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कपूरथला : कूड़े और स्ट्रीट लाइटों के मुद्दे पर सुखजिंदर सिंह बृंदपुरिया का बड़ा ऐलान, निजी जमीन देने की कही बात

कपूरथला / सत्ता संदेश

कपूरथला विधानसभा क्षेत्र में कूड़े के ढेर और खराब स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। आम आदमी पार्टी से कपूरथला विधानसभा सीट के टिकट के दावेदार बताए जा रहे पहलवान सुखजिंदर सिंह बृंदपुरिया ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है।

मीडिया से बातचीत में सुखजिंदर सिंह बृंदपुरिया ने कहा कि यदि पार्टी और विधानसभा क्षेत्र के लोग उन्हें सेवा की जिम्मेदारी देते हैं, तो वह कपूरथला में कूड़े की समस्या के समाधान के लिए अपनी निजी जमीन देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह केवल सरकारी फंड पर निर्भर नहीं रहेंगे।

बृंदपुरिया ने कहा कि कपूरथला शहर में कूड़े के ढेर और टूटी स्ट्रीट लाइटों की समस्या से आम लोग परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि जिम्मेदारी मिलने पर शहर से कूड़ा उठाने के काम में तेजी लाने के लिए वह अपनी निजी ट्रॉलियां भी सफाई व्यवस्था में लगाने की पहल करेंगे।

इसके साथ ही उन्होंने शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को दुरुस्त करवाने को भी प्राथमिकता देने की बात कही, ताकि जिन सड़कों और इलाकों में अंधेरा रहता है, वहां रोशनी की व्यवस्था बेहतर हो सके।

सुखजिंदर सिंह बृंदपुरिया के निजी जमीन और ट्रॉलियां उपलब्ध करवाने के इस ऐलान के बाद कपूरथला की स्थानीय राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उनके इन दावों पर प्रशासन या अन्य राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कपूरथला विधानसभा क्षेत्र में सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसे स्थानीय मुद्दे आने वाले राजनीतिक माहौल में किस तरह चर्चा का विषय बनते हैं।

TTDI 2026 में भारत की 31वीं रैक, PM मोदी का ‘विकास भी, विरासत भी’ का कॉन्सेप्ट का दिख रहा है असर

लेखक : गजेंद्र सिंह शेखावत, भारत सरकार के संस्कृति और पर्यटन मंत्री

किसी देश में टूरिज्म सिर्फ इसलिए नहीं बढ़ता कि वहां खूबसूरत पहाड़, पुराने मंदिर या बीच हैं। टूरिस्ट को वहां पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें और फ्लाइट्स चाहिए होती हैं। उन्हें रहने के लिए होटल या होमस्टे चाहिए होते हैं। उन्हें सही जानकारी, सिक्योरिटी, साफ-सफाई और अच्छे तौर-तरीके भी चाहिए होते हैं। सबसे बढ़कर, उन्हें ऐसा अनुभव चाहिए होता है जिसे वे ज़िंदगी भर याद रख सकें। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का ट्रैवल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट इंडेक्स इन चीजों को मापता है। इसकी 2026 की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने इस दिशा में काफी तरक्की की है।

भारत 2014 में दुनिया में 65वें नंबर से 2024 में 39वें नंबर पर आ गया है और अब 160 इकॉनमी में 31वें नंबर पर है। हमारा ओवरऑल स्कोर 4.42 है, जो 2024 के मुकाबले 4.3 परसेंट ज़्यादा है। यह नए मेथड से दोबारा कैलकुलेट किए गए 2019 के 4.36 स्कोर के मुकाबले 1.4 परसेंट की बढ़ोतरी भी दिखाता है। भारत साउथ एशिया और कम इनकम वाले देशों में पहले नंबर पर है। यह सिर्फ़ रैंकिंग में सुधार नहीं है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के आइडिया पर चल रही टूरिज्म पॉलिसी के असर को ग्लोबल पहचान है।

इस साल की रैंकिंग को समझने के लिए एक बात जानना ज़रूरी है। 2019 के इंडेक्स में चार बड़े सेक्टर और 90 इंडिकेटर थे। 2026 में, देशों को 17 पिलर और 102 इंडिकेटर पर आंका गया है। लोगों की राय पर आधारित इंडिकेटर्स को 33 से घटाकर 18 कर दिया गया है। यानी, पहले से ज़्यादा असली डेटा के आधार पर असेसमेंट किया गया है। देशों की संख्या भी 140 से घटाकर 110 कर दी गई है, इसलिए पुरानी और नई रैंकिंग की सीधे तुलना करना सही नहीं होगा। लेकिन इसी आधार पर बढ़ा हुआ स्कोर भारत की तरक्की को साफ तौर पर साबित करता है। 13 इंडिकेटर्स में भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में शामिल है। विदेशी टूरिस्ट के एवरेज आने और टूरिज्म डेटा समय पर देने के मामले में भारत टॉप पर है।

यह याद रखना चाहिए कि भारत में विदेशी टूरिस्ट के आने का एवरेज समय लगभग 17-18 दिन है, जो दूसरे बड़े टूरिज्म वाले देशों के एवरेज से दोगुने से भी ज़्यादा है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में यह चौथे और प्राइस कॉम्पिटिटिवनेस, होटल रेट्स, खरीदने की ताकत और अच्छी सैलरी वाली टूरिज्म जॉब्स में छठे नंबर पर है। रोड डेंसिटी में भारत 10वें नंबर पर है। नए हाईवे, बेहतर रेल सर्विस, नए एयरपोर्ट और रीजनल फ्लाइट्स अब देश में टूरिज्म को बढ़ावा दे रही हैं। उड़ान स्कीम के 687 रूट 95 एयरपोर्ट को जोड़ते हैं। भारत की सबसे बड़ी ताकत इसकी डायवर्सिटी है। ट्रैवल रिसोर्स के मामले में हम दुनिया में चौथे नंबर पर हैं।

नेचुरल रिसोर्स में हम 7वें, कल्चरल रिसोर्स में 9वें और बिज़नेस, एजुकेशन और दूसरे नॉन-हॉलिडे ट्रैवल रिसोर्स में 8वें नंबर पर हैं। इंडिया बड़े स्पोर्ट्स स्टेडियम और टॉप यूनिवर्सिटी में तीसरे और ग्लोबल शहरों में पांचवें नंबर पर है। इसका मतलब है कि इंडिया सिर्फ़ छुट्टियां मनाने वाला देश नहीं है। यह कॉन्फ्रेंस, स्पोर्ट्स, एजुकेशन, शादी, स्पिरिचुअलिटी, हेल्थ और बिज़नेस से जुड़े ट्रैवल का भी एक बड़ा हब बन रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का विज़न साफ़ है – विरासत को बचाना और उसे स्थानीय लोगों की खुशहाली से भी जोड़ना। इसी विज़न के साथ, टूरिज़्म मिनिस्ट्री ने सिर्फ़ देखने लायक जगहें बनाने के बजाय पूरे डेस्टिनेशन को डेवलप करने पर ज़ोर दिया है। स्वदेश दर्शन के तहत, 15 थीम पर आधारित टूरिज़्म सर्किट में 5,295 करोड़ रुपये से ज़्यादा के 76 प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है और 75 पूरे हो चुके हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत, 2,207 करोड़ रुपये से ज़्यादा के 53 प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ रहे हैं। प्रसाद योजना के तहत 54 प्रोजेक्ट्स तीर्थ स्थलों पर सफ़ाई, सुरक्षा, सुविधाएँ और रोज़गार बढ़ा रहे हैं।

इन कोशिशों का असर रिपोर्ट में दिख रहा है। टूरिस्ट का आना कुछ महीनों तक सीमित नहीं है, इससे जुड़े इंडिकेटर्स में भारत की रैंकिंग 80 से सुधरकर 46 हो गई है। आबादी के हिसाब से होटल रूम की उपलब्धता का अनुपात 117वें से 84वें नंबर पर आ गया है। डिजिटल पर्यटन सेवाओं का उपयोग 106वें से 91वें स्थान पर, सरकारी पर्यटन व्यय 113वें से 101वें स्थान पर और पर्यटन का आर्थिक प्रभाव 41वें से 31वें स्थान पर आ गया है। छोटे किराये के आवास में भी सुधार हुआ है।

हाल ही में विश्व पर्यटन दिवस पर घोषित टूरिज्म डिजिटल स्टैक के शुभारंभ, आने वाले वर्षों में डिजिटल पर्यटन सेवाओं की रैंकिंग और पर्यटन में निवेश पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जा रही सुविधाओं और प्रोत्साहनों, होटल के कमरों की तेजी से बढ़ती संख्या और आबादी के अनुपात में कमरों की उपलब्धता के संकेतकों में भी सुधार होना तय है। इसका सीधा लाभ नए शहरों, गांवों, होमस्टे और स्थानीय व्यवसायों को मिल रहा है। डिजिटल सुविधा ने इस बदलाव को तेज कर दिया है।

ई-वीज़ा अब 172 देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध है। लगभग 78 प्रतिशत वीज़ा इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किए जाते हैं और लगभग 95 प्रतिशत ई-वीज़ा आवेदन 72 घंटों के भीतर संसाधित किए जाते हैं टेक्नोलॉजी अब छोटे होटलों, गाइड, टूर ऑपरेटर और सर्विस प्रोवाइडर को बड़े मार्केट से जोड़ने का ज़रिया बन रही है, जिससे टूरिस्ट को आसानी हो रही है। टूरिज्म में यह बढ़ोतरी इकॉनमी और रोज़गार में भी दिख रही है। टूरिज्म नेशनल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट में 5.22 परसेंट का योगदान देता है।

साल 2023-24 में, इस सेक्टर ने 8.46 करोड़ नौकरियों को सपोर्ट किया। 2025 में, घरेलू टूरिस्ट विज़िट 428.55 करोड़, विदेशी टूरिस्ट विज़िट 2.53 करोड़ और टूरिज्म से विदेशी मुद्रा की कमाई 2,76,831 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इन आंकड़ों के पीछे गाइड, टैक्सी ड्राइवर, कारीगर, बुनकर, लोक कलाकार, ढाबे, छोटे होटल और होमस्टे चलाने वाले लाखों परिवार हैं। इसलिए, टूरिज्म डेवलपमेंट का फायदा सीधे आम नागरिक तक पहुंचता है।

टूरिज्म को लंबे समय तक सफल बनाने के लिए, हमें नेचर और लोकल कम्युनिटी का ध्यान रखना होगा। इसीलिए टूरिज्म सस्टेनेबिलिटी में भारत की 7th रैंक खास तौर पर ज़रूरी है। हमारा लक्ष्य सिर्फ़ टूरिस्ट की संख्या बढ़ाना नहीं है। हम चाहते हैं कि टूरिस्ट ज़्यादा समय तक रुकें, लोकल प्रोडक्ट खरीदें, आस-पास की नई जगहें देखें और एक आरामदायक अनुभव के साथ लौटें। टूरिज्म मित्र, टूरिज्म दीदी, रूरल होमस्टे, साफ़-सफ़ाई, वेस्ट मैनेजमेंट और कम्युनिटी की भागीदारी जैसी कोशिशें इसी सोच का हिस्सा हैं।

हालांकि, यह कामयाबी आत्मसंतुष्टि का कारण नहीं हो सकती। हमें अच्छे होटल, ट्रेंड गाइड, आसान एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी और बेहतर डेस्टिनेशन मैनेजमेंट पर और काम करना होगा। AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी को यात्राओं को आसान और पर्सनलाइज़्ड बनाना होगा। कम पॉपुलर साइट्स को भी ऐसा बनाना होगा कि टूरिस्ट उन्हें आसानी से ढूंढ सकें, बुक कर सकें और वहां सुरक्षित अनुभव कर सकें। TTDI की 31st रैंक कोई डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि सही दिशा का सबूत है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, टूरिज्म भारत की वाइब्रेंट सभ्यता को दुनिया से जोड़ने और हर सेक्टर में रोज़गार पैदा करने में एक बड़ी ताकत बन रहा है।