लुधियाना के दुगरी चौक के पास ATM कार्ड बदलकर ठगी के संदेह में युवक को लोगों ने पकड़ा।
40-50 ATM कार्ड मिलने का दावा, पुलिस ने जांच शुरू की।
दुगरी चौक के पास हंगामा, संदिग्ध युवक की पिटाई का वीडियो वायरल; पुलिस ने जांच शुरू की
लुधियाना / सत्ता संदेश
दिनांक : 9 अक्टूबर 2026
लुधियाना शहर के दुगरी चौक के पास ATM कार्ड बदलकर ठगी करने के संदेह में स्थानीय लोगों ने एक युवक को पकड़ लिया। इस दौरान लोगों ने उसकी पिटाई भी की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बाद में युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मौके पर मौजूद एक व्यक्ति के मुताबिक, वह ATM से पैसे निकालने पहुंचा था। इसी दौरान उसके पीछे खड़े दो युवकों पर उसे शक हुआ। आरोप है कि वे उसकी वीडियो बना रहे थे और ATM कार्ड लेने की कोशिश कर रहे थे। विरोध करने पर एक युवक मौके से फरार हो गया, जबकि दूसरे को लोगों ने पकड़ लिया। मौके पर मौजूद लोगों ने दावा किया कि पकड़े गए युवक की तलाशी के दौरान उसके पास से करीब 40 से 50 ATM कार्ड मिले। हालांकि, इन कार्डों की वास्तविक संख्या और उनसे जुड़े मामलों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
वहीं, एक अन्य युवक ने आरोप लगाया कि उसका ATM कार्ड बदलकर बैंक खाते से करीब डेढ़ लाख रुपये निकाल लिए गए थे। पीड़ित के अनुसार, यह रकम उसने लंबे समय की मेहनत से जमा की थी। अब मामले में पुलिस जांच से यह पता लगाने की उम्मीद है कि पकड़े गए युवक का कथित ठगी की घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं।
घटना की सूचना मिलने पर PCR पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली थी और पकड़े गए युवक के साथ मारपीट भी हुई है। युवक को संबंधित पुलिस थाने के हवाले किया जाएगा, जहां शिकायतों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मामले में लगे आरोपों की जांच जारी है। पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि पकड़े गए युवक की कथित ATM कार्ड ठगी में क्या भूमिका है और बरामद बताए जा रहे कार्डों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया था।
रामदास अठावले, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री
एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की नींव इस भरोसे पर टिकी होती है कि प्रत्येक नागरिक गरिमा, समानता और सुरक्षा के साथ जीवन यापन कर सके। अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए यह प्रतिबद्धता मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपायों, प्रभावी कानूनों और उत्तरदायी संस्थाओं के माध्यम से ठोस रूप लेती है। इसलिए, भारत सरकार ने अत्याचारों की रोकथाम, पीड़ितों की सुरक्षा और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनी और संस्थागत फ्रेमवर्क को लगातार मजबूत किया है।
इस फ्रेमवर्क का आधार दो प्रमुख कानून हैं: नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 (PCR Act) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST (PoA) Act)। वर्षों से इन कानूनों को विधायी संशोधनों, बेहतर राहत और पुनर्वास प्रावधानों, विशेष न्यायिक तंत्रों, शिकायत-निवारण प्रणालियों तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता के जरिए सुदृढ़ किया गया है।
न्याय के लिए एक अधिक सशक्त कानूनी फ्रेमवर्क
जाति-आधारित अत्याचारों के प्रति संवेदनशील समुदायों की चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए एससी/एसटी (PoA) अधिनियम, 1989 में उल्लेखनीय विकास हुआ है। इस दिशा में एक बड़ा कदम 26 जनवरी 2016 से प्रभावी हुए संशोधनों के जरिए उठाया गया।
इन संशोधनों में अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए अनन्य विशेष न्यायालयों (Exclusive Special Courts) की स्थापना और अनन्य विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया। अधिनियम में कई नए प्रकार के अत्याचारों को भी शामिल किया गया, जिससे एससी और एसटी समुदायों को उपलब्ध कानूनी सुरक्षा का दायरा व्यापक हुआ।
उतना ही महत्वपूर्ण पीड़ितों और गवाहों के अधिकारों से जुड़ा एक समर्पित अध्याय जोड़ना भी था। पीड़ितों, उनके आश्रितों और गवाहों के प्रति राज्य सरकारों की जिम्मेदारियों को और सुदृढ़ किया गया-यह स्वीकार करते हुए कि न्याय केवल मामले के पंजीकरण और मुकदमे की सुनवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें प्रभावित लोगों की सुरक्षा, गरिमा और पुनर्वास भी शामिल होना चाहिए।
इसके बाद, 14 अप्रैल 2016 को एससी/एसटी (PoA) नियम, 1995 में संशोधन किए गए। इन संशोधनों ने राहत और पुनर्वास फ्रेमवर्क को मजबूत किया, अत्याचार के 47 अपराधों के लिए निर्धारित राहत राशि में वृद्धि की और पीड़ितों तथा उनके आश्रितों को समय पर वित्तीय सहायता के वितरण पर जोर दिया।
