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भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के प्रतिप्रतिबद्धता

या

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: विश्व के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्र

का निर्माण

  • श्री राजेश अग्रवाल

भारत का यूरोप के साथ 250 ईसा पूर्व से एक समृद्ध व्यापारिक संबंध रहा है, जो सिल्क रोड
से भी पहले की अवधि है। अगले 2000 वर्षों के अधिकांश हिस्से के दौरान, भारतीय मसलिन,
कपास, हस्तशिल्प, मसाले, पन्ना और रत्न अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सबसे पसंदीदा वस्तुओं में
शुमार होते थे, जिनमें से अधिकांश यूरोप तक पहुँचती थीं। इन शानदार वस्तुओं के भुगतान के
तौर पर भारत को सोना और चांदी मिलते थे। अपने सुनहरे दिनों में, भारत-यूरोप व्यापार ने
मात्रा और पैमाने की दृष्टि से अभूतपूर्व वृद्धि हासिल की।
एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के माध्यम से इस संबंध को सुदृढ़ करने के प्रयास 2007 में
शुरू हुए थे। गंभीर मतभेदों के कारण 2013 में बातचीत को रोकना पड़ा, क्योंकि कई मुद्दों पर
दोनों पक्षों के विचार अलग थे। 2022 में बातचीत फिर से शुरू हुई और चुनौतियों की जटिलता
के बावजूद इसे केवल दोनों राजनेताओं की मजबूत प्रतिबद्धता और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण
अंतिम रूप दिया जा सका। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस व्यापार समझौते को दोनों पक्षों ने

बातचीत के माध्यम से पूरा किया है, वह अस्थिर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नियम-आधारित
व्यापार संबंध की पुष्टि करता है। यह समझौता ऐतिहासिक है सिर्फ इसलिए नहीं कि इसमें
शामिल विषय और क्षेत्र व्यापक हैं; समझौता ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि दोनों पक्षों को
ऐसे मुद्दों पर साझा रुख अपनाना पड़ा, जो कठिन और जटिल थे।
सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता: भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता शायद हाल के समय में
किया गया सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता है। यह दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में
से एक का निर्माण कर सकता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोग और 28 देश शामिल होंगे और
जो वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत है। इसके अलावा, यह समझौता मुद्दों और चिंताओं के
समाधान के सन्दर्भ में आधुनिक और नवीन है। इस समझौते में व्यापार संबंध को प्रगाढ़ करने
के लिए अद्यतन और मूल विषयों के साथ-साथ प्रक्रिया-संबंधी प्रावधान भी हैं। यह समझौता
वस्तु और सेवा; दोनों के लिए बाजार पहुंच और नियामक बाधाओं के समाधान के लिए एक
नया मॉडल स्थापित करता है, जो पारंपरिक विषयों को नवाचार-तत्वों के साथ सुदृढ़ करता है।
उदाहरण के लिए, उत्पत्ति के नियमों का अध्याय सुनिश्चित करता है कि केवल वही उत्पाद
जिनका पर्याप्त प्रसंस्करण या उत्पादन साझेदार देशों में हुआ है, उन्हें मूल देश का प्रमाण दिया
जाएगा; इसे विस्तृत और जटिल उत्पाद-विशिष्ट नियमों के माध्यम से हासिल किया गया है, जो
मौजूदा और नयी आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुरूप हैं। इसके अलावा, यह समझौता बौद्धिक संपदा
संरक्षण को पुनर्स्थापित करता है और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व सूचना प्रवाह को बढ़ावा देने पर
अतिरिक्त ध्यान केंद्रित करता है।
वस्तु और सेवाओं के लिए बाजार खोलना: समझौते का मुख्य ध्यान दोनों पक्षों के विशाल और
व्यापक बाजारों को एक-दूसरे के लिए खोलना है। यह समझौता भारत के निर्यात व्यापार मूल्य
के 99 प्रतिशत से अधिक के लिए बाजार पहुँच प्रदान करता है, जिसमें कम से कम 90 प्रतिशत
भारतीय निर्यात को समझौते के लागू होने पर तुरंत निःशुल्‍क प्रवेश की सुविधा मिलेगी। विशेष
रूप से, श्रम-सघन वस्तुएँ जैसे वस्त्र और परिधान, चमड़ा, रत्न और आभूषण, लकड़ी और लकड़ी
की शिल्पकला और समुद्री उत्पादों को जल्दी लाभ मिलेगा। यह रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि-
प्रसंस्करण उद्योग और खनिज जैसे उद्योगों को भी जीवंत ईयू सामान्य बाजार में अपने निर्यात
को विविधता देने में सक्षम करेगा। हालांकि, भारत ने ईयू वाहन के लिए बाजार पहुँच की
अनुमति दी है, लेकिन इसे चरणबद्ध और सन्तुलित तरीके से टैरिफ कोटा के माध्यम से अंतिम
रूप दिया गया है। इसी तरह, यूरोपीय संघ की शराब पर भारत की छूट घरेलू उद्योग के हितों
की रक्षा करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वर्ग में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है।

सेवाओं के व्यापार के लिए भारत-ईयू व्यापार संबंध में महत्वपूर्ण संभावनाएँ हैं। इस समझौते के
तहत भारत ने 144 सेवा क्षेत्रों में ईयू की प्रतिबद्धताएँ प्राप्त की हैं, जो कि अभूतपूर्व है। इसके
अलावा, गतिशीलता पर अध्याय यह सुनिश्चित करता है कि पेशेवरों और संविदा सेवा प्रदाताओं
का अस्थायी प्रवेश और निवास सरल और भरोसेमंद होगा, जिसका अर्थ है कि भारत के
प्रतिभाशाली सेवा पेशेवर ईयू बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। वित्तीय सेवाओं पर
संलग्नक भारत और ईयू के बीच इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर अधिक सहभागिता का
प्रावधान करता है, जिसमें भारत की डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे यूपीआई में तकनीकी
विशेषज्ञता का उपयोग शामिल है। यह समझौता आयुष और पारंपरिक चिकित्सा कर्मियों को भी
अधिक निश्चितता के साथ ईयू में अपनी सेवाएँ प्रदान करने की संभावना पेश करता है।
मुक्त और न्यायसंगत व्यापार को बढ़ावा देना: मुक्त व्यापार समझौता दो बड़े बाजारों के बीच
मुक्त, न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
व्यापार और सतत विकास अध्याय सतत विकास संबंधी चिंताओं के संदर्भ में सहयोग का एक
नया मॉडल प्रस्तुत करता है। यह अध्याय दोनों पक्षों के श्रम या पर्यावरण मानकों में तालमेल
बिठाये बिना दोनों पक्षों के व्यापार संबंध में सतत विकास के उद्देश्य को समग्र रूप से एकीकृत
करता है। इस सहभागिता का मुख्य उद्देश्य नीति संवाद, तकनीकी सहायता और वित्तीय
उपकरणों और संसाधनों को जुटाने पर है। दोनों पक्षों ने त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, गैर-उल्लंघन
शिकायतें और स्वतंत्र परिशिष्ट जैसी व्यवस्थाओं पर भी बातचीत की है, जो कुछ नीति उपायों
या उत्पाद-विशिष्ट उपायों के संबंध में उनकी विशिष्ट चिंताओं का समाधान कर सकते हैं।
असल चुनौती यह थी कि कुछ महत्वपूर्ण हितधारकों, जैसे कि डेयरी और कृषि क्षेत्र, की चिंताओं
और संवेदनशीलताओं की अनदेखी किए बिना बाजार खोलने के उच्च महत्वाकांक्षा को हासिल
किया जा सके। छोटे और सीमांत किसानों और कुछ उद्योग क्षेत्रों की आय और जीवनयापन की
चिंताएं हमारे मन में सबसे पहले थीं। ईमानदारी से कहें तो, इस मामले में यूरोपीय संघ ने
आवश्यक लचीलापन भी दिखाया।
भारत की एफटीए रणनीति का पूरक: आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान के युग में, भारत-ईयू मुक्त
व्यापार समझौता; भारत-यूके एफटीए, ईएफटीए और अन्य व्यापक व्यापार समझौतों से हुए लाभ
में पूरक की भूमिका निभाएगा। 2021 से, भारत ने 9 व्यापक व्यापार समझौते किए हैं और
अगले कुछ महीनों में कई प्रमुख आर्थिक साझेदारी समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता

कर रहा है। भारत-ईयू व्यापार समझौते का निष्कर्ष भारत की नई आर्थिक और व्यापारिक पहलों
को तेज करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता विस्तारित बाजार पहुंच, नजदीकी आर्थिक एकीकरण और
विशेष रूप से अनिश्चित और अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में रणनीतिक स्वायत्तता और सुदृढ़ता
प्राप्त करने में एक बड़ा कदम है। जैसा कि आर्थिक इतिहासकार उल्लेख करते हैं, आर्थिक
समृद्धि सबसे अच्छे तरीके से तब प्राप्त की जा सकती है जब राष्ट्र न्यायपूर्ण, नियम-आधारित
और पूर्व अनुमान योग्य कानूनी रूपरेखा और संस्थानों के आधार पर व्यापार करते हैं। भारत-ईयू
मुक्त व्यापार समझौता समय पर खरे उतरे इस सिद्धांत को बनाए रखने का प्रयास करता है।

(लेखक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव हैं।)

भारत रूसी तेल की खरीद में करेगा कटौती, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद कवायद शुरू: सूत्र
नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) अमेरिका के साथ व्यापार शुल्कों में कटौती के बदले हुए समझौते के तहत भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि हालांकि, नायरा एनर्जी जैसी तेल शोधनशालाओं (रिफाइनरी) के पास सीमित विकल्प होने के कारण ये आयात फिलहाल पूरी तरह बंद नहीं होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को भारत से होने वाले सभी आयातों पर 25 प्रतिशत के दंडात्मक शुल्क को रद्द करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि यह कदम नयी दिल्ली की उस प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया है, जिसमें रूस से तेल आयात रोकने की बात कही गई है।
मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने बताया कि हालांकि तेल शोधनशालाओं को रूस से खरीद रोकने का कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है, लेकिन उन्हें अनौपचारिक रूप से मॉस्को से खरीद कम करने की सलाह दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश तेल शोधनशालाएं इस घोषणा से पहले की गई खरीद प्रतिबद्धताओं (आमतौर पर 6-8 सप्ताह पहले दिए गए ऑर्डर) का सम्मान करेंगी, लेकिन उसके बाद नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद वहां से तेल खरीदना बंद कर दिया था। अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) भी अपनी खरीद धीरे-धीरे बंद करेंगे।
भारत की सबसे बड़ी खरीदार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी अगले कुछ हफ्तों में 1,50,000 बैरल की खेप प्राप्त होने के बाद रूसी तेल की खरीद बंद कर सकती है जिसने पिछले साल के अंत में रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद खरीदारी रोक दी थी। 
इस नियम का एकमात्र अपवाद 'नायरा एनर्जी' हो सकती है। रूसी संबंधों (नायरा में रोसनेफ्ट की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी) के कारण नायरा पर पहले यूरोपीय संघ और फिर ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों के कारण कोई अन्य बड़ा आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ व्यावसायिक लेनदेन नहीं करना चाहता, जिससे वह प्रतिबंधित नहीं की गई संस्थाओं से रूसी तेल खरीदने को मजबूर है।
हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, वहीं वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने भी रूसी तेल खरीद के संबंध में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सूत्रों ने कहा कि रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद से ही रूस से भारत का तेल आयात लगातार घट रहा है।
दिसंबर में अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के दौरान नायरा की इस विशिष्ट स्थिति के बारे में बताया गया था। सूत्रों का कहना है कि नायरा को 'रूसी तेल न खरीदने' की नीति से छूट दी जा सकती है।
सूत्रों ने कहा कि नायरा एनर्जी द्वारा निकट भविष्य में उन संस्थाओं से रूसी तेल की खरीद जारी रखने की संभावना है, जो प्रतिबंधों के दायरे में नहीं हैं।
दिसंबर 2025 में रूस से आयात औसतन 12 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो मई 2023 के 21 लाख बैरल प्रति दिन के उच्चतम स्तर से काफी कम है। जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल रह गया और इस महीने या अगले महीने इसके 10 लाख बैरल से नीचे जाने की उम्मीद है। अमेरिका के साथ नयी समझौते के बाद यह आयात जल्द ही आधा हो सकता है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस से मिलने वाले रियायती तेल ने भारत के आयात बिल को कम करने में मदद की है।
केपलर के प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, रूस से आने वाला तेल अगले 8-10 सप्ताह के लिए पहले से ही तय है और यह भारत की तेल शोधन प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। 
हालांकि, निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (इक्रा) के प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि भारत के पास अमेरिका और वेनेजुएला जैसे पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।
राजस्थान: कोटा में तीन मंजिला इमारत ढही, मलबे से निकाले गए 15 में से दो लोगों की मौत
 जयपुर, आठ फरवरी (भाषा) राजस्थान के कोटा में शनिवार रात तीन मंजिला इमारत के ढह जाने के बाद मलबे से कुल 15 लोगों को बाहर निकाला गया लेकिन उनमें से दो व्यक्तियों की मौत हो गई। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
 उन्होंने बताया कि घायलों में से आठ का इलाज जारी है जबकि पांच को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
 अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान आर्यन (20) और लक्ष्मण (15) के रूप में हुई है।
 कैबिनेट मंत्री हीरालाल नागर ने पत्रकारों को बताया, “कुल 15 लोगों को मलबे से निकाला गया। दो लोगों की मौत हो गई है जबकि कुछ घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। तथ्यों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए जाएंगे और मामले में कार्रवाई की जाएगी।”
 संभागीय आयुक्त अनिल अग्रवाल ने बताया कि आस-पास के इलाके में कुछ नया निर्माण कार्य जारी था और ऐसा अंदेशा है कि इसी कारण इमारत ढह गई।
 यह घटना तलवंडी इलाके में हुई, जहां इमारत में एक रेस्तरां था।
 अधिकारियों के अनुसार, इमारत ढहने के समय रेस्तरां में कुछ ग्राहक और कर्मचारी मौजूद थे।
 उन्होंने बताया कि बचाव अभियान देर रात तक जारी रहा।
सूर्यवंशी सहित तीन भारतीय अंडर-19 विश्व कप की सर्वश्रेष्ठ टीम में
    दुबई, आठ फरवरी (भाषा) युवा स्टार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को रविवार को आईसीसी की अंडर-19 विश्व कप की सर्वश्रेष्ठ टीम में जगह मिली जिसमें तीन भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं।
    इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में 80 गेंद में 175 रन की शानदार पारी खेलने के बाद टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए 14 साल के सूर्यवंशी के अलावा टीम के उनके साथी कनिष्क चौहान और हेनिल पटेल को भी 12 सदस्यीय टीम में जगह मिली। भारत ने रिकॉर्ड छठी बार खिताब जीता।
    कनिष्क ने बल्ले और गेंद दोनों से लगातार महत्वपूर्ण योगदान दिया जबकि हेनिल के 11 विकेट में अमेरिका के खिलाफ 16 रन देकर पांच विकेट का शानदार स्पैल भी शामिल था।
    उप विजेता इंग्लैंड के भी तीन खिलाड़ी टीम में जगह बनाने में सफल रहे जिसमें थॉमस रेव को कप्तान और विकेटकीपर बनाया गया है।
    रेव ने 66 की औसत से 330 रन बनाए जिसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में मैच जिताने वाला शतक भी शामिल है।
    मैनी लुम्सडेन 16 विकेट के साथ टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाज रहे। बेन मायेस को भी टीम में जगह मिली जो स्कॉटलैंड के खिलाफ 191 रन की पारी सहित कुल 444 रन बनाकर टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर रहे।
    मायेस अंडर-19 पुरुष विश्व कप में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी करने से सिर्फ एक रन दूर थे जो चार दिन पहले श्रीलंका के विरान चामुदिथा ने बनाया था। विरान को भी टीम में चुना गया है।
    चामुदिथा ने जापान के खिलाफ 192 रन बनाए और अपनी इस पारी में 26 चौके और एक छक्का लगाया। 
    फैजल खान शिनोजादा और नूरीस्तानी उमरजाई की अफगानिस्तान की जोड़ी को भी टीम में चुना गया जिन्होंने अपने देश को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    फैजल ने टूर्नामेंट में आयरलैंड और भारत के खिलाफ लगातार दो शतक लगाए जबकि नूरीस्तानी ने 14 विकेट लिए जिसमें तंजानिया के खिलाफ नौ रन देकर पांच विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। 
    ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ओलिवर पीक ने भी वेस्टइंडीज के खिलाफ और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ शतक लगाए। ओलिवर, पाकिस्तान के अली रजा और वेस्टइंडीज के विटेल लावेस को भी टीम में जगह मिली।
    रजा ने 13.92 की औसत से 13 विकेट लिए और उनका इकोनॉमी रेट चार रन प्रति ओवर से थोड़ा अधिक था जबकि जमैका के बाएं हाथ के स्पिनर लावेस ने पांच मैच में 10 विकेट लिए।
    चयन पैनल में इयान बिशप (समन्वयक), लीडिया ग्रीनवे, एंडी फ्लावर और टेलफोर्ड वाइस शामिल थे।
    आईसीसी अंडर-19 पुरुष विश्व कप की सर्वश्रेष्ठ टीम: वैभव सूर्यवंशी (भारत), विरान चामुदिथा (श्रीलंका), फैजल खान शिनोजादा (अफगानिस्तान), थॉमस रेव (विकेटकीपर, कप्तान) (इंग्लैंड), ओलिवर पीक (ऑस्ट्रेलिया), बेन मायेस (इंग्लैंड), कनिष्क चौहान (भारत), नूरीस्तानी उमरजई (अफगानिस्तान), विटेल लावेस (वेस्टइंडीज), अली रजा (पाकिस्तान), मैनी लुम्सडेन (इंग्लैंड), हेनिल पटेल (भारत)।
पंजाब में दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया गया
चंडीगढ़, सात फरवरी (भाषा) पंजाब सरकार ने शनिवार को एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
 आधिकारिक आदेशों के अनुसार, अधिकारी कमल किशोर यादव और जसप्रीत सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
 आदेशों में हालांकि उनके निलंबन के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया था, सूत्रों ने बताया कि यह केंद्र सरकार की मिशन सक्षम आंगनवाड़ी के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्मार्टफोन खरीदने में छह साल की देरी से संबंधित है।
 उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा स्मार्टफोन उपलब्ध कराने के लिए चयनित विक्रेता ने देरी के लिए अदालत का रुख किया था।
 इस मामले के संबंध में दो अन्य आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिनमें विकास प्रताप भी शामिल हैं, जो सामाजिक सुरक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थे।
भाजपा समाज के कुछ लोगों का दुरुपयोग उसी समाज के खिलाफ करती : अखिलेश यादव
लखनऊ, सात फरवरी (भाषा) समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसी समाज के कुछ लोगों का दुरुपयोग, उसी समाज के खिलाफ करती है। 
   माना जा रहा है कि यादव ने यह टिप्पणी ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्म ‘‘घूसखोर पंडत’’ के संदर्भ में की है। हालांकि उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से फिल्म के नाम का जिक्र नहीं किया है।
राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने शुक्रवार को फिल्म/वेब सीरीज ‘‘घूसखोर पंडत’’ के निदेशक और उनकी टीम के ख़िलाफ़ एक जाति विशेष (ब्राह्मण) को अपमानित करने और वैमनस्यता फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी।

सपा अध्यक्ष यादव ने कहा कि वर्तमान में जिस फिल्म को लेकर मुद्दा बना है, उसके नाम का उल्लेख करना भी संभव नहीं है क्योंकि फ़िल्म का शीर्षक केवल आपत्तिजनक नहीं, बेहद अपनानजनक भी है। उन्होंने कहा कि उस फ़िल्म का नाम लिखने से भाजपा का उस समाज का तिरस्कार करने का उद्देश्य और भी अधिक पूरा होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ भाजपा हमेशा से ये षड्यंत्र करती है कि वो किसी समाज के कुछ लोगों का दुरुपयोग, उसी समाज के खिलाफ करती है। इससे वो किसी समाज विशेष को लक्षित, चिह्नित , टारगेट करके अपमानित-आरोपित’ करती है।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा कभी ये काम बयानबाज़ी से करती है और कभी बैठकों पर नोटिस देकर, कभी अपना पैसा लगाकर विज्ञापन, प्रचार सामग्री या फ़िल्म बनवाकर। और जब विवाद बढ़ जाता है तो गिरगिट की तरह रंग बदलकर घड़ियाली आंसू बहाती है और दिखावे के लिए सामने आकर झूठी कार्रवाई का नाटक करती है। सच तो ये है कि वो लक्षित किये हुए समाज विशेष को अपमानित-उत्पीड़ित देखकर मन-ही-मन बहुत ख़ुश होती है।’’
यादव ने उक्त फिल्म को नाम बदलकर भी रिलीज नहीं करने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘जब निर्माताओं को आर्थिक हानि होगी, तभी ऐसी फ़िल्में बनना बंद होंगी क्योंकि पैसे के लालच में भाजपा का एजेंडा चलानेवाले भी भाजपाइयों की तरह पैसे को छोड़कर किसी और के सगे नहीं हैं। ये ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ या ‘क्रिएटिव लिबर्टी’ के हनन की बात नहीं है, ये ‘रचनात्मक समझ’ या कहिए ‘क्रिएटिव प्रुडेंस’ की बात है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित जो फ़िल्म किस एक पक्ष की भावनाओं को, एक सोची-समझी साज़िश के तहत आहत करे वो मनोरंजन कैसे हो सकती है।’’
उन्होंने कहा,” और अगर उद्देश्य मनोरंजन नहीं है तो किसी एक समाज को बदनाम करने के एजेंडे के पीछे के एजेंडे का खुलासा भी होना ही चाहिए।’’
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी शुक्रवार को फ़िल्म ‘घूसखोर पंडत’ में ब्राह्मण समाज के कथित अपमान को लेकर निंदा करते हुए सरकार से मांग की थी कि इस जातिसूचक फिल्म पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिये।

जापान में संसदीय चुनावों के लिए मतदान शुरू, प्रधानमंत्री ताकाइची को बड़ी जीत की उम्मीद
तोक्यो, आठ फरवरी (एपी) जापान में रविवार को संसदीय चुनावों के लिए मतदान शुरू हुआ। प्रधानमंत्री साने ताकाइची को उम्मीद है कि उनकी संघर्षरत पार्टी को इतनी बड़ी जीत मिलेगी कि वह अपना महत्वाकांक्षी रूढ़िवादी राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा सकें।
 ताकाइची व्यक्तिगत रूप से काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) उतनी लोकप्रिय नहीं है, जिसने पिछले सात दशकों में अधिकतर समय जापान पर शासन किया है। उन्होंने इसी स्थिति को बदलने के लिए अचानक चुनाव कराने का फैसला किया।
 ताकाइची चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जापान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता को मजबूत करने वाली दक्षिणपंथी नीतियों को आगे बढ़ाना चाहती हैं। साथ ही वह अमेरिका के साथ गठबंधन को भी मजबूत बनाए रखना चाहती हैं।
 अत्यंत रूढ़िवादी ताकाइची अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और उन्होंने सिर्फ ‘‘काम’’ करने का संकल्प लिया। उन्हें मजाकिया और सख्त मिजाज का माना जाता है, जिससे युवाओं के बीच वह काफी लोकप्रिय हैं।
 ताजा सर्वेक्षणों के अनुसार, एलडीपी को निचले सदन में भारी जीत मिलने की संभावना है। विपक्ष बिखरा हुआ है और उसे मजबूत चुनौती देने में सक्षम नहीं माना जा रहा।
 ताकाइची ने कहा है कि अगर पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाई तो वह इस्तीफा दे देंगी। 
 इस बीच, उत्तरी जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी से मतदान और मतगणना प्रभावित होने की आशंका है।
उप्र: शामली में 12 वर्षीय नाबाालिग ने तीन वर्षीय लड़के से किया कुकर्म, आरोपी पुलिस हिरासत में
मुजफ्फरनगर, आठ फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के शामली जिले के एक गांव में 12 वर्षीय नाबालिग ने तीन वर्षीय बच्चे से कथित तौर पर कुकर्म किया। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
कांधला थाना प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) सतीश चंद ने यहां पत्रकारों को बताया कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया।
उन्होंने बताया कि बाद में उसे किशोर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सुधार गृह भेज दिया गया और पीड़ित लड़के को चिकित्सकीय जांच के लिए भेज दिया गया।
पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बच्चा शनिवार को अपने घर के बाहर खेल रहा था कि तभी आरोपी उसे टॉफी देने के बहाने पास के एक स्थान पर ले गया और उससे कुकर्म किया।
अधिकारी ने बताया कि मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है।
मुजफ्फरनगर दंगा: हत्या व आगजनी के मामले में साक्ष्य के आभाव में 22 आरोपी बरी
मुजफ्फरनगर (उप्र), आठ फरवरी (भाषा) मुजफ्फरनगर जिले की एक अदालत ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े हत्या, लूट और आगजनी के एक मामले में साक्ष्यों के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया। शासकीय अधिवक्ता ने रविवार को यह जानकारी दी।
शासकीय अधिवक्ता नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कनिष्क कुमार ने शनिवार को यह कहते हुए आरोपियों को बरी किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
उन्होंने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आठ सितंबर 2013 को भौराकला थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में हुई घटनाओं के संबंध में 26 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद शेष 22 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन कार्रवाई जारी थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हनीफ ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि सैकड़ों दंगाइयों ने गांव में घरों पर हमला किया, संपत्ति लूटी और बाद में घरों में आग लगा दी।
शिकायत में आरोप था कि हमले के दौरान शिकायतकर्ता के पिता रहीसुद्दीन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। दंगाइयों पर एक मस्जिद को नुकसान पहुंचाने और एक पुलिस कांस्टेबल की मोटरसाइकिल में आग लगाने का भी आरोप था।
बरी किए गए आरोपियों में अनिल, सुभाष, संजीव, करण, शेर सिंह, ऋषिपाल, हंसपाल, प्रमोद, विक्की, बादल, मदन, जय नारायण, बृजवीर, विनोद, काला, प्रवीण, जगपाल, प्रेमपाल, पप्पू, नीतू, भूरा और हरेंद्र सिंह शामिल हैं। ये सभी मोहम्मदपुर रायसिंह गांव के निवासी हैं।
मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए दंगों में 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज जम्मू में जम्मू और कश्मीर में विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की


बैठक में केन्द्रीय गृह मंत्री ने सड़क, बुनियादी ढांचे, जल विद्युत परियोजनाओं, बिजली, उद्योग, पर्यटन, 4G और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विकास की व्यापक समीक्षा की 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार, विकसित और समृद्ध जम्मू-कश्मीर के निर्माण के लिए कटिबद्ध है

मोदी सरकार के निरंतर समर्पित प्रयासों से जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाओं में अभूतपूर्व प्रगति हुई है

केंद्र सरकार की जनकल्याण योजनाओं का 100% सैचुरेशन और सभी विकास परियोजनाओं का लाभ लाभार्थियों को सुनिश्चित हो

युवाओं के लिए स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और स्पोर्ट्स अकादमियों की स्थापना पर ध्यान दिया जाए

NDDB के माध्यम से जम्मू और कश्मीर में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयास हों

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज जम्मू में जम्मू और कश्मीर में विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान, केन्द्रीय गृह मंत्री ने सड़क बुनियादी ढांचे, जल विद्युत परियोजनाओं, बिजली, उद्योग, पर्यटन, 4G और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विकास की व्यापक समीक्षा की। बैठक में जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री श्री उमर अबदुल्ला, केन्द्रीय गृह सचिव और केन्द्र सरकार और जम्मू और कश्मीर सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार, एक विकसित और समृद्ध जम्मू और कश्मीर के विजन के प्रति कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा विकास में तेजी लाने के लिए किए जा रहे निरंतर और समर्पित प्रयासों से जम्मू और कश्मीर में विकास परियोजनाओं में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को जल विद्युत परियोजनाओं के पूरी क्षमता को विकसित करने की ज़रूरत है । उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याण योजनाओं का 100% सैचुरेशन प्राप्त करना और सभी विकास परियोजनाओं का लाभ लाभार्थियों को मिलना सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिय़ा जाए।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि युवाओं को विकास के साथ जोड़ने के लिए स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और स्पोर्ट्स अकादमियों की स्थापना पर ध्यान दिया जाए। इस विषय में विभिन्न स्पोर्ट्स बॉडीज से बात करके लगभग 200 करोड़ रुपए के निवेश की कोशिश की जाएगी। श्री शाह ने कहा कि National Dairy Development Board (NDDB) के माध्यम से जम्मू और कश्मीर में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयास होने चाहिएं।

एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, जम्मू और कश्मीर को पहली बार वित्त वर्ष 2025-26 में Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI) योजना के दायरे में लाया गया है, जिससे पूंजीगत परियोजनाओं के लिए 50 साल के ब्याज-मुक्त ऋण मिल सकेंगे। गृह मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मज़बूत वित्तीय अनुशासन से समय के साथ केंद्रशासित प्रदेश के वित्तीय घाटे को स्थिर करने में मदद मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि देश, वर्ष 2047 में आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, और भारत सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जम्मू और कश्मीर को पूरी सहायता देती रहेगी। गृह मंत्री श्री अमित शाह का दौरा, भारत सरकार के जम्मू और कश्मीर के विकास, शांति और सुरक्षा को सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।