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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय- श्री शिवराज सिंह चौहान


दिल्ली / सत्ता संदेश

किसान-गरीब को भटकना नहीं पड़े, शिकायत निवारण को दें वरीयता- श्री शिवराज सिंह चौहान

हर महीने होगी समीक्षा, केवल डिस्पोजल नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए- श्री शिवराज सिंह

नियम-प्रक्रिया को बनाएं सरल; एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को देंगे नई धार- श्री शिवराज

कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग पर श्री शिवराज सिंह का बड़ा सुधार एजेंडा

पीएम मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनफॉर्म’ मंत्र से किसानों के जीवन में भरेंगे खुशियां- केंद्रीय कृषि मंत्री

2047 विजन, राज्यों से साझेदारी और 12 साल की उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण पर श्री शिवराज सिंह ने दिया जोर

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले ही दिन आज अपने दोनों मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए। इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के प्रतिवेदनों और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे।

श्री चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था। उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना अब जरूरी है। उन्होंने पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके।

बैठक में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है। बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके।

श्री चौहान ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है। इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो।

न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताए कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी।

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती। इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए।

बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है।

श्री चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है।

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है।

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है।

फाइलों के निस्तारण को लेकर श्री चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है। उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

दिल्ली / सत्ता संदेश

करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करें; भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित किया

वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने आज (20 मई, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों ने हमारे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जब देश विकास के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है, तो अधिकारियों से अपेक्षाएं भी अधिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा। कई अवसरों पर वे विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व करेंगे। इसलिए, उनके सीखने का दायरा और गति बहुत व्यापक तथा त्‍वरित होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की उनकी क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों की निष्पक्षता उनकी न्यायसंगतता का सूचक होगी। उनकी संवेदनशीलता समावेशिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मापदंड होगी। उनकी विश्वसनीयता उनकी पारदर्शिता और निरंतर निष्पादन पर आधारित होगी। उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक आचरण से निर्धारित उनकी सत्यनिष्ठा उन्हें जनहित में निर्णायक कार्रवाई करने का नैतिक साहस प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा। उन्हें नियमों का पालन करना होगा, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को भूलना नहीं होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अधिकारियों को ईमानदार और नैतिक होना चाहिए। साथ ही, उन्हें परिणाम भी देने होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है बल्कि, जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही नैतिकता का सच्चा सार है। जिस प्रकार न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी भी लोगों को उनके वैध हितों से वंचित करने के समान है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य जनता की आकांक्षाओं को साकार करना है। ये आकांक्षाएं उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त की जाती हैं। इसलिए, अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे जनता के हित में इन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि बहती धारा के साथ बहते रहने में कोई मेहनत नहीं लगती। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और हमारे समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे भारत की जनता, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को, अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखें, चाहे वे क्षेत्र में हों या कार्यालय में। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।

देशभर में मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को भारी परेशानी का सामना

अमृतसर / सत्ता संदेश

ऑनलाइन फार्मेसी और नई नीति के विरोध में केमिस्टों की हड़ताल

अमृतसर की दवा मंडी समेत पंजाबभर में मेडिकल दुकानों पर लगे ताले

केमिस्ट एसोसिएशन की चेतावनी — मांगें नहीं मानी गईं तो संघर्ष होगा तेज

देशभर में आज मेडिकल स्टोर और दवाइयों की दुकानों के बंद रहने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों को जरूरी दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा, लेकिन ज्यादातर मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। कई जगहों पर लोग मेडिकल स्टोरों के बाहर खड़े नजर आए, लेकिन बंद होने के कारण उन्हें दवाइयां नहीं मिल सकीं।

पंजाब के अमृतसर में भी इस बंद का बड़ा असर देखने को मिला। अमृतसर के कटड़ा शेर सिंह इलाके, जिसे दवाइयों की सबसे बड़ी होलसेल मार्केट माना जाता है, वहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन द्वारा पहले ही बंद का ऐलान किया गया था, जिसके चलते शहर की लगभग सभी मेडिकल दुकानें बंद रहीं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह बंद रात 12 बजे तक जारी रहेगा।

मीडिया से बातचीत करते हुए अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी मनजीत सिंह ने बताया कि यह हड़ताल पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन और ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर की गई है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर दवाइयां बेच रही हैं, जिससे छोटे दुकानदारों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना उचित जांच के दवाइयां बेची जा रही हैं, जिससे नकली दवाइयों का खतरा भी बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार द्वारा लाई जा रही नई नीतियों के कारण आने वाले समय में केमिस्टों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। एसोसिएशन के मुताबिक ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंस पोर्टल में भी कई तकनीकी खामियां हैं, जिससे दुकानदार परेशान हैं।

वहीं अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन के वाइस प्रधान अमरदीप सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी प्रिस्क्रिप्शन तैयार कर ऑनलाइन दवाइयां बेची जा रही हैं, जो लोगों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली दवाइयों की सप्लाई भी आसानी से हो रही है, इसलिए केमिस्ट इसके विरोध में आवाज उठा रहे हैं।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में संघर्ष को और तेज किया जाएगा। अगले महीने ऑल इंडिया स्तर पर बैठक की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल देशभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों और आम लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

बाइट — केमिस्ट एसोसिएशन के वाइस प्रधान अमरदीप सिंह

बाइट — अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी मनजीत सिंह

हिंद महासागर का जहाज सागर कोलंबो बंदरगाह पर सफल ठहराव के बाद रवाना

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय नौसेना का हिंद महासागर पोत (आईओएस) सागर , तीन दिवसीय सफल बंदरगाह यात्रा के बाद 18 मई 2026 को कोलंबो, श्रीलंका से रवाना हुआ , जिससे भारत और श्रीलंका के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी को और मजबूती मिली और भारत के महासागर – पारस्परिक और समग्र क्षेत्रीय विकास के विजन को आगे बढ़ाया गया।

इस यात्रा के दौरान, आईओएस सागर के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की और समुद्री सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर केंद्रित चर्चा की।

आईओएस सागर पर आयोजित स्वागत समारोह ने नौसैनिक कर्मियों और विशिष्ट अतिथियों के बीच राजनयिक जुड़ाव और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इस कार्यक्रम ने जहाज के चालक दल के बहुराष्ट्रीय स्वरूप को उजागर किया और तैनाती में निहित क्षेत्रीय सहयोग की भावना को रेखांकित किया।

आउटरीच गतिविधियों के एक भाग के रूप में, आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय स्कूली बच्चों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों का जहाज पर स्वागत किया, जिससे उन्हें जहाज की परिचालन क्षमताओं और जहाज पर जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव करने का अवसर मिला।

इस यात्रा में सौहार्द और आपसी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी शामिल थीं। श्रीलंका नौसेना और आईओएस सागर के कर्मियों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच ने टीम भावना को बढ़ावा दिया और दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी संबंधों को मजबूत किया। इसके अलावा, बहुराष्ट्रीय दल ने गाले और कैंडी की सांस्कृतिक यात्राएँ कीं, जिससे उन्हें श्रीलंका की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की गहरी समझ प्राप्त हुई।

कोलंबो से प्रस्थान करते समय, आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के जहाज एसएलएनएस नंदीमित्रा के साथ पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) में भाग लिया । इस अभ्यास में समन्वित सामरिक युद्धाभ्यास और संचार अभ्यास शामिल थे, जिनका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता, नौकायन कौशल और परिचालन समन्वय को बढ़ाना था।

आईओएस सागर इस समय कोच्चि के रास्ते में है और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदार देशों के बीच समुद्री सहयोग, अंतरसंचालनीयता और मित्रता को बढ़ावा देने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है।

यूपीएससी सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 की अनंतिम उत्तर कुंजी परीक्षा के बाद तुरंत जारी करेगा


यूपीएससी अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने अनंतिम उत्तर कुंजी शीघ्र जारी करने की पहल को अधिक पारदर्शिता की दिशा में एक ‘नई शुरुआत’ बताया

संघ लोक सेवा आयोग पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षा संचालन के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए पहली बार सिविल सेवा परीक्षा 2026 की अनंतिम उत्तर कुंजी परीक्षा के तुरंत बाद जारी करेगा।

इसे “एक नई शुरुआत” बताते हुए यूपीएससी के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा, “ पहली बार, संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा के अनंतिम उत्तर कुंजी जारी करेगा। यह पहल उम्मीदवारों के साथ अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर संवाद स्थापित करने के आयोग के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।” उन्होंने आगे कहा, “इस नीति का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता, अखंडता और योग्यता-आधारित ढांचे को बनाए रखते हुए इसे उम्मीद्वारों के लिए अधिक सहभागी बनाना है।”