समय पर न्याय की उपलब्धता सुनिश्चित करना
20 अगस्त 2018 को एससी/एसटी (PoA) अधिनियम में किए गए संशोधन के माध्यम से और भी महत्वपूर्ण बदलाव पेश किए गए। इस संशोधन ने इस कानून के तहत मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया। इसके अलावा, अधिनियम के तहत अपराध के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता को भी हटा दिया गया।
उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था: प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं एससी और एसटी के खिलाफ अत्याचार से जुड़े अपराधों के पंजीकरण, जांच और अभियोजन में बाधा नहीं बननी चाहिए।
एससी/एसटी (PoA) नियम, 1995 में 27 जून 2018 को भी संशोधन किया गया, जिसने मृत्यु, चोट, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, एसिड हमले, संपत्ति के नुकसान और कानून के दायरे में आने वाले अन्य अपराधों के मामलों में राहत प्रावधानों को और मजबूत किया।
ये सुधार इस महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करते हैं कि कानून को केवल कागजों पर ही मजबूत नहीं होना चाहिए, बल्कि जब कोई पीड़ित सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाए, तब उसे सुलभ और संवेदनशील भी होना चाहिए।
त्वरित सुनवाई के लिए अनन्य विशेष न्यायालयों का सुदृढ़ीकरण
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 217 अनन्य विशेष न्यायालय स्थापित किए जा चुके हैं। यह अधिनियम संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, उन जिलों में सत्र न्यायालयों को विशेष न्यायालय के रूप में नामित करने का भी प्रावधान करता है जहां मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
अनन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण का उद्देश्य अधिनियम के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई और प्रभावी निस्तारण को सुगम बनाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों की पहुंच विशेष न्यायिक तंत्र तक हो।
शिकायत निवारण को नागरिकों के निकट लाना
कानूनी सुरक्षा तभी सार्थक होती है जब नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और उचित सहायता प्राप्त कर सकें। इसे ध्यान में रखते हुए, 13 दिसंबर 2021 को एससी और एसटी पर अत्याचार के खिलाफ राष्ट्रीय हेल्पलाइन (NHAA) शुरू की गई, जिसे बाद में ‘संबल’ (SAMBAL) नाम दिया गया।
टोल-फ्री नंबर 1800-202-1989 और शॉर्ट कोड हेल्पलाइन 14566 को एससी/एसटी (PoA) अधिनियम के प्रावधानों के बारे में अधिक जागरूकता फैलाने और सूचना, मार्गदर्शन तथा शिकायत निवारण तंत्र तक पहुंच को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह अत्याचार से प्रभावित व्यक्तियों को अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध उपायों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम प्रदान करता है।
जागरूकता और सुलभता को बढ़ाकर, यह हेल्पलाइन सुरक्षा और न्याय के व्यापक संस्थागत फ्रेमवर्क को मजबूती प्रदान करती है।
ज़मीनी स्तर पर कार्यान्वयन को सुदृढ़ बनाना
किसी भी कानून की प्रभावशीलता अंततः उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इसलिए, सरकार ने हितधारकों तथा संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ परामर्श के बाद पीसीआर अधिनियम, 1955 और एससी/एसटी (PoA) अधिनियम, 1989 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए योजना दिशानिर्देश जारी किए हैं।
ये दिशानिर्देश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान करने तथा रोकथाम, सुरक्षा, राहत, पुनर्वास और जागरूकता से संबंधित उपायों को मजबूत करने के लिए एक संरचित रूपरेखा तैयार करते हैं।
सरकार ने कार्यान्वयन के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का भी समाधान किया है। उदाहरण के लिए, एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से दूसरे में स्थानांतरित होने वाले पीड़ितों या आश्रितों को राहत प्रदान करने के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी के संबंध में प्रश्न उठे थे।
स्पष्टता और एकरूपता लाने के लिए, 20 जून 2025 को जारी एक स्पष्टीकरण में यह निर्धारित किया गया कि एससी/एसटी (PoA) नियमों के तहत निर्धारित राहत राशि उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा प्रदान की जाएगी जहां अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
ऐसे उपाय महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कानून के तहत उपलब्ध सुरक्षा तब भी प्रभावी रहनी चाहिए जब पीड़ित या उनके आश्रित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सीमाओं से बाहर चले जाएं। यह स्पष्टीकरण राहत राशि के समय पर वितरण की सुविधा प्रदान करता है और कार्यान्वयन में निरंतरता को मजबूत करता है।
पीड़ितों और सामाजिक समावेशन पर केंद्रित केंद्रीय सहायता
