1984 Sikh Victims: 84 पीड़ित परिवारों का भगवंत मान सरकार के खिलाफ मोर्चा, अकाल तख्त से इंसाफ की मांग
अमृतसर में 1984 के सिख विरोधी हिंसा के पीड़ित परिवारों ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। परिवारों ने श्री अकाल तख्त साहिब से इंसाफ, पुनर्वास और अपनी मांगों के समाधान की अपील की।
अमृतसर / सत्ता संदेश
1984 के सिख विरोधी हिंसा के पीड़ित परिवारों ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इंसाफ की मांग उठाई है। अमृतसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि उन्हें अभी भी परेशानियों और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस मामले को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब से हस्तक्षेप की मांग की है।
पीड़ित परिवारों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि 42 साल बीत जाने के बावजूद कई परिवारों का पुनर्वास पूरी तरह नहीं हो पाया है और उनके सामने रोजगार तथा आवास से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। एक महिला प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि उन्हें सरकार की ओर से ऐसे पत्र मिले हैं, जिनमें उन्हें आवंटित घर खाली करने के लिए कहा गया है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों और पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछली सरकारों के बाद मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में भी उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
मामले को लेकर पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधि श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे और सिंह साहिब से मुलाकात की। उनके अनुसार, अकाल तख्त साहिब पर उनकी समस्याओं को सुना गया और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनके मुद्दे पर पंथ स्तर पर विचार किया जाएगा।
पीड़ित परिवारों ने कहा कि 1 नवंबर को 1984 की घटनाओं की बरसी के मौके पर आगे की रणनीति और बड़े ऐलान किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे सरकार के मंत्रियों और विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों के बीच अपनी समस्याएं उठाएंगे और सरकार के खिलाफ अपने आरोपों को जनता के सामने रखेंगे।
परिवारों ने पंजाब के लोगों से भी अपील की कि वे 1984 के पीड़ितों के मुद्दे पर उनका साथ दें और सरकार से उनके पुनर्वास, अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर जवाब मांगें।
गौरतलब है कि 2026 में भी श्री अकाल तख्त साहिब और भगवंत मान सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर सार्वजनिक तौर पर मतभेद सामने आए हैं। जून में अकाल तख्त ने गुरु ग्रंथ साहिब से संबंधित कानून में संशोधन को लेकर पंजाब सरकार को निर्देश दिए थे, जबकि सितंबर में सरकार ने संबंधित कानून पर अकाल तख्त की ओर से उठाई गई चिंताओं पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति के साथ बैठक भी की थी।
फिलहाल 84 पीड़ित परिवारों की ओर से लगाए गए आरोपों पर पंजाब सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

