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स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत, अमृतसर में टीचर्स और प्रिंसिपल्स ने फैसले का किया स्वागत

अमृतसर / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत देने के फैसले का शिक्षकों और स्कूल प्रिंसिपल्स ने स्वागत किया है। शिक्षकों का कहना है कि इससे वे अब अपना अधिक समय कक्षा में विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और सिलेबस पूरा करने में दे सकेंगे।

स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को अतिरिक्त ड्यूटी से राहत देने के संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से पहले भी निर्देश जारी किए गए हैं। अप्रैल 2026 में जारी एक निर्देश में स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों की शैक्षणिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।

अमृतसर के स्कूल ऑफ एमिनेंस, मॉल रोड की प्रिंसिपल मंदीप कौर ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना है। उनके मुताबिक, उनके स्कूल के करीब 8 से 10 शिक्षक BLO और SIR जैसी ड्यूटी में लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि चुनाव और अन्य सरकारी कार्य जरूरी हैं, लेकिन स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को इन अतिरिक्त ड्यूटी से राहत मिलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई को फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि परीक्षा नजदीक होने के कारण शिक्षकों की कक्षा में मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है। जब शिक्षक कई दिनों तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं तो पढ़ाई का क्रम प्रभावित होता है और विद्यार्थियों को रिवीजन तथा विषय से जुड़े मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

14 वर्षों से स्कूल ऑफ एमिनेंस में कार्यरत शिक्षिका मंदीप कौर ने कहा कि शिक्षक के स्कूल से बाहर रहने पर शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच पढ़ाई का नियमित सिलसिला टूटता है। खासकर टर्मिनल और फाइनल परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को रिवीजन और व्यक्तिगत मार्गदर्शन की जरूरत होती है।

बायोलॉजी लेक्चरर प्रतिभा मिश्रा और इंग्लिश लेक्चरर सदर शर्मा ने भी फैसले का स्वागत किया। प्रतिभा मिश्रा ने कहा कि गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से राहत मिलने के बाद शिक्षक विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। वहीं सदर शर्मा ने कहा कि कई बार बड़ी संख्या में स्टाफ बाहरी ड्यूटी पर चला जाता है, जिसका असर स्कूल में नियमित शिक्षण व्यवस्था पर पड़ता है।

पंजाब में शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी का मुद्दा हाल के दिनों में चर्चा में रहा है। सितंबर 2026 में सरकारी स्कूल शिक्षकों ने राशन कार्ड सत्यापन जैसी अतिरिक्त ड्यूटी के विरोध में आंदोलन और बहिष्कार की चेतावनी भी दी थी।

शिक्षकों का कहना है कि कक्षा में नियमित मौजूदगी से विद्यार्थियों को सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत मार्गदर्शन और आवश्यक मानसिक एवं नैतिक सहयोग भी मिल सकेगा। शिक्षकों और प्रिंसिपल्स ने सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी को केंद्र में रखने वाला कदम बताया है।

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