पीसीआर अधिनियम, 1955 और एससी/एसटी (PoA) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने, पीड़ितों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने तथा सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
वर्ष 2014-15 से अब तक इस योजना के तहत 5,012.17 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है। इस अवधि के दौरान, अत्याचार के लगभग 7,26,588 पीड़ितों को राहत प्रदान की गई है, जबकि 2,21,716 जोड़ों को अंतरजातीय विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।
ये आंकड़े केवल वित्तीय आवंटन और लाभार्थियों की संख्या से कहीं अधिक हैं। ये सरकार के उस निरंतर प्रयास को दर्शाते हैं जो यह सुनिश्चित करता है कि पीड़ितों को आवश्यकता पड़ने पर सहायता मिले और समानता तथा समावेशन को बढ़ावा देने वाले उपायों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव को बल मिले।
केंद्र में न्याय, गरिमा और समानता
एससी/एसटी (PoA) अधिनियम और नियमों को सुदृढ़ करना, विशेष न्यायिक तंत्र की स्थापना, राहत और पुनर्वास प्रावधानों में वृद्धि, एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन का गठन, कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी करना और निरंतर केंद्रीय वित्तीय सहायता-ये सभी मिलकर एससी और एसटी समुदायों की सुरक्षा की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण तैयार करते हैं।
हमारी प्रतिबद्धता केवल अत्याचार होने के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है। यह समान रूप से रोकथाम, जागरूकता, संस्थागत जवाबदेही, समय पर राहत, पुनर्वास और ऐसी परिस्थितियां बनाने के बारे में भी है जिसमें प्रत्येक नागरिक गरिमा के साथ और बिना किसी डर के जी सके।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता, गरिमा और न्याय की गारंटी देता है। इन मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर सतर्कता, प्रभावी कार्यान्वयन और केंद्र, राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता है।
सरकार इन तंत्रों को मजबूत करने, कार्यान्वयन की चुनौतियों का समाधान करने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना जारी रखेगी कि कानूनी सुरक्षा उपाय ज़मीनी स्तर पर सार्थक सुरक्षा में परिवर्तित हों। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए न्याय केवल एक संवैधानिक वादा नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे गरिमा, सुरक्षा, समानता और अवसर की एक जीवंत वास्तविकता के रूप में अनुभव किया जाना चाहिए।
(लेखक सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री हैं)
रायकोट के कत्याल पैलेस में 9 अक्टूबर को जिला स्तरीय किसान जागरूकता कैंप लगेगा। रबी फसलों, मिट्टी की जांच, खाद के सही इस्तेमाल और पराली प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी।
लुधियाना / सत्ता संदेश
दिनांक : 8 अक्टूबर 2026
रबी फसलों की बुवाई से पहले किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों और कृषि संबंधी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से 9 अक्टूबर को रायकोट में जिला स्तरीय किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कैंप लगाया जाएगा। यह कैंप रायकोट-लुधियाना रोड स्थित कत्याल पैलेस में आयोजित होगा, जिसमें करीब 2,000 किसानों के शामिल होने की उम्मीद है।
लुधियाना के चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर ने जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किसानों की भलाई के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, खाद और कीटनाशक उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें रबी और खरीफ फसलों की आधुनिक खेती के बारे में तकनीकी जानकारी देना है। इसके लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर भी विशेष जागरूकता कैंप लगाए जाते हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी की जांच करवाने के बाद ही जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करें। इससे खेती की लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर ने किसानों को फसल अवशेष यानी पराली जलाने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे लोगों को सांस संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा, आग लगाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली और अन्य कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय मिट्टी में मिलाने तथा सरकार की ओर से सब्सिडी पर उपलब्ध आधुनिक कृषि मशीनों और तकनीकों का इस्तेमाल करें।
उन्होंने जिले के किसानों से अपील की कि वे 9 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस जिला स्तरीय कैंप में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें और कृषि विशेषज्ञों से जानकारी लेकर इसका पूरा लाभ उठाएं।