अनंतिम उत्तर कुंजी जारी होने के बाद  सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवार, यदि कोई अपत्ति हो, तो 31 मई, 2026 शाम 6 बजे तक अपने अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल “ऑनलाइन पश्न पत्र अभ्यावेदन पोर्टल (क्यूपीआरईपी)” उपलब्ध कराया गया है,  जो https://upsconline.nic.in/login पर उपलब्ध है। उम्मीदवार अपनी समझ के अनुसार सही उत्तर कुंजी का संकेत देते हुए एक संक्षिप्त विवरण और तीन प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त सहायक दस्तावेजों के साथ अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इससे न केवल उम्मीदवार परीक्षा में अपने प्रदर्शन का जल्दी और सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे, बल्कि उन्हें अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर भी मिलेगा।

उम्मीदवारों से प्राप्त सभी अभ्यावेदनों को विषय-विशेषज्ञों की टीमों के समक्ष विस्तृत एवं सावधानीपूर्वक समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह विशेषज्ञ संबंधित विषयों का गहन ज्ञान और विशेषज्ञता रखते हैं। वे प्रत्येक अभ्यावेदन की बारीकी से जांच करेंगे, प्रसतुत दस्तावेजों का मूल्यांकन करेंगे और संबंधित प्रश्नों की उत्तर कुंजी की शुद्धता पर अपना विचार दर्ज करेंगे। इसके बाद प्राप्त सभी अभ्यावेदनों पर समुचित विचार करने के उपरांत ही अंतिम उत्तर कुंजी तैयार की जाएगी।

यह नया सुधार उम्मीद्वारों की उस लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए लाागू किया गया है, जिसमें अनांतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित करने की मांग की जा रही है। यह कदम आयोग की पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में उम्मीदवारों के विश्वास को और सुदृढ करने की प्रतिबद्धता को भी दोहराता है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शी-मार्ट्स के माध्यम से पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक रूपरेखा तैयार की


दिल्ली /सत्ता संदेश

डीएवाई-एनआरएलएम ने पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए शी-मार्ट्स पर राष्ट्रीय परामर्श का नेतृत्व किया

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से 14-15 मई , 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा के मेफेयर कन्वेंशन हॉल में शी-मार्ट्स (स्वयं सहायता उद्यमी-ग्रामीण परिवर्तन के लिए विपणन के अवसर) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। इस परामर्श ने बजट घोषणा – 2026 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया। इस परामर्श की मेजबानी ओडिशा आजीविका मिशन (ओएलएम), मिशन शक्ति विभाग, ओडिशा सरकार ने की और राष्ट्रीय सहायता संगठन (एनएसओ) के रूप में पीआरएडीएएन ने इसे सुगम बनाया।

राज्य मिशन निदेशकों, सीईओ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) के वरिष्ठ अधिकारियों, नाबार्ड के प्रतिनिधियों, क्षेत्र विशेषज्ञों, विकास कार्यकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों ने एक साथ मिलकर महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों और बाजार प्रणालियों को मजबूत करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया।

इस परामर्श का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जमीनी प्रतिक्रिया, सुझावों और प्रासंगिक जानकारियों के माध्यम से शी-मार्ट्स पहल के परिचालन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देना था। प्रमुख विषयों में संस्थागत संरचना, वित्तपोषण मॉडल, अभिसरण मार्ग, निगरानी प्रणाली, व्यावसायिक प्रक्रियाएं, शासन संरचनाएं, प्रौद्योगिकी एकीकरण और कार्यान्वयन रणनीतियां शामिल थीं।

उद्घाटन सत्र का नेतृत्व भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार ने किया, जिन्होंने वर्चुअल माध्यम से मुख्य उद्घाटन भाषण दिया। अपने मुख्य भाषण में, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि डीएवाई-एनआरएलएम का भविष्य उद्यम विकास और बाज़ार एकीकरण में निहित है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी-आधारित संस्थागत मॉडलों के बजाय, महिलाओं के समूहों द्वारा संचालित, समुदाय के स्वामित्व वाले खुदरा और एकत्रीकरण प्रणालियों के रूप में उभरना चाहिए।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री स्वाति शर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस राष्ट्रीय परामर्श का उद्देश्य एक ऐसे कार्यकारी मंच के रूप में काम करना है, जहाँ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश मसौदा रूपरेखा की गहन समीक्षा कर सकें, कार्यान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान कर सकें और बड़े पैमाने पर इसे लागू करने के लिए व्यावहारिक विकल्प सुझा सकें।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी वीबी-जीराम-जी की प्रमुख विशेषताओं को उजागर करने के लिए इस परामर्श में शामिल हुईं।

ओडिशा आजीविका मिशन की राज्य मिशन निदेशक डॉ. मोनिका प्रियदर्शनी ने मिशन शक्ति और सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से विकेंद्रीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में ओडिशा के अनुभव पर प्रकाश डाला।

