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क्या ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कोई आश्वासन दिया है: केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया

 नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शुक्रवार को सवाल किया कि क्या ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि भारतीय पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया जाएगा।

केजरीवाल ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बृहस्पतिवार रात फोन पर बात कर पश्चिम एशिया की ‘‘गंभीर स्थिति’’ पर चर्चा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति को बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, क्या ईरान के राष्ट्रपति ने आपको आश्वासन दिया है कि वह हमारे पोतों को होर्मुज से निकलने देंगे? क्या देशवासियों को इस गंभीर संकट से जल्द छुटकारा मिलेगा?’’

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा आता है।

भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने तीन दिन पहले उस समय गोलीबारी की जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था।

नार्वेकर ने विस में महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान अनुपस्थित रहने पर वरिष्ठ नौकरशाहों को चेतावनी दी

मुंबई, 10 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मंगलवार को वरिष्ठ नौकरशाहों को चेतावनी दी कि वे सदन की महत्वपूर्ण चर्चाओं, विशेषकर राज्य के बजट पर होने वाली चर्चा के दौरान अनुपस्थित न रहें। उन्होंने इसे नौकरशाही के लिए “अंतिम मौका” बताया।

बजट पर चर्चा से पहले सदन को संबोधित करते हुए नार्वेकर ने कहा कि चर्चा के दौरान मंत्रियों को तत्काल प्रशासनिक जानकारी देने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का सदन में उपस्थित होना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य बजट पर चर्चा एक गंभीर विषय है और इसे उचित महत्व देना सरकार और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।’’

अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने पहले ही राज्य के नौकरशाहों को पत्र लिखकर विधानसभा में महत्वपूर्ण बहसों के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि नौकरशाह इस चेतावनी को ‘‘अंतिम अवसर’’ समझें।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर भविष्य में अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी ऐसी महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान सभाघर में उपस्थित नहीं होते हैं, तो सदन को उचित कार्रवाई करनी पड़ेगी।’’

नार्वेकर ने कहा कि सदन का सुचारू संचालन निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासन दोनों के सहयोग पर निर्भर करता है और सदस्यों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि चर्चाएं निर्धारित समय के भीतर संपन्न हों, ताकि विधानसभा की कार्यवाही कुशलतापूर्वक संचालित हो सके।

नेपाल संसदीय चुनाव : प्रत्यक्ष मतदान में आरएसपी ने 125 सीट जीतीं

काठमांडू, 10 मार्च (भाषा) नेपाल में संसदीय चुनावों में प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत मतगणना मंगलवार को पूरी होने के साथ ही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने 165 में से 125 सीटें जीत ली हैं जिससे वह बहुमत की सरकार बनाने की स्थिति में आ गई है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत सभी 165 सीट की मतगणना पूरी हो चुकी है और आरएसपी 125 सीट के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

अन्य दलों में नेपाली कांग्रेस (एनसी) को 18 सीट मिली हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल को नौ, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) को आठ, श्रम संस्कृति पार्टी (एसएसपी) को तीन और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) को एक सीट मिली है। इसके अलावा एक निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुआ है।

निर्वाचन आयोग ने बताया कि आनुपातिक मतदान (पीआर) प्रणाली के तहत मतगणना अभी जारी है और इसके मंगलवार रात तक समाप्त होने की उम्मीद है।

पीआर प्रणाली के तहत अब तक आरएसपी को 49,74,957 वोट मिले हैं। इसके बाद नेपाली कांग्रेस को 16,85,722, सीपीएन-यूएमएल को 14,02,157, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को 7,63,633, श्रम संस्कृति पार्टी को 3,50,809 और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी को 3,23,744 वोट मिले हैं।

वर्तमान रुझानों के आधार पर आरएसपी को आनुपातिक मतदान प्रणाली के तहत कम से कम 50 और सीट मिलने की संभावना है। ऐसा होने पर 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में उसकी कुल सीट की संख्या लगभग 175 तक पहुंच सकती है।

ऐसी स्थिति में पार्टी नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (1) के तहत बहुमत की सरकार बनाने में सक्षम होगी।

हालांकि चुनाव आयोग ने कहा कि आनुपातिक मतदान प्रणाली के तहत अंतिम परिणाम घोषित करने और विभिन्न दलों के उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से सीट आवंटित करने में अभी कुछ और दिन लगेंगे।

नेशनल हेराल्ड मामला: सोनिया, राहुल के खिलाफ ईडी की याचिका पर 20 अप्रैल को होगी सुनवाई

 नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल हेराल्ड धनशोधन मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान न लेने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ ईडी की याचिका को 20 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि अदालत आज (सोमवार) सुनवाई नहीं कर सकती।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू

ने मामले की सुनवाई के लिए कम समयावधि की कोई तारीख तय करने का अनुरोध किया।

इसके बाद अदालत ने याचिका 20 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दी।

उच्च न्यायालय ने 22 दिसंबर को गांधी परिवार और अन्य लोगों को मुख्य याचिका और ईडी के आवेदन पर नोटिस जारी किया था, जिसमें 16 दिसंबर, 2025 के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। निचली ने कहा था कि मामले में एजेंसी की शिकायत का संज्ञान ‘‘कानूनी रूप से अस्वीकृत’’ है, क्योंकि यह प्राथमिकी पर आधारित नहीं है।

सऊदी अरब ने ईरान को चेतावनी दी:अरब देशों पर हमला जारी रहा तो उसे होगा सबसे बड़ा नुकसान’

दुबई, नौ मार्च (एपी) सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को आगाह किया कि अगर वह अरब देशों पर हमले करता रहा तो उसे अब तक का ‘‘सबसे बड़ा नुकसान’’ उठाना पड़ेगा।

सऊदी अरब का यह बयान उस नए ड्रोन हमले के बाद आया, जिसमें जाहिर तौर पर उसके बड़े शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाया गया।

इसने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा शनिवार को दिये गये इस बयान को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने खाड़ी अरब देशों पर अपने हमले रोक दिए हैं।

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “देश इस बात की पुष्टि करता है कि ईरानी पक्ष ने इस बयान पर अमल नहीं किया, न तो राष्ट्रपति के भाषण के दौरान और न ही उसके बाद। ईरान ने बिना किसी ठोस वजह के अपना आक्रमण जारी रखा है।”

बयान में कहा गया कि ईरानी हमले का मतलब है, “तनाव में और वृद्धि, जिसका वर्तमान और भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा।”

जो ट्रंप ने मादुरो के साथ किया, वही नरेन्द्र मोदी ने नीतीश के साथ किया: जयराम रमेश

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा का सदस्य बनने के फैसले को लेकर शुक्रवार को भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो इस साल जनवरी में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ किया था, वही अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतीश के साथ किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के छोड़ने का फैसला जनादेश के साथ विश्वासघात है क्योंकि पिछले साल नवंबर में राज्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि नीतीश को ही फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया था।

नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में यह ऐलान किया था कि वह राज्यसभा जाने की इच्छा रखते हैं और बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

बिहार की राजनीति के इस बड़े घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बिहार के चुनाव प्रचार के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे जी और राहुल गांधी जी ने कहा था कि नीतीश कुमार ज्यादा समय के लिए मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे क्योंकि भाजपा का मकसद यही है कि उनको हटाया जाए। आखिरकार यही हुआ। नीतीश को इस बार मुख्यमंत्री बने चार महीने भी नहीं हुए और उन्हें हटाया जा रहा है।’’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘जो ट्रंप ने मादुरो के साथ किया, यहां मोदी जी ने नीतीश कुमार के साथ किया है।’’

उल्लेखनीय है कि इस साल तीन जनवरी को अमेरिका के विशेष सुरक्षा बलों ने वेनेजुएला में एक सैन्य कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़कर अमेरिका ले गए थे। अब इनके खिलाफ अमेरिका में कानूनी कार्रवाई चल रही है।

रमेश ने नीतीश कुमार के मामले को लेकर दावा किया, ‘‘यह तो तख्तापलट है। यह तो होना ही था। यह बिहार की जनता और उसके जनादेश के साथ विश्चासघात है।’’

उनके मुताबिक, जनादेश भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं था, जनादेश नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए था।

रमेश ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘हो सकता है कि कल नायडू को भी तख्तापलट कर राज्यसभा में लाया जाए और मंत्री बना दिया जाए। महाराष्ट्र में भी तो तख्लापलट हुआ था…यह सब ‘जी2’ का कमाल है।’’

नीतीश कुमार और नितिन नवीन के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पर अमित शाह ने दी बधाई

पटना, पांच मार्च (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने पर उन्हें बधाई दी।

बिहार के जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पांच उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री पटना में मौजूद थे। राजग के अन्य उम्मीदवारों में भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार, केंद्रीय मंत्री और जदयू के रामनाथ ठाकुर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के उपेन्द्र कुशवाहा शामिल हैं।

शाह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “नीतीश कुमार जी ने बिहार से राज्यसभा सदस्य के रूप में आज नामांकन भरा है। बीते दो दशकों से बिहार की जनता के कल्याण के लिए आपकी प्रतिबद्धता और समर्पित नेतृत्व ने प्रदेश को जंगलराज से मुक्त कर विकास और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ाया है।”

