कनाडा के सरे में लॉन्च हुई मरहूम कवि सुखबीर सिंह संधू की ‘पायल’ किताब, 53 साल बाद सामने आईं खोई हुई रचनाएं
लुधियाना / सत्ता संदेश
कनाडा के सरे शहर में मशहूर पंजाबी कवि एवं पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल द्वारा संपादित पुस्तक ‘पायल’ का भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समारोह के दौरान विमोचन किया गया। यह पुस्तक स्वर्गीय कवि सुखबीर सिंह संधू की उन खोई हुई रचनाओं का संग्रह है, जिन्हें करीब 53 साल बाद दोबारा संपादित कर पाठकों के सामने लाया गया है।
मशहूर मीडिया संगठन ‘रेडियो इंडिया’ की अगुवाई में सरे के स्थानीय बॉम्बे बैंक्वेट हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्रों से जुड़ी बड़ी संख्या में प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में सरे की मेयर ब्रेंडा लॉक, मेंबर ऑफ पार्लियामेंट सुख धालीवाल, मेंबर ऑफ पार्लियामेंट गुरबख्श सिंह सैनी, पूर्व सांसद गुरमंत सिंह ग्रेवाल और ब्रिटिश कोलंबिया के पूर्व मंत्री डॉ. गुलजार सिंह चीमा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में सिख सोसायटी, विभिन्न गुरुद्वारों एवं मंदिरों के प्रतिनिधियों, मुस्लिम समुदाय के नेताओं तथा साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने भी भाग लिया। सभी प्रमुख हस्तियों ने मंच से प्रो. गुरभजन सिंह गिल द्वारा संपादित पुस्तक ‘पायल’ को समर्पित करते हुए स्वर्गीय कवि सुखबीर सिंह संधू की साहित्यिक विरासत को याद किया।
‘पायल’ को पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना ने सुखबीर सिंह संधू परिवार और कर्नल जसबीर भुल्लर के सहयोग से प्रकाशित किया है। पुस्तक में शामिल महत्वपूर्ण रचना ‘दो जानिया’ को मशहूर लोक गायक एवं कनाडाई कारोबारी सुरजीत सिंह माधोपुरी ने अपनी आवाज दी है। उन्होंने बताया कि पंजाब के पिछले दौरे के दौरान उन्होंने इस गजल को रिकॉर्ड किया था, लेकिन इसके वास्तविक लेखक के बारे में उन्हें पुस्तक प्रकाशित होने के बाद जानकारी मिली।
कार्यक्रम में ‘रेडियो इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर मनिंदर सिंह गिल ने स्वर्गीय कवि सुखबीर सिंह संधू की साहित्यिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 1985 में दिवंगत हुए कवि की रचना “उस बेवफा दी याद में रोया करां की ना” को नुसरत फतेह अली खान, मराताब अली, नसीबो लाल और अकरम राही जैसे प्रसिद्ध गायकों ने भी अपनी आवाज दी है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भारतीय पंजाब में लंबे समय तक इस रचना के वास्तविक रचनाकार के बारे में जानकारी सामने नहीं आ सकी।
मनिंदर सिंह गिल ने पुस्तक के संपादक प्रो. गुरभजन सिंह गिल के पंजाबी साहित्य और पंजाबी भाषा के लिए किए जा रहे योगदान का भी उल्लेख किया।
समारोह के दौरान मशहूर बैरिस्टर एवं सॉलिसिटर लवलीन सिंह गिल ने मंच सचिव की भूमिका निभाई। इस अवसर पर सेंट्रल पंजाबी राइटर्स एसोसिएशन नॉर्थ अमेरिका के अध्यक्ष प्रितपाल सिंह गिल, सुरजीत सिंह माधोपुरी, पलविंदर सिंह रंधावा, दर्शन सिंह संघा, बिक्कर सिंह खोसा, जसवीर सिंह भलूरिया, इंदरपाल सिंह संधू, एडवोकेट संघा, शब्बा हुंदल, बूटा सिंह ढिल्लों, बलबीर सिंह पड्डा, बलबीर सिंह बोपाराय, रणजीत सिंह वालिया सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।
‘रेडियो इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर मनिंदर सिंह गिल ने पंजाब से ‘पायल’ गजल संग्रह की 200 प्रतियां मंगवाकर पंजाबी पाठकों में वितरित कीं। पुस्तक के संपादक प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने इस पहल के लिए मनिंदर सिंह गिल का धन्यवाद किया और इसे पंजाबी साहित्य की पुरानी रचनात्मक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

