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Amritsar Khasa Dogra War Memorial: 1965 के शहीदों को श्रद्धांजलि, डोगरा डे पर हुआ कार्यक्रम

अमृतसर के खासा स्थित डोगरा वॉर मेमोरियल पर डोगरा डे के अवसर पर 1965 के युद्ध में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। डोगरा ब्रिगेड, स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स हुए शामिल।

  • अमृतसर के खासा में डोगरा वॉर मेमोरियल पर 1965 के शहीदों को श्रद्धांजलि
  • डोगरा डे पर डोगरा ब्रिगेड ने किया शहीदों को नमन, स्कूल स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स भी हुए शामि

अमृतसर / सत्ता संदेश

खासा स्थित डोगरा वॉर मेमोरियल में डोगरा डे के अवसर पर 1965 के युद्ध में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। डोगरा ब्रिगेड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सेना के जवानों के साथ विभिन्न स्कूलों के स्टूडेंट्स, NCC कैडेट्स और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान शहीद सैनिकों की याद में पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही डोगरा ब्रिगेड की ओर से हथियारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स ने देखा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को 1965 के युद्ध के इतिहास और सैनिकों के बलिदान से परिचित करवाना भी रहा।

कार्यक्रम में पहुंची स्टूडेंट गौरी ने 1965 के युद्ध के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सैनिकों ने बहादुरी के साथ देश और लोगों के घरों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनना किसी भी व्यक्ति के लिए गर्व और सम्मान की बात है।

गौरी ने युवाओं से भारतीय सेना में शामिल होने की कोशिश करने की अपील करते हुए कहा कि डोगरा वॉर मेमोरियल पर हथियारों की प्रदर्शनी देखना और श्रद्धांजलि समारोह का हिस्सा बनना उन्हें काफी प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में देश सेवा और सेना में शामिल होने की भावना को मजबूत करते हैं और उन्हें NDA के माध्यम से सेना में जाने के लिए भी प्रेरणा मिलती है।

इस अवसर पर रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर कर्नल आर.पी.एस. ढिल्लों ने भी 1965 के युद्ध से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित और कारगिल ऑपरेशन के दौरान 9 पंजाब के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर रहे कर्नल ढिल्लों ने बताया कि एक युवा अधिकारी के रूप में उन्हें इच्छोगिल नहर के दूसरी तरफ जाने का अवसर मिला था।

उन्होंने युद्ध के दौरान देखे गए तबाह पाकिस्तानी टैंकों और उन मोर्चों का जिक्र किया, जहां भारतीय सैनिकों ने बंकरों तक पहुंचकर ग्रेनेड के जरिए वहां मौजूद MMGs को निष्क्रिय किया था। कर्नल ढिल्लों ने युवा पीढ़ी से देश और भारतीय सेना के लिए मेहनत करने तथा सेना में भर्ती होने की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया।

कर्नल ढिल्लों ने बताया कि कार्यक्रम डोगराई दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उनके अनुसार, 1965 के युद्ध के दौरान छंब और खेमकरण सेक्टर में भारत पर दबाव के बीच लाहौर पर दबाव बनाने और अन्य मोर्चों से दबाव कम करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र से भी मोर्चा खोलने की कोशिश की गई थी।

कार्यक्रम में शामिल स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स ने भी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और देश की रक्षा के लिए उनके बलिदान को याद किया। डोगरा वॉर मेमोरियल में आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को भारतीय सेना के इतिहास, युद्ध में सैनिकों की भूमिका और देश सेवा की भावना से जोड़ने का अवसर बना।

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