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बकरीद क्या है और क्यों मनाई जाती है? जाने त्याग और विश्वास का पर्व, भारतीय अर्थव्यवस्था में ₹50,000 करोड़ का योगदान

नई दिल्ली: दुनियाभर के साथ-साथ भारत में भी मुसलमान बकरीद (ईद-उल-अज़हा) का त्योहार बड़े उत्साह के साथ मना रहे हैं। इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ‘ज़िल-हिज्जा’ की 10 तारीख को मनाया जाने वाला यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी एक बड़ी भूमिका निभाता है।

इतिहास और महत्व बकरीद की कहानी: करीब 2000 ईसा पूर्व पैगंबर इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल के त्याग से जुड़ी है। यह त्योहार ईश्वर पर अटूट भरोसे और बलिदान का संदेश देता है। इस दिन कुर्बानी के गोश्त को गरीबों और जरूरतमंदों में बांटने की परंपरा है, जो इस्लाम में ‘ज़कात’ की तरह दान का संदेश देती है।

अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव : जानकारों के अनुसार, केवल बकरीद के मौके पर भारत में जानवरों से जुड़ा कारोबार करीब 50,000 करोड़ रुपये तक पहुँच जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, इस अवसर पर करीब 1.5 करोड़ जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इस कारोबार से न केवल पशुपालक, बल्कि चारा बेचने वाले, वेटनरी डॉक्टर, ट्रांसपोर्टर, कसाई और चमड़ा कारोबारी भी जुड़े होते हैं।

पशुपालन और गोट फॉर्मिंग : भारत के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार में पशुपालन ग्रामीण रोजगार का अहम जरिया है। यूपी में यादव और गुर्जर, राजस्थान में रबारी और मालधारी, तथा गुजरात के कच्छ-सौराष्ट्र में मालधारी समुदाय पारंपरिक रूप से इस उद्योग से जुड़े हैं। वर्तमान में ‘गोट फॉर्मिंग’ का कारोबार भी तेजी से फल-फूल रहा है, जिससे पिछड़े वर्ग, दलित और आदिवासी समाज के लोग आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

महंगे बकरों की मांग : इस साल मंडियों में बकरों की भारी मांग देखी गई, जहाँ कुछ खास नस्ल के बकरों की कीमत 50 लाख रुपये तक रही। यहाँ तक कि एक विशेष निशान वाले बकरे की कीमत 4 करोड़ रुपये तक बताई गई है।

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में बड़ा उछाल, 5.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश


देश में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं की कुल लागत में सामूहिक रूप से 5.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

यह जानकारी अप्रैल महीने की एक आधिकारिक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें देशभर में चल रही प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की स्थिति का आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, लागत में यह वृद्धि विभिन्न कारणों से हुई है, जिनमें परियोजनाओं में देरी, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भूमि अधिग्रहण में बाधाएं और तकनीकी कारण प्रमुख हैं। इससे इन परियोजनाओं की समयसीमा और बजट दोनों पर दबाव बढ़ा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत वृद्धि से सरकारी वित्तीय योजना पर असर पड़ सकता है और परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की चुनौती और बढ़ सकती है।

यह रिपोर्ट भारत सरकार (Government of India) द्वारा बुनियादी ढांचा विकास की निगरानी के तहत तैयार की गई है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों की परियोजनाओं का विस्तृत विश्लेषण शामिल है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में लागत नियंत्रण और परियोजना प्रबंधन में सुधार करना बेहद जरूरी होगा, ताकि देश की विकास गति प्रभावित न हो।

आरबीआई देगा सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश, बढ़ेगी वित्तीय मजबूती

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है। माना जा रहा है कि यह राशि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार को बड़ी वित्तीय राहत प्रदान करेगी।

यह अब तक का सबसे बड़ा लाभांश हस्तांतरण है। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआई ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का लाभांश दिया था, जो 2023-24 की तुलना में 27.4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, 2023-24 में यह राशि 2.1 लाख करोड़ रुपये और 2022-23 में 87,416 करोड़ रुपये रही थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, आरबीआई से मिलने वाला यह बड़ा लाभांश सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने में मदद करेगा।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, निवेश आय और केंद्रीय बैंक की बेहतर वित्तीय स्थिति के कारण इस बार रिकॉर्ड लाभांश संभव हो पाया है।

भारत का लक्ष्य इस वर्ष एक ट्रिलियन डॉलर और अगले पांच वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात करना : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल


दिल्ली /सत्ता संदेश

निर्यात लक्ष्य एक राष्ट्रीय मिशन; लगभग 38 विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते बाजार पहुंच को बढ़ावा देंगे: श्री पीयूष गोयल

श्री पीयूष गोयल ने व्यवसायों से आयात रुझानों पर दृष्टि रखने, अवसरों की पहचान करने, आयात प्रतिस्थापन में देश की मदद करने की अपील की