डीएवाई-एनआरएलएम की ग्रामीण आजीविका विभाग की निदेशक, डॉ. मोलिश्री ने शी-मार्ट्स पहल के विकास और रणनीतिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया और आजीविका संवर्धन से उद्यम-आधारित ग्रामीण बाजार प्रणालियों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत सरकार के वीबी-जीराम-जी की सहायक आयुक्त सुश्री दीक्षा सुप्याल बिष्ट ने वीबी-जीराम-जी और शी-मार्ट्स के बीच संभावित अभिसरण के अवसरों पर चर्चा की, विशेष रूप से महिला-केंद्रित बुनियादी ढांचे, मांग सृजन और बाजार समर्थन प्रणालियों के संबंध में।

पहले दिन का एक प्रमुख आकर्षण “ग्रामीण विपणन के लिए एक रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में ‘शी-मार्ट्स’ पर आयोजित राष्ट्रीय पैनल चर्चा थी। इस पैनल ने शी-मार्ट्स के लिए स्केलेबल डिज़ाइन सिद्धांतों पर विचार-विमर्श करने हेतु सरकार, वित्त, प्रौद्योगिकी और सामाजिक उद्यम क्षेत्रों के विविध दृष्टिकोणों को एक साथ लाया। इस परामर्श में व्यापक उप-समूह विचार-विमर्श भी शामिल था, जिसमें पाँच विषयगत समूहों ने शी-मार्ट्स के मसौदा परिचालन ढाँचे की गहन समीक्षा की; इस समीक्षा में और अधिक विस्तार, जोड़, हटाव और किन पहलुओं से बचना है—इन सभी बिंदुओं पर विशेष रूप से विचार किया गया।

परामर्श के दूसरे दिन मानव संसाधन संरचना एवं महिला नेतृत्व, तकनीकी डिजाइन एवं कार्यान्वयन रणनीति तथा क्षमता निर्माण संरचना पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने महिला नेतृत्व वाली शासन प्रणाली और सामुदायिक स्वामित्व को बनाए रखते हुए पेशेवर खुदरा प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया।

दो-दिवसीय परामर्श के दौरान, इस बात पर एक मज़बूत आम सहमति बनी कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी पर निर्भर खुदरा दुकानों के बजाय, विकेंद्रीकृत, महिलाओं के नेतृत्व वाले, पेशेवर रूप से प्रबंधित और समुदाय के स्वामित्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

परामर्श प्रक्रिया राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, डीएवाई-एनआरएलएम और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों की ओर से शी-मार्ट्स के लिए अंतिम परिचालन दिशानिर्देशों को सुदृढ़ करने और देश भर में चरणबद्ध कार्यान्वयन का समर्थन करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2029 तक 3 करोड़ अतिरिक्त ‘लखपति दीदी’ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, मंत्रालय ने एसआरएलएम को ‘शी-मार्ट्स’ स्थापित करने में सहायता देने का भी संकल्प लिया है। ये शी-मार्ट्स ऐसे टिकाऊ ग्रामीण विपणन मंच होंगे जो पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले उत्पादक समूहों के लिए आय के अवसर, उद्यम विकास, ब्रांडिंग और बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाएंगे।

मध्यस्थता और मध्यस्थता में क्षमता निर्माण के माध्यम से वैकल्पिक विवाद समाधान को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों और न्याय मंत्रियों की बैठक

गुजरात/ सत्ता संदेश

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय का विधि मामलों का विभाग, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तत्वावधान में 19-20 मई, 2026 को ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (एसओएम) और उसके बाद 21-22 मई, 2026 को गांधीनगर, गुजरात में ब्रिक्स न्याय मंत्रियों की बैठक (जेएमएम) की मेजबानी कर रहा है। इस वर्ष ब्रिक्स न्याय मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता भारत करेगा।

ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ अधिकारी संस्थागत मध्यस्थता, मध्यस्थता सुधार और वाणिज्यिक एवं सार्वजनिक क्षेत्र के विवादों में वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) की भूमिका सहित प्राथमिकता वाले एडीआर-संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आएंगे। चर्चाओं में एडीआर-केंद्रित सुधारों के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की जाएगी, जिन्हें ब्रिक्स मंचों में लंबित मामलों को कम करने और समय पर, लागत प्रभावी विवाद समाधान को बढ़ावा देने के लिए आदर्श हस्तक्षेप के रूप में उजागर किया गया है।

संयुक्त न्याय परिषद (जेएमएम) ब्रिक्स देशों के न्याय मंत्रियों को ब्रिक्स ढांचे में वैकल्पिक विवाद समाधान निवारण आधारित सहयोग पर एक संयुक्त वक्तव्य अपनाने के लिए एक मंत्रिस्तरीय मंच प्रदान करेगी, जिसमें सर्वोत्तम प्रणालियों को साझा करने, संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और प्रशिक्षण कार्यक्रम, आदर्श नियम और डिजिटल विवाद समाधान मंच जैसे सहयोगी एडीआर संबंधी पहलों का पता लगाने के लिए ठोस प्रतिबद्धताएं निर्धारित की जाएंगी। ये बैठकें आधुनिक कानूनी प्रणाली सुधार के एक मुख्य घटक के रूप में और नागरिकों को सुलभ, त्वरित और किफायती न्याय प्रदान करने के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में एडीआर को बढ़ावा देने में भारत के नेतृत्व को रेखांकित करती हैं।

आयोजन स्थल के रूप में गुजरात के गांधीनगर का चयन भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कानूनी और बहुपक्षीय आयोजनों के केंद्र के रूप में शहर के उभरने को दर्शाता है।

प्रमुख उद्देश्य और अपेक्षित परिणाम

ब्रिक्स के न्याय मंत्री वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर), विशेष रूप से मध्यस्थता और मध्यस्थता पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देंगे, जिसके लिए वे सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत दृष्टिकोणों और संस्थागत अनुभवों के आदान-प्रदान को सुगम बनाएंगे;  मध्यस्थों, न्यायाधीशों, सरकारी कानूनी अधिकारियों और कानूनी पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण, व्यावसायिक आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाओं और ज्ञान साझाकरण मंचों के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता और संस्थागत इको-सिस्टम को मजबूत करेंगे; न्यायालय द्वारा संदर्भित और मुकदमे से पहले की मध्यस्थता को बढ़ावा देंगे; मध्यस्थता केंद्रों, मध्यस्थता संस्थानों और कानूनी प्रशिक्षण निकायों के बीच संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देंगे; सीमा पार वाणिज्यिक विवादों पर सहयोग का समर्थन करने और पहुंच, दक्षता में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाएंगे; व्यापार और पर्यावरण पर कानूनों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए ब्रिक्स न्यायशास्त्र के कानूनी अनुसंधान और तुलनात्मक अध्ययन को आगे बढ़ाएंगे; और सरकारी कानूनी अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण को बढ़ावा देंगे।

इन बैठकों में पूर्ण सत्र और द्विपक्षीय आदान-प्रदान शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य ठोस सहयोग पहल, क्षमता निर्माण परियोजनाएं और संस्थागत संबंध स्थापित करना है। इन बैठकों के परिणाम ब्रिक्स देशों के न्याय मंत्रियों द्वारा “मध्यस्थता और मध्यस्थता में क्षमता निर्माण के माध्यम से वैकल्पिक विवाद समाधान को मजबूत करना” विषय पर एक घोषणापत्र में संकलित किए जाएंगे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र का शुभारंभ किया


छत्तीसगढ़ / सत्ता संदेश

शहीद वीर गुण्डाधुर की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि बस्तर के नेतानार गांव को तीर्थ माना जाता है, नक्सलवाद की समाप्ति के बाद वहाँ CSC केंद्र का खुलना ऐतिहासिक है

बस्तर की जिस भूमि पर नक्सलियों ने 6 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या की थी, उसी स्थान पर आज गरीब आदिवासियों के लिए जनसेवा केंद्र का निर्माण हो रहा है

नक्सलवाद की समाप्ति का उद्देश्य केवल नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंकना ही नहीं, बल्कि गरीब आदिवासियों तक जनकल्याणकारी सुविधाएँ पहुँचाना भी है

देशभर में आजादी 1947 में आ गई थी, मगर बस्तर में 31 मार्च, 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति के बाद आदिवासी बहनें विकास का नेतृत्व करेंगी

नक्सलवाद से हुए दशकों के नुकसान की भरपाई हमारी सरकार अगले 5 वर्षों में करेग

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन और श्री तपन डेका, निदेशक, आसूचना ब्यूरो सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज एक बहुत ऐतिहासिक दिन है। शहीद वीर गुण्डाधर की यह जन्मभूमि और कर्मभूमि अपने आप में भारत के हर नागरिक के लिए तीर्थ समान है। वर्ष 1910 में हमारे वीर आदिवासी नेता ने भूमकाल विद्रोह के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत की थी और विदेशी शासन के विरुद्ध बस्तर के आदिवासियों की लड़ाई का नेतृत्व शहीद वीर गुण्डाधुर ने किया था। उन्होंने कहा कि आज उन्हीं से प्रेरणा लेकर नेतानार का यह कैंप, जो वर्ष 2013 से सुरक्षा कैंप था, अब सेवा कैंप बनकर आदिवासियों की सेवा करेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस सेवा कैंप का नाम भी शहीद वीर गुण्डाधुर के नाम पर रखा है। यह कैंप हमें सदैव स्मरण कराएगा कि एक समय यहां छह पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या की गई थी, यहां के स्कूल, अस्पताल उजाड़ दिए गए थे, राशन पहुंचने नहीं दिया गया, रोजगार और शिक्षा से लोगों को वंचित रखा गया। श्री शाह ने कहा कि आज उसी स्थान पर, जहां हमारे छह जवान शहीद हुए थे, वहां गरीब आदिवासियों की सेवा का एक तीर्थ स्थल बनाने का कार्य प्रारंभ हो रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जब हमने नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया, उसका उद्देश्य केवल नक्सलियों का खात्मा करना नहीं बल्कि इस क्षेत्र के गरीब आदिवासियों के जीवन में वे सभी सुविधाएं पहुंचाना भी था, जो बड़े-बड़े शहरों में उपलब्ध हैं, जिससे उनके बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल बन सके। उन्होंने कहा कि “नियद नेल्लानार” योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार हर गांव में सस्ते राशन की दुकान खोल रही है, हर गांव में प्राथमिक विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं और गांवों के बीच में एक समूह PSC एवं CSC खोले जा रहे हैं। अब यहां हर गरीब के घर तक पीने का पानी पहुंचाने का काम हो रहा है, आधार कार्ड बन रहे हैं, राशन कार्ड बन रहे हैं। हर व्यक्ति को प्रति माह 7 किलो चावल दिया जाता है और 5 लाख रूपए तक का पूरा इलाज मुफ्त में करने की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की योजना भी अब यहां तक पहुंच चुकी है।

श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने दशकों तक गलतफहमी फैलाई कि हमारा विकास नहीं हुआ इसलिए हमने हथियार उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि इस क्षेत्र का विकास इसलिए नहीं हुआ क्योंकि नक्सलियों ने हाथों में हथियार उठा रखे थे। उन्होंने कहा कि रायपुर में विकास के जितने कार्य हुए हैं, उन्हें एक साल के भीतर हमारी सरकार आपके गांवों तक लाएगी। श्री शाह ने कहा कि सरकार की हर सुविधा पर आपका इतना ही अधिकार है जितना बड़े शहरों की जनता का है। श्री शाह ने कहा कि यह आपकी सरकार है और आपके जीवन में खुशियां लाना सरकार का उत्तरदायित्व है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि बस्तर में अभी लगभग 200 कैंप हैं और उनमें से 70 कैंप को अगले डेढ़ वर्षों में हम इसी प्रकार के जनसेवा केंद्र के रूप में परिवर्तित कर आदिवासी कल्याण का केन्द्र बनाएंगे। इन कैंपों का डिजाइन कंप्लीट होगा, जिनके अंदर बैंकिंग सुविधा भी होगी, आधार कार्ड भी बनेगा, राशन कार्ड भी बनेगा, सरकार की योजना के पैसे यहीं से मिलेंगे, कॉमन सर्विस सेंटर पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलेगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी आह्वान किया है कि नक्सलवाद समाप्त हो गया है, ऐसा मानकर चैन की नींद नहीं सोना है। नक्सलवाद से हुए नुकसान की भरपाई हम 5 साल के अंदर कर इन सभी गांवों को ऊर्जावान आदिवासी गांवों में बदलेंगे । इसके लिए आदिवासियों के खेल को बढ़ावा देने के लिए हमने बस्तर ओलंपिक और आदिवासी साहित्य, भाषा, संगीत, कला, नृत्य और विविध पकवानों को विश्व प्रसिद्ध करने के लिए बस्तर पंडुम शुरू किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि इसी दिन के लिए शहीद वीर गुण्डाधुर ने आजादी का आंदोलन शुरू किया होगा। उन्होंने कहा कि देशभर में तो आजादी 1947 में आ गई थी, मगर हमारे बस्तर में 31 मार्च, 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है। श्री शाह ने कहा कि जो देरी हुई है, उसके पूरे नुकसान की भरपाई हम बहुत जल्द करेंगे और इस क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने कहा कि विकास को रोकने से कभी विकास नहीं होता है, बल्कि जब हम विकास को गति देंगे तभी विकास का फायदा हम तक पहुंचेगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए इसकी छह दशकों की विशिष्ट राष्ट्र सेवा को स्मरण किया


तिरुवनंतपुरम /सत्ता संदेश

श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे रही है

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने ऑपरेशन सिंदूर सहित संकट के समय अनुकरणीय सेवा दी है

स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने तिरुवनंतपुरम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का अनावरण किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने आज तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल पेरूकाडा फैक्ट्री में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया। यह समारोह देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में संगठन के 60 वर्षों के योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

वर्ष 1966 में स्थापित, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य मिशन को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में अपने शुरुआती योगदान से लेकर स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों, निदान, अवसंरचना विकास और सामाजिक विपणन में अपनी विविध उपस्थिति तक, संगठन ने लगातार उत्कृष्टता, नवाचार और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जताए गए गहरे विश्वास पर जोर दिया और कहा कि संगठन ने प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से इस विश्वास को लगातार कायम रखा है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने एचएलएल के निरंतर विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की उभरती जरूरतों के प्रति उसकी तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करने और व्यावहारिक, प्रभावी उपायों के माध्यम से उन्हें दूर करने की अद्वितीय क्षमता प्रदर्शित की है। हालांकि ऐसे प्रयास हमेशा स्तर तक नहीं पहुंचते, लेकिन उनका संचयी प्रभाव, विशेष रूप से महिलाओं और रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने में, राष्ट्र के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एचएलएल पर विश्वास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वास केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के किफायती दवाइयां और विश्वसनीय उपचार प्रत्यारोपण (एएमआरआईटी) फार्मेसी नेटवर्क जैसी प्रमुख पहलों के प्रति मजबूत समर्थन और जुड़ाव में भी परिलक्षित होता है, जिसने हाल ही में अपनी सेवा के एक दशक पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के साथ-साथ ऐसी पहलों ने देश भर में सस्ती दवाओं की उपलब्धता को काफी हद तक बढ़ाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि एएमआरआईटी फार्मेसियों ने मंत्रालय को कैंसर की दवाओं, ब्रांडेड दवाओं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों सहित महत्वपूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है, जिनकी कीमतें प्रचलित बाजार दरों से 50 प्रतिशत कम हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को ठोस वित्तीय राहत मिल रही है।

संकट के समय में एचएलएल की सराहनीय भूमिका को याद करते हुए, श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संगठन की त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसके तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरण, भीष्म क्यूब्स और दवाएं जम्मू और कश्मीर तथा पंजाब राज्यों में तुरंत पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास संकट के समय राष्ट्र की सेवा करने के लिए एचएलएल की परिचालन तत्परता, प्रतिबद्धता और क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी संस्था की वास्तविक क्षमता महत्वपूर्ण क्षणों में चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता में निहित होती है और इस संबंध में एचएलएल ने सार्वजनिक सेवा वितरण में एक मिसाल कायम की है।

अपने संबोधन के समापन में, उन्होंने पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और समर्पण के उच्चतम मानकों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए संगठन की सराहना की और देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भागीदार के रूप में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में मंत्रालय के निरंतर विश्वास की पुष्टि की।

समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण स्मारक सिक्के का विमोचन था, जो भारत के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से एक के रूप में एचएलएल की विशिष्ट यात्रा के छह दशक पूरे होने का प्रतीक है। यह इसकी स्थायी विरासत और राष्ट्रीय महत्व का भी प्रतीक है।

इस कार्यक्रम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास सहित प्रमुख संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ जिसका उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को आगे बढ़ाना और भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाना है।

किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों और सामाजिक प्रभाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, एचएलएल ने इस कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण उत्पाद और सेवा पहलों की घोषणा की। इनमें हाइड्रोसेफालस शंट का पुनः शुभारंभ, एचएलएल परिवर्तन वेलनेस क्लिनिक, एचएलएल वाटर का शुभारंभ और ‘हैप्पी डेज़’ कम्पोस्टेबल सैनिटरी नैपकिन का विमोचन शामिल हैं। ये सभी पहल संगठन के सुलभता, स्थिरता और नवाचार-संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव द्वारा तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल के अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का उद्घाटन भी शामिल था। यह उन्नत सुविधा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पर्यावरण के अनुकूल मासिक धर्म स्वच्छता समाधानों को प्रोत्साहित करने और स्वदेशी विनिर्माण उत्कृष्टता को मजबूत करने के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की पीएफटी और एएफटी सुविधाओं का दौरा किया जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और उन्हें प्रमुख कार्यों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने दोनों इकाइयों के कारखाना का दौरा किया, टीमों के साथ बातचीत की और विनिर्माण प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही उनके गुणवत्ता, दक्षता और स्वदेशी उत्पादन के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता की भी सराहना की।

इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी, साझेदार संस्थानों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के प्रतिष्ठित हितधारकों ने भाग लिया।

आयुष मंत्रालय ने लू और अत्यधिक गर्मी की स्थिति को देखते हुए जन स्वास्थ्य संबंधी सलाह जारी की


दिल्ली /सत्ता संदेश

इस परामर्श में गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए निवारक उपायों, पारंपरिक स्‍वास्‍थ्‍य पद्धतियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर विशेष जोर दिया गया है

देश के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान और लू की स्थिति को देखते हुए  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत आयुष वर्टिकल ने आयुष मंत्रालय के समन्वय से वर्तमान ग्रीष्म ऋतु के लिए अत्यधिक गर्मी/लू पर एक व्यापक जन स्वास्थ्य सलाह जारी की है।

इस परामर्श में आम जनता, संवेदनशील समूहों, नियोक्ताओं, श्रमिकों तथा बडे सर्वाजनकि और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले लोगों के लिए गर्मी से होने वाले तनाव और गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाव हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, दोपहर के समय में सीधे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से बचने,  हल्के सूती कपड़े पहनने तथा मौसमी फलों और इलेक्ट्रोलाइट से भरपूर तरल पदार्थों के सेवन पर जोर दिया गया है।

परामर्श में यह भी बताया गया है कि शिशु, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग व्यक्ति, खुले में काम करने वाले श्रमिक और हृदय रोग तथा उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति लू की स्थिति में विशेष रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं तथा उन्हें अतिरिक्‍त देखभाल एवं निगरानी की आवश्यकता होती है।

कार्यस्थलों, सार्वजनिक आयोजनों तथा बाहरी गतिविधियों के लिए विशेष सावधानियां सुलझाई गई हैं, जिनमें छायादार विश्राम स्‍थलों की व्‍यवस्‍था, नि‍यमति जलपान अवकाश, श्रमिकों के लिए अनुकूलन उपाय तथा गर्मी के तनाव के लक्षणों के प्रति जागरूकता बढाना शामिल है।

इस सलाह में नागरिकों को गर्मी से संबंधित बीमारियों के खतरनाक संकेतों- जैसे चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, मानसिक स्थिति में बदलाव, शरीर का अत्‍यधिक तापमान, निर्जलीकरण, दौरे पडना-बेहोशी- के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। हीटस्ट्रोक को एक चिकित्सा आपातस्थिति बताया गया है, जिसके लिए तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है। गंभीर मामलों में तुरंत 108/102 आपातकालीन हेल्पलाइन हेल्‍पलाइन पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

डीजीएचएस के आयुष वर्टिकल द्वारा जारी परिशिष्ट के अंतर्गत इस परामर्श में आयुर्वेद, सिद्ध, योग, यूनानी और होम्योपैथी सहित विभिन्न आयुष पद्धतियों के पारंपरिक स्वास्थ्य एवं निवारक उपायों को भी शामिल किया गया है, ताकि लू की स्थिति से मुकाबला किया जा सके।

आयुर्वेद विभाग ने शीतल आहार पद्धातियों, मठ्ठा, नारियल पानी और नींबू आधारित पेय जैसे शरीर को तरलता प्रदान करने वाले पेयों के सेवन तथा निम्बुकफला पनाका, आम्र प्रपनाका और चिंचा पनाका सहित पारंपरिक उपयोग की सलाह देता है, जिससे अत्‍यधिक गर्मी के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित करने में सहायाता मिल सकेगी।

सिद्ध और योग अनुभागों में शीतलता प्रदान करने वाले पेयों तथा शीतली प्राणायाम और हल्‍के योग अभ्‍यासों को अपनाने की सलाह दी गई है,  ताकि शरीर में ताकि संतुलित बना रहे और गर्मी के तनाव को कम किया जा सके।

यूनानी पद्धति धूप से झुलसने और डीहाईड्रेशन को रोकने के लिए पारंपरिक ठंडे पेय और हर्बल लेप की सलाह देती है, जबकि होम्योपैथी अत्‍यधिक भीषण गर्मी के दौरान एहतियाती उपाय करने की सिफारिश करती है।

परामर्श में जनता को गर्मी के मौसम में अपने दैनिक आहार में खीरा, तरबूज, नींबू, खरबूजा, लौकी और टमाटर जैसी हाइड्रेटिंग और शीतलता देने वाले पारंपरिक खाद्य सामग्रि‍यों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

नागरिकों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम संबंधी अद्यतनों पर नियमित रूप से ध्‍यान देने और लू संबंधी चेतावनियों के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने की भी सलाह दी गई है।

विस्तृत परामर्श संलग्न है।