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‘मैं जिंदा हूं…’, युवती के सामने आते ही हत्या केस में बड़ा खुलासा; पिता और भाई की गिरफ्तारी पर उठे सवाल

बुरहानपुर/इंदौर / सत्ता संदेश

Madhya Pradesh और Maharashtra पुलिस की जांच को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस गुमशुदा युवती की हत्या का दावा करते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने उसके पिता और भाई को गिरफ्तार किया था, वही युवती अब जिंदा सामने आ गई है। इस खुलासे के बाद पुलिस जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि सीमावर्ती बुरहानपुर जिले की रहने वाली युवती अचानक सामने आई और उसने साफ कहा, “मैं जिंदा हूं।” युवती के सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और महाराष्ट्र पुलिस की जांच पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, युवती के लापता होने के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने उसकी हत्या की आशंका जताई थी। जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि युवती की हत्या कर दी गई है और इसी आधार पर उसके पिता तथा भाई को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस का कहना था कि परिवार के लोगों ने हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की।

हालांकि अब युवती के जीवित मिलने से पूरे मामले की दिशा बदल गई है। अधिकारियों के अनुसार, युवती ने सामने आकर बताया कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। उसके बयान के बाद पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की दोबारा समीक्षा कर रही हैं।

इस घटना ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के जीवित होने की पुष्टि किए बिना हत्या का निष्कर्ष निकालना और परिजनों को गिरफ्तार करना बेहद गंभीर मामला है। इससे न केवल निर्दोष लोगों की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।

मामले में अब यह भी जांच की जा रही है कि किन परिस्थितियों और किन सबूतों के आधार पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि युवती के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और संबंधित एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि युवती सामने नहीं आती, तो उसके पिता और भाई को लंबे समय तक गलत आरोपों का सामना करना पड़ सकता था। वहीं परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पुलिस जांच में सतर्कता और तथ्यों की पुष्टि की आवश्यकता को उजागर करती है। बिना ठोस प्रमाणों के गंभीर धाराओं में कार्रवाई कई बार निर्दोष लोगों के जीवन पर गहरा असर डाल सकती है।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवती इतने दिनों तक कहां रही और जांच में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

ओडिशा में हिरासत में प्रताड़ना का आरोप, महिला पुलिस निरीक्षक निलंबित; मां-बेटे ने लगाए ‘थर्ड डिग्री’ टॉर्चर के गंभीर आरोप

भुवनेश्वर / सत्ता संदेश

Odisha के केंद्रपाड़ा जिले में पुलिस हिरासत में कथित प्रताड़ना का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तालचुआ मरीन पुलिस थाने की महिला पुलिस निरीक्षक को निलंबित कर दिया है। महिला और उसके बेटे ने पुलिस अधिकारियों पर हिरासत में ‘थर्ड डिग्री’ यातना देने, दुर्व्यवहार करने और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, तालचुआ मरीन पुलिस थाने की प्रभारी निरीक्षक Sandhyarani Jena को कर्तव्य में लापरवाही और अनुचित व्यवहार के आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले ने राज्य में पुलिस कार्यप्रणाली और हिरासत में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

यह मामला तब सामने आया जब गिरिपाही गांव की रहने वाली 55 वर्षीय अन्नपूर्णा मंडल और उनके 31 वर्षीय बेटे अनंत कुमार मंडल ने सोमवार को आरोप लगाया कि पुलिस थाने के अंदर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। दोनों का कहना है कि पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और दबाव बनाने के लिए मारपीट की गई।

पीड़ित परिवार के अनुसार, उन्हें किसी मामले की जांच के सिलसिले में थाने बुलाया गया था, लेकिन वहां उनके साथ कथित तौर पर कठोर व्यवहार किया गया। मां-बेटे ने आरोप लगाया कि उन्हें घंटों तक थाने में रखा गया और पूछताछ के दौरान ‘थर्ड डिग्री’ तरीके अपनाए गए। घटना के बाद दोनों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर न्याय की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और शिकायतों के आधार पर महिला निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है।

राज्य में विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन को घेरा है। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस तंत्र में जवाबदेही की कमी के कारण ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की जाएगी और किसी भी अधिकारी को नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा।

पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में हिरासत में प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

सावरकर जयंती पर बंगाल में राजनीतिक संदेश, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वीर सावरकर को बताया राष्ट्रभक्ति का प्रतीक

कोलकाता / सत्ता संदेश

विनायक दामोदर सावरकर की 143वीं जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य विरासत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति की ऐसी मिसाल है, जो आज भी देश के करोड़ों युवाओं और राष्ट्रप्रेमियों को प्रेरणा देता है।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लिखा कि महान स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी विचारक स्वातंत्र्यवीर Vinayak Damodar Savarkar को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के लिए सावरकर द्वारा दिए गए बलिदान और संघर्ष को देश कभी भुला नहीं सकता।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सावरकर का अदम्य साहस, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और राष्ट्रीय चेतना के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए सावरकर द्वारा प्रस्तुत विचार और उनके संघर्ष का इतिहास भारतीय राजनीति और सामाजिक चेतना में विशेष स्थान रखता है।

वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। वे एक प्रखर राष्ट्रवादी, लेखक, समाज सुधारक और हिंदू महासभा के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। सावरकर ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और उन्हें काला पानी की सजा भी भुगतनी पड़ी। अंडमान की सेल्युलर जेल में बिताए गए उनके वर्षों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सावरकर की जयंती पर दिया गया यह संदेश केवल श्रद्धांजलि भर नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और वैचारिक राजनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। हाल के वर्षों में सावरकर को लेकर देश की राजनीति में लगातार बहस होती रही है, जहां एक ओर उन्हें राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रतीक बताया जाता है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल कई मुद्दों पर उनकी आलोचना भी करते रहे हैं।

बंगाल की राजनीति में भी राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे लगातार प्रमुखता से उठते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा वीर सावरकर को याद करना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों ने भी देशभर में सावरकर जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

वीर सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को 82 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रवादी विचारधारा में उनके योगदान को आज भी बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है।

केरल में ईडी अधिकारियों के वाहन पर हमला, मुख्यमंत्री विजयन के आवास के बाहर बढ़ा राजनीतिक तनाव

तिरुवनंतपुरम / सत्ता संदेश

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आधिकारिक आवास के बाहर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के वाहन पर कथित हमला किए जाने की घटना सामने आई। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, ईडी अधिकारियों का वाहन मुख्यमंत्री आवास के आसपास मौजूद था, तभी कुछ लोगों ने वाहन को घेर लिया और कथित तौर पर उस पर हमला कर दिया। घटना के दौरान वाहन को नुकसान पहुंचने की भी खबर है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक नुकसान की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

घटना के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। सुरक्षा बलों ने इलाके में अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और हमले में शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, घटना ऐसे समय हुई है जब राज्य में विभिन्न राजनीतिक और वित्तीय मामलों को लेकर ईडी की कार्रवाई चर्चा में बनी हुई है। इससे पहले भी विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने कानून व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं और ईडी अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हमला अचानक हुई झड़प का परिणाम था या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद केरल की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकार के बीच एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस और तेज हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले से ही राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

फिलहाल प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। वहीं सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

तेलंगाना में दिल दहला देने वाली घटना, पत्नी और दो बच्चों की हत्या के बाद व्यक्ति ने की आत्महत्या

हैदराबाद / सत्ता संदेश

तेलंगाना में एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या करने के बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

पुलिस के अनुसार, घटना की जानकारी उस समय मिली जब पड़ोसियों ने घर से काफी देर तक कोई हलचल न होने पर संदेह जताया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने घर के भीतर चार लोगों के शव बरामद किए, जिनमें पति, पत्नी और दो बच्चे शामिल थे। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि व्यक्ति ने पहले परिवार के सदस्यों की हत्या की और बाद में खुद अपनी जान दे दी।

अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल से कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे मामला पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव या आर्थिक परेशानियों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल की जा रही है।

घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि परिवार सामान्य रूप से रह रहा था और किसी बड़े विवाद की जानकारी आसपास के लोगों को नहीं थी। पड़ोसियों के अनुसार, परिवार पिछले कई वर्षों से इलाके में रह रहा था और बच्चों की पढ़ाई भी स्थानीय स्कूल में चल रही थी।

पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फोरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस मोबाइल फोन रिकॉर्ड, परिवार के परिचितों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। यदि कोई सुसाइड नोट मिलता है, तो उससे घटना के पीछे की वजहों को समझने में मदद मिल सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव और सामाजिक चुनौतियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मानसिक तनाव या पारिवारिक संकट की स्थिति में समय रहते परामर्श और सहयोग मिलना बेहद जरूरी होता है।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा किया जाएगा।

ट्रांसजेंडर कानून को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की केंद्र की मांग

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) (संशोधन) अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाली विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की है। केंद्र का कहना है कि एक ही कानून से जुड़े मामलों पर अलग-अलग उच्च न्यायालयों में सुनवाई होने से विरोधाभासी फैसले आने की संभावना बन सकती है, इसलिए मामले की एकरूपता बनाए रखने के लिए सर्वोच्च अदालत में संयुक्त सुनवाई जरूरी है।

बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि केंद्र द्वारा दायर स्थानांतरण याचिकाओं पर शुक्रवार को तत्काल सुनवाई की जाए।

केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) (संशोधन) अधिनियम, 2026 के खिलाफ देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं लंबित हैं। इन सभी मामलों में समान कानूनी और संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता बनाए रखने के लिए सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करना उचित होगा।

सूत्रों के अनुसार, कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं में संशोधित अधिनियम के कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्तियां जताई गई हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कुछ प्रावधान ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों, पहचान और समानता से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। वहीं, केंद्र सरकार का पक्ष है कि यह कानून ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अलग-अलग उच्च न्यायालयों में समान मुद्दों पर अलग-अलग फैसले आते हैं, तो इससे कानूनी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर सर्वोच्च अदालत सभी याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित कर एक साथ सुनवाई करती है, ताकि पूरे देश में एक समान कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सके।

ट्रांसजेंडर अधिकारों का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में देश में व्यापक चर्चा का विषय रहा है। उच्चतम न्यायालय पहले भी ट्रांसजेंडर समुदाय को समान अधिकार और सम्मानजनक जीवन देने को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले दे चुका है। ऐसे में इस संशोधन अधिनियम को लेकर चल रही कानूनी चुनौती को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं को सर्वोच्च अदालत में स्थानांतरित किया जाएगा या नहीं।

वीवीपैट पर्चियों पर समय दर्ज करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को सौंपा फैसला

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

चुनावी पारदर्शिता और मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उच्चतम न्यायालय ने वीवीपैट पर्चियों पर वोट डालने का सटीक समय दर्ज करने की मांग संबंधी याचिका पर निर्णय लेने का अधिकार निर्वाचन आयोग को सौंप दिया है। अदालत ने कहा कि यह एक तकनीकी विषय है, जिस पर फैसला लेने का अधिकार और विशेषज्ञता निर्वाचन आयोग के पास है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बुधवार को इस जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया मुद्दा चुनावी निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है, लेकिन वीवीपैट प्रणाली में तकनीकी बदलाव संभव हैं या नहीं, इसका आकलन निर्वाचन आयोग ही बेहतर तरीके से कर सकता है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि चुनावों में अधिक पारदर्शिता और सत्यापन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वीवीपैट पर्चियों पर मतदान का सटीक समय दर्ज करने की मांग एक तकनीकी प्रकृति का विषय है और यह निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय इस स्तर पर सीधे कोई तकनीकी निर्देश जारी करने के बजाय संबंधित संवैधानिक संस्था को इस विषय पर विचार करने का अवसर देना उचित समझता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि संबंधित जनहित याचिका निर्वाचन आयोग को भेजी जाए, ताकि आयोग इस पर आवश्यक विचार कर सके और जरूरत पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों की राय लेकर उचित निर्णय ले सके।

याचिका में दावा किया गया था कि यदि प्रत्येक वीवीपैट पर्ची पर मतदाता द्वारा वोट डालने का सटीक समय अंकित किया जाए, तो इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही में और अधिक सुधार होगा। याचिकाकर्ता का कहना था कि समय दर्ज होने से मतदान रिकॉर्ड का बेहतर सत्यापन संभव होगा और किसी भी विवाद या जांच की स्थिति में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता मजबूत होगी।

गौरतलब है कि वीवीपैट यानी ‘वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ी होती है, जिसके माध्यम से मतदाता यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को दर्ज हुआ है। मतदान के बाद कुछ सेकंड के लिए मशीन में एक पर्ची दिखाई देती है, जिसमें उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह प्रदर्शित होता है। यही पर्ची बाद में सत्यापन प्रक्रिया में उपयोग की जाती है।

हाल के वर्षों में चुनावी पारदर्शिता को लेकर वीवीपैट प्रणाली को लेकर कई बहसें और याचिकाएं सामने आती रही हैं। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय पर वीवीपैट के उपयोग और उसके सत्यापन को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे निर्वाचन आयोग को भविष्य में तकनीकी सुधारों पर विचार करने का अवसर मिलेगा।

जम्मू में टूटा पुल बना ग्रामीणों की मुसीबत, जान जोखिम में डाल नदी पार कर स्कूल और धार्मिक स्थलों तक पहुंच रहे लोग

जम्मू,/ सत्ता संदेश

Jammu and Kashmir के कई ग्रामीण इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं, जहां पुल बह जाने के कारण गांवों का संपर्क स्कूलों, धार्मिक स्थलों और आसपास के क्षेत्रों से पूरी तरह कट गया है। मजबूरी में ग्रामीण अब कामचलाऊ नावों और अस्थायी साधनों के सहारे उफनती नदी पार कर रहे हैं, जिससे हर दिन हादसे का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार हाल की बारिश और तेज बहाव के चलते नदी पर बना पुराना पुल क्षतिग्रस्त होकर बह गया। इसके बाद कई गांवों के लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है, जबकि धार्मिक स्थलों तक जाने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है। मजबूरी में स्थानीय लोगों ने छोटी नावों और अस्थायी लकड़ी के सहारों से नदी पार करने का इंतजाम किया है। हालांकि तेज बहाव और खराब मौसम के कारण यह सफर बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराने के बावजूद पुल निर्माण का काम शुरू नहीं किया गया।

क्षेत्र के निवासियों ने कहा कि बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है। यदि जल्द नया पुल नहीं बनाया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल अस्थायी पुल या सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पुल निर्माण और वैकल्पिक संपर्क बहाल करने को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होता, तब तक उनकी परेशानियां कम नहीं होंगी।

इस घटना ने एक बार फिर दूरदराज ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमजोर स्थिति को उजागर कर दिया है, जहां एक पुल टूटने से हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो जाती है।

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने एसईसीएल के कार्य संचालन की समीक्षा की; छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

बुनियादी ढांचे और अस्पताल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए गए; अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइजर यूनिट का उद्घाटन भी किया गया

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने दक्षिण पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) का एक दिवसीय दौरा किया और कंपनी के परिचालन प्रदर्शन, अवसंरचना संबंधी पहलों और भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरे के दौरान उन्होंने रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य में कोयला उत्पादन, अवसंरचना विकास, रसद संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन चर्चाओं का मुख्य लक्ष्य प्रमुख विकास परियोजनाओं में तेजी लाना, परिचालन सुगम बनाना और कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक विकास व रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूती देना था। उन्होंने कोयला क्षेत्र के विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि सहयोगात्मक दृष्टिकोण से राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा में राज्य का योगदान और अधिक मजबूत होगा।

एसईसीएल मुख्यालय के अपने दौरे के दौरान, श्री सतीश चंद्र दुबे ने एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कोयला उत्पादन, ढुलाई, गुणवत्ता प्रबंधन, सुरक्षा, डिजिटलीकरण पहल, पर्यावरण स्थिरता उपायों, कोयला गैसीकरण परियोजनाओं, खदान बंद करने की गतिविधियों, सीएसआर पहल और कंपनी की भविष्य की कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में एसईसीएल के सीएमडी श्री हरीश दुहान, कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और एसईसीएल के अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री ने सुरक्षित और टिकाऊ खनन पद्धतियों, आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसईसीएल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उत्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, सुरक्षा मानकों और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में कंपनी के प्रयासों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि सीएसआर पहलों को कोयला क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस अवसर पर एसईसीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री हरीश दुहान ने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान, एसईसीएल ने कोल इंडिया के 100 मिलियन टन के संचयी उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में 26.86 मिलियन टन का सर्वोच्च योगदान दिया है। उन्होंने कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एसईसीएल की प्रतिबद्धता को दोहराया।

एसईसीएल के डिजिटल परिवर्तन की पहल के अंतर्गत, केंद्रीय मंत्री ने ई-डीएडीएएस (एसईसीएल में डिजाइन और ड्राइंग अनुमोदन) पोर्टल और अस्पताल प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-डीएडीएएस पोर्टल प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं से संबंधित इंजीनियरिंग डिजाइन और ड्राइंग की ऑनलाइन जांच, निगरानी और अनुमोदन को सुगम बनाएगा, जिससे पारदर्शिता, निगरानी और समयबद्ध निष्पादन में सुधार होगा। एचएमआईएस पोर्टल रोगी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और बेहतर अस्पताल प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से एसईसीएल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करेगा।

इस दौरे के दौरान, श्री दुबे ने बिलासपुर के इंदिरा विहार स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइजर यूनिट का भी उद्घाटन किया। उन्नत स्वचालित परीक्षण क्षमताओं से लैस यह मशीन रक्त विश्लेषण को तेज और अधिक सटीक बनाएगी और स्वास्थ्य सेवाओं में निदान क्षमता को बढ़ाएगी। उन्होंने इस केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया और चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में एसईसीएल के प्रयासों की सराहना की।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रदर्शन के नए आयाम स्थापित किए।

खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया।

केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए क्षेत्र की रिकॉर्ड प्रगति को रेखांकित किया।

पिछले 12 वर्षों में उत्पादन में 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह क्षेत्र लगभग पांच गुना विस्तारित हुआ, जबकि बिक्री में 501 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति करते हुए पिछले 12 वर्षों में 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे अब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवीआईसी की योजनाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।
नई दिल्ली, 26 मई 2026: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने बीते 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी आज केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है।

केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े

नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।

खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार

अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड

ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि

रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष 2024-25 में 38,904 तथा वित्त वर्ष 2025-26 में 37,769 मशीनों एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। इस प्रकार ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अभी तक कुल 3,23,006 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केवीआईसी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 59 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 28,180 महिला उद्यमियों द्वारा इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके माध्यम से 3,09,980 महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र को महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनाती है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि

कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जो वर्ष 2013-14 में 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकारी आपूर्ति, प्रदर्शनी बिक्री और राष्ट्रीय ध्वज की मांग में वृद्धि

इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है। इसी क्रम में खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार विस्तार और उपभोक्ता जुड़ाव को सुदृढ़ करती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन-अभियानों के प्रभाव और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को रेखांकित करती है।