उन्होंने कहा कि जनसेवा का उनका व्यापक अनुभव और नीति-निर्माण की गहरी समझ राज्यसभा की कार्यवाही को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

शाह ने लिखा कि उनकी गरिमामयी उपस्थिति से राजग के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को और भी मजबूती मिलेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा नामांकन पर भी उन्हें बधाई दी।

उन्होंने कहा, “भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज राज्यसभा के लिए नामांकन भरा है। राज्य में लंबे समय तक सफल और सक्रिय राजनीति करने के बाद अब वह उच्च सदन में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”

खामेनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, संसद में चर्चा होनी चाहिए: सोनिया गांधी

नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ‘‘लक्षित हत्या’’ पर मोदी सरकार की ‘‘चुप्पी’’ को लेकर मंगलवार को उस पर तीखा हमला बोला और कहा कि उसका यह रुख भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

उन्होंने अंग्रेजी दैनिक अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित अपने लेख में यह भी कहा कि आगामी नौ मार्च से जब संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की बैठक शुरू हो तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भंग होने पर सरकार की ‘‘परेशान करने वाली चुप्पी’’ पर स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए।

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘जारी कूटनीतिक वार्ता के बीच किसी पदासीन राष्ट्राध्यक्ष की हत्या समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक भयावह विघटन का संकेत है। लेकिन इस स्तब्ध कर देने वाली घटना से परे नयी दिल्ली की चुप्पी भी हैरान करने वाली है।’’

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की है।

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘अमेरिका-इज़राइल के व्यापक हमले की अनदेखी करते हुए, प्रधानमंत्री ने केवल ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात पर किए गए प्रतिशोधी हमले की निंदा तक स्वयं को सीमित रखा और उससे पहले के घटनाक्रमों का उल्लेख नहीं किया। बाद में उन्होंने ‘‘गहरी चिंता’’ व्यक्त की और ‘‘संवाद और कूटनीति’’ की बात की, जबकि यही प्रक्रिया इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए गए व्यापक, अकारण हमलों से पहले जारी थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून की स्पष्ट रक्षा नहीं करता और निष्पक्षता त्याग दी जाती है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। मौन रहना तटस्थता नहीं है।’’

सोनिया गांधी ने कहा कि ईरानी नेता की हत्या बिना किसी औपचारिक युद्ध घोषणा के और चल रही राजनयिक प्रक्रिया के दौरान की गई।

उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2 (4) किसी भी राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल के प्रयोग या धमकी को प्रतिबंधित करता है। किसी सेवारत राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या इन सिद्धांतों पर सीधा प्रहार है।’’

उन्होंने तर्क दिया कि यदि ऐसे कृत्यों पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र द्वारा सैद्धांतिक आपत्ति न जतायी जाए तो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के क्षरण को सामान्य बनाना आसान हो जाता है।

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘समय की दृष्टि से भी यह असहज करने वाला है। हत्या से मात्र 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इज़राइल की यात्रा से लौटे थे, जहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति स्पष्ट समर्थन दोहराया, जबकि गाज़ा संघर्ष में बड़ी संख्या में नागरिको, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की मौतों पर वैश्विक आक्रोश बना हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब ‘ग्लोबल साउथ’ के कई देश, साथ ही रूस और चीन जैसे भारत के ब्रिक्स साझेदार दूरी बनाए हुए हैं, भारत का उच्च स्तरीय राजनीतिक समर्थन, बिना नैतिक स्पष्टता के एक चिंताजनक बदलाव का संकेत देता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का रुख इस त्रासदी के प्रति मौन समर्थन का संकेत दे रहा है।

उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि कांग्रेस ने ईरानी धरती पर हुए बम हमलों और लक्षित हत्याओं की स्पष्ट रूप से निंदा की है।

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘हमने ईरानी जनता और विश्वभर के शिया समुदायों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और दोहराया है कि भारत की विदेश नीति विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 में परिलक्षित है।’’

उनके मुताबिक, संप्रभु समानता, हस्तक्षेप नहीं करना और शांति को बढ़ावा देना वे सिद्धांत हैं जो ऐतिहासिक रूप से भारत की कूटनीतिक पहचान का हिस्सा रहे हैं।

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘इसलिए वर्तमान सरकार की चुप्पी केवल सामरिक नहीं, बल्कि हमारे घोषित सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होती है। भारत के लिए यह प्रकरण विशेष रूप से चिंताजनक है।’’

सोनिया गांधी ने सवाल किया कि यदि आज ईरान के मामले में संप्रभुता की अवहेलना पर हम संकोच करते हैं, तो कल ‘ग्लोबल साउथ’ के देश अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए भारत पर कैसे भरोसा करेंगे?

उन्होंने कहा, ‘‘इस विषय के समाधान का उपयुक्त मंच संसद है। जब कार्यवाही फिर से शुरू होगी, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के इस विघटन पर भारत की चुप्पी को लेकर खुली और स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या, अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का क्षरण और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता, सीधे भारत के सामरिक हितों और नैतिक प्रतिबद्धताओं से जुड़े हुए विषय हैं।

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘भारत के स्पष्ट रुख की अभिव्यक्ति में अब विलंब नहीं होना चाहिए। लोकतांत्रिक जवाबदेही और रणनीतिक स्पष्टता इसकी मांग करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत लंबे समय से ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के आदर्श का आह्वान करता रहा है। यह केवल औपचारिक कूटनीति का नारा नहीं, बल्कि न्याय, संयम और संवाद के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत है, चाहे वह असुविधाजनक ही क्यों न हो।’’

शाह, राजनाथ आज बंगाल में भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ के विभिन्न चरणों की शुरुआत करेंगे

कोलकाता, दो मार्च (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार दोपहर को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘परिवर्तन यात्रा’ के विभिन्न चरणों की शुरुआत करेंगे।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने अभियान को तेज कर रही है।

शाह दोपहर दो बजे दक्षिण 24 परगना के रायदीघी से रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जबकि सिंह लगभग उसी समय हावड़ा से यात्रा की शुरुआत करेंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर दो बजे उत्तर 24 परगना के संदेशखालि से यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मालदा और इस्लामपुर से कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2019 के लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनावों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की प्रदेश इकाई ने रविवार को कई जिलों से 5,000 किलोमीटर की ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू की, जिसका उद्देश्य सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर को तेज करना और जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियों का आकलन करना है।

रविवार को कूच बिहार से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए नवीन ने आगामी विधानसभा चुनावों में ‘परिवर्तन’ का आह्वान किया और कहा कि भाजपा अपना संदेश राज्य के हर बूथ और घर तक पहुंचाएगी।

राहुल का वित्त मंत्री को पत्र, पूर्व सैनिकों के लिए ईसीएचएस और दिव्यांग पेंशन पर कदम उठाने के आग्रह
नयी दिल्ली, 28 फरवरी (सत्ता संदेश) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के लिए प्रयाप्त बजट का आवंटन और विकलांगत पेंशन पर आयकर की छूट को बहाल किया जाए।
 कांग्रेस नेता ने वित्त मंत्री को 25 फरवरी को यह पत्र लिखा और यह उल्लेख किया कि पूर्व सैनिक इन दोनों मामलों के कारण मुश्किल का सामना कर रहे हैं।
 उन्होंने कहा, "भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना आज धन की कमी के संकट का सामना कर रही है। चिकित्सा बिल के रूप में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक लंबित हैं और अस्पताल भुगतान न करने के कारण इस योजना से बाहर निकल रहे हैं। पूर्व सैनिकों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जेब से भुगतान करने या यहां तक कि इलाज में देरी के लिए मजबूर किया जा रहा है। जिन लोगों ने देश की सेवा की वे संकट की घड़ी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।"
 उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि इसके अलावा, वित्त विधेयक 2026 में सैनिक को सेवा में बनाए रखने पर दिव्यांग पेंशन पर कर लगाने का प्रस्ताव है।
 राहुल गांधी ने कहा, " 1922 के बाद यह पहली बार है कि दिव्यांग पेंशन पर कर लगाया जा रहा है। यह पेंशन उन सैनिकों को राहत प्रदान करने के लिए है जो घायल हो जाते हैं और इसे आय के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इसके अलावा, जब कोई दिव्यांग सैनिक सेवा में बने रहने का विकल्प चुनता है या उससे अनुरोध किया जाता है तो वह चोट के बावजूद निस्वार्थ भाव से भारत की सेवा करता है।’’
 कांग्रेस नेता ने कहा कि जिस चीज़ की प्रशंसा की जानी चाहिए उस पर कर लगाना अपमानजनक है।
 कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल से मेरी मुलाकात हुई और उन्होंने इन मुद्दों की ओर मेरा ध्यान आकर्षित किया। अपनी ही सरकार द्वारा अपमानित किए जाने की उनकी भावनाओं को सुनना दुखद था।"
 राहुल गांधी ने कहा, "मुझे यकीन है कि आप इस बात से सहमत होंगी कि सशस्त्र बलों में सेवा करने वाले हमारे भाई-बहन कृतज्ञ राष्ट्र के हर सहयोग के पात्र हैं। इसलिए, मैं आपसे पर्याप्त बजट समर्थन के साथ सभी लंबित ईसीएचएस देनदारियों को चुकाने और दिव्यांग पेंशन पर पूर्ण आयकर छूट बहाल करने का आग्रह करता हूं।"