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नरेंद्र मोदी अजेय क्यों हैं? पूर्व वित्त सचिव हसमुख आध्या ने बताईं PM मोदी की मैनेजमेंट, मानवीय और आध्यात्मिक खूबियां

हसमुख आध्या भारत के पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव

पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व को लेकर विस्तार से अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक मोदी के साथ काम करने के दौरान उन्हें उनकी कई प्रशासनिक और व्यक्तिगत खूबियों को करीब से देखने का अवसर मिला।

हसमुख आध्या के मुताबिक, नरेंद्र मोदी की लंबे समय तक राजनीतिक सफलता के पीछे उनकी दूरदर्शिता, मैनेजमेंट क्षमता, टीम के साथ संवाद, लोगों से जुड़ाव और आध्यात्मिक दृष्टिकोण जैसी कई खूबियां हैं। आध्या ने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय में एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी और बाद में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया था।

उन्होंने कहा कि मोदी किसी भी योजना को केवल तत्काल परिणाम के नजरिए से नहीं देखते, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर लंबी अवधि की रणनीति तैयार करने पर जोर देते हैं। आध्या के अनुसार, बजट तैयार करने के दौरान मोदी वित्त मंत्रालय के अलग-अलग विभागों की प्रस्तुतियों को घंटों ध्यान से सुनते और इसके बाद अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करते थे।

आध्या ने यह भी बताया कि मोदी विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की नियमित समीक्षा करते थे। उनके अनुसार, इन बैठकों में प्रधानमंत्री नए सुझाव देने के साथ अधिकारियों का उत्साह बढ़ाने पर भी ध्यान देते थे।

‘चिंतन शिविर’ से लेकर टीम मैनेजमेंट तक

हसमुख आध्या ने गुजरात में शुरू किए गए ‘चिंतन शिविर’ का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आयोजित होने वाला यह वार्षिक कार्यक्रम प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तैयार करने का माध्यम बना। बाद में केंद्र स्तर पर चीफ सेक्रेटरीज कॉन्फ्रेंस जैसी प्रक्रिया भी देखने को मिली।

आध्या ने मोदी की एक अन्य खूबी का जिक्र करते हुए कहा कि वे अधिकारियों और सहयोगियों के लिए आसानी से उपलब्ध रहते हैं। उनके मुताबिक, इससे उन्हें सरकार और संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों की जानकारी सीधे मिलती रहती थी।

‘वाइब्रेंट गुजरात’ का उदाहरण देते हुए आध्या ने कहा कि मोदी किसी नई पहल को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उसके अनुभव को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और भविष्य के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर देते थे।

लोगों से व्यक्तिगत जुड़ाव का भी किया जिक्र

हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री मोदी के मानवीय पक्ष का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, मोदी गरीब और पिछड़े वर्गों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2003 के गुजरात के पहले चिंतन शिविर की विदाई स्पीच को याद करते हुए कहा कि उस दौरान पिछड़े लोगों की समस्याओं पर मोदी की भावनात्मक चर्चा ने वहां मौजूद कई अधिकारियों और मंत्रियों को प्रभावित किया था।

आध्या के मुताबिक, मोदी अपनी टीम के लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर भी जुड़ाव रखते हैं। किसी अधिकारी, राजनीतिक कार्यकर्ता या उनके परिवार के सदस्य के बीमार होने की जानकारी मिलने पर फोन करके हालचाल पूछना और विशेष अवसरों पर शुभकामनाएं देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी लोगों के नाम और उनसे हुई मुलाकातों को लंबे समय तक याद रखते हैं। आध्या के अनुसार, यह क्षमता लोगों के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करती है।

भगवद्गीता और कर्मयोग का भी किया उल्लेख

हसमुख आध्या ने नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में आध्यात्मिक पक्ष को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मोदी के काम करने के तरीके और सफलता-असफलता को स्वीकार करने के दृष्टिकोण में उन्हें भगवद्गीता के ‘कर्मयोग’ की झलक दिखाई देती है।

आध्या के अनुसार, मोदी जिस काम को हाथ में लेते हैं, उसमें पूरी मेहनत और गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं। सफलता मिलने के बाद भी उनके मुताबिक मोदी इसे लेकर लापरवाह या अहंकारी नहीं होते, जबकि अपेक्षित परिणाम न मिलने की स्थिति में भी मुश्किलों को नए अवसरों में बदलने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने ‘आर्जव’ का उल्लेख करते हुए इसे विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता तथा सादगी से जोड़ा। आध्या ने कहा कि मोदी की धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बचपन की घटना का भी किया जिक्र

हसमुख आध्या ने मोदी के साथ हुई एक बातचीत से जुड़ी बचपन की घटना भी साझा की। उनके अनुसार, मोदी ने बताया था कि बचपन में चोट लगने के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें दर्द हो रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया था कि उन्हें दर्द नहीं हो रहा, बल्कि उनके शरीर में दर्द हो रहा है।

आध्या ने इस घटना को वेदांत के अद्वैत विचार से जोड़ते हुए कहा कि इसमें शरीर और आत्मा के बीच अंतर की अवधारणा दिखाई देती है।

अपने लेख के अंत में हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मैनेजमेंट क्षमता, मानवीय जुड़ाव और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को उनके नेतृत्व व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका यह लेख मोदी के साथ काम करने के उनके व्यक्तिगत अनुभवों और अवलोकनों पर आधारित है।

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