स्वदेशी को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए श्री पीयूष गोयल ने घरेलू उत्पादों की सहायता करने का आग्रह किया

बढ़ती खपत अवसर प्रदान करती है, लेकिन आयात में वृद्धि को रोकने के लिए घरेलू उद्योग को आगे आना होगा; युवाओं और स्टार्टअप की अधिक भागीदारी की आवश्‍यकता : श्री पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत ने इस वर्ष एक ट्रिलियन डॉलर और अगले पांच वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। यही आत्मनिर्भर भारत की सच्ची पहचान होगी। नई दिल्ली में भारतीय व्यापार महोत्सव की वेबसाइट लॉन्च समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, इस वर्ष निर्यात 863 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि वस्तुओं और सेवाओं दोनों के निर्यात में वृद्धि हुई है, जो वर्तमान वैश्विक परिवेश में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

श्री गोयल ने कहा कि यह केवल सरकार का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र का लक्ष्य है और केंद्र सरकार इसे अर्जित करने के लिए हर संभव सहायता देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में लगभग 38 विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की दिशा में प्रयास किए गए हैं। इससे भारतीय वस्तुओं को उन बड़े बाजारों में तरजीही पहुंच मिलेगी जहां प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम आयात शुल्क पर भारतीय सामान बेचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ये समझौते धीरे-धीरे लागू होंगे और ओमान के साथ एफटीए पहली जून से लागू हो सकता है। कागजी कार्रवाई के लिए लंबित अन्य अंतिम रूप दिए गए एफटीए भी बाद में लागू हो जाएंगे।

श्री पीयूष गोयल ने हितधारकों से वाणिज्य मंत्रालय के व्यापार पोर्टल के माध्यम से आयात रुझानों का अध्ययन करने और घरेलू विनिर्माण तथा आयात प्रतिस्थापन के अवसरों की पहचान करने का आग्रह किया। उन्होंने देश में आयात की जा रही वस्तुओं पर निरंतर दृष्टि रखने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि ऐसे रुझान भारतीय व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं। श्री गोयल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय को विदेशों से भारत में आने वाले उत्पादों को उजागर करते हुए इन अवसरों को अधिक व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयात प्रतिस्थापन और निर्यात विकास के दो प्रमुख पहलू हैं और मंत्रालय उन क्षेत्रों को भी प्रदर्शित करेगा जहां भारत की शक्ति और क्षमता है ताकि व्यवसाय इन अवसरों का लाभ उठा सकें।

श्री पीयूष गोयल ने घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने और स्वदेशी भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विदेशी वस्तुओं के प्रति थोड़ी सी भी प्राथमिकता घरेलू उद्योग को कमजोर कर सकती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है और उपभोग बढ़ रहा है, भारत के लिए अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करना आवश्यक है, अन्यथा आयात इस कमी को पूरा करेगा। श्री गोयल ने व्यवसायों और उपभोक्ताओं से देश के भीतर आपूर्तिकर्ता और ग्राहक बनकर एक-दूसरे की सहायता करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि यदि भारतीय स्वदेशी मेला जैसी पहलों के माध्यम से इस भावना को मजबूत किया जाता है, तो यह भारत में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने वाले एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में परिवर्तित हो सकता है।

श्री गोयल ने कहा कि पूंजीगत वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में भारत अभी भी विदेशी देशों पर बहुत हद तक निर्भर है। उन्होंने राजकोट, जालंधर, लुधियाना, बटाला और पुणे सहित औद्योगिक समूहों से आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री ने चिकित्सा उपकरणों के बढ़ते घरेलू उत्पादन को भी रेखांकित किया और विशाखापत्तनम में निर्मित सीटी स्कैन मशीन को उदृत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को अधिक अपनाने से मांग बढ़ेगी और परिचालन का परिमाण भी बढ़ेगा।

श्री गोयल ने कहा कि भारत को केवल विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने मात्र से आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को निरंतर बड़ी उपलब्धियों के लिए प्रयासरत रहना चाहिए, नए विचार उत्पन्न करने चाहिए और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा परिकल्पित अमृत काल के दौरान विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर निरंतर कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उद्योगों, व्यवसायों और नागरिकों के उत्साह के साथ-साथ 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भावना से यह विश्वास मिलता है कि विश्‍व की कोई भी शक्ति भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती। भारत मंडपम में आयोजित हो रहे भारतीय स्वदेशी मेले का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थल स्वयं भारत की विविधता को दर्शाता है, क्योंकि यहाँ उपयोग की जाने वाली सामग्री और उत्पाद देश के विभिन्न कोनों से आए हैं।

श्री गोयल ने गुणवत्ता और उत्पादकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी देश में गुणवत्ता मानकों में सुधार और उत्पादकता में वृद्धि चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर गुणवत्ता और पैकेजिंग के बिना भारत वैश्विक बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और इसके निर्यात में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

कृषि और मत्स्य पालन सेक्‍टरों की क्षमता को रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि किसानों और मछुआरों के उत्पादों सहित भारत का कृषि निर्यात लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन सेक्‍टरों में मूल्यवर्धन का स्तर अभी भी कम है। उन्होंने कहा कि यदि युवा उद्यमी मूल्यवर्धित सेक्‍टरों में प्रवेश करें और लघु, मध्यम एवं वृहत्तर स्तर पर प्रसंस्करण और विनिर्माण इकाइयां स्थापित करें तो अपार संभावनाएं हैं।

श्री गोयल ने कहा कि जब भारत निर्यात-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाता है, तो गुणवत्ता मानक स्वाभाविक रूप से बेहतर होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्वदेशी उत्पाद निर्यात-योग्य हो जाएं, तो लोग विदेशी वस्तुओं की ओर रुख नहीं करेंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और परिचालन के दायरे का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री गोयल ने कहा कि सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की परिभाषा का विस्तार किया गया है और अब 500 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले उद्यम एमएसएमई के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उद्यमों को और अधिक विकसित होते देखना चाहती है और उनके साथ खड़ी है।

उन्होंने आयोजकों से आग्रह किया कि वे भारतीय व्यापार महोत्सव में देश भर से विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को आमंत्रित करें। कार्यक्रम में 1,000 व्यवसायों की भागीदारी का हवाला देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य से 25 महिला उद्यमियों को आमंत्रित किया जाए, जिससे अकेले ही लगभग 700-750 प्रतिभागी शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का बढ़ता मध्यम वर्ग और बढ़ती खपत व्यापारियों, उद्योगों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असीम अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सावधान किया कि यदि घरेलू उद्योग देश की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो आयात इस कमी को पूरा करेगा।

उन्होंने इस पहल में युवा उद्यमियों, स्टार्टअप्स और देश भर के युवाओं सहित अगली पीढ़ी को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आयात प्रतिस्थापन और वर्तमान में आयात किए जा रहे उत्पादों से संबंधित अवसरों को प्रदर्शित किया जाना चाहिए ताकि लोग घरेलू विनिर्माण की संभावनाओं को समझ सकें।

श्री गोयल ने भारतीय स्वदेशी मेले में रुपे कार्ड और यूपीआई संचालित करने वाली एनपीसीआई को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि यूपीआई का व्यापक उपयोग हो रहा है, जबकि रुपे कार्ड का पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने मेले के पूरे परिसर में 50 से 100 कियोस्क स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां आगंतुक आधार और अन्य पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके रुपे डेबिट कार्ड प्राप्त कर सकें और यूपीआई या रुपे कार्ड के माध्यम से सभी लेनदेन डिजिटल रूप से कर सकें।

श्री गोयल ने कहा कि इस पहल के लिए बैंकों को एक साथ लाने से भारत की भुगतान प्रणालियों के व्यापक अंगीकरण को प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत मंडपम नियमित रूप से प्रदर्शनियों और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन करता है। ऐसी पहल से अधिक लोगों को पूरे देश में रुपे और यूपीआई को अपनाने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह की छोटी-छोटी पहल भारत की अमृतकाल यात्रा को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेंगी और जनभागीदारी के माध्यम से समृद्ध और विकसित भारत की राह को सुदृढ़ करेंगी। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति एक कदम आगे बढ़ाता है, तो देश 140 करोड़ कदम आगे बढ़ता है।

श्री गोयल ने सभी हितधारकों से भारतीय व्यापार महोत्सव को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया और कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

भारतीय व्यापार महोत्सव 12 अगस्त – 15 अगस्त 2026 तक चलेगा।

सोने के बाद अब चांदी की बारी: सरकार ने चांदी के आयात पर कसी नकेल, इंपोर्ट के लिए लेनी होगी मंजूरी

नेशनल डेस्क : केंद्र सरकार ने देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू कर दी हैं। सरकार ने चांदी की कई श्रेणियों को ‘फ्री’ लिस्ट से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) कैटेगरी में डाल दिया है, जिसका अर्थ है कि अब इनके आयात के लिए अतिरिक्त सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होगी।

क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का मुख्य उद्देश्य बढ़ते आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करना है। अधिकारियों को यह चिंता सता रही है कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के बाद निवेशक और ज्वेलरी खरीदार चांदी की ओर रुख कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए चांदी के आयात पर सख्ती बढ़ाई गई है ताकि चालू खाते के घाटे (CAD) को बढ़ने से रोका जा सके।

आयात शुल्क में पहले ही हुई है बढ़ोतरी: हाल ही में सरकार ने सोना और चांदी दोनों पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा बचाना सरकार की प्राथमिकता है।

30 साल के निचले स्तर पर पहुंचा आयात : सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ऊंची ड्यूटी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों की वजह से अप्रैल महीने में सोने और चांदी का आयात पहले ही 30 साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। अब नई पाबंदियों के लागू होने के बाद आने वाले महीनों में चांदी के आयात में और अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है।

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी इजाफा; इतने रुपए हुआ महंगा

नेशनल डेस्क: सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो आज से प्रभावी हो गई है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 218 रुपये तक की वृद्धि की गई है। राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस बढ़ोतरी के बाद प्रमुख शहरों में नई कीमतें इस प्रकार हैं:

दिल्ली: सिलेंडर 194 रुपये महंगा होकर अब 2078.50 रुपये में मिलेगा।

कोलकाता: यहाँ सबसे ज्यादा 218 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे नई कीमत 2208 रुपये हो गई है।

मुंबई: 196 रुपये की वृद्धि के साथ अब कीमत 2031 रुपये है।

चेन्नई: 203 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब सिलेंडर 2246.50 रुपये का मिलेगा।

पटना और जयपुर: पटना में आज से रेट 2365 रुपये और जयपुर में 2031 रुपये हो गया है।इस मूल्य वृद्धि से बाहर खाना-पीना और रेस्टोरेंट का खर्च बढ़ने की संभावना है।

वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख से शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स, निफ्टी में भारी गिरावट

 मुंबई, 27 मार्च (भाषा) वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख और अमेरिका-ईरान संघर्ष जारी रहने से शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहने और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भी निवेशकों को हतोत्साहित किया है।

बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 926.92 अंक गिरकर 74,346.53 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 280.95 अंक की गिरावट के साथ 23,025.50 अंक पर पहुंच गया।

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इटर्नल, इंटरग्लोब एविएशन और बजाज फिनसर्व के शेयर में सबसे अधिक गिरावट रही।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और ट्रेंट के शेयर में बढ़त दर्ज की गई।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का ‘कॉस्पी’ और जापान का ‘निक्केई’ 225 घाटे में रहे, जबकि चीन का ‘एसएसई कम्पोजिट’ और हांगकांग का ‘हैंगसेंग’ फायदे में रहे।

अमेरिकी बाजार बृहस्पतिवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 106.8 डॉलर प्रति बैरल रहा।

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,429.78 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

रामनवमी के अवसर पर बृहस्पतिवार को शेयर बाजार बंद रहे थे।

सेंसेक्स बुधवार को 1.63 प्रतिशत और निफ्टी 1.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था।

रुपया शुरुआती कारोबार में सात पैसे मजबूत होकर 92.14 प्रति डॉलर पर

मुंबई, 10 मार्च (भाषा) वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट और घरेलू शेयर बाजारों में मजबूती के बीच मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सात पैसे मजबूत होकर 92.14 पर पहुंच गया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.92 पर खुला और कुछ ही देर में यह 92.14 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले सात पैसे की मजबूती दर्शाता है।

सोमवार को रुपया 39 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 92.21 पर बंद हुआ था, जो इसका अब तक का सबसे निचला बंद स्तर है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और डॉलर की मजबूती से रुपये में बड़ी कमजोरी आई थी।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि मंगलवार को कमजोर डॉलर और घरेलू शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत से रुपये को समर्थन मिला। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारी बिकवाली के कारण इसकी तेजी सीमित रही।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 4.69 प्रतिशत गिरकर 94.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.26 प्रतिशत गिरकर 98.92 पर आ गया।

घरेलू शेयर बाजार में भी तेजी का रुख रहा। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 809.57 अंक बढ़कर 78,375.73 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 252.75 अंक चढ़कर 24,280.80 पर कारोबार कर रहा था।

रुपया शुरुआती कारोबार में एक पैसे टूटकर 90.67 प्रति डॉलर पर

मुंबई, 16 फरवरी (भाषा) रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में एक पैसा टूटकर 90.67 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर मामूली वृद्धि और देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट का भी स्थानीय मुद्रा पर दबाव रहा।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.63 प्रति डॉलर पर मजबूत खुला। हालांकि फिर 90.67 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से एक पैसे की गिरावट दर्शाता है।

रुपया शुक्रवार को सीमित दायरे में कारोबार करता हुआ पांच पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.66 पर बंद हुआ था।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.93 पर रहा।

घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 71.53 अंक टूटकर 82,555.23 अंक पर जबकि निफ्टी 11.95 अंक फिसलकर 25,459.15 अंक पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 67.78 डॉलर प्रति बैरल रहा।

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 7,395.41 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, छह फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.711 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 717.064 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया।