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टांडा में ब्यास नदी का बढ़ता खतरा, किसानों ने प्रशासन से बांध मजबूत करने की लगाई गुहार

टांडा/उड़मुड़ / सत्ता संदेश

होशियारपुर के टांडा उड़मुड़ क्षेत्र के रड़ा गांव स्थित ब्यास दरिया के मंड इलाके में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से तुरंत सुरक्षा प्रबंध करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों में आई बाढ़ के दौरान दरिया किनारे बने तटबंध (गेट बांध) क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई थी।

लगातार हो रही बारिश और ब्यास नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे क्षतिग्रस्त तटबंधों की तुरंत मरम्मत और मजबूती का कार्य कराया जाए, ताकि इस बार बाढ़ की स्थिति में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों ने कहा कि पिछले नुकसान की भरपाई अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाई है और एक बार फिर बाढ़ की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से अपील की कि ब्यास नदी के किनारे सुरक्षा प्रबंधों को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत किया जाए।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते तटबंधों की मरम्मत नहीं कराई गई तो आगामी दिनों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति से क्षेत्र में बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

भारतीय सेना को मिलेंगे 840 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, टाटा और निबे को 1600 करोड़ का ऑर्डर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंत्रालय ने सेना के लिए 1,600 करोड़ रुपये के टेंडर में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को ‘लोइटरिंग म्यूनिशंस’ की सप्लाई के लिए चुना है। इस टेंडर के तहत सेना को 100 किलोमीटर की रेंज वाले 840 आधुनिक ड्रोन मिलेंगे।

​टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का कुल ऑर्डर का 64% हिस्सा टाटा को मिला है. टाटा इसके तहत अपनी पूरी तरह से स्वदेशी ‘ALS सीरीज’ के लोइटरिंग सिस्टम की सप्लाई करेगा।

निबे डिफेंस का ऑर्डर 36% हिस्सा निबे डिफेंस के खाते में गया है। निबे इसके लिए ‘वायु अस्त्र’ ड्रोन की सप्लाई करेगी, जो असल में इजरायल की कंपनी एलबिट सिस्टम्स के ‘स्काईस्ट्राइकर’ का रीब्रांडेड वर्जन है।

जानकारी के मुताबिक टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनकर उभरी है और उससे सेना की जरूरत का 64 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करने की उम्मीद है। वहीं निबे दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-2) बनकर उभरी है और उससे बाकी बचे 36 प्रतिशत लोइटरिंग म्यूनिशन की सप्लाई करेगा।

ये पूरी डील ‘फास्ट-ट्रैक’ रूट के जरिए की जा रही है। इसके तहत दोनों कंपनियों को अगले 6 महीने के भीतर ड्रोन की डिलीवरी शुरू करनी होगी. इन ड्रोनों का इस्तेमाल भारतीय सेना की नई बनाई जा रही ‘ड्रोन आर्टिलरी रेजिमेंट्स’ के लिए किया जाएगा, जिससे दुश्मनों के ठिकानों पर बेहद सटीक और लंबी दूरी के हमले किए जा सकें।

यहां टाटा का सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है, वहीं निबे का ड्रोन इजरायली तकनीक पर आधारित है. इसे रक्षा खरीद में घरेलू विकास के मिले-जुले स्तर के रूप में तैयार किया जाएगा।

महादेव बेटिंग ऐप मामले में ED ने विकास गर्ग की ₹940.77 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

ईडी ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में 941 करोड़ रुपये की संपत्ति की कुर्की की पुष्टि के लिए न्यायाधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज इस शिकायत में दिल्ली के व्यापारी विकास गर्ग, उसके परिवार के सदस्यों और कंपनियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

ईडी का आरोप है कि विकास गर्ग से संबंधित संपत्तियां अपराध की कमाई हैं या ऐसी आय से अर्जित की गई हैं। ईडी का कहना है कि मामले में लगभग 941 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है। इनमें 893.03 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 47.73 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। सबसे बड़ी कुर्की एबिक्स इंक के 12.84 लाख शेयर की है। इनका मूल्य लगभग 766 करोड़ रुपये है और ये शेयर कंपनी में 64.20 प्रतिशत हिस्सेदारी दिखाते हैं।

ईडी ने एबिक्स इंक में 10.66 प्रतिशत की अतिरिक्त हिस्सेदारी का भी जिक्र किया है, जिसकी कीमत ₹127.26 करोड़ रुपये है। ईडी का आरोप है कि अपराध से अर्जित इस रकम का इस्तेमाल पहले ही किया जा चुका है, इसलिए इसे जब्त नहीं किया जा सकता।

ईडी द्वारा जब्त अचल संपत्तियों में दिल्ली के ‘द अमैरिलिस’ में लग्जरी अपार्टमेंट, सफदरजंग विकास योजना में व्यावसायिक संपत्ति, बाबर रोड पर आवासीय संपत्ति, शिवाजी मार्ग पर एक अपार्टमेंट और शिकायत में नामजद कंपनियों की गोवा, उत्तराखंड, राजस्थान और देहरादून में मौजूद संपत्तियां शामिल हैं।

शिकायत में कहा गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस, आंध्र प्रदेश पुलिस, रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा और कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज शुरुआती मामलों पर आधारित है।

भारत में पहली बार BBL का उद्घाटन मैच, पीएम मोदी ने किया ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

What is Big Bash League: भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में खेल सहयोग का नया अध्याय जुड़ गया है. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मेलबर्न में संयुक्त घोषणा करते हुए बताया कि इस साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित बिग बैश लीग (BBL) का उद्घाटन मुकाबला चेन्नई में खेला जाएगा.

BBL ऑस्ट्रेल‍िया की टी20 लीग है, जिसका क्रेज आईपीएल की तरह है. भारत में भी इस लीग की तगड़ी फॉलोइंग है. यह क्रिकेट इतिहास का एक अहम पल होगा, क्योंकि पहली बार किसी विदेशी क्रिकेट लीग का आधिकारिक मैच भारत की धरती पर आयोजित किया जाएगा.

चेन्नई में होने वाला यह मुकाबला दिसंबर में आयोजित होने वाले सप्ताहभर के ‘जी’ डे नमस्ते (‘G’Day Namaste’) कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा.

इस फेस्टिवल में ऑस्ट्रेलिया की संस्कृति, व्यापार, निवेश और खेल से जुड़े कई कार्यक्रम भारत के विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति देना है.

क्या है ब‍िग बैश लीग ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग (BBL) देश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल टी20 क्रिकेट लीग है. इसकी शुरुआत 2011 में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने की थी. इस लीग में ऑस्ट्रेलिया के अलग-अलग शहरों की 8 टीमें हिस्सा लेती हैं. BBL का टूर्नामेंट लीग स्टेज और नॉकआउट मुकाबलों के फॉर्मेट में खेला जाता है. इसमें ऑस्ट्रेलिया के स्टार खिलाड़ियों के साथ-साथ दुनिया भर के कई बड़े विदेशी क्रिकेटर भी खेलते हैं.

BBL की 8 टीमें हैं

  1. एडिलेड स्ट्राइकर्स (Adelaide Strikers)
  2. ब्रिस्बेन हीट (Brisbane Heat)
  3. होबार्ट हरिकेन्स (Hobart Hurricanes)
  4. मेलबर्न रेनेगेड्स (Melbourne Renegades)
  5. मेलबर्न स्टार्स (Melbourne Stars)
  6. पर्थ स्कॉर्चर्स (Perth Scorchers)
  7. सिडनी सिक्सर्स (Sydney Sixers)
  8. सिडनी थंडर (Sydney Thunder)

BBL की तरह विमेंस बिग बैश लीग (WBBL) भी है. 2015 में शुरू हुई यह लीग महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े घरेलू T20 कॉम्पिटिशन में से एक है, जिसने दुनिया भर में महिला क्रिकेटर्स के लिए नए आयाम स्थाप‍ित किए.

खेल सहयोग के लिए नया रोडमैप

दोनों प्रधानमंत्रियों ने खेल सहयोग पर रोडमैप (Roadmap on Sport Cooperation) भी जारी किया. इसके तहत खेलों में क्षमता निर्माण, स्पोर्ट्स साइंस, टेक्नोलॉजी रिसर्च, खेल उद्योग और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर काम करेंगे.

यह रोडमैप ऐसे समय में सामने आया है, जब ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक और पैरालंपिक की तैयारी कर रहा है, जबकि भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारियों को आगे बढ़ा रहा है.

अल्बनीज बोले- खेल दोनों देशों को जोड़ने वाला सबसे मजबूत माध्यम pm.gov.au के मुताब‍िक- ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया खेलों, खासकर क्रिकेट, के प्रति समान जुनून साझा करते हैं.

उन्होंने कहा कि नया स्पोर्ट्स रोडमैप तकनीक, रिसर्च और क्षमता निर्माण जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी मजबूती मिलेगी.

ऑस्ट्रेलियाई मंत्रियों ने भी जताई खुशी

ऑस्ट्रेलिया के व्यापार एवं पर्यटन मंत्री डॉन फैरेल ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध दोनों देशों की आर्थिक समृद्धि के लिए बेहद अहम हैं. उनके मुताबिक बड़े खेल आयोजन पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने का शानदार अवसर होते हैं.

वहीं, खेल मंत्री अनिका वेल्स ने कहा कि क्रिकेट दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह रोडमैप खेलों के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई स्पोर्ट्स सिस्टम पहले से ही भारतीय संस्थाओं के साथ अपने अनुभव साझा कर रहा है और भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होगी.

MCG गए पीएम मोदी, फिर न्यूजीलैंड रवाना होंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अपने तीन देशों के दौरे के ऑस्ट्रेलिया चरण का समापन करेंगे. वह ऐतिहासिक मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) का दौरा करने के बाद न्यूजीलैंड के ऑकलैंड के लिए रवाना होंगे.

ऑकलैंड पहुंचने के बाद शुक्रवार को उनका कोई आधिकारिक कार्यक्रम नहीं होगा. शनिवार को वह गवर्नमेंट हाउस में बैठकों के अलावा स्पोर्ट्स और बिजनेस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे. इसके बाद वह नई दिल्ली लौटेंगे.

गौरतलब है कि भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना है.

भारत ने 13वीं आसियान-भारत व्यापार समझौता सयुंक्त समिति की बैठक की मेजबानी की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत ने 6 से 10 जुलाई तक नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में 13वीं आसियान-भारत व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति और संबंधित बैठकों की मेजबानी की, जिसमें AITIGA समीक्षा के तहत वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई। ये बैठकें हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही हैं।

एआईटीआईजीए संयुक्त समिति के अंतर्गत आने वाली आठ उप-समितियों में से तीन की बैठकें वर्तमान में 13वीं संयुक्त समिति की बैठक के दौरान समानांतर रूप से आयोजित की जा रही हैं। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रिया एवं व्यापार सुगमता उप-समिति (SC-CPTF), राष्ट्रीय व्यवहार एवं बाजार पहुंच उप-समिति (SC-NTMA) और उत्पत्ति नियम उप-समिति (SC-ROO) शामिल हैं। ये बैठकें भारत और आसियान के बीच सहयोग को गहरा करने, आपसी समझ को मजबूत करने और रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य कर रही हैं।

संयुक्त समिति ने उप-समितियों को उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया और उनसे AITIGA समीक्षा के अंतर्गत लंबित अध्यायों को अंतिम रूप देने में तेजी लाने का आग्रह किया। वार्ता की गति बनाए रखने के लिए, उप-समितियों को समयबद्ध कार्य सौंपे गए और उन्हें सहमत समयसीमा के भीतर ठोस परिणाम प्राप्त करने हेतु मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

7 जुलाई, को आयोजित 13वीं AITIGA संयुक्त समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य विभाग के अपर सचिव नितिन कुमार यादव और मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने की। इस बैठक में आसियान के सभी सदस्य देशों ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

आसियान भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जो भारत के वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा है। भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 के दौरान 128 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो दोनों पक्षों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी को दर्शाता है और व्यापार एवं निवेश सहयोग को और बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है।

PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज, भारत से मदद की गुहार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत का नाम खुलकर सामने आने लगा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (एलओसी) खोलने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद इलाके में राशन और दवाइयों की कमी हो गई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

पीओजेके के नेता ने भारत से क्या अपील की?

सरदार अमन खान ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पीओजेके के लोगों को भारत की मदद की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए आर्थिक नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे आम लोगों को खाने-पीने का सामान और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। उन्होंने नियंत्रण रेखा के पूंछ और डोडा सेक्टर की ओर रास्ता खोलने की भी मांग की। हालांकि, उनके इस कथित वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीओजेके में विरोध प्रदर्शन क्यों तेज हुए हैं?

पिछले महीने से पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और विरोध की आवाज उठाने वालों पर सख्ती की जा रही है। ईदगाह मैदान में हुई एक बड़ी रैली में प्रदर्शनकारियों ने ‘पीओजेके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है’ और ‘हमें आजादी चाहिए’ जैसे नारे लगाए। इससे साफ संकेत मिला कि आंदोलन अब केवल स्थानीय मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नियंत्रण के खिलाफ भी आवाज उठाई जा रही है।विज्ञापन

जेएएसी पर कार्रवाई को लेकर क्या दावा?

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान प्रशासन ने पांच जून को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से पीओजेके में असंतोष और बढ़ गया। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों का लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव रहा है, जबकि स्थानीय संगठनों की भूमिका लगातार सीमित होती गई है।

पाकिस्तान प्रशासन पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?

  • प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कार्रवाई में कई लोगों की जान जा चुकी है।
  • जेएएसी का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन पर सख्ती की जा रही है।
  • संगठन ने कहा कि यदि मांगों का जवाब गोलियों से दिया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।
  • कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
  • क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
  • पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

ये प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए चुनौती क्यों?

पीओजेके में जारी विरोध प्रदर्शन अब पाकिस्तान के लिए एक राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनते जा रहे हैं। भारत से मदद मांगने और एलओसी खोलने की अपील ने इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, इन मांगों पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान प्रशासन आंदोलन को बातचीत से शांत करने की कोशिश करता है या सख्ती का रास्ता जारी रखता है। फिलहाल पीओजेके के हालात पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

पं. बंगाल में राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा, जानिए कब होगी वोटिंग और मतगणना

पश्चिम बंगाल / सत्ता संदेश

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। आयोग के अनुसार, इन सीटों पर 24 जुलाई को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम पांच बजे मतगणना भी कराई जाएगी। निर्वाचन कार्यक्रम के तहत 7 जुलाई को अधिसूचना जारी होगी, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई तय की गई है। 15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 17 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। चुनाव प्रक्रिया 27 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी।

तृणमूल कांग्रेस के किस सांसद ने कब दिया इस्तीफा?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद पूर्व सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस में बड़ा सियासी उठापटक देखने को मिली है। इसकी शुरुआत विधानसभा से हुई और राज्यसभा से होते हुए लोकसभा तक पहुंची। पार्टी के राज्यसभा सदस्यों की बात करें तो, सबसे पहल 8 जून को पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद शुखेंदु रॉय शेखर ने अपने पद और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दिया। इसके बाद 10 जून को  सुष्मिता देव ने निजी कारणों से इस्तीफा सौंपा फिर इसके एक दिन बाद 11 जून को राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने भी पद का त्याग किया था।

गुजरात के मंझलपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा

चुनाव आयोग ने सोमवार को गुजरात की मंझलपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। इसके साथ ही चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। यह सीट भाजपा के आठ बार के विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद 2 जून को खाली हुई थी। अधिसूचना के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई को होगी, जबकि उम्मीदवार 16 जुलाई तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो 30 जुलाई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतगणना और पूरी चुनाव प्रक्रिया 4 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी।

बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया सीटों पर भी उपचुनाव

चुनाव आयोग ने यह अधिसूचना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की संबंधित धाराओं के तहत जारी की है। आयोग के सचिव बिनोद कुमार ने चुनाव कार्यक्रम को अधिसूचित किया। मंझलपुर उपचुनाव देश में हो रहे तीन विधानसभा उपचुनावों में शामिल है। अन्य दो उपचुनाव बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीटों पर होंगे। वडोदरा जिले की मंझलपुर सीट पर भाजपा का मजबूत आधार रहा है। ऐसे में राजनीतिक दलों की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा के साथ यह मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।

लुधियाना में शिक्षा और सद्भाव का संदेश, एक मंच पर आए AAP, अकाली और कांग्रेस नेता

लुधियाना / सत्ता संदेश

शहर के दुर्गा माता मंदिर में संचालित कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र के सफल विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई नेता एक ही मंच पर नजर आए और विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु ने कहा कि युवाओं को शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें। हालांकि, कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह से जुड़े सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

वहीं, पूर्व विधायक रणजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के एक मंच पर आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि समाज में सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी भाईचारा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ने बताया कि इस वर्ष कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र से 1,700 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिन्हें समारोह में प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि मंदिर कमेटी जरूरतमंद लोगों की सेवा और युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

‘मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की एकता के लिए अमर प्रेरणा’ : पीएम मोदी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। 

श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। 

डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’

कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।

उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न ‘दीपक’ यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  

यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।

भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  

75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।

डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। 

कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे। 

दिल्ली में प्रदूषण से जंग के लिए ₹8,300 करोड़ का मेगा प्लान, 65% फंड देगा वर्ल्ड बैंक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 8,300 करोड़ रुपये के सात साल के प्रोग्राम का ऐलान किया है। इस प्रोग्राम के लिए 65 फीसदी धनराशि वर्ल्ड बैंक दे रही है और 35 फीसदी फंड दिल्ली सरकार से मिलेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘स्वच्छ वायु, स्वस्थ दिल्ली’ टाइटल वाला प्रोजेक्ट सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इसका मकसद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और पूरे शहर में प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से उत्सर्जन में कटौती करना है। तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी स्टेकहोल्डर के बीच कोऑर्डिनेशन में सुधार के लिए 10 जुलाई को एक स्पेशल वर्कशॉप आयोजित किया जाएगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “वर्कशॉप में कई विभागों और एजेंसियों की भूमिकाओं को परिभाषित करेगी और परियोजना के प्रभावी और समय पर इम्प्लीमेंटेशन के लिए रोडमैप पर चर्चा होगी। यह कार्यक्रम दिल्ली के एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान को गति देगा, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के टारगेट्स में मदद करेगा और विकसित भारत 2047 उद्देश्य की मदद करेगा।

रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल ‘सिर्फ प्रदूषण कंट्रोल प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक लंबे वक्त का इन्वेस्टमेंट’ है, जिसका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ हवा, बेहतर पब्लिक हेल्थ और ज्यादा टिकाऊ शहरी माहौल देना है। उन्होंने कहा कि यह पहल दो मुख्य स्तंभों पर टिकी है: हवा की क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना।

पहले हिस्से के तहत, सरकार एक खास प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाएगी, एडवांस्ड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करेगी, डेटा एनालिटिक्स क्षमताएं तैयार करेगी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएगी। इस प्रोजेक्ट में इंडो-गैंगेटिक प्लेन के राज्यों के साथ बेहतर तालमेल, वैज्ञानिक प्लानिंग, जन-जागरूकता अभियान और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की योजना भी शामिल है।

दूसरा हिस्सा पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के लिए एडवांस्ड ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्रोग्राम को पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी, ट्रांसपोर्ट विभाग, पब्लिक वर्क्स विभाग, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर लागू करेंगे. आर्थिक मामलों का विभाग और वर्ल्ड बैंक भी इसमें मुख्य पार्टनर होंगे।

साफ हवा को हर नागरिक का अधिकार बताते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजधानी में हवा की क्वालिटी और पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक, समन्वित और टिकाऊ समाधानों के प्रति दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार का नया प्रोग्राम हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से निपटने और शहर में पब्लिक हेल्थ के उपायों को मजबूत करने के लंबे वक्त के प्रयास के लिए अलग-अलग विभागों के बीच फंडिंग, टेक्नोलॉजी और तालमेल को एक साथ लाएगा।