लुधियाना में इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर वरुण रूजम ने 270 वोटर फॉर्म की भौतिक जांच की। फील्ड विजिट के दौरान नए वोट और वोटर कार्ड सुधार के 50 आवेदन सही पाए गए।
लुधियाना / सत्ता संदेश
दिनांक : 8 अक्टूबर 2026
वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर वरुण रूजम, IAS, ने लुधियाना जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित मतदाता फॉर्म की जांच की। इस दौरान उन्होंने कुल 270 फॉर्म की भौतिक जांच की, जबकि फील्ड विजिट के दौरान नए वोट बनवाने और वोटर कार्ड में सुधार से संबंधित 50 अन्य फॉर्म भी चेक किए। ये सभी 50 फॉर्म सही पाए गए।
लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में वरुण रूजम ने विधानसभा क्षेत्र 57-खन्ना, 58-समराला, 59-साहनेवाल, 60-लुधियाना ईस्ट, 61-लुधियाना साउथ, 62-आतम नगर और 67-पायल से संबंधित फॉर्म नंबर 6, 6A, 7 और 8 की विस्तृत जांच की। कुल 270 आवेदनों की जांच के साथ उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की।
इसके अतिरिक्त, फील्ड विजिट के दौरान नए मतदाता पंजीकरण और वोटर कार्ड में सुधार के लिए भरे गए फॉर्म नंबर 6 और 8 के 50 आवेदनों की जांच की गई। जांच में सभी फॉर्म सही पाए गए।
इस दौरान विभिन्न पोलिंग क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की ओर से किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों का काम संतोषजनक पाया गया।
इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर वरुण रूजम ने संबंधित अधिकारियों और BLOs को निर्देश दिया कि मतदाता सूची से जुड़े सभी कार्य निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी ढंग से पूरे किए जाएं, ताकि मतदाता पंजीकरण और वोटर कार्ड में सुधार की प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
लुधियाना में GLADA ने 7 अक्टूबर को अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 8 अनधिकृत कॉलोनियों और 2 इमारतों को सील या ध्वस्त किया। लोगों से निवेश से पहले मंजूरी जांचने की अपील।
अवैध कॉलोनियों और बिना मंजूरी के किए जा रहे निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GLADA) ने विशेष अभियान चलाया। 7 अक्टूबर 2026 को की गई इस कार्रवाई के दौरान बाजड़ा, शुजातवाल और कसाबाद गांवों में 8 अनधिकृत कॉलोनियों तथा कनिजा गांव में 2 अनधिकृत इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों और ढांचों को सील या ध्वस्त किया गया।
आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन के निर्देशों के तहत GLADA के मुख्य प्रशासक विकास हीरा (PCS) ने अनधिकृत और बिना योजना के किए जा रहे विकास कार्यों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है, जो अवैध कॉलोनियों में सस्ते प्लॉट देने के नाम पर लोगों को कथित तौर पर गुमराह कर रहे थे।
GLADA के अतिरिक्त मुख्य प्रशासक की ओर से जारी सीलिंग और ध्वस्तीकरण आदेशों के तहत ड्यूटी मजिस्ट्रेट, पुलिस बल तथा GLADA की रेगुलेटरी विंग की एनफोर्समेंट टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित डेवलपर्स को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अवैध निर्माण कार्य नहीं रोके गए और न ही उन्हें हटाया गया। इसके बाद विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। विभाग के मुताबिक, अभियान के दौरान किसी तरह का विरोध नहीं हुआ।
GLADA ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माणों को शुरुआती चरण में ही रोकने के लिए आने वाले सप्ताहों में भी ऐसे अभियान जारी रखे जाएंगे। प्राधिकरण का उद्देश्य बिना कानूनी मंजूरी के विकसित की जा रही कॉलोनियों और इमारतों पर रोक लगाना तथा नियोजन संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
GLADA के मुख्य प्रशासक विकास हीरा ने आम लोगों से अपील की कि वे अनधिकृत कॉलोनियों में प्लॉट या इमारतें खरीदने से बचें। ऐसी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को पानी की आपूर्ति, सीवरेज, सड़कों, बिजली कनेक्शन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के संबंध में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने लोगों को किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले GLADA की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध स्वीकृत और नियमित कॉलोनियों की सूची में संबंधित कॉलोनी या प्रोजेक्ट की स्थिति जांचने की सलाह दी।
GLADA के अतिरिक्त मुख्य प्रशासक एवं सक्षम प्राधिकारी (लुधियाना) ने कहा कि ध्वस्तीकरण अभियानों के साथ-साथ पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के तहत अनधिकृत विकास कार्यों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जारी रहेगी।