वाले दिनों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।

‘अग्नि नक्षत्रम’ को दक्षिण भारत में गर्मी का सबसे तीव्र चरण माना जाता है, जो आमतौर पर मई के महीने में होता है। इस वर्ष यह अवधि 4 मई से 28 मई तक रही। इस दौरान तापमान सामान्य से अधिक रहने और तेज गर्म हवाओं के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस चरम गर्मी के बाद मानसून पूर्व गतिविधियां सक्रिय हो रही हैं, जिससे राज्य के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है। इससे न केवल तापमान में गिरावट आएगी बल्कि लंबे समय से जारी गर्मी से राहत भी मिलेगी।

पूर्वानुमान के अनुसार, तटीय जिलों के साथ-साथ आंतरिक क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश के कारण जलभराव की स्थिति भी बन सकती है, जिसे लेकर प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने किसानों के लिए भी सलाह जारी की है कि वे मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए अपनी कृषि गतिविधियों की योजना सावधानी से बनाएं। विशेष रूप से जिन क्षेत्रों में धान और अन्य खरीफ फसलों की तैयारी चल रही है, वहां बारिश लाभकारी साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के बाद होने वाली यह बारिश पर्यावरण संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे भूजल स्तर में सुधार और तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है।

फिलहाल राज्य में मौसम के इस बदलाव को राहत भरे संकेत के रूप में देखा जा रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी कि बारिश का यह दौर कितना प्रभावी रहता है।

राजस्थान के सेवानिवृत्त एएसपी ने की आत्महत्या, जोधपुर में पुलिस जांच शुरू

जोधपुर / सत्ता संदेश

Rajasthan के जोधपुर शहर के लालसागर इलाके में एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने अपने आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शुक्रवार को इस घटना की पुष्टि की और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान दशरथ सिंह चरण के रूप में हुई है, जो करीब दो साल पहले पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने हाल ही में लालसागर क्षेत्र में एक नया मकान बनवाया था और लगभग एक सप्ताह पहले ही अपनी पत्नी के साथ वहां रहने आए थे।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में किसी सुसाइड नोट की जानकारी सामने नहीं आई है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पारिवारिक स्थिति, मानसिक तनाव या किसी अन्य व्यक्तिगत कारण सहित सभी एंगल से जांच की जा रही है।

इस घटना के बाद इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशरथ सिंह चरण एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हाल ही में नए घर में शिफ्ट होने के बाद सामान्य जीवन जी रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले को संवेदनशील मानते हुए जांच जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मानसिक दबाव, सामाजिक बदलाव और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करते हैं, जिसके चलते ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और समय पर सहायता बेहद जरूरी हो जाती है।

‘अन्नपूर्णा योजना’ के 12 पन्नों के आवेदन पत्र पर विवाद, मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने किया बचाव

कोलकाता / सत्ता संदेश

West Bengal सरकार की प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) योजना ‘अन्नपूर्णा योजना’ के विस्तृत आवेदन पत्र को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बीच राज्य की मंत्री Agnimitra Paul ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और भारतीय नागरिकों तक ही पहुंचे।

यह योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, लेकिन इसके लिए तैयार किए गए 12 पन्नों के विस्तृत आवेदन पत्र को लेकर कई स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। आवेदन में लाभार्थियों से परिवार के प्रत्येक सदस्य की विस्तृत जानकारी, पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य व्यक्तिगत विवरण मांगे गए हैं।

विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतने विस्तृत दस्तावेजीकरण के कारण कई वास्तविक जरूरतमंद महिलाएं योजना का लाभ लेने से वंचित रह सकती हैं। आलोचकों का यह भी तर्क है कि ग्रामीण और कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में इतनी लंबी प्रक्रिया जटिलता पैदा कर सकती है।

हालांकि, मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का मकसद पारदर्शिता सुनिश्चित करना और फर्जी लाभार्थियों को योजना से बाहर रखना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया आवश्यक है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस आवेदन पत्र के माध्यम से लाभार्थियों की सटीक पहचान सुनिश्चित करने और दोहराव या फर्जीवाड़े को रोकने की कोशिश की जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचेगा और संसाधनों का दुरुपयोग नहीं होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि कल्याणकारी योजनाओं में सत्यापन और सरलता के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। जहां एक ओर सख्त जांच प्रक्रिया फर्जी लाभार्थियों को रोकती है, वहीं अत्यधिक जटिलता वास्तविक जरूरतमंदों के लिए बाधा भी बन सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में और बहस का विषय बन सकता है, खासकर महिलाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर।

फिलहाल यह विवाद जारी है और राज्य सरकार पर आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने या उसमें संशोधन करने का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।

मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला: 29 कॉलेजों में पीजी प्रथम वर्ष में प्रवेश पर रोक

नांदेड़ / सत्ता संदेश

Swami Ramanand Teerth Marathwada University ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपने संबद्ध 29 कॉलेजों में परास्नातक (पीजी) पारंपरिक पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष में प्रवेश पर रोक लगाने का बड़ा निर्णय लिया है। यह कदम उन कॉलेजों पर कार्रवाई के तौर पर उठाया गया है, जिन्हें शैक्षणिक एवं प्रशासनिक लेखा परीक्षा (एएए) में बेहद कमजोर प्रदर्शन के आधार पर ‘एफ’ ग्रेड प्राप्त हुआ है।

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, कुल 72 कॉलेजों का मूल्यांकन किया गया था, जिसमें 29 संस्थान ‘एफ’ श्रेणी में पाए गए। इन कॉलेजों को न्यूनतम मानकों पर खरा न उतरने के कारण आगामी सत्र में पीजी पारंपरिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने से प्रतिबंधित किया गया है।

परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई कॉलेज इस निर्देश का उल्लंघन करता है और फिर भी प्रवेश देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें छात्रों की पात्रता निरस्त करना, परीक्षा फॉर्म अस्वीकार करना, प्रवेश पत्र जारी न करना और परिणाम रोकने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। साथ ही, किसी भी प्रकार के शैक्षणिक नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज की होगी।

अधिकारियों ने बताया कि यह प्रतिबंध केवल पारंपरिक पीजी पाठ्यक्रमों पर लागू होगा। फार्मेसी, विधि, बीएड/एमएड और शारीरिक शिक्षा जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेजों को इससे छूट दी गई है।

एएए मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, 72 कॉलेजों में से पांच को ‘ओ’ ग्रेड, 11 को ‘ए’ ग्रेड, 13 को ‘बी’, चार को ‘सी’, पांच को ‘डी’ और पांच को ‘ई’ ग्रेड मिला है। वहीं सबसे अधिक 29 कॉलेज ‘एफ’ श्रेणी में रहे, जो सीधे तौर पर गंभीर शैक्षणिक और प्रशासनिक कमियों को दर्शाता है।

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, ‘एफ’ ग्रेड पाने वाले 29 कॉलेजों में से 18 नांदेड़ जिले, सात लातूर जिले और चार परभणी जिले के हैं।

यह निर्णय विश्वविद्यालय के कुलपति Manohar Chaskar की अध्यक्षता में हुई शैक्षणिक परिषद और बोर्ड ऑफ डीन्स की बैठकों में लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कदम उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और कॉलेजों को न्यूनतम मानकों के पालन के लिए प्रेरित करने की दिशा में उठाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से कमजोर शैक्षणिक संस्थानों पर दबाव बढ़ेगा और उन्हें अपने ढांचे, शिक्षण गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि, इसका असर उन छात्रों पर भी पड़ सकता है जो इन कॉलेजों पर निर्भर हैं, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना भी एक चुनौती होगी।

फिलहाल इस फैसले के बाद प्रभावित कॉलेजों में हलचल है और कई संस्थान अब विश्वविद्यालय के सामने अपनी स्थिति में सुधार का मौका देने की मांग कर सकते हैं।

कपूरथला में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई बकरीद

कपूरथला / सत्ता संदेश

कपूरथला में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार धार्मिक श्रद्धा, उत्साह और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। शहर की मॉरिशस मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर ईद की नमाज अदा की। नमाज के दौरान लोगों ने देश और दुनिया में अमन-शांति तथा खुशहाली की दुआ मांगी।

मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़

ईद के मौके पर शहर की प्रमुख मस्जिदों में सुबह से ही नमाजियों का पहुंचना शुरू हो गया था। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक परिधानों में नमाज अदा की। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया। मस्जिदों के बाहर भी त्योहार को लेकर रौनक देखने को मिली।

भाईचारे और प्रेम का दिया संदेश

इस दौरान मुस्लिम भाईचारे के नेताओं ने कहा कि ईद का त्योहार प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दिन लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के करीब आने और खुशियां बांटने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ईद केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि समाज में एकता और सौहार्द को मजबूत करने का अवसर भी है।

देश-दुनिया में सुख-शांति की मांगी दुआ

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस अवसर पर देश और दुनिया में अमन-शांति बनाए रखने की दुआ की। उन्होंने कहा कि हर वर्ग के लोग सुखी और समृद्ध रहें तथा समाज में प्रेम और भाईचारा लगातार बढ़ता रहे। ईद के इस पावन अवसर पर लोगों ने जरूरतमंदों की मदद करने और समाज सेवा का संदेश भी दिया।

यूपी के हमीरपुर में बड़ा हादसा: बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा, मलबे में दबने से 6 मजदूरों की मौत

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहाँ कुरारा थाना क्षेत्र में बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से 6 मजदूरों की मौत हो गई है। मलबे में अभी भी कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

सोते समय हुआ हादसा : जानकारी के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुआ। उस समय क्षेत्र में मौसम अचानक खराब हो गया और तेज आंधी-बारिश शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि पुल की सटरिंग और स्लैब गिरने के वक्त कई मजदूर उसी के नीचे सो रहे थे, जिसके कारण उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय ग्रामीणों ने धमाके की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया।

प्रशासन और SDRF की टीम: मौके पर हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीमें घटनास्थल पर पहुँच गईं। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

मृतकों की हुई पहचान : हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान लोकेंद्र निषाद, कुलदीप निषाद, सावंत यादव, सभाजीत, पुष्पेंद्र सिंह चौहान और राजेश पाल के रूप में हुई है। ये मजदूर बांदा और हमीरपुर जिले के ही निवासी थे।

जांच के आदेश: इस घटना ने पुल निर्माण में सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

लुधियाना में डेयरी संचालकों का हल्ला बोल: सोमवार को हंबड़ा रोड जाम करने का अल्टीमेटम, DC दफ्तर के बाहर लाएंगे गाय-भैंस

पंजाब डेस्क : पंजाब के लुधियाना में सीवरेज व्यवस्था की बदहाली से नाराज डेयरी एसोसिएशन ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले सोमवार को हंबड़ा रोड पूरी तरह से जाम किया जाएगा और डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

पशुओं के साथ प्रदर्शन की तैयारी : डेयरी एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप सिंह लाहोरिया के अनुसार, इस बार का प्रदर्शन अनोखा होगा क्योंकि डेयरी संचालक अपने पशुओं (गाय और भैंसों) के साथ DC दफ्तर पहुंचेंगे। उनका आरोप है कि डेयरियों के पास सीवरेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है, जिससे गलियों में गंदा पानी भरा रहता है और पशु घंटों तक उसी गंदगी में खड़े रहने को मजबूर हैं।

वादाखिलाफी का आरोप : लाहोरिया ने बताया कि 21 दिन पहले भी उन्होंने नगर निगम के कार्यालय के बाहर गोबर से भरी ट्रालियां ले जाकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय अधिकारियों ने व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पुलिस केस से नाराजगी : एसोसिएशन का कहना है कि नगर निगम ने गोबर निपटारे के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की है, उल्टा डेयरी मालिकों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए जा रहे हैं। पशुओं को नहलाने के बाद निकलने वाले गंदे पानी की निकासी की भी कोई सुविधा नहीं दी गई है।

राजगढ़ में ‘शोले’ स्टाइल ड्रामा: प्रेमी से शादी की जिद पर मोबाइल टावर पर चढ़ी युवती, पुलिस ने सुरक्षित उतारा

नेशनल डेस्क : मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया नगर में गुरुवार शाम उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक 22 वर्षीय युवती बस स्टैंड स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गई। युवती अपने प्रेमी से शादी करने की जिद पर अड़ी थी और चिल्ला-चिल्लाकर उसे मौके पर बुलाने की मांग कर रही थी।

एक घंटे तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा: घटना शाम करीब 6 बजे की है। युवती ने टावर से कूदने की धमकी देते हुए कहा कि यदि उसके प्रेमी को नहीं बुलाया गया, तो वह अपनी जान दे देगी। इस नजारे को देखने के लिए बस स्टैंड पर भारी भीड़ जमा हो गई और युवती के माता-पिता ने भी उसे नीचे उतारने की काफी कोशिश की, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई।

पुलिस ने प्रेमी को बुलाकर मामला सुलझाया: सूचना मिलते ही सुठालिया थाना पुलिस और नगर परिषद की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने युवती को समझाने के बाद उसके प्रेमी को मौके पर बुलाया और शादी का भरोसा दिलाया। इसके बाद शाम करीब 7 बजे युवती सुरक्षित नीचे उतरी।

परिजनों की असहमति बनी वजह: पुलिस जांच में सामने आया कि युवती और युवक के बीच प्रेम प्रसंग है, लेकिन लड़की के परिजन इस शादी के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, लड़के के परिजन शादी के लिए राजी हैं। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले जाकर